NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
कई मोर्चों पर भड़कता अमेरिका-रूस तनाव
वाशिंगटन और बर्लिन क्रमशः बेलारूस और नवलनी मामले पर एक ही समय साथ-साथ आगे बढ़े हैं। ऐसा लगता है कि एक बड़ा टकराव उबाल ले रहा है।
एम. के. भद्रकुमार
04 Sep 2020
कई मोर्चों पर भड़कता अमेरिका-रूस तनाव
28 अगस्त, 2020 को काला सागर में परमाणु क्षमता वाले US B-52 बमवर्षक के आगे 100 फ़ीट के भीतर की दूरी से गुज़रते हुए रूसी Su-27 फ्लेंकर जेट

चीन के साथ बढ़ते तनाव के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका को रूस के साथ अस्थिर रिश्ते को सामान्य रखना चाहिए था। लेकिन, इसके उलट हो रहा है। 9 अगस्त को बेलारूस में राष्ट्रपति चुनाव के बाद पहली बार वाशिंगटन, मिन्स्क में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के साथ खुलकर आ गया है और रूस के हस्तक्षेप को चुनौती दी है।

ठीक उसी समय बर्लिन ने भी यह ऐलान कर दिया है कि रूस के विपक्षी नेता,एलेक्सी नवलनी को नोविचोक नर्व एजेंट द्वारा ज़हर दिया गया है। दिलचस्प तरीक़े से जर्मनी ने पहले मास्को को सूचित किए बिना इस विस्फ़ोटक जानकारी को सार्वजनिक कर दिया। माना जा रहा है कि रूसी राजनीति में नवलनी के रूख़ को देखते हुए इस बात की जानकारी अमेरिका को पहले से थी।

इस बात की ज़्यादा संभावना है कि वाशिंगटन और बर्लिन ने क्रमशः बेलारूस और नवेलनी मामले में साथ-साथ आगे क़दम बढ़ाये हैं। ऐसा लगता है कि एक बड़ा टकराव उबल रहा है। बेलारूस को लेकर यह चेतावनी अमेरिकी उपविदेश मंत्री,स्टीफ़न बेगुन के स्तर पर आयी है, जिन्होंने क्रेमलिन को शीत युद्ध के युग के मेगाफ़ोन रेडियो लिबर्टी के ज़रिये एक कठोर संदेश दिया है:

“पिछले चार साल अमेरिकी-रूसी सम्बन्धों के लिए बहुत चुनौतीपूर्ण रहे हैं, लेकिन मुमकिन है कि यह और बदतर हों। इसके अलावा, नवंबर में (अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव) के नतीजे की परवाह किए बिना एक चीज़, जो रूस के साथ किसी भी क्षेत्र में ज़्यादा सहकारी सम्बन्ध विकसित करने में किसी भी राष्ट्रपति की क्षमता को सीमित कर सकती है, वह बेलारूस में प्रत्यक्ष रूप से रूसी हस्तक्षेप है।”

घंटों के भीतर,विदेश मंत्री, माइक पोम्पिओ ने विरोध प्रदर्शनों पर अंकुश लगाने के लिए बेलारूस सरकार के क़दमों की तत्काल ख़त्म करने की मांग करते हुए और वाशिंगटन के ट्रांसअटलांटिक भागीदारों के परामर्श से "महत्वपूर्ण लक्षित प्रतिबंधों" की चेतावनी देते हुए हस्तक्षेप किया।

यह एक तरह से राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए एक सीधी चुनौती है, जिन्होंने पिछले सप्ताह ही कहा था कि रूस 1998 के रूस-बेलारूस यूनिटी पैक्ट और सामूहिक सुरक्षा संधि के तहत बेलारूस में हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य है। (30 अगस्त, 2020 को मेरा ब्लॉग पढ़ें-बेलारूस में तख़्तापलट की कोशिश का गहन विश्लेषण)

असल में अमेरिकी इरादा रूस को एक साथ दो मोर्चों पर राजनयिक घरेबंदी करने का है। जर्मनी में रूसी राजदूत को कुछ घंटों पहले बर्लिन स्थित विदेश मंत्रालय में बुलाया गया था; इस बीच, मिन्स्क में विरोध प्रदर्शन एक नयी अंगड़ाई ले रहा है।

रूसी विदेश मंत्री, सर्गेई लावरोव ने गुरुवार को मिन्स्क में विरोध प्रदर्शनों को हवा देने को लेकर "कई विदेशी ताक़तों की तरफ़ से किये जा रहे प्रयासों" की निंदा की और उन्होंने कहा कि "बेलारूस की सीमाओं के पास नाटो गतिविधियों” में वृद्धि देखी जा रही है। रूस और बेलारूस की ख़ुफ़िया एजेंसियां एक दूसरे के संपर्क में हैं।

बेलारूस के विदेश मंत्री, व्लादिमीर मेकी ने लावरोव के साथ वार्ता के लिए गुरुवार को मॉस्को का दौरा किया। रूस और बेलारूस के जनरल स्टाफ़ के प्रमुखों ने गुरुवार को फ़ोन पर "राज्य और द्विपक्षीय सैन्य सहयोग की संभावनाओं और स्लाविक ब्रदरहुड संयुक्त अभ्यास की तैयारियों की स्थिति” पर चर्चा की। बेलारूस के राष्ट्रपति, अलेक्जेंडर लुकाशेंका की मॉस्को की यात्रा जल्दी ही होने की उम्मीद है।

जिस समय पश्चिमी विचार में नवलनी का मामला रूस की प्रतिष्ठा को धूमिल करने की एक बड़ी प्रचार सामग्री है, उस दौरान मॉस्को बेलारूस की स्थिति पर नज़र रखे हुए है। पुतिन ने पिछले सप्ताह इस बात को रेखांकित किया था कि पूर्व सोवियत गणराज्यों में बेलारूस " जातीय निकटता, भाषा, संस्कृति, आध्यात्मिक और साथ ही अन्य पहलुओं के मामले में भी रूस के साथ बहुत मिलता जुलता है। बेलारूस के साथ हमारे लाखों नहीं, तो दर्जनों या शायद सैकड़ों हजारों सीधे-सीधे पारिवारिक सम्बन्ध और करीबी औद्योगिक सहयोग हैं।”

लावरोव ने शब्दों पर ज़ोर नहीं दिया, जब उन्होंने पलटवार करते हुए कहा, "मॉस्को उन्हें तथ्यों के आधार पर पर्याप्त और सख़्त जवाब देगा, जो बेलारूस में स्थिति को पटरी से उतारने की कोशिश कर रहे हैं...(और) इस गणतंत्र को रूस से दूर करने और इस संघीय राज्य की नींव को कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।”

सवाल है कि आख़िर वाशिंगटन की योजना क्या है? असल में अगर ट्रम्प प्रशासन रूस पर अपना कड़ा रुख़ अपनाये रखता है, तो यह राष्ट्रपति ट्रम्प के अभियान के लिए फ़ायदेमंद है, सच्चाई यही है कि वाशिंगटन ने शायद यह सोचकर आक्रामक होने का विकल्प चुना है कि बेलारूस की क्रांति के मंचन को अपने मन माफ़िक रंग देने में सीआईए ने जो खाका बनाया है, उसके सामने रूसी ख़ुफ़िया एजेंसी की हालत हवा हो गयी है।

वास्तव में हाल के दिनों में रूस को शामिल करते हुए गतिरोध की एक हैरतअंगेज़ व्यूह रचना बनायी जाती रही है। अमेरिका और रूस की सेना छह दिन पहले तब टकराये थे,जब उत्तर-पूर्वी सीरिया में एक रूसी काफ़िले का हिस्सा बनने वाले किसी वाहन ने एक अमेरिकी बख़्तरबंद वाहन को टक्कर मार दी थी, जिसमें 4 अमेरिकी सैनिक घायल हो गये थे, इसके बाद बिडेन ने ट्रम्प पर ऊंगली उठाते हुए कहा था, "इसे लेकर आपने राष्ट्रपति को एक शब्द भी कहते सुना है? क्या उन्होंने अपनी एक भी उंगली उठायी है? इससे पहले कभी भी किसी अमेरिकी राष्ट्रपति ने किसी रूसी नेता के लिए ऐसी अधिनस्थ-भूमिका नहीं निभायी है।”

31 अगस्त को अमेरिकी सेना ने ऐलान किया कि अगले 10 दिनों में यह रूसी सीमा से महज़ 70 मील की दूरी पर लाइव-फ़ायर अभ्यास करेगी। 28 अगस्त को अमेरिका ने एक बड़े सैन्य प्रदर्शन में 30 नाटो देशों के छह परमाणु-सक्षम बी-52 बमवर्षक विमान उड़ाये। उनमें से दो ने काले सागर पर उड़ान भरे और दो रूसी फ़ाइटर जेट्स द्वारा उन्हें बीच में ही रोक दिया गया, जो बमवर्षकों में से एक के अगले हिस्से के 100 फ़ीट के भीतर से गुज़र गया, कथित तौर पर इन जेटों ने बमवर्षकों के वहन क्षमता को बाधित कर दिया।

27 अगस्त को रूसी गाइडेड मिसाइल पनडुब्बी, ओम्स्क अलास्का के तट से दूर निकल गयी और बेरिंग सागर में लाइव-फ़ायर अभ्यास में भाग लिया। इसके अलावा, 27 अगस्त को, नोराद ने अलास्का तट से रूसी सैन्य समुद्री गश्ती विमान के तीन समूहों को रोकने के लिए दो एफ़-22 जेट भेजे।

रूस के लिए खंदक खोदने के बढ़ते संकेतों के साथ बेलारूस पर प्लान बी अब ज़मीन पर उतरने लगा है। बेलारूस और नवलनी,दोनों ही ऐसे सटीक कारण हैं,जो वॉशिंगटन के लिए यूरोप को एकजुट करने और अपने उस ट्रांसअटलांटिक नेतृत्व को फिर से क़ायम करने के काम आ सकते हैं, जो ट्रम्प प्रशासन की तरफ़ से ईरान के ख़िलाफ़ "दुबारा" प्रतिबंध लगाये जाने की कोशिश को रूस और चीन के साथ मिलकर यूरोपीय संघ, फ़्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन द्वारा नाकाम कर दिये जाने के सिलसिले में चिंदी-चिंदी हो गया था।

बह बड़ी बात, जो वाशिंगटन को गहरी निराशा में डालती है कि रूस और चीन के बीच दरार पैदा करने की बेढंगी कोशिशें एकदम से काम नहीं कर पा रही हैं। चीन लुकाशेंका के समर्थन में आगे आया है; ईरान के ख़िलाफ़ ट्रम्प की अधिकतम दबाव की रणनीति में चीन-रूस की जुगलबंदी हर तरफ़ से सेंध लगा रही है। पश्चिम के साथ संघर्ष, रेडियो लिबर्टी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में रूस-चीन सम्बन्धों को बढ़ावा देने के लिए अनेक आर्थिक परियोजनायें दोनों देशों के बीच सूचीबद्ध हैं।

इन परियोजनाओं में शामिल हैं- चीन के विशाल सिनोपेक समूह के सहयोग से 11 बिलियन डॉलर की लागत वाली चीनी सीमा के पास स्थित अमूर में रूस द्वारा निर्मित दुनिया के सबसे बड़े संयंत्रों में से एक पॉलिमर प्लांट; 2,900 किलोमीटर पॉवर ऑफ़ साइबेरिया पाइपलाइन के ज़रिये चीन को प्राकृतिक गैस की आपूर्ति शुरू करना; एक दूसरी पाइपलाइन पर काम शुरू करने की योजना, पॉवर ऑफ़ साइबेरिया 2; चीन को तिगुनी मात्रा से भी ज़्यादा रूसी गैस देने की योजना; कोविड-19 के नये टीके के लिए वैज्ञानिक सहयोग परीक्षण; द्विपक्षीय लेन-देन आदि को लेकर डॉलर के इस्तेमाल को सीमित करने के उद्देश्य से "डी-डॉलराइजेशन" योजना।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें

US-Russia Tensions Flare up on Multiple Fronts

US-Russia
Belarus
Alexei Navalny
Donald Trump
vladimir putin
Mike Pompeo
US-China

Related Stories

पुतिन की अमेरिका को यूक्रेन से पीछे हटने की चेतावनी

नाटो देशों ने यूक्रेन को और हथियारों की आपूर्ति के लिए कसी कमर

यूक्रेन में छिड़े युद्ध और रूस पर लगे प्रतिबंध का मूल्यांकन

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने रूस को शीर्ष मानवाधिकार संस्था से निलंबित किया

बुका हमले के बावजूद रशिया-यूक्रेन के बीच समझौते जारी

रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात

रूस-यूक्रेन युद्धः क्या चल रहा बाइडन व पुतिन के दिमाग़ में

यूक्रेन-रूस युद्ध का संदर्भ और उसके मायने

नवउदारवादी व्यवस्था में पाबंदियों का खेल

'सख़्त आर्थिक प्रतिबंधों' के साथ तालमेल बिठाता रूस  


बाकी खबरें

  • प्रगतिशील वर्गों का हंगरी के समलैंगिकता संबंधी क़ानून पर हमला
    पीपल्स डिस्पैच
    प्रगतिशील वर्गों का हंगरी के समलैंगिकता संबंधी क़ानून पर हमला
    18 Jun 2021
    पीडोफ़िलिया से लड़ने की आड़ में हंगरी में दक्षिणपंथी सरकार ने एक क़ानून लागू किया है जो नाबालिगों तक एलजीबीटी के बारे में चर्चा करने वाली सामग्री के प्रसार पर रोक लगाता है।
  • राजनीति: यूपी में ऊंट नहीं ‘हाथी’ किस करवट बैठेगा सबको है इंतज़ार!
    असद रिज़वी
    राजनीति: यूपी में ऊंट नहीं ‘हाथी’ किस करवट बैठेगा सबको है इंतज़ार!
    18 Jun 2021
    कहावत तो ऊंट की है कि देखते हैं ऊंट किस करवट बैठेगा, लेकिन यूपी में राजनीति ख़ासकर 2022 के चुनाव की हवा मापने और भांपने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है यह देखना कि आने वाले दिनों में बीएसपी प्रमुख मायावती…
  • ओएफबी
    रौनक छाबड़ा
    ओएफबी के निगमीकरण के ख़िलाफ़ रक्षा महासंघ अनिश्चितकालीन हड़ताल पर विचार-विमर्श कर रहे हैं
    18 Jun 2021
    केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड को सात नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों में तब्दील किये जाने की योजना को मंजूरी दे दी है। वहीं कर्मचारियों की ओर से 19 जून को विभिन्न…
  • इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए सरकार को ख़र्च बढ़ाना चाहिए
    शिन्ज़नी जैन
    इस संकट की घड़ी में लोगों की मदद करने के लिए सरकार को ख़र्च बढ़ाना चाहिए
    18 Jun 2021
    महामारी आने के पहले से ही भारतीय अर्थव्यवस्था मांग में कमी की समस्या से जूझ रही है, ऐसे में अर्थशास्त्री और वाम आंदोलन लगातार सरकार से मांग बढ़ाने के लिए अपने ख़र्च में वृद्धि करने की अपील कर रहा है।
  • अगला क़दम : अदालतों को यूएपीए का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों को दंडित करना चाहिए
    एजाज़ अशरफ़
    अगला क़दम : अदालतों को यूएपीए का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों को दंडित करना चाहिए
    18 Jun 2021
    दिल्ली उच्च न्यायालय ने पुलिस द्वारा कठोर क़ानूनों को मनमाने ढंग से लागू करने की प्रवृत्ति पर क्यों तंज़ कसा है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License