NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
उत्तराखंड : पहले से ही ख़स्ताहाल रोडवेज़ को सरकार कर रही है और भी कमज़ोर
उत्तराखंड सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हरिद्वार रोड स्थित रोडवेज़ वर्कशाप को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण को सौंपने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों का कहना है, "एक तो सरकार हमारे हिस्से का पैसा दे नहीं रही है और हमारे पास जो सीमित साधन हैं उन्हें भी छीन रही है।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
07 Nov 2019
uttrakhand roadways
Image courtesy: Inextlive

उत्तराखंड सरकार ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत हरिद्वार रोड स्थित रोडवेज़ वर्कशाप को मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण को देने का निर्णय लिया है। इसी फ़ैसले के ख़िलाफ़ रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन ने विरोध दर्ज किया है। यूनियन ने साफ़ कहा है कि अगर शासन परिवहन निगम की ज़मीन का अधिग्रहण करना चाहता है तो तत्काल ही आईएसबीटी देहरादून का स्वामित्व परिवहन निगम के नाम पर किया जाए।

आपको बता दें कि साल 2003 में उत्तरांचल रोडवेज़ को उत्तर प्रदेश रोडवेज़ से अलग किया गया था। उस समय केंद्र सरकार ने वादा किया था की जितनी भी साझी संपत्ति है उसके बाज़ार मूल्य का लगभग 14% उत्तरांचल रोडवेज़ को दिया जाएगा। लेकिन परिवहन निगम के मुताबिक़ वो राशि अभी तक नहीं मिली है। एक अंदाज़े के मुताबिक़ यह राशि क़रीब सात-आठ सौ करोड़ हैं। इसको लेकर कर्मचारियों में ग़ुस्सा है। उनका कहना है "एक तो सरकार हमारे हिस्से का पैसा दे नहीं रही है और हमारे पास जो सीमित साधन हैं उन्हें भी छीन रही है।"

कर्मचारी यूनियन का कहना है कि केंद्र, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में एक ही पार्टी की सरकार होने के बावजूद परिसंपत्तियों का बंटवारा न होना चिंता का विषय है। बंटवारा न होने के कारण परिवहन निगम को आर्थिक नुक़सान उठाना पड़ रहा है। यूनियन की बैठक में परिवहन निगम को सौ करोड़ रुपये अतिरिक्त अंशदान के तौर पर देने की मांग उठाई गई है।

क्या है पूरा मामला?

स्मार्ट सिटी के तहत ज़िला स्तरीय सभी सरकारी कार्यालय एक ग्रीन बिल्डिंग में शिफ़्ट किए जाने की कवायद में सरकार ने रोडवेज़ की कार्यशाला की ज़मीन शहरी विकास विभाग को ट्रांसफ़र करने के आदेश दे दिए हैं। इस बारे में शुक्रवार को परिवहन सचिव शैलेश बगोली की ओर से जारी आदेश में बताया गया कि "कार्यशाला की ज़मीन की प्रतिपूर्ति के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की गई है। ज़मीन ट्रांसफ़र के बाद प्रतिपूर्ति की राशि पर फ़ैसला होगा। हरिद्वार रोड पर रोडवेज़ कार्यशाला में 204 करोड़ रुपये की लागत से छह मंज़िला ग्रीन बिल्डिंग बनेगी।"

IMG-20191107-WA0005 (1).jpg

कार्यशाला को ट्रांसपोर्टनगर शिफ़्ट किया जाना है। इंटीग्रेटेड ग्रीन बिल्डिंग में कलेक्ट्रेट, विकास भवन, तहसील समेत तमाम ज़िलास्तरीय सरकारी कार्यालय होंगे। यहां हर तरह की जनसुविधाएं भी मिलेंगी। पिछले दिनों सचिवालय में हुई स्मार्ट सिटी को लेकर बैठक में शासन ने कार्यशाला की भूमि को शीघ्र ही शहरी विकास को देने के लिए हामी भरी थी। शुक्रवार को परिवहन सचिव शैलेश बगोली ने तत्काल प्रभाव से कार्यशाला की भूमि शहरी विकास विभाग को हस्तांतरित करने के आदेश दिए।

वहीं, कर्मचारी यूनियनों ने सरकार के आदेश का विरोध किया है। उत्तरांचल रोडवेज़ कर्मचारी यूनियन के प्रदेश महासचिव अशोक चौधरी ने कहा कि सरकार जबरन भूमि का अधिग्रहण नहीं कर सकती। पहले आईएसबीटी का स्वामित्व रोडवेज़ को दिया जाए, जो शहरी विकास विभाग के अधीन है। इसके अलावा कार्यशाला निर्माण और शिफ़्टिंग का पूरा ख़र्च भी सरकार ही वहन करे। अगर ऐसा नहीं हुआ तो यूनियन इस फ़ैसले के विरोध में आंदोलन करेगी।

Uttrakhand
Damage Roadways
Roadways workshop
uttrakhand government
modi sarkar
Uttaranchal Roadways Employees Union

Related Stories

बच्चों को कौन बता रहा है दलित और सवर्ण में अंतर?

उत्तराखंड: क्षमता से अधिक पर्यटक, हिमालयी पारिस्थितकीय के लिए ख़तरा!

दिल्ली से देहरादून जल्दी पहुंचने के लिए सैकड़ों वर्ष पुराने साल समेत हज़ारों वृक्षों के काटने का विरोध

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव परिणाम: हिंदुत्व की लहर या विपक्ष का ढीलापन?

उत्तराखंड में बीजेपी को बहुमत लेकिन मुख्यमंत्री धामी नहीं बचा सके अपनी सीट

EXIT POLL: बिग मीडिया से उलट तस्वीर दिखा रहे हैं स्मॉल मीडिया-सोशल मीडिया

उत्तराखंड चुनाव: एक विश्लेषण: बहुत आसान नहीं रहा चुनाव, भाजपा-कांग्रेस में कांटे की टक्कर

उत्तराखंड चुनाव: भाजपा के घोषणा पत्र में लव-लैंड जिहाद का मुद्दा तो कांग्रेस में सत्ता से दूर रहने की टीस

उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल

बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन


बाकी खबरें

  • aicctu
    मधुलिका
    इंडियन टेलिफ़ोन इंडस्ट्री : सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ख़राब नियोक्ताओं की चिर-परिचित कहानी
    22 Feb 2022
    महामारी ने इन कर्मचारियों की दिक़्क़तों को कई गुना तक बढ़ा दिया है।
  • hum bharat ke log
    डॉ. लेनिन रघुवंशी
    एक व्यापक बहुपक्षी और बहुआयामी दृष्टिकोण की आवश्यकता
    22 Feb 2022
    सभी 'टूटे हुए लोगों' और प्रगतिशील लोगों, की एकता दण्डहीनता की संस्कृति व वंचितिकरण के ख़िलाफ़ लड़ने का सबसे अच्छा तरीका है, क्योंकि यह परिवर्तन उन लोगों से ही नहीं आएगा, जो इस प्रणाली से लाभ उठाते…
  • MGNREGA
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    ग्रामीण संकट को देखते हुए भारतीय कॉरपोरेट का मनरेगा में भारी धन आवंटन का आह्वान 
    22 Feb 2022
    ऐसा करते हुए कॉरपोरेट क्षेत्र ने सरकार को औद्योगिक गतिविधियों के तेजी से पटरी पर आने की उसकी उम्मीद के खिलाफ आगाह किया है क्योंकि खपत की मांग में कमी से उद्योग की क्षमता निष्क्रिय पड़ी हुई है। 
  • Ethiopia
    मारिया गर्थ
    इथियोपिया 30 साल में सबसे ख़राब सूखे से जूझ रहा है
    22 Feb 2022
    इथियोपिया के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 70 लाख लोगों को तत्काल मदद की ज़रूरत है क्योंकि लगातार तीसरी बार बरसात न होने की वजह से देहाती समुदाय तबाही झेल रहे हैं।
  • Pinarayi Vijayan
    भाषा
    किसी मुख्यमंत्री के लिए दो राज्यों की तुलना करना उचित नहीं है : विजयन
    22 Feb 2022
    विजयन ने राज्य विधानसभा में कहा, ‘‘केरल विभिन्न क्षेत्रों में कहीं आगे है और राज्य ने जो वृद्धि हासिल की है वह अद्वितीय है। उनकी टिप्पणियों को राजनीतिक हितों के साथ की गयी अनुचित टिप्पणियों के तौर पर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License