NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
यूपी: बीएचयू अस्पताल में फिर महंगा हुआ इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं से और दूर हुए ग्रामीण मरीज़
बीते साल नवंबर में ही ओपीडी की फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब एक बार फिर सभी जांच सुविधाओं की दर में दो से तीन गुना की बढ़ोत्तरी की गई है। नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में पहले ही सबसे निचले स्थान पर है।
सोनिया यादव
01 Mar 2022
BHU hospital

पूर्वांचल का एम्स कहे जाने वाले बीएचयू का सर सुंदरलाल अस्पताल न सिर्फ़ वाराणसी बल्कि पूर्वांचल और उसके आस-पास के कई ज़िलों के लोगों के लिए इलाज का भरोसेमंद स्थान है। बड़ी संख्या में राज्य के बाहर से भी लोग यहां इलाज के लिए आते हैं। क्योंकि ये एक सरकारी संस्थान है, ऐसे में लोगों को यहां बेहतर इलाज और किफायती दाम पर जांच की उम्मीद होती है। लेकिन बीते साल नवंबर में ही ओपीडी की फीस बढ़ोत्तरी के बाद अब एक बार फिर सभी जांच सुविधाओं की दर में बेतहाशा वृद्धि कर दी गई है।

बता दें कि रविवार, 27 फरवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वाराणसी दौरे से ठीक एक दिन पहले शनिवार, 26 फरवरी को अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक की ओर से जांच में बढ़ोत्तरी का आदेश जारी किया गया। इसमें एमआरआई, अल्ट्रासाउंड से लेकर एक्सरे, सोनोग्राफी तक सभी जांचों के दाम में दो से तीन गुना की फीस बढ़ा दी गई है। ऐसे में इलाज़ महंगा होने के कारण पहले से चरमराई स्वास्थ्य व्यवस्था अब मरीजों पहुंच से और दूर होने की संभावना है।

स्वास्थ्य मानकों में यूपी सबसे खराब

बीते दिसंबर में आई नीति आयोग की रिपोर्ट में दिखाया गया था कि उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य मानकों में राज्यों में सबसे निचले स्थान पर है। 'द हेल्दी स्टेट्स, प्रोग्रेसिव इंडिया' नाम के शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट को नीति आयोग, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तथा वर्ल्ड बैंक द्वारा संकलित किया गया था जिसमें 2019-2020 के बीच 19 बड़े राज्यों, 8 छोटे राज्यों और 7 केंद्र शासित प्रदेशों का आंकड़ा इकट्ठा किया गया था। 19 बड़े राज्यों में उत्तर प्रदेश 19वें स्थान पर था।

नीति आयोग का स्वास्थ्य सूचकांक कहता है कि हेल्थ आउटकम, बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं और मरीजों की संख्या के मुताबिक डॉक्टरों की उपलब्धता के आधार पर देखा जाए तो उत्तर प्रदेश देश का सबसे पिछड़ा राज्य है।

ध्यान रहे कि बीते साल जब सर सुंदरलाल अस्पताल के ओपीडी पर्ची शुल्क और जांच दरों को बढ़ाया गया था तब हॉस्पिटल के कई डॉक्टर खुलकर इसके विरोध में सामने आए थे। उन्होंने प्रशासन के निणय की निंदा करते हुए तत्काल इस फैसले को वापस लेने की मांग भी की थी। तब प्रशासन का फीस बढ़ोत्तरी को लेकर अजीबो-गरीब तर्क सामने आया था। बीएचयू के अधिकारियों का कहना था कि प्राइवेट अस्पतालों के तुलना में अभी भी यहां पर रेट कम है।

स्वास्थ्य सेवाओं पर सबका हक़

मेडिकल सुपरिटेंडेंट के मुताबिक समय के साथ महंगाई बढ़ रही है। इसके चलते बिजली का बिल, मेंटेनेंस और मेडिकल उपकरण के लिए अधिक पैसों की जरूरत है। इसके लिए यहां इलाज कराने आए मरीजों से ये पैसे चिकित्सीय शुल्क के रूप में लिए जा रहे हैैं। शुल्क की बढ़ोत्तरी कुलपति और केंद्र सरकार के एप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।

ऐसे में सवाल उठाता है कि अगर बढ़ती महंगाई का बोझ मरीज़ों के सिर पर ही डालना है तो बीएचयू अस्पताल को प्रति बेड दो लाख रुपये के अलावा सरकार की ओर से मिलने वाली अन्य ग्रांट्स का आखिर होता क्या है? हमें निजी अस्पतालों में भी सस्ती दरों पर बेहतर सेवाओं की ओर जाने की जरूरत है नाकि सरकारी अस्पतालों में भी प्राइवेट अस्पतालों की तरह ही इलाज के नाम पर लूट का खेल शुरू करने की। हमें समझना होगा कि प्राइवेट अस्पताल सबके बस की बात नहीं, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं पर सबका हक जरूर है। ऐसे में जब कोरोना काल में हम अस्पतालों की खस्ता हालत देख चुके हैं, फिर भी सरकार का ध्यान इस ओर क्यों नहीं जा रहा।

सरकारी अस्पतालों का हाल बेहाल

बड़े-बड़े दावे और वादे करती बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार के कार्यकाल में उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई खास सुधार देखने को नहीं मिला। अभी भी स्थिति बद से बदतर है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पतालों तक में सुविधा का अभाव है जिसके चलते मरीजों को भटकना पड़ता है और निजी अस्पतालों की शरण में जाना पड़ता है। जिनके पास पैसा है वो तो अपना इलाज अपनी पसंद के डॉक्टरों से करवाते हैं लेकिन उन गरीबों का क्या जिनके पास खाने तक के पैसे नहीं होते। आए दिन राज्य के सरकारी अस्पतालों में सुविधा की कमी, उपकरणों की कमी, डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति की खबरें पढ़ने सुनने को मिल ही जाती हैं।

गौरतलब है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद तभी की जा सकती है जब स्वास्थ्य सेवाओं को आवंटित होने वाले बजट को खर्च नहीं बल्कि निवेश के रूप में लिया जाए। हालांकि इस बार राज्य सरकार क्या केंद्र सरकार ने भी महामारी से सीख नहीं ली और स्वस्थ्य बजट में कटौती ही नज़र आई। इस बार स्वास्थ्य पर बजट में 86,200.65 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, अगर ध्यान दें तो यह 2021-22 के संशोधित बजट के मुकाबले सिर्फ 0.2 प्रतिशत की बढ़ोतरी है। और यदि इसमें हम पिछले वर्ष के मुकाबले बढ़ी 4.8% की महंगाई दर को जोड़ लें, तो हमें स्वास्थ्य बजट में सीधे तौर पर कटौती नजर आएगी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अपने कार्यकाल के आखिरी बजट में मेडिकल कॉलेजों के निर्माण के लिए 1950 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया। हालांकि पुरानी घोषणाओं का क्या हुआ, किसा को नहीं पता। प्रदेश में स्वास्थ्य पर प्रति व्यक्ति ख़र्च बहुत कम है और यह 2018-19 और 2019-20 के बीच और कम हो गया था। महामारी के दौरान परिवार नियोजन सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं और लोगों के पास पीएमजेएवाई कार्ड होने के बावजूद उन्हें अपनी जेब से भुगतान करना पड़ा था। विश्लेषण करती कई रिपोर्टों ने बुनियादी ढांचे और मानव संसाधनों के मामले में यूपी में उस कमज़ोर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को बेपर्दा कर दिया है, जिसके चलते ख़राब स्वास्थ्य नतीजे सामने आए हैं। हालांकि इन सब के बावजूद चुनाव में सरकार का विकास का ढोल ज़ोर-शोर से पीट रही है।

इसे भी पढ़ें: योगी कार्यकाल में चरमराती रही स्वास्थ्य व्यवस्था, नहीं हुआ कोई सुधार

UttarPradesh
BHU
BHU hospital
Sir Sunderlal Hospital
Health facilities
Purvanchal
UP Health Sector
UP Health Care Facilities
NITI Aayog health index
Yogi Adityanath
BJP

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

यूपी: बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच करोड़ों की दवाएं बेकार, कौन है ज़िम्मेदार?

ग्राउंड रिपोर्ट: स्वास्थ्य व्यवस्था के प्रचार में मस्त यूपी सरकार, वेंटिलेटर पर लेटे सरकारी अस्पताल

कोरोना अपडेट: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में 1 मई से 31 मई तक धारा 144 लागू

यूपी चुनाव : माताओं-बच्चों के स्वास्थ्य की हर तरह से अनदेखी

यूपी चुनाव : योगी काल में नहीं थमा 'इलाज के अभाव में मौत' का सिलसिला

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!

यूपीः एनिमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, बाल मृत्यु दर चिंताजनक

नीति आयोग का स्वास्थ्य सूचकांक: नहीं काम आ रहा 'डबल इंजन’, यूपी-बिहार सबसे नीचे


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    जेपीसी में डाटा क़ानून को मंज़ूरी, जारी रहेगा किसान आंदोलन और अन्य ख़बरें
    23 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी निजी डाटा सुरक्षा क़ानून को जेपीसी में मंज़ूरी, जारी रहेगा किसान आंदोलन और अन्य ख़बरों पर
  • pollution
    सतीश भारतीय
    दिल्ली ही नहीं गुरुग्राम में भी बढ़ते प्रदूषण से सांसों पर संकट
    23 Nov 2021
    "नाक साफ करते हैं तो नाक के अंदर से काली परत जमीं निकलती है जो प्रदूषण की गंभीरता के संकेत है।"
  • MSP
    अजय कुमार
    MSP की लीगल गारंटी नहीं पड़ेगी देश की जेब पर भारी, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था संभल जाएगी
    23 Nov 2021
    भाजपा और सरकार समर्थक कह रहे हैं कि एमएससी की लीगल गारंटी देने से देश का खजाना खाली हो जाएगा और देश का दिवाला निकल जाएगा। चलिए समझते हैं कि क्यों ऐसा नहीं होगा, और इससे कैसे देश की अर्थव्यवस्था पहले…
  • Taiwan and Ukraine
    एम. के. भद्रकुमार
    अमेरिका जो चाल ताइवान में चल रहा है, हूबहू वही यूक्रेन में भी
    23 Nov 2021
    वास्तव में ताइवान और यूक्रेन  दोनों ही एक दूसरे से कूल्हे से जुड़े हुए हैं। अतः रूस एवं चीन के लिए कोई भी  दांव इसके ऊंचा नहीं हो सकता है।
  • local body poll
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    आगामी जीटीए चुनावों पर टिकी है दार्जिलिंग हिल्स की राजनीति
    23 Nov 2021
    भाजपा और उसके सहयोगी जीएनएलएफ के विरोध के साथ यहाँ पर चुनाव एक संवेदनशील मुद्दा बन सकता है, जो इसके ‘स्थायी राजनीतिक समाधान’ के पक्ष में हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License