NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
केन्द्रीय बजट में तेलुगु राज्यों की वित्तीय जरूरतों की अनदेखी की गई है
इस बारे में राजनीतिक विश्लेषकों का मत है कि एपी पुनर्गठन अधिनियम 2014 के तहत किये गए आश्वासनों को एक बार फिर से नजरअंदाज कर दिया गया है।
पृथ्वीराज रूपावत
03 Feb 2021
केन्द्रीय बजट

हैदराबाद: 2021-22 का केन्द्रीय बजट तेलुगु राज्यों के लिए एक बड़ी निराशा के रूप में सामने आया है।  दोनों राज्य सरकारों द्वारा अपनी वित्तीय जरूरतों को लेकर किये गए बारम्बार अनुरोधों की इस बजट में अनसुनी की गई है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने आंध्रप्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 के तहत लंबे समय से लंबित चले आ रहे आश्वासनों के क्रियान्वयन को भी अनसुना कर दिया है।

इस बारे में राजनीतिक विश्लेषक प्रोफेसर के. नागेश्वर राव का कहना है: “बजट से इस बात के संकेत मिलते हैं कि तेलुगु राज्य भाजपा के नेतृत्ववाली केंद्र सरकार के राजनीतिक राडार पर फिलहाल नहीं हैं। तेलंगाना और आंध्रप्रदेश के लिए किसी भी बड़ी परियोजना को मंजूरी नहीं दी गई है। इसके अलावा 2020-21 के बजट के संशोधित अनुमानों से इस बात के संकेत मिलते हैं कि सरकार इन दोनों राज्यों के केन्द्रीय एवं आदिवासी विश्वविद्यालयों के लिए आवण्टित धनराशि को जारी कर पाने में विफल रही है।”

पिछले वर्ष के बजट में आंध्रप्रदेश और तेलंगाना के आदिवासी विश्वविद्यालयों के लिए 8.3 करोड़ रूपये की धनराशि को आवण्टित किये जाने का प्रस्ताव किया गया था। ध्यान देने योग्य बात यह है कि केंद्र ने इन दोनों विश्वविद्यालयों के लिए 2020-21 में आवण्टित 8.3 करोड़ रूपये की धनराशि को संशोधित अनुमानों में घटाकर 4 करोड़ रूपये कर दिया।

सोमवार को वाईएसआर कांग्रेस सांसद विजय साई रेड्डी ने आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा (एसपीएस) न दिए जाने के सवाल पर केंद्र सरकार के “घोर अन्याय” पर जमकर आलोचना की है।

2014 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने पाँच वर्षों की अवधि के लिए आंध्रप्रदेश राज्य को विशेस राज्य का दर्जा दिए जाने का वायदा किया था। आंध्रप्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आईवाईआर कृष्णा राव का इस बारे में कहना है कि “लेकिन भाजपा सरकार ने पहले से ही स्पष्ट कर दिया था कि वह आंध्रप्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा नहीं देने जा रही है।”

इससे पहले भी तेलंगाना सरकार ने केंद्र सरकार से कालेश्वरम परियोजना को राष्ट्रीय महत्व का दर्जा दिए जाने की अपील की थी, लेकिन उस अनरोध को भी बजट में नजरअंदाज कर दिया गया है।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों के अनुसार तेलंगाना राष्ट्र समिति के नेतृत्ववाली राज्य सरकार को इस बात की भी उम्मीद थी कि हैदराबाद में सूचना प्रोद्योगिकी निवेश क्षेत्र (आईटीआईआर) और काजीपेट में रेल कोच फैक्ट्री की स्थापना की घोषणा की जा सकती है, लेकिन इस बारे में उसे कोई सफलता हाथ नहीं लगी है।

नागेश्वर राव का यह भी कहना था कि “एपी पुनर्गठन अधिनियम के तहत केंद्र सरकार द्वारा जो आश्वासन दिए गए थे उन्हें एक बार फिर से नजरअंदाज कर दिया गया है।”

एपी पुनर्गठन अधिनियम के हिसाब से केंद्र सरकार से अपेक्षित था कि वह स्टील अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया लिमिटेड के जरिये तेलंगाना के बय्यारम और आंध्रप्रदेश के कडप्पा में स्टील संयंत्रों की स्थापना का काम करेगी। यह अधिनियम विशाखापट्टनम-चेन्नई औद्योगिक कॉरिडोर को विकसित करने, दोनों राज्यों में रेलवे कनेक्टिविटी को बढ़ाने और पिछड़े जिलों के विकास के लिए विशेष फण्ड मुहैय्या कराने को लेकर भी आश्वस्त करता है। राव के अनुसार “लेकिन बजट में इन आश्वासनों का कोई उल्लेख नहीं किया गया है।”

आंध्रप्रदेश मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के प्रदेश सचिव पी मधु का इस बारे में कहना था “जहाँ इस बजट में एक तरफ आन्ध्र की उपेक्षा की गई है, वहीँ ऐसा प्रतीत होता है कि इस बजट को विशेष तौर पर  तमिलनाडु, असम, पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में होने जा रहे आगामी चुनावी को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है।”

मधु के अनुसार “विशाखापट्टनम में रेलवे ज़ोन को लेकर लंबे समय से चली आ रही लंबित मांग को नजरअंदाज किया गया है। राज्य में बंदरगाहों के विकास के साथ-साथ ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम के तहत 100 दिनों के कार्य दिवसों को 150 दिन तक बढाये जाने को लेकर भी बजट में कोई जिक्र नहीं किया गया है।”

पोलावरम परियोजना

पोलावरम सिंचाई परियोजना के बारे में आंध्रप्रदेश सरकार द्वारा कई बार केंद्र सरकार को अनुरोध किया जा चुका है कि वह वर्तमान में जारी सरकारी बॉन्ड जारी कर अतिरिक्त बजटीय संसाधनों को जुटाने के माध्यम से वित्त-पोषण की मौजूदा परिपाटी के बजाय केंद्र इस परियोजना पर सीधे वित्तपोषण का इंतजाम करे। हालाँकि वर्तमान बजट में इस बहु-उद्येशीय सिंचाई परियोजना के लिए किसी भी तरह के फण्ड का आवंटन निर्दिष्ट नहीं किया गया है। पोलावरम प्रोजेक्ट रिवाइज्ड कास्ट कमिटी की सिफारिशों के अनुसार इस परियोजना की लागत 55,656.87 करोड़ रूपये पहुँच चुकी थी। हालाँकि केन्द्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से अभी भी इस संशोधित लागत को मंजूरी दी जानी बाकी है।

केन्द्रीय कराधानों के हस्तांतरण में कमी

15 वें वित्त आयोग की सिफारिशों के अनुसार केन्द्रीय करों के हस्तांतरण के मामले में आंध्र प्रदेश की हिस्सेदारी वर्तमान के 4.31% से घटकर 2021-22 में 4.04% रह जायेगी। इस प्रकार तेलंगाना के लिए केन्द्रीय हस्तांतरण भी 2.37% से घटकर 2.1% रह जाने वाला है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

‘Union Budget has Ignored Telugu States’ Financial Pleas Across Sectors’

Telugu States
Budget 2021-22
AP Reorganisation Act
Special Category Status
Polavaram
ITIR
Visakhapatnam Railway Zone

Related Stories

बजट-2021-22: संकट के बीच लंबी-लंबी डींगे

नौकरियां? हां हां! वे बस आ ही रही हैं!

गोदावरी बाढ़ पीड़ितों के प्रति आंध्र सरकार की बेरुखी के ख़िलाफ़ वाम पार्टियों का प्रतिरोध


बाकी खबरें

  • BSL
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : पूर्वजों ने ज़मीनें दीं उद्योग विकास के लिए, उनके विस्थापित प्रशिक्षित बच्चे भटक रहें हैं काम के लिए 
    25 Oct 2021
    बोकारो स्टील सिटी प्रबंधन द्वारा नियोजन के वायदे से मुकरने के खिलाफ विस्थापित युवाओं का आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
  • Moscow
    एम. के. भद्रकुमार
    मास्को सम्मेलन में तालिबान विजेता बनकर उभरा है
    25 Oct 2021
    अफगानिस्तान में होने वाली निरंतर घटनाओं पर एक नज़र में इस दफा 10 क्षेत्रीय राज्यों और तालिबान के बीच हुआ मास्को सम्मेलन पर केंद्र-बिंदु को रखा गया है।
  • Doodh Ganga
    राजा मुज़फ़्फ़र भट
    दूध गंगा के बचाव में आगे आया एनजीटी
    25 Oct 2021
    डॉ राजा मुजफ्फर भट पिछले कई वर्षों से सरकारी एजेंसियों की वजह कश्मीर में दूध गंगा नदी को व्यापक रूप से प्रदूषित होने के बारे में लिखते रहे हैं और लेकिन उनके इन अथक प्रयासों के बावजूद, इस समस्या को…
  • Ashram-3
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    आश्रम-3 के सेट पर बजरंग दल का हमला, माकपा ने कहा- ये संविधान पर हमला है 
    25 Oct 2021
    मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चल रही एक वेब सीरीज की शूटिंग के दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता सेट पर जबरदस्ती घुस आए और इस दौरान उन्होंने फ़िल्म निर्देशक प्रकाश झा के साथ बदसलूकी की। 
  • tax.
    सुबोध वर्मा
    मोदी सरकार ने कॉर्पोरेट टैक्स का बोझ आम जनता पर लादा
    25 Oct 2021
    सीमा शुल्क संग्रह में गिरावट बताती है कि आयात को आसान बनाया जा रहा है जो भारतीय उत्पादकों को तबाह कर रहा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License