NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
यूपी चुनाव : मथुरा की जनता ने कहा मंदिर के नाम पर भंग हो रही सांप्रदायिक शांति
कई स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह कोई मुद्दा नहीं है, हम इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देंगे।
तारिक़ अनवर
19 Jan 2022
Translated by महेश कुमार
मंदिर

मथुरा (उत्तर प्रदेश): भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मथुरा में हिंदुत्व के अपने पाठ्यक्रम का खेल शुरू कर दिया है, इसके नेताओं ने कृष्ण जन्मभूमि परिसर में एक "भव्य मंदिर" के निर्माण का वादा किया है, जिसमें शाही ईदगाह मस्जिद भी शामिल है, लेकिन इस पवित्र शहर के स्थानीय निवासी कहते हैं कि भगवान कृष्ण के जन्म स्थान पर एक भव्य मंदिर पहले से मौजूद है और वे क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव की कीमत पर वहां कोई अन्य मंदिर नहीं चाहते हैं।

कुछ निवासियों को यह भी लगता है कि मामला मथुरा की अदालत में विचाराधीन है, इसलिए न्यायपालिका को फैसला करने दें। उनका दावा है कि "यह जिले में चर्चा का विषय नहीं है" और वे इसे चुनावी मुद्दा नहीं बनने देंगे।

 

पवन चतुर्वेदी, जो मथुरा-दिल्ली रोड पर एक ऑटोमोबाइल शोरूम के मालिक हैं, ने न्यूज़क्लिक को बताया कि लोगों को “उकसाया जा रहा है” लेकिन स्थानीय लोगों ने इस पर ध्यान नहीं दिया है। उन्होंने कहा, “यहां रहने वाले लोगों के बीच कोई विवाद नहीं है। मथुरा एक पवित्र स्थान है, और लोग यहां पूर्ण सद्भाव से रहते हैं। न मस्जिद को और न ही मंदिर को कोई खतरा है। राई का पहाड़ बनाया जा रहा है।” 

यह सब एक दक्षिणपंथी संगठन, अखिल भारत हिंदू महासभा ने शुरू किया था, जिसने घोषणा की थी कि वह देवता के "वास्तविक जन्मस्थान" पर भगवान कृष्ण की मूर्ति स्थापित करेगा, जिसका दावा है कि श्री कृषन का जन्मस्थान शाही ईदगाह मस्जिद में है। घोषणा के बाद, मथुरा जिला प्रशासन ने सीआरपीसी की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी और प्रशासन शांति बनाए रखने में कामयाब रहा है।

इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की जहां अब मामला लंबित पड़ा है।

पिछले साल अप्रैल में एक आवेदन दायर किया गया था, जिसमें मांग की गई थी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को मस्जिद का सर्वेक्षण करना चाहिए। दिसंबर में एक और आवेदन दायर किया गया, जिसमें 17 वीं शताब्दी की मस्जिद में नमाज़ (प्रार्थना) को रोकने की मांग की गई थी क्योंकि मंदिर से सटी इसकी एक दीवार पर कुछ हिंदू प्रतीक अंकित हैं।

ज़ाहिर तौर पर चुनावी लाभ के लिए इस अवसर का इस्तेमाल करने पर बिना समय बर्बाद किए, सत्तारूढ़ भाजपा से जुड़े नेता भी बाद में बयान देने लगे, और जिससे विवाद खड़ा हो गया।

पिछले साल दिसंबर में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि अयोध्या और काशी में भव्य मंदिर बनाए जा रहे हैं, तो ऐसे में मथुरा-वृंदावन को कैसे पीछे छोड़ा जा सकता है। 

भाजपा सांसद हेमा मालिनी ने भी पिछले महीने कहा था कि उनके लोकसभा क्षेत्र मथुरा को भी अयोध्या में राम मंदिर और वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर की तर्ज पर मंदिर मिलना चाहिए। 

 मध्य प्रदेश के इंदौर में एक कार्यक्रम में अभिनेता से नेता बनी अभिनेता ने कहा था, "मथुरा में एक भव्य मंदिर होना चाहिए, जो भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है, जो प्रेम और स्नेह का प्रतीक हैं।" 

उन्होंने कहा, "एक मंदिर पहले से ही है और इसे सुशोभित किया जा सकता है, जैसे मोदी जी (प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी) ने काशी विश्वनाथ गलियारा विकसित किया, और गंगा नदी को सीधे मंदिर से देखा जा सकता है।" 

हेमा मालिनी से पहले, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 1 दिसंबर को एक टिप्पणी के माध्यम से धार्मिक ध्रुवीकरण करने की कोशिश की थी, जिससे लगा कि सत्तारूढ़ भाजपा मथुरा में एक भव्य मंदिर की "तैयारी" कर रही है।

यूपी के डेयरी विकास, पशुपालन और मत्स्य पालन मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी, जो मथुरा से ताल्लुक रखते हैं, ने तब इसी तरह की टिप्पणी की थी, जब उन्होंने एक नए मंदिर के निर्माण या मौजूदा मथुरा मंदिर के विस्तार की वकालत की थी।

उन्होने कहा कि "अगर कृष्ण मंदिर मथुरा में नहीं बनेगा तो क्या यह लाहौर में बनेगा?" 

लेकिन वास्तविक हितधारक, शहर के निवासी हैं, और वे इस तरह के बयानों से बेफिक्र नजर आते हैं।

 

"उस घटना का दिलचस्प पहलू यह था कि 6 दिसंबर को जगह को 'शुद्ध' करने के लिए 'महा जलाभिषेक' के बाद मस्जिद में कृष्ण की मूर्ति की स्थापना के आह्वान के बाद, कृष्ण जन्मस्थान के गेट 1 पर केवल पांच लोग एकत्र हुए थे, और उनमें से कोई भी मथुरा से नहीं था। वकील मधुवन दत्त चतुर्वेदी ने कहा कि उन सभी को हिरासत में ले लिया गया था।” 

यहां यह कोई सांप्रदायिक मुद्दा नहीं है क्योंकि मुगल बादशाह औरंगजेब, जिसने ईदगाह मस्जिद का निर्माण करवाया था, ने भी दाऊजी महाराज मंदिर (बलराम की जन्मस्थली- भगवान कृष्ण के बड़े भाई) पर नक्काशी की थी। उन्होंने मंदिर को उसकी जागीर के रूप में पांच गांव भी दान किए थे।

“कृष्ण जन्मस्थान मथुरा के वैष्णव समुदाय (विष्णु के अनुयायी और उनके अवतार, जैसे कृष्ण) की आस्था का प्रतीक नहीं है। यह एक पर्यटन स्थल हो सकता है। विश्राम घाट, वृंदावन में द्वारकाधीश मंदिर, राधिका मंदिर और नंद भवन उनके सबसे पवित्र मंदिर हैं। जैसा कि जिला अदालत में याचिका दायर की गई थी, मथुरा चतुर्वेद परिषद (पंडा समाज या पुजारी समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाला एक समूह) ने भी जिला न्यायाधीश की अदालत में अपील की है कि उन्हें भी इस मामले में एक पक्ष के रूप में सुना जाना चाहिए। चतुर्वेदी ने कहा कि उन्होंने अदालत से कहा कि वे मंदिर और मस्जिद के न होने पर यथास्थिति चाहते हैं, क्योंकि इसमें हस्तक्षेप करने से क्षेत्र में सांप्रदायिक सौहार्द प्रभावित होगा।”

इस मामले में पहली याचिका दायर होने के बाद कई अन्य वादियों ने भी अदालत में यही मुकदमा दायर किया है।

जैसा कि सब जानते हैं कि हिंदुत्ववादी संगठनों ने यह विवाद खड़ा किया था, लेकिन ब्राह्मण महासभा, अखाड़ा परिषद और दिर्घ विष्णु महंत ने इसका कड़ा विरोध किया और एक बयान जारी किया, जिसमें लोगों से शांति और सद्भाव बनाए रखने की अपील की गई है।

कृष्ण जन्मस्थान परिसर में रहने वाले लोगों की भी ऐसी ही राय थी।

 "दोनों धार्मिक स्थान अलग-अलग और भिन्न संस्थाएं हैं। जिले में सांप्रदायिक माहौल बिगाड़ने के लिए अनावश्यक विवाद को हवा दी जा रही है। यहां हिंदू और मुसलमान शांति से रहते हैं। उनके आपसी व्यापारिक हित हैं। राजेंद्र सिंह सिसोदिया ने न्यूज़क्लिक को बताया कि, यहां के मुसलमान भगवान कृष्ण और राधा के आभूषण, पोशाक और मुकुट बनाते हैं और यह यहां का एक बड़ा व्यवसाय है। इसलिए, कोई टकराव नहीं है।" 

छह दिसंबर की घटना को याद करते हुए सिसोदिया ने बताय कि यहां केवल तीन लोग आए थे जिनका मंदिर प्रबंध समिति ने स्वागत किया था और विनम्रता से उन्हे वापस जाने को कह दिया था। उन्होंने शांतिपूर्वक वापस जाने के बजाय हंगामा करने की कोशिश की, जिसका समिति और स्थानीय लोगों ने विरोध किया। उन्होंने बताया कि, “उनकी पिटाई हो सकती थी अगर प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया होता और उन्हें हिरासत में नहीं लिया होता।"

यहां तक कि अन्य वादियों ने भी, जिन्होंने बाद में मस्जिद को हटाने की मांग को लेकर अलग-अलग मुकदमे दायर किए थे ने 6 दिसंबर के कार्यक्रम के आह्वान से खुद को अलग कर लिया था।

“हम मस्जिद को हटाना चाहते हैं लेकिन साथ ही, सांप्रदायिक सद्भाव को किसी भी कीमत पर बिगड़ने नहीं देंगे। उस दिन (6 दिसंबर) जो हुआ वह कुछ लोगों का राजनीतिक स्टंट हो सकता है। इसलिए हमने आयोजन का समर्थन नहीं किया। हमें न्यायपालिका में विश्वास है, ”एडवोकेट राजेंद्र माहेश्वरी, जो पांच वादियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं – जिसमें ठाकुर केशवदेव (देवता), जय भगवान गोयल के माध्यम से संयुक्त हिंदू मोर्चा, सौरव गौर के माध्यम से धर्म रक्षा संघ, राजेंद्र महेश्वर (स्वयं वकील) और एडवोकेट महेंद्र प्रताप सिंह शामिल हैं।

शाही मस्जिद ईदगाह की प्रबंध समिति, जिसके यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सचिव, श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट और श्री कृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ के माध्यम से मामले में प्रतिवादी हैं।

कृष्ण जन्मस्थान परिसर 13.37 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ है और इसका स्वामित्व ठाकुर केशवदेव जी (देवता) के पास है। मंदिर का संचालन और प्रबंधन श्री कृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा एक प्रबंध समिति के माध्यम से किया जाता है। मस्जिद करीब एक एकड़ के क्षेत्र में बनी है।

"हमारा तर्क यह है कि ट्रस्ट समझौते पर नहीं पहुंचा है (जिस पर सहमति हुई थी और 1968 में जिस पर फैसला सुनाया गया था), लेकिन ट्रस्ट की प्रबंध समिति ने ऐसा किया था। विचाराधीन भूमि मंदिर की है। तो इस पर भक्तों (हिंदू समुदाय) का अधिकार है। उन्होंने समझाया कि इसलिए, हमने अदालत का दरवाजा खटखटाया है।”

पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991 के बारे में पूछे जाने पर, जो किसी भी पूजा स्थल में बदलाव पर रोक लगाता है और किसी भी पूजा स्थल के धार्मिक चरित्र के रखरखाव को सुनिश्चित करता है, जैसा कि कानून 15 अगस्त, 1947 तक यथास्थिति को बनाए रखने को कहता है (कानून, हालांकि, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर स्वामित्व पर मुकदमे में देता है), माहेश्वरी ने कहा: "कानून हमारे मामले में लागू नहीं होता है। यह इस मामले की रख-रखाव और कार्यवाही पर कोई प्रतिबंध और बाधा नहीं है। आक्रमणकारियों ने हमारे अस्तित्व को जड़ से खत्म करने के इरादे से हमारे धार्मिक ढांचे और प्रतीकों को ध्वस्त किया था। अब धार्मिक दमन के प्रतीकों को हटाने का समय आ गया है। केवल इसकी अनदेखी करना और सांप्रदायिक सौहार्द के नाम पर यथास्थिति बनाए रखना उचित नहीं है।

एक सिक्के के दो पहलू होते हैं, उन्होंने कहा कि जगह को फिर से हासिल करने की बात करना कुछ के लिए एक राजनीतिक स्टंट हो सकता है लेकिन यह एक विशाल बहुमत की आस्था और स्वाभिमान का मामला हो सकता है।

उत्तर प्रदेश के राज्यसभा सांसद हरनाथ यादव ने हाल ही में अधिनियम को निरस्त करने की मांग की थी। इस संबंध में एक याचिका भी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।

शाही ईदगाह मस्जिद के अध्यक्ष प्रोफेसर ज़हीर हसन ने मामले की योग्यता पर बात करने से इनकार करते हुए कहा कि समिति अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पेश करेगी। लेकिन उन्होंने दावा किया कि उनकी कार्यवाही का हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

"यहां दो समुदायों के बीच एक अजीब एकता है। जो लोग गैर-मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर रहे हैं, वे कभी सफल नहीं होंगे।"

पिछले 40 वर्षों से भगवान कृष्ण के लिए बेहतरीन मुकुट बनाने वाले 70 वर्षीय शरफुद्दीन खान ने कहा कि उन्हें यह कला अपने पूर्वजों से विरासत में मिली है।

“हम पीढ़ियों से ऐसा करते आ रहे हैं। हम भगवान कृष्ण और राधा के लिए मुकुट, आभूषण और जरी की कढ़ाई करते हैं। जन्माष्टमी के दौरान हमें काम से समय नहीं मिलता है। हमारे सारे ग्राहक हिंदू हैं। तो एक तरह से हम उनकी आस्था और कर्मकांड में योगदान करते हैं। इस ताने-बाने को तोड़ने की कोशिश की जा रही है, लेकिन यह मथुरा है जहां नफ़रत की राजनीति कभी सफल नहीं हुई है।" 

मुसलमान शहर की आबादी का 15-17 प्रतिशत हिस्सा हैं और वे व्यवसाय में शामिल कार्यबल का एक बड़ा वर्ग बनाते हैं। “भगवान कृष्ण को सजाने और पूजा करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली टोपी, पोशाक और माला बनाने के व्यवसाय में कम से कम 40 प्रतिशत कारीगर मुसलमान हैं। जब सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि का फैसला सुनाया था तो कोई हंगामा नहीं हुआ। पंडित कामेश्वर नाथ चतुर्वेदी ने कहा कि, अतीत को बदला नहीं जा सकता है, वर्तमान को संवारना और बेहतर भविष्य का निर्माण करना सबसे अच्छा काम है।”

अब तक, मथुरा शहर के निवासियों ने हिंदुत्व संगठनों द्वारा लोगों को धार्मिक आधार पर ध्रुवीकरण करने के सभी प्रयासों को सफलतापूर्वक विफल कर दिया है, फिर भी कुछ इस बात से आशंकित हैं कि वे ऐसा कब तक कर पाएंगे।

विशेष रूप से, इस पवित्र शहर में, जो राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के करीब है, जब 1991-1992 में राम जन्मभूमि आंदोलन हुआ था तब भी यहां सांप्रदायिक टकराव नहीं हुआ था, जिसने लगभग पूरे देश में सांप्रदायिक ज़हर फैला दिया था।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिये गए लिंक पर क्लिक करें।

UP Elections: Temple at Altar of Communal Peace Unacceptable, Say Mathura Residents

 

mathura
Krishna Janmasthan
Mathura Mosque
Hindutva
UP elections
Ram Janmabhoomi
Shahi Idgah Masjid

Related Stories

डिजीपब पत्रकार और फ़ैक्ट चेकर ज़ुबैर के साथ आया, यूपी पुलिस की FIR की निंदा

श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही मस्जिद ईदगाह प्रकरण में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल

ओटीटी से जगी थी आशा, लेकिन यह छोटे फिल्मकारों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: गिरीश कसारावल्ली

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है

मनोज मुंतशिर ने फिर उगला मुसलमानों के ख़िलाफ़ ज़हर, ट्विटर पर पोस्ट किया 'भाषण'

क्या ज्ञानवापी के बाद ख़त्म हो जाएगा मंदिर-मस्जिद का विवाद?

बीमार लालू फिर निशाने पर क्यों, दो दलित प्रोफेसरों पर हिन्दुत्व का कोप

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

धर्म के नाम पर काशी-मथुरा का शुद्ध सियासी-प्रपंच और कानून का कोण

इतवार की कविता: वक़्त है फ़ैसलाकुन होने का 


बाकी खबरें

  • सत्यम् तिवारी
    वाद-विवाद; विनोद कुमार शुक्ल : "मुझे अब तक मालूम नहीं हुआ था, कि मैं ठगा जा रहा हूँ"
    16 Mar 2022
    लेखक-प्रकाशक की अनबन, किताबों में प्रूफ़ की ग़लतियाँ, प्रकाशकों की मनमानी; ये बातें हिंदी साहित्य के लिए नई नहीं हैं। मगर पिछले 10 दिनों में जो घटनाएं सामने आई हैं
  • pramod samvant
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेकः प्रमोद सावंत के बयान की पड़ताल,क्या कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार कांग्रेस ने किये?
    16 Mar 2022
    भाजपा के नेता महत्वपूर्ण तथ्यों को इधर-उधर कर दे रहे हैं। इंटरनेट पर इस समय इस बारे में काफी ग़लत प्रचार मौजूद है। एक तथ्य को लेकर काफी विवाद है कि उस समय यानी 1990 केंद्र में कांग्रेस की सरकार थी।…
  • election result
    नीलू व्यास
    विधानसभा चुनाव परिणाम: लोकतंत्र को गूंगा-बहरा बनाने की प्रक्रिया
    16 Mar 2022
    जब कोई मतदाता सरकार से प्राप्त होने लाभों के लिए खुद को ‘ऋणी’ महसूस करता है और बेरोजगारी, स्वास्थ्य कुप्रबंधन इत्यादि को लेकर जवाबदेही की मांग करने में विफल रहता है, तो इसे कहीं से भी लोकतंत्र के लिए…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    फ़ेसबुक पर 23 अज्ञात विज्ञापनदाताओं ने बीजेपी को प्रोत्साहित करने के लिए जमा किये 5 करोड़ रुपये
    16 Mar 2022
    किसी भी राजनीतिक पार्टी को प्रश्रय ना देने और उससे जुड़ी पोस्ट को खुद से प्रोत्सान न देने के अपने नियम का फ़ेसबुक ने धड़ल्ले से उल्लंघन किया है। फ़ेसबुक ने कुछ अज्ञात और अप्रत्यक्ष ढंग
  • Delimitation
    अनीस ज़रगर
    जम्मू-कश्मीर: परिसीमन आयोग ने प्रस्तावों को तैयार किया, 21 मार्च तक ऐतराज़ दर्ज करने का समय
    16 Mar 2022
    आयोग लोगों के साथ बैठकें करने के लिए ​28​​ और ​29​​ मार्च को केंद्र शासित प्रदेश का दौरा करेगा।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License