NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
तूफ़ान के केंद्र में यूक्रेन और बेलारूस
काला सागर में टकराव के घुमड़ते काले बादलों के बीच आशा की चमकती किरण यह है कि मास्को एवं वाशिंगटन के बीच रणनीतिक संवाद-संचार फिर से शुरू हो गया है तथा विभिन्न कार्य स्तरों पर उनमें आदान-प्रदान हो रहा है।
एम. के. भद्रकुमार
21 Nov 2021
Putin
18 नवंबर, 2021 को मास्को में रूसी विदेश मंत्रालय बोर्ड की विस्तारित बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन।

क्या ब्रिटिश रक्षा सचिव बेन वालेस गुरुवार का वारसॉ पहुंचना एक स्वादिष्ट विडंबना नहीं होगी, जो वहां बेलारूस से लगी पोलैंड की सीमा की बाड़बंदी को मजबूत करने की विस्तृत योजनाओं पर काम करने के लिए गए थे? 2003 में इराक पर आक्रमण में ब्रिटेन ने अमेरिका का साथ दिया था और अब वह इराकी प्रवासियों से यूरोपीय संघ का स्वयंभू रक्षक बन गया है!

बेलारूस के साथ पोलैंड की सीमा को चाक-चौबंद में मदद देने के लिए 150 ब्रिटिश सेना रॉयल इंजीनियर्स को वहां भेजा जाने वाला है। वालेस का अनुमान है कि ब्रिटिश सैनिक "संभवतः अन्य बाल्टिक राज्यों को भी अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने में मदद कर सकते हैं।" ब्रिटिश मीडिया ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि ब्रिटेन के विशेष बल के सैकड़ों सैनिक और पैराट्रूपर्स को भी उस क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच यूक्रेन में तैनाती के लिए तैयार किया गया है।

मंगलवार को, वालेस ने बेलारूस के प्रति अपना समर्थन जताने के लिए ऐसे समय कीव का दौरा किया, जब यूक्रेन और नाटो देशों ने यूक्रेन की सीमाओं के आसपास रूसी सेना की गतिविधियों पर अपनी चिंताएं जताई हैं।

यूक्रेनी रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव के साथ वालेस की बातचीत के बाद कीव में एक संयुक्त बयान जारी किया गया। इस संयुक्त बयान में अन्य बातों के अलावा कहा गया है कि यह दौरा दोनों देशों के बीच पिछले सप्ताह लंदन में हस्ताक्षरित एक अंतर सरकारी रूपरेखा समझौते के तहत हुआ है, और काला सागर में यूक्रेन के नौसैनिक बलों की क्षमताओं को विकसित करने एवं उनकी अंतर्संचालनीयता बढ़ाने के लिए ब्रिटेन के साथ संयुक्त परियोजनाएं शुरू की जाएंगी।

ब्रिटेन और यूक्रेन ने भी हाल ही में एक संधि को अंतिम रूप दिया जो कीव को ब्रिटिश युद्धपोत और मिसाइल खरीदने के लिए लंदन से ऋण लेने में सक्षम बनाएगी। स्काई न्यूज ने बताया कि "यूक्रेन की £1.7 बिलियन की खरीदारी सूची में दो माइन हंटर हैं, आठ मिसाइलों और एक फ्रिगेट जहाज के संयुक्त उत्पादन के साथ-साथ मौजूदा जलपोतों को असलहों से लैस करने के लिए आवश्यक हथियारों की खरीद भी शामिल है।"

इसके अलावा, ब्रिटेन काला सागर में यूक्रेन के लिए दो नौसैनिक अड्डे भी बनाएगा। निस्संदेह, ग्लोबल ब्रिटेन ने मध्य यूरोप और काला सागर में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने के लिए यूक्रेन की सीमाओं पर सैनिकों को इकट्ठा करने वाले रूस पर प्रवासियों के मुद्दे और युद्ध उन्माद के मुद्दे को हथिया लिया है।

ब्रिटेन परंपरागत रूप से अमेरिका के साथ मिलकर काम करता है। दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी जे ब्लिंकन और यूक्रेनी विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने 10 नवंबर को वाशिंगटन, डीसी में रणनीतिक साझेदारी पर यूएस-यूक्रेन चार्टर नामक एक प्रमुख दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किए हैं, जिसमें वाशिंगटन की प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई कि "क्षेत्रीय अखंडता पर खतरे की स्थिति में यूक्रेन की खुद की रक्षा-क्षमता को मजबूती प्रदान करना तथा यूरो-अटलांटिक संस्थानों (इसे नाटो पढ़ें) में यूक्रेन के एकीकरण को गहराई देना अमेरिका की समवर्ती प्राथमिकताएं हैं।”

शुरुआत से अंत तक, अमेरिकी-यूक्रेनी संधि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रूस पर उंगली उठाती है।

पिछले शनिवार को दिए गए एक बयान में, रूसी रक्षा मंत्रालय ने अमेरिका पर "काला सागर क्षेत्र में एक आक्रामक प्रकृति की सैन्य गतिविधि" संचालित करने का आरोप लगाया था। बयान में कहा गया था कि अमेरिकी युद्धपोतों, U-2S रणनीतिक टोही विमान, एक बी- 51 सामरिक बमवर्षक विमान काला सागर में रूसी सीमा के करीब उड़ते हुए रूसी सीमा के आसपास के क्षेत्र की निगरानी कर रहे हैं।

इस सबके बीच जो बड़ी तस्वीर सामने आ रही है, वह यह है कि रूस का घेरा मध्य यूरोप के साथ बाल्टिक क्षेत्र से काला सागर और फिर काकेशस तक कसता हुआ दिखाई दे रहा है। शीत युद्ध के युग के विपरीत, नाटो की तैनाती रूस की ठीक पश्चिमी और दक्षिणी सीमाओं तक फैली हुई है।

पश्चिमी देशों की राजधानियों और मॉस्को में जो कुछ भी सामने आ रहा है, उसकी बिल्कुल विपरीत व्याख्याएं की जा रही हैं। इनमें पश्चिम की व्याख्या यह है कि मास्को इसे एक तनाव परीक्षण के रूप में ले रहा है, उसे उम्मीद है कि प्रवासी संकट और यूक्रेन की सीमा पर रूसी सेना की तैनाती से यूरोपीय संघ और नाटो में दरार दिखने लगेगी, जो बदले में उन्हें नॉर्ड स्ट्रीम गैस पाइप लाइन (जिसका अमेरिका, यूक्रेन और पोलैंड विरोध कर रहे हैं) की प्रमाणन प्रक्रिया में तेजी लाकर व्यावहारिक लेन-देन का विकल्प चुनने के लिए मजबूर करेगा।

संक्षेप में, यह तर्क दिया जाता है कि पश्चिम को मास्को का झांसा देना चाहिए। दूसरी ओर, मॉस्को की नैरेटिव यह है कि पश्चिमी शक्तियां जानबूझकर यूक्रेन की विद्रोही प्रवृत्ति को हथियार देकर और कीव में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के घिरे नेतृत्व को प्रोत्साहित कर रही हैं, जो खुद इस विश्वास के साथ अपने राजनीतिक अस्तित्व बचाने के लिए लड़ रहे हैं कि उनके लिए पश्चिमी समर्थन मिलने के साथ डोनबास और क्रीमिया में खोए हुए क्षेत्रों को फिर से हासिल करने और इस तरह से अपने देश के उद्धारकर्ता होने के उनके संकल्प को भुनाने के लिए अवसर की एक खिड़की खुलती नजर आ रही है।

और, दूसरा, जैसा कि मास्को इसे देखता है, रूस के साथ बढ़ता तनाव यूक्रेन की सुरक्षा में नाटो को सीधे दखल देने और इस तरह रूस के खिलाफ पश्चिम की नियंत्रण रणनीति का एक नमूना बनाने का एक सुविधाजनक बहाना बन गया है।

इस व्याख्या का अभिसमर्थन करने के लिए साक्ष्य की कमी नहीं है। अमेरिका यूरोपीय सहयोगियों को जानकारी देता रहा है कि मॉस्को जमीन पर नए तथ्य पैदा कर सकता है और इसलिए, जवाबी उपायों की जरूरत है। फ्रांस ने कसम खाई है कि रूस ने अगर यूक्रेन पर हमला किया तो वह उसकी रक्षा करेगा। नाटो ने भी रूस को चेताया है।

वास्तव में, वाशिंगटन हाल ही में अंकारा के साथ अपने मतभेद को दूर करने जा रहा है ताकि इसे नाटो के पाले में वापस लाने के लिए एक दृढ़ कदम उठाया जा सके। यूक्रेन के साथ तुर्की के घनिष्ठ सैन्य संबंध हैं, जो काला सागर की एक प्रमुख शक्ति है, और सबसे ऊपर, अंकारा का मास्को का सामना करने का इतिहास रहा है, यदि वह आक्रमण करता है तो।

लिहाजा, अमेरिका-तुर्की के उच्चस्तरीय रक्षा समूह ने मंगलवार को पेंटागन में एक बैठक की। अमेरिकी रक्षा विभाग की अवर सचिव लॉरा कूपर ने बातचीत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि तुर्की का सैन्य उन्नयन नाटो के समर्थन में एक आवश्यकता बन गया है, और वाशिंगटन ने "टीएएफ (तुर्की सशस्त्र बलों) के सैन्य-आधुनिकीकरण की आवश्यकताओं की पहचान की है।"

कहा गया कि बैठक में कूपर ने "काला सागर पर सहयोग पर प्रकाश डाला"। दोनों पक्षों ने "कार्यात्मक और क्षेत्रीय मुद्दों की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की" और इसके बाद अंकारा में एक बैठक करने पर दोनों देशों में एक सहमति बनी है। बेशक, काला सागर में नाटो की उपस्थिति के लिए यूएस-तुर्की तालमेल एक गेम चेंजर हो सकता है।

मॉन्ट्रो कन्वेंशन (1936) के तहत, तुर्की बोस्पोरस और डार्डानेल्स जलडमरूमध्य पर नियंत्रण रखता है और पूर्वी भूमध्यसागरीय और काला सागर के बीच वह नौसैनिक युद्धपोतों के पारगमन का नियमन करता है। यह कहना पर्याप्त है कि रूस के काला सागर बेड़े के संचालन और भूमध्य सागर में रूसी युद्ध जहाजों की क्षमता तुर्की के सहयोग पर निर्भर करेगी।

इस तरह की उथल-पुथल वाली पृष्ठभूमि के खिलाफ, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को मास्को में विदेश मंत्रालय बोर्ड की एक विस्तारित बैठक में दिए गए अपने एक भाषण में कहा कि पश्चिम अब "लाल रेखाओं के बारे में हमारी चेतावनियों" पर ध्यान नहीं दे रहा है। उन्होंने अपने भाषण में, कहा कि "हमारे राज्य की सीमा से केवल 20 किलोमीटर की दूरी पर", काला सागर में उड़ने वाले अमेरिका के सामरिक बमबर्षक विमानों, पूर्व की ओर नाटो के विस्तार, "हमारी सीमाओं के ठीक बगल में" नाटो की मिसाइल-रोधी प्रणालियों की तैनाती आदि संदर्भों का उल्लेख किया।

लेकिन पुतिन ने रहस्यमय तरीके से यह भी दावा किया कि "हमारी हालिया चेतावनियों का एक निश्चित प्रभाव पड़ा है। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से नहीं बताया। पुतिन व्हाइट हाउस को मैनेज करते नजर आए। दरअसल, वे रूसी सुरक्षा परिषद के सचिव निकोलाई पेत्रुशेव और अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जेक सुलिवन के बीच फोन पर बातचीत के एक दिन बाद बोल रहे थे।

आगे देखने से तनाव भड़कने की आशंका कम लगती है। इसलिए कि प्रवासी संकट पहले से ही कम हो रहा है, जर्मनी ने कुछ सौ इराकी शरणार्थियों को अपने यहां रखने की पेशकश कर दी है। इन सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह है कि रूस-अमेरिका शिखर सम्मेलन साल के अंत से पहले ऑनलाइन हो सकता है। अगले साल राष्ट्रपति बाइडेन और पुतिन के बीच एक व्यक्तिगत बैठक की भी संभावना है।

अमेरिका में रूसी राजदूत अनातोली एंटोनोव ने गुरुवार को टास को बताया कि मॉस्को और वाशिंगटन के बीच सामरिक वार्ता का तीसरा दौर "निकट भविष्य में" होने की उम्मीद है। राजदूत ने कहा कि "रणनीतिक स्थिरता के क्षेत्र में सकारात्मक विकास हो रहा है...वार्ता की व्यापक प्रकृति रणनीतिक स्थिरता के सभी महत्त्वपूर्ण कारकों, पारंपरिक हथियारों और नई प्रौद्योगिकियों, दोनों पर चर्चा करने की अनुमति देती है।"

काला सागर में घुमड़ते काले बादलों के बीच आशा की एक चमकती किरण यह है कि मॉस्को और वाशिंगटन के बीच रणनीतिक संवाद-संचार फिर से शुरू हो गया है और विभिन्न कार्य स्तरों पर उनमें आदान-प्रदान हो रहा है।

हर संबंध में हमेशा ही बिगाड़ करा देने वाले पक्ष होते हैं। यहां भी हैं, जो अपने असंतोष के एजेंडे के लिए रूस के साथ तनाव बढ़ा सकते हैं-चाहे वह ब्रिटेन, यूक्रेन या पोलैंड हो-लेकिन न तो क्रेमलिन और न ही व्हाइट हाउस आपस में टकराव चाहते हैं।

अंग्रेजी में मूल रूप से प्रकाशित लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: 

Ukraine, Belarus in Eye of the Storm

ukraine
Belarus
Euro-Atlantic institutions
Turkish Armed Forces
NATO
Black Sea

Related Stories

बाइडेन ने यूक्रेन पर अपने नैरेटिव में किया बदलाव

पश्चिम बैन हटाए तो रूस वैश्विक खाद्य संकट कम करने में मदद करेगा: पुतिन

और फिर अचानक कोई साम्राज्य नहीं बचा था

90 दिनों के युद्ध के बाद का क्या हैं यूक्रेन के हालात

यूक्रेन युद्ध से पैदा हुई खाद्य असुरक्षा से बढ़ रही वार्ता की ज़रूरत

खाड़ी में पुरानी रणनीतियों की ओर लौट रहा बाइडन प्रशासन

फ़िनलैंड-स्वीडन का नेटो भर्ती का सपना हुआ फेल, फ़िलिस्तीनी पत्रकार शीरीन की शहादत के मायने

यूक्रेन में संघर्ष के चलते यूरोप में राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव 

गुटनिरपेक्षता आर्थिक रूप से कम विकसित देशों की एक फ़ौरी ज़रूरत

यूक्रेन की स्थिति पर भारत, जर्मनी ने बनाया तालमेल


बाकी खबरें

  • राशन वितरण के दौरान वृद्ध, विधवा, विकलांग और अभावग्रस्त व्यक्तियों को प्राथमिकता दी गई। फोटो: नरेश बिस्वास
    शिरीष खरे
    कोरोना लॉकडाउन में घने वनों से घिरे बैगाचक में बांटा गया परंपरागत खाद्य पदार्थ, दिया पोषण-सुरक्षा का मॉडल
    22 Jul 2021
    आदिवासी बहुल बैगाचक में काम करने वाले राहत-कार्य समूह से जुड़े लोगों ने डिंडौरी और पड़ोसी जिले अनूपपुर के लगभग साढ़े चार सौ जरूरतमंद परिवारों को जो राशन-किट दी उसमें मुख्य रुप से कोदो-कुटकी रखी गई थी।
  • उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    कुमुदिनी पति
    उत्तर प्रदेश जनसंख्या नियंत्रण विधेयक महिलाओं की जिंदगी पर सबसे ज्यादा असर डालेगा!
    22 Jul 2021
    उत्तर प्रदेश में 2015 में 31 लाख 52 हजार महिलाओं ने गर्भपात रिपोर्ट किया था। संख्या इससे कहीं अधिक होगी क्योंकि केवल 11 प्रतिशत ने स्वास्थ्य केंद्र में गर्भपात करवाया था।
  • लोकसभा
    अनिल जैन
    दलबदल विरोधी क़ानून का मखौल उड़ाने में अब लोकसभा अध्यक्ष भी शामिल!
    22 Jul 2021
    जन-प्रतिनिधियों के दल-बदल और खरीद-फरोख्त के रोकथाम के लिए कोई साढ़े तीन दशक पहले दलबदल निरोधक कानून अस्तित्व में आया था। उम्मीद जताई गई थी कि इस कानून के जरिए भारतीय लोकतंत्र इस बीमारी से निजात पा…
  • सड़क संसद में किसान। भास्कर पर इनकम टैक्स छापे।
    न्यूज़क्लिक टीम
    सड़क संसद में किसान, भास्कर पर इनकम टैक्स छापे
    22 Jul 2021
    मोदी सरकार ने अब सारी हदें पार कर दी हैं। सत्ता से सवाल पूछने वाले अखबार दैनिक भास्कर और उत्तर प्रदेश स्थित भारत समाचार पर इनकम टैक्स रेड मारी गयी है। याद रहे ऐसे ही न्यूज़ क्लिक के दफ्तर पर भी ED ने…
  • दैनिक भास्कर और भारत समाचार चैनल के परिसरों पर आयकर विभागने मारे छापे, लोगों ने कहा डारने की साज़िश
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दैनिक भास्कर और भारत समाचार चैनल के परिसरों पर आयकर विभाग ने मारे छापे, लोगों ने कहा डराने की साज़िश
    22 Jul 2021
    "...सरकार की छापेमारी इसलिए हुई है क्योंकि उसने “कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान सरकार की अक्षमता की सही तस्वीर देश के सामने रखी थी।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License