NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
भारत
राजनीति
उत्तराखंड: एक सड़क के लिए दो महीने से आंदोलन फिर भी सुनवाई नहीं
राज्य के दो मुख्यमंत्री वादा करने के बाद भी ना बनवा पाए सड़क, बड़ी संख्या में ग्रामीण दो महीने से धरना प्रदर्शन कर रहे हैं। और अब तो क्रमिक अनशन को भी एक महीना होने जा रहा है।
सत्यम कुमार
07 Feb 2021
उत्तराखंड: एक सड़क के लिए दो महीने से आंदोलन फिर भी सुनवाई नहीं

उत्तराखंड का सीमांत जिला चमोली। यहां का घाट विकास खंड पिछले कई दिनों से चर्चा में है। चर्चा की वजह है ग्रामीणों का आंदोलन। दरअसल क्षेत्र के लोग नंदप्रयाग-घाट रोड को डेढ़ लेन चौड़ा करने की मांग कर रहे हैं। अपनी मांग के समर्थन में पहले ग्रामीणों ने शांतिपूर्वक धरना दिया परन्तु जब सरकार-प्रशासन नहीं मानी तो अनशन शुरू कर दिया।

ग्रामीण पिछले करीब 60 दिनों से धरने पर हैं। इस बीच कुछ ग्रामीणों ने मोबाइल टावर पर चढ़कर भी आंदोलन किया, लेकिन तब भी किसी ने उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो ग्रामीण पिछले 27 दिनों से क्रमिक भूख हड़ताल पर बैठे हैं।

सरकार-प्रशासन की बेरुखी के चलते लोगों का गुस्सा बढ़ता जा रहा है। घाट में आंदोलन कर रहे लोगों के समर्थन में अब क्षेत्र के 70 से अधिक गाँवों के ग्रामीण भी आ गये हैं और लगातार आंदोलन में सम्मिलित होने वाले व्यक्तियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। प्रदर्शनकारियों ने मिलकर जुलूस प्रदर्शन करते हुए धरना दिया।

जिस तरह ग्रामीण इस आंदोलन में शिरकत कर रहे हैं, उससे यह आंदोलन अब बड़ा रूप लेने लगा है। प्रदर्शन में महिलाएं बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही हैं।

विकास खंड घाट की आबादी लगभग 40 हज़ार है जिसके तहत लगभग 70  ग्राम पंचायत आती हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी अहम ये सड़क नंदा देवी राज-जात कुरुड़ मार्ग के लिए अहम मानी जाती है। इस नंदप्रयाग-घाट रोड की लंबाई 19 किमी है। अक्सर बाहरी पर्यटक भी इसी रूट से होते हुए निजमुला घाटी , ग्वालदम, बेदनी और थराली के खूबसूरत बुग्याल के जाने के लिए यहीं से गुज़रते है। इस रुट पर वर्ष भर बड़ी संख्या में पर्यटक आते है

1965 में बनी थी सड़क

स्थानीय लोग बताते हैं कि अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय 1965 में नंदप्रयाग - घाट सड़क का निर्माण किया गया था। तब की तत्कालीन परिस्थिति में सड़क सिंगल लाइन थी पर आज आवश्यकता और आबादी और परिस्थितियों के चलते सड़क के विस्तार की आवश्यकता है। संकरी सड़क होने के कारण इस सड़क पर अब तक कई दुर्घटनाएँ भी हो चुकीं हैं। जिसका शिकार कई बार स्थानीय ग्रामीण और पर्यटक भी हुए। ग्रामीणों का कहना है कि संकरी सड़क होने की वजह से अब तक कई ग्रामीणों की मौत हो चुकी है।

पिछले 2 महीने से हो रहा है प्रदर्शन

14 सितंबर 2017 को मुख्यमंत्री हरीश रावत जब इस क्षेत्र में दौरे के लिए आए तो उन्होंने भी इस सड़क के निर्माण, चौड़ीकरण और डामरीकरण की घोषणा की। कुछ समय बाद करीब एक करोड़ 28 लाख रुपए सड़क निर्माण के लिए स्वीकृत भी कर लिए गए। लेकिन कागज़ों पर मिली यह स्वीकृति कभी जमीन पर नहीं उतर सकी।

आमतौर पर घाट मोटर मार्ग को लेकर क्षेत्र की जनता पिछले कई सालो से मांग उठाती रही है लेकिन विधानसभा उप चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी द्वारा मोटर मार्ग को डेढ़ लेन करने का वादा किया गया था लेकिन अभी तक कोई कार्य नहीं हो पाने से स्थानीय लोगों द्वारा इस सम्बन्ध में पीडब्लूडी कर्णप्रयाग को कई बार ज्ञापन दिए जाने के बावजूद कोई कार्यवाही नहीं किये जाने के कारण जनता के द्वारा सरकार के खिलाफ व्यापार मंडल, टैक्सी यूनियन, प्रधान संगठन ने मिलकर एक सयुंक्त कमेटी बनाकर आन्दोलन करने का निर्णय लिया।

इस सड़क से संबंधित लगभग 55 ग्राम-सभाओ के लोग आन्दोलन के समर्थन में हैं।

बीते 5 दिसंबर 2020 से घाट के लोग सड़क पर डेरा जमाए बैठे हैं। करीब एक हफ्ता पहले आंदोलन में शामिल इन लोगों ने 19 किलोमीटर लंबी मानव शृंखला बनाकर अपना विरोध दर्ज करवाया था। इस प्रदर्शन में पुरुषों से ज्यादा महिलाओं की हिस्सेदारी दिखाई दे रही है।

सामाजिक कार्यकर्ता एवं इस आंदोलन में लगातार भागीदार रहे कुंवर राम जी  बताते हैं कि प्रशासन ख़ौफ़ पैदा करने के लिए फ्लैग मार्च निकाल रहा है, जबकि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मांग के समर्थन में बाजार में रैली निकाली गई। जब तक मांग पूरी नहीं हो जाती तब तक आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रखा जाएगा।

उत्तराखंड के चमोली जिले के ही रहने वाले और सीपीएम के जिला सचिव भोपाल सिंह रावत कहते हैं कि इस सड़क को बनाने का वादा प्रदेश के दो-दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं। लेकिन धरातल पर आज तक काम शुरू नहीं हो सका है। सबसे पहले प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने कार्यकाल में इस सड़क निर्माण का वादा किया था। उनका कार्यकाल पूरा हो गया लेकिन ये वादा पूरा नहीं हुआ। फिर चुनाव हुए, सरकार बदली और प्रदेश में बतौर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की ताजपोशी हो गई। अब मुख्यमंत्री को तुरंत अपने वादे पर संज्ञान लेना चाहिए ताकि ऐसा न हो उनका वादा मात्र चुनावी जुमला बनकर रह जाए।

व्यापार संघ के अध्यक्ष चरण सिंह नेगी ने बताया कि अगर उनकी मांगों पर सरकार कोई ठोस फैसला नहीं लेती तो सभी ग्रामीण राज्य सरकार के बजट सत्र का विरोध करेंगे और आगामी ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान विधानसभा का घेराव भी करेंगे।

साथ ही प्रदर्शनकारियों का यह कहना भी है कि राज्य की पूर्व सरकार और वर्तमान सरकार के द्वारा भी राज्य के बजट में, राज्य को पर्यटन राज्य के रूप में विकसित करने और पर्यटन को बढावा देकर युवाओं को रोज़गार देने और पलायन को रोकने की बात लगातार कर रहे है, परन्तु यदि हम धरातल पर देखे तो सरकार के द्वारा किये गये सभी वादे एक जुमला साबित हो रहे है।

(लेखक एक सामाजिक कार्यकर्ता हैं।)

Uttrakhand
Uttrakhand protest
Trivendra Singh Rawat
PWD
BJP
hunger strike

Related Stories

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

आंगनवाड़ी महिलाकर्मियों ने क्यों कर रखा है आप और भाजपा की "नाक में दम”?

NEP भारत में सार्वजनिक शिक्षा को नष्ट करने के लिए भाजपा का बुलडोजर: वृंदा करात

नौजवान आत्मघात नहीं, रोज़गार और लोकतंत्र के लिए संयुक्त संघर्ष के रास्ते पर आगे बढ़ें


बाकी खबरें

  • up elections
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनावों को लेकर चूड़ी बनाने वालों में क्यों नहीं है उत्साह!
    22 Jan 2022
    कोविड-19 की तीन लहरें और उसके बाद के लॉकडाउन, डेंगू का प्रकोप, कच्चे माल और गैस की क़ीमतों में इज़ाफ़ा, कच्चे माल पर  GST के चलते फ़िरोज़ाबाद के पारंपरिक कांच उद्योग को भारी मंदी का सामना करना पड़ा…
  • Mumbai
    भाषा
    मुंबई में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत, 16 अन्य घायल
    22 Jan 2022
    ''18वीं मंजिल पर आग लगने के तुरंत बाद, निवासी अपने परिवार के सदस्यों के साथ बाहर की ओर भागने लगे। प्रत्येक मंजिल पर कम से कम छह फ्लैट हैं। आग ने 18वीं और 19वीं मंजिल को अपनी चपेट में ले लिया और कुछ…
  • LIC
    थॉमस फ्रंकों
    एलआइसी को बेचना क्यों परिवार की चांदी बेचने से भी बदतर है?
    22 Jan 2022
    एलआइसी की सीमित बिकवाली के वादे पहले भी किए और तोड़े जा चुके हैं। भारत को अपनी एकमात्र सामाजिक सुरक्षा के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए; ऐसा करना असंवैधानिक और लोगों के साथ अन्याय होगा।
  • Hum Bharat Ke Log
    मुकुल सरल
    हम भारत के लोग:  एक नई विचार श्रृंखला
    22 Jan 2022
    “हम भारत के लोग” हमारे संविधान की प्रस्तावना (preamble) का पहला ध्येय वाक्य है। जिसके आधार पर हमारे संपूर्ण प्रभुत्व संपन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक, गणराज्य की स्थापना हुई है। इसी को…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में आज लगातार तीसरे दिन भी कोरोना के 3 लाख से ज़्यादा नए मामले
    22 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 3,37,704 नए मामले सामने आए हैं। देश में अब कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 3 करोड़ 89 लाख 3 हज़ार 731 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License