NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लगातार विरोध के चलते उत्तराखंड सरकार ने चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड भंग किया
अस्तित्व में आने के ठीक दो साल बाद देवस्थानम बोर्ड के भंग होने का जहां तीर्थ पुरोहितों और साधु संतों ने स्वागत किया। वहीं, मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों में हार के डर से लिया गया फ़ैसला बताया।
भाषा
30 Nov 2021
Pushkar Singh Dhami

देहरादून: लंबे समय से आंदोलनरत तीर्थ पुरोहितों की मांग को मानते हुए उत्तराखंड सरकार ने मंगलवार को विवादास्पद चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को भंग कर दिया।

अस्तित्व में आने के ठीक दो साल बाद देवस्थानम बोर्ड के भंग होने का जहां तीर्थ पुरोहितों और साधु संतों ने स्वागत किया। वहीं, मुख्य विपक्षी कांग्रेस ने इसे आगामी विधानसभा चुनावों में हार के डर से लिया गया फैसला बताया।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ट्वीट किया,‘‘ आप सभी की भावनाओं, तीर्थपुरोहितों, हक-हकूकधारियों के सम्मान एवं चारधाम से जुड़े सभी लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए श्री मनोहर कांत ध्यानी जी की अध्यक्षता में गठित उच्च स्तरीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर सरकार ने देवस्थानम बोर्ड अधिनियम वापस लेने का फैसला किया है।’’

इससे पहले, ध्यानी समिति ने रविवार शाम को अपनी अंतिम रिपोर्ट मुख्यमंत्री को सौंपी थी जिसका उन्होंने परीक्षण कर जल्द निर्णय लेने की बात कही थी।

चारों हिमालयी धामों-बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितों के देवस्थानम बोर्ड को भंग करने को लेकर लंबे समय से चल रहे आंदोलन के मद्देनजर धामी ने सत्ता संभालते ही भाजपा नेता ध्यानी की अध्यक्षता में समिति का गठन किया था।

बोर्ड के गठन को अपने पारंपरिक अधिकारों का हनन बताते हुए चारों धामों के तीर्थ पुरोहित इसे भंग करने की मांग को लेकर लंबे समय से आंदोलन चला रहे थे। निकट आ रहे विधानसभा चुनावों को देखते हुए उन्होंने आंदोलन तेज करने की धमकी दी थी। धामी सरकार के इस निर्णय को इसी संदर्भ में देखा जा रहा है ।

देवस्थानम अधिनियम पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत के सरकार के कार्यकाल में दिसंबर 2019 में पारित हुआ था जिसके तहत चारों धाम सहित प्रदेश के 51 मंदिरों के प्रबंधन के लिए जनवरी, 2020 में बोर्ड का गठन किया गया था।

तीर्थ पुरोहितों ने बोर्ड के भंग होने के निर्णय पर खुशी व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री का आभार जताया। लेकिन कहा कि यह उनके संघर्ष का परिणाम है। चारधाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता ब्रजेश सती ने कहा, ‘‘यह एक ऐतिहासिक निर्णय है। यह भारतीय लोकतंत्र की एक अनूठी घटना है जहां जनता के दवाब में एक सरकार को अपना ही निर्णय वापस लेना पड़ा।’’

अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष महंत रवींद्र पुरी ने भी फैसले का स्वागत किया और कहा कि सरकार ने यह एक अच्छा काम किया है।

उधर, कांग्रेस महासचिव और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि अहंकार की एक बार फिर हार हुई है। उन्होंने कहा, ‘‘ तीन कृषि कानूनों के मामले की तरह ही अहंकार एक बार फिर पराजित हुई है। आने वाले चुनावों में हार से भयभीत होकर भाजपा सरकार ने यह निर्णय लिया है। यह तीर्थ पुरोहितों की जीत है जो अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। मैं उन्हें बधाई देता हूं।’’

इसे भी पढ़ें : देवस्थानम एक्ट के विरोध में उबल रहे हैं चारों धाम, पूर्व सीएम को बिना दर्शन लौटाया, पीएम मोदी के विरोध की तैयारी

UTTARAKHAND
Uttarakhand govt
Char Dham Devasthanam Management Board

Related Stories

उत्तराखंड के ग्राम विकास पर भ्रष्टाचार, सरकारी उदासीनता के बादल

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

रुड़की : डाडा जलालपुर गाँव में धर्म संसद से पहले महंत दिनेशानंद गिरफ़्तार, धारा 144 लागू

कहिए कि ‘धर्म संसद’ में कोई अप्रिय बयान नहीं दिया जाएगा : न्यायालय ने उत्तराखंड के मुख्य सचिव से कहा

इको-एन्ज़ाइटी: व्यासी बांध की झील में डूबे लोहारी गांव के लोगों की निराशा और तनाव कौन दूर करेगा

उत्तराखंड : चार धाम में रह रहे 'बाहरी' लोगों का होगा ‘वेरीफिकेशन’

हिमाचल प्रदेश के ऊना में 'धर्म संसद', यति नरसिंहानंद सहित हरिद्वार धर्म संसद के मुख्य आरोपी शामिल 

रुड़की : हनुमान जयंती पर भड़की हिंसा, पुलिस ने मुस्लिम बहुल गांव में खड़े किए बुलडोज़र

व्यासी परियोजना की झील में डूबा जनजातीय गांव लोहारी, रिफ्यूज़ी बन गए सैकड़ों लोग

उत्तराखंड: तेल की बढ़ती कीमतों से बढ़े किराये के कारण छात्र कॉलेज छोड़ने को मजबूर


बाकी खबरें

  • नाइश हसन
    मेरे मुसलमान होने की पीड़ा...!
    18 Apr 2022
    जब तक आप कोई घाव न दिखा पाएं तब तक आप की पीड़ा को बहुत कम आंकता है ये समाज, लेकिन कुछ तकलीफ़ों में हम आप कोई घाव नहीं दिखा सकते फिर भी भीतर की दुनिया के हज़ार टुकड़े हो चुके होते हैं।
  • लाल बहादुर सिंह
    किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़
    18 Apr 2022
    किसानों पर कारपोरेटपरस्त  'सुधारों ' के अगले डोज़ की तलवार लटक रही है। जाहिर है, हाल ही में हुए UP व अन्य विधानसभा चुनावों की तरह आने वाले चुनाव भी भाजपा अगर जीती तो कृषि के कारपोरेटीकरण को रोकना…
  • सुबोध वर्मा
    भारत की राष्ट्रीय संपत्तियों का अधिग्रहण कौन कर रहा है?
    18 Apr 2022
    कुछ वैश्विक पेंशन फंड़, जिनका मक़सद जल्द और स्थिर लाभ कमाना है,  ने कथित तौर पर लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति को लीज़ पर ले लिया है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,183 नए मामले, 214 मरीज़ों की मौत हुई
    18 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे हैं। दिल्ली में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 517 नए मामले सामने आए है |
  • भाषा
    दिल्ली में सीएनजी में सब्सिडी की मांग को लेकर ऑटो, टैक्सी संगठनों की हड़ताल
    18 Apr 2022
    दिल्ली में ऑटो, टैक्सी और कैब चालकों के विभिन्न संगठन ईंधन की बढ़ती कीमतों के मद्देनजर सीएनजी में सब्सिडी और भाढ़े की दरों में बदलाव की मांग को लेकर सोमवार को हड़ताल पर हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License