NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी : पत्रकारों पर बढ़ते हमले और धमकियों की घटनाएं चिंताजनक हैं!
नेशनल प्रेस डे के बीच देश के सबसे बड़े सूबे में पत्रकारों की स्थिति गंभीर है। राज्य में ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जहां पत्रकारों को सरकार और बाहुबलियों के कामकाज पर सवाल उठाना भारी पड़ गया है।
सोनिया यादव
16 Nov 2020
नेशनल प्रेस डे
प्रतीकात्मक तस्वीर। साभार : गूगल

“फ्री प्रेस हमारे लोकतंत्र की विशेषता और आधारशिला है।”

केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने राष्ट्रीय प्रेस दिवस, 16 नवंबर की शुभकामनाएं देते हुए पत्रकारों से इस दिशा में काम करने की बात कही। इसके साथ ही प्रकाश जावड़ेकर ने फेक न्यूज़ को संकट भी बताया। हालांकि केंद्रीय मंत्री प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा पर चुप्पी साध गए जो आज के दौर में सबसे ज्यादा चिंता का विषय है। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स की बात करें तो भारत विश्व के 180 देशों की सूची में 142वें स्थान पर है।

हाल ही में उत्तर प्रदेश के उन्नाव में पत्रकार सूरज पांडेय की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत की खबर सामने आई। इस मामले में आरोपी महिला दारोगा और सिपाही को निलंबित कर दिया गया है। प्रशासन की ओर से मामले की जांच के लिए पुलिस क्षेत्राधिकारी (नगर) गौरव त्रिपाठी के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई है। हालांकि कई लोग इसे हत्या तो कई आत्महत्या बताने में लगे हैं। इससे पहले भी राज्य में कई पत्रकारों की हत्या की खबरें सुर्खियां बन चुकी हैं।

आबादी के हिसाब से देश का सबसे बड़ा राज्य उत्तर प्रदेश पत्रकारों की हत्या, शोषण और उत्पीड़न में एक नया ट्रेंड सेट करता दिखाई पड़ता है। बीते तीन सालों में राज्य में ऐसे कई मामले सामने आये हैं, जहां पत्रकारों को सरकार और बाहुबलियों के कामकाज पर सवाल उठाना भारी पड़ गया। कई मामलों में पुलिस ने उन पर एफआईआर दर्ज कर दिए तो वहीं कई मामलों में पत्रकारों की हत्या तक हो गई।

पत्रकारों की हत्या और उन पर हुए हमलों की कुछ घटनाएं

इसी माह की शुरुआत में लखनऊ के पत्रकार कौशलेंद्र उपाध्याय के गृह जनपद जौनपुर में उनके घर पर दबंगों ने मार-पीट और अभद्रता की। तो वहीं एक अन्य मामले में सहारनपुर के एक टीवी पत्रकार कपिल धीमान पर जानलेवा हमला किया गया। जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आईं। पत्रकार की पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हुआ लेकिन पत्रकारों की सुरक्षा की तस्वीर नहीं बदली।

पत्रकार रतन सिंह और विक्रम जोशी की सरेआम गोली मारकर हत्या

24 अगस्त की रात बलिया में पत्रकार रतन सिंह को लाठी-डंडों से पीटा गया और गोली मार दी गई। ये मामला राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियां भी बना। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक, रतन सिंह को उन्होंने जान बचाने के लिए गांव के प्रधान के घर जाकर छिपने की कोशिश की, लेकिन आरोपियों ने उन्हें दौड़ाकर गोली मार दी।

गाज़ियाबाद में पत्रकार विक्रम जोशी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। मीडिया में आई खबरों के मुताबिक विक्रम जोशी ने अपनी एक रिश्तेदार के साथ छेड़छाड़ किए जाने की शिकायत पुलिस में दर्ज करवाई थी। जिसके बाद बदमाशों ने गुस्से में आकर विक्रम की हत्या कर दी।

शुभममणि त्रिपाठी की हत्या और एनएचआरसी का नोटिस

19 जून को उन्नाव में स्थानीय पत्रकार शुभममणि त्रिपाठी की हत्या कर दी गई। शुभम ने गंगा घाट थाना क्षेत्र में सरकारी जमीन लूट मामले की बात मीडिया में उठाई थी। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश सरकार और राज्य के पुलिस महानिदेशक को नोटिस भी जारी किया था।

हाथरस निर्भया मामले में पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन पर राजद्रोह समेत धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में केस दर्ज कर दिया गया।

इसी साल 13 जून को स्क्रॉल वेबसाइट की पत्रकार सुप्रिया शर्मा के खिलाफ वाराणसी के रामनगर नगर थाने में एफआईआर दर्ज की गई। सुप्रिया की स्टोरी में बताया गया था कि डोमरी गांव जिसे पीएम मोदी ने 2018 में सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत गोद लिया था वहां लॉकडाउन के दौरान लोग भूख से परेशान रहे। सुप्रिया पर अपनी स्टोरी में एक दलित महिला की गरीबी व जाति का मजाक उड़ाने का आरोप लगा। इसके बाद स्क्रॉल वेबसाइट की ओर से कहा गया कि वह अपनी रिपोर्ट पर कायम रहेंगे।

सिद्धार्थ वरदराजन के ख़िलाफ़ एफआईआर

बीती एक अप्रैल को यूपी पुलिस ने ‘द वायर’ वेबसाइट के संपादक सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ एफआईआर दर्ज की। उन पर सीएम योगी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप लगा। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि जिस दिन तबलीग़ी जमात ने दिल्ली में कार्यक्रम किया था उसी दिन यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अयोध्या में रामनवमी मेला पहले की तरह ही लगेगा। इसी ट्वीट को आधार बनाते हुए उन पर एफआईआर हुई।

इससे पहले सीएम योगी पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में दिल्ली के पत्रकार प्रशांत कनौजिया के खिलाफ भी लखनऊ में एफआईआर दर्ज हुई थी जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी हुई थी।

राष्ट्रीय लॉकडाउन की घोषणा के दो दिन बाद 26 मार्च को हिंदी भाषा के दैनिक समाचार पत्र जनसंदेश टाइम्स ने एक समाचार प्रकाशित किया जिसमें यह बताया गया था कि उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले में एक जनजाति के पास खाने के लिए पर्याप्त अनाज नहीं था और लॉकडाउन की अचानक घोषणा हो जाने के बाद वहां के बच्चे घास खा रहे थे।

उसी दिन, वाराणसी जिले के जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने अखबार को एक कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें उनके द्वारा यह दावा किया गया कि उक्त रिपोर्ट का हिस्सा झूठा एवं "सनसनीखेज" है। उन्होंने अखबार से 24 घंटे की समय सीमा के भीतर माफीनामा जारी करने की मांग की और कहा कि ऐसा न होने की स्थिति में इस समाचार के लेखक विजय विनीत और प्रधान संपादक सुभाष राय के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे।

साल 2019 की कुछ प्रमुख घटनाएं

20 जून 2019 को शाहजहांपुर के स्थानीय पत्रकार राजेश तोमर द्वारा अवैध वसूली का विरोध करने पर कुछ दबंगों ने चाकू और सरिया से हमला कर दिया। इस दौरान उका भाई और बेटा भी घायल हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने अवैध वसूली का विरोध किया था और ह्वाट्सएप ग्रुप पर पूरे प्रकरण को शेयर किया था, जिससे नाराज दबंगों ने उन पर और उनके भाई व बेटे पर जानलेवा हमला कर दिया।

अक्टूबर 2019 में कुशीनगर जिले के स्थानीय पत्रकार राधेश्याम शर्मा की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। राधेश्याम एक हिंदी दैनिक में पत्रकार थे और साथ ही एक निजी स्कूल में शिक्षक भी थे। वहीं अगस्त 2019 में सहारनपुर में एक पत्रकार और उसके भाई को कुछ अज्ञात लोगों ने गोली मार कर हत्या कर दी थी।

नमक-रोटी का खुलासा करने वाले पवन जायसवाल पर एफआईआर

इसी तरह 2 सितंबर 2019 को मिर्जापुर के प्राइमरी स्कूल के बच्चों को नमक के साथ रोटी खिलाने का मामला सामने आया था। इस मामले का खुलासा करने वाले स्थानीय पत्रकार पवन जायसवाल के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर ली थी जिसके बाद पुलिस की काफी किरकिरी हुई थी। पवन पर गलत साक्ष्य बनाकर वीडियो वायरल करने और छवि खराब करने के आरोप लगे थे।

बीते साल 24 अगस्त को नोएडा में पांच पत्रकारों को गैंगस्टर एक्ट के तहत गिरफ्तार किया गया। इस मामले में बाद में कई पुलिस अधिकारियों संग सांठ-गांठ की भी बात सामने आई।

यूपी के फतेहपुर जिले में स्थानीय पत्रकार अजय भदौरिया पर स्थानीय प्रशासन ने एफआईआर दर्ज करा दी जिसके खिलाफ जिले के तमाम पत्रकारों ने बीती 7 जून को जल सत्याग्रह किया। दरअसल पत्रकार अजय भदौरिया ने बीती 13 मई को दो ट्वीट किए थे जिनमें उन्होंने एक नेत्रहीन दंपति को लॉकडाउन में राशन से संबंधित दिक्कतों का जिक्र करते हुए जिले में चल रहे कम्युनिटी किचन पर सवाल उठाए थे जिसके बाद उन पर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।

गौरतलब है कि प्रदेश में पत्रकारों पर आपराधिक आरोप लगने और शारीरिक हमले होने का खतरा बढ़ गया है, कई मामलों में तो खुद प्रशासन पत्रकारों के खिलाफ मुकदमें दर्ज करवा रहा है। ऐसे भी आरोप लग रहे हैं कि सत्तारूढ़ पार्टी पुलिस का इस्तेमाल पत्रकारों, असहमत नागरिक समाज के लोगों के खिलाफ कर रही है। हालांकि जानकारों का मानना है कि जब तक जिला और ग्रामीण स्तर के पत्रकारों के पास कोई समर्थन प्रणाली या संगठनात्मक ढांचा नहीं होता, तब तक वे ऐसे ही स्थानीय प्रशासन के शोषण का शिकार होते रहेंगे।

UttarPradesh
Yogi Adityanath
journalist
attack on journalists
democracy
UP police
CRIMES IN UP

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

भारत में संसदीय लोकतंत्र का लगातार पतन

UPSI भर्ती: 15-15 लाख में दरोगा बनने की स्कीम का ऐसे हो गया पर्दाफ़ाश

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?


बाकी खबरें

  • modi
    अनिल जैन
    खरी-खरी: मोदी बोलते वक्त भूल जाते हैं कि वे प्रधानमंत्री भी हैं!
    22 Feb 2022
    दरअसल प्रधानमंत्री के ये निम्न स्तरीय बयान एक तरह से उनकी बौखलाहट की झलक दिखा रहे हैं। उन्हें एहसास हो गया है कि पांचों राज्यों में जनता उनकी पार्टी को बुरी तरह नकार रही है।
  • Rajasthan
    सोनिया यादव
    राजस्थान: अलग कृषि बजट किसानों के संघर्ष की जीत है या फिर चुनावी हथियार?
    22 Feb 2022
    किसानों पर कर्ज़ का बढ़ता बोझ और उसकी वसूली के लिए बैंकों का नोटिस, जमीनों की नीलामी इस वक्त राज्य में एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ऐसे में गहलोत सरकार 2023 केे विधानसभा चुनावों को देखते हुए कोई जोखिम…
  • up elections
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव, चौथा चरण: केंद्रीय मंत्री समेत दांव पर कई नेताओं की प्रतिष्ठा
    22 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश चुनाव के चौथे चरण में 624 प्रत्याशियों का भाग्य तय होगा, साथ ही भारतीय जनता पार्टी समेत समाजवादी पार्टी की प्रतिष्ठा भी दांव पर है। एक ओर जहां भाजपा अपना पुराना प्रदर्शन दोहराना चाहेगी,…
  • uttar pradesh
    एम.ओबैद
    यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला
    22 Feb 2022
    पिछले साल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि "वर्तमान में प्रदेश में चिकित्सा सुविधा बेहद नाज़ुक और कमज़ोर है। यह आम दिनों में भी जनता की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त…
  • covid
    टी ललिता
    महामारी के मद्देनजर कामगार वर्ग की ज़रूरतों के अनुरूप शहरों की योजना में बदलाव की आवश्यकता  
    22 Feb 2022
    दूसरे कोविड-19 लहर के दौरान सरकार के कुप्रबंधन ने शहरी नियोजन की खामियों को उजागर करके रख दिया है, जिसने हमेशा ही श्रमिकों की जरूरतों की अनदेखी की है। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License