NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
वैलेंटाइन डे : प्रेम प्रतिरोध की सबसे बड़ी ताक़त
प्रेम सिर्फ संवेदनाओं और भावनाओं का खेल ही नहीं है प्रेम कई तरह के बंधनों को भी तोड़ता है। यह बंधन जाति-धर्म, ऊंच-नीच,काला-गोरा सबको धता बताता है। प्रेम मानव गरिमा की सबसे मुखर अभिव्यक्ति और प्रतिरोध की सबसे सशक्त ताक़त है।
प्रदीप सिंह
14 Feb 2021
वैलेंटाइन डे

प्रेम का पर्व वैलेंटाइन डे विभिन्न देशों में अलग-अलग तरह से और अलग-अलग विश्वास के साथ मनाया जाता है। पश्चिमी देशों में तो इस दिन की रौनक अपने शबाब पर ही होती है, मगर पूर्वी देशों में भी इस दिन को मनाने का अपना-अपना अंदाज होता है। जहां चीन में यह दिन 'नाइट्स ऑफ सेवेन्स' प्यार में डूबे दिलों के लिए खास होता है, वहीं जापान व कोरिया में इस पर्व को 'वाइट डे' का नाम से जाना जाता है। इतना ही नहीं, इन देशों में इस दिन से पूरे एक महीने तक लोग अपने प्यार का इजहार करते हैं और एक-दूसरे को तोहफे व फूल देकर अपनी भावनाओं का इजहार करते हैं।

7 फरवरी को शुरू हुए ‘वैलेंटाइन वीक’ आज 14 फरवरी को ‘वैलेंटाइन डे’ के रूप में पूरे उरूज पर है। लेकिन भारत की बात करें तो आज भी हमारे देश-समाज में प्रेम को सहज स्वीकृति नहीं मिलती है। प्रेम प्रदर्शन करने वालों पर फब्तियां कसी जाती हैं,हमले का शिकार होना पड़ता है और प्रेम विवाह करने वालों को लव जिहादी कह कर जेल में ठूंस दिया जाता है। जबकि नफरत, हिंसा और यौन उत्पीड़न करने वाले खुलेआम सड़कों पर घूमते हैं।

प्रेम मार्ग पर चलना आज भी कांटों पर चलने से कम नहीं है। आज भी ऐसा लगता है कि हमारा समाज प्रेम पर नहीं नफरत पर सहज है। हर समय प्रेम पर पहरा लगाने का षडयंत्र रचा जाता है। यह तब भी था जब 20वीं सदी में मानव चांद पर पहुंचा था और यह आज भी है जब हम 21वीं सदी में अन्य ग्रहों पर पहुंचने की तैयारी कर रहे हैं।

भारत में जाति-धर्म की फौलादी दीवारों भी जब प्रेम को काबू में नहीं रख सकीं तो राजनीति ने प्रेम को कैद करने का ताना-बाना बुनाना शुरू कर दिया। कई राज्य सरकारों ने तो और ‘प्रेम’ करने वालों को जेहादी और ‘प्रेम विवाह’ को ‘लव जिहाद’ का नाम देकर कानून का ताला लगा दिया। प्रेम करने वाले जोड़ों की कहानी जितनी पुरानी है प्रेम से डरने वालों शासकों का इतिहास भी उतना पुराना। ऐसे में सवाल उठता है कि प्रेमी जोड़ों से धर्म, समाज और सरकार इतना डरते क्यों हैं?

दरअसल, प्रेम सिर्फ संवेदनाओं और भावनाओं का खेल ही नहीं है प्रेम कई तरह के बंधनों को भी तोड़ता है। यह बंधन जाति-धर्म, ऊंच-नीच,काला-गोरा सबको धता बताता है। प्रेम मानव गरिमा की सबसे मुखर अभिव्यक्ति और प्रतिरोध की सबसे सशक्त ताकत है।

 वैलेंटाइन वीक की शुरुआत रोज डे से होती है जिसमें गुलाब को प्यार की निशानी के रूप में पेश किया जाता है। गुलाब की खूबसूरती किसी से छिपी नहीं है। लेकिन गुलाब जितना सुंदर है, उसके कांटे उतने ही नुकीले। गुलाब की कल्पना बिना कांटे की नहीं की जा सकती और प्रेम में बहुदा देखा गया है कि सबकुछ प्रेममय नहीं होता।  

दुनिया भर में प्रेम जीवन का केंद्रीय तत्व है। विश्व साहित्य प्रेम कथाओं और कविताओं से भरे पड़े हैं। भारतीय साहित्य में भी प्रेम और सौंदर्य की बहुलता रही है। दरअसल, प्रेम एक एहसास है जो दिमाग से नहीं दिल से होता है। प्यार अनेक भावनाओं जिनमें अलग अलग विचारो का समावेश होता है।  

मनोविज्ञानी रोबेर्ट स्टर्न्बर्ग के अनुसार प्यार के तीन भिन्न प्रकार के घटक हैं : “आत्मीयता, प्रतिबद्धता और जोश। आत्मीयता वो तत्व है जिसमें दो मनुष्य अपने आत्मविश्वास और अपने ज़िन्दगी के निजी सुख-दुख को साझा करते हैं। ये ज़्यादातर दोस्ती और रोमानी कार्य में देखने को मिलता है।”

प्रतिबद्धता एक उम्मीद है कि ये रिश्ता हमेशा के लिये कायम रहेगा। आखिर में यौन आकर्षण और जोश है। आवेशपूर्ण प्यार, रोमानी प्यार और आसक्ति में दिखाया गया है। प्यार के सारे प्रपत्र इन घटकों का संयोजन होता हैं।

प्राचीन ग्रीकों ने प्यार को चार तरह का माना है : रिश्तेदारी, दोस्ती, रोमानी इच्छा और दिव्य प्रेम। प्यार को अक्सर वासना के साथ तुलना की जाती है और पारस्परिक संबध के तौर पर रोमानी अधिस्वर के साथ तोला जाता है, प्यार दोस्ती यानी पक्की दोस्ती से भी तोला जाता हैं। आम तौर पर प्यार एक एहसास है जो एक इन्सान दूसरे इन्सान के प्रति महसूस करता है।

फिलहाल “प्रेम अपने आप में संपूर्ण चीज है। आपको अपनी इच्छित वस्तु मिले या ना मिले, इससे फर्क नहीं पड़ता है। प्रेम मंजिल का भी विषय नहीं है, प्रेम का एहसास ही अपने आप में प्रर्याप्त है। यह नितांत निजी, भावनात्मक और आत्मीय रिश्ता होता है।”

प्रेम का एक चरम सामंतवादी युग में पाया गया। सोनी-मेहवाल, हीर-रांझा, सीरी-फरहाद, रोमियो जूलियट और लैला-मजनू सब उसी काल में था। उसका कारण है कि उस काल में समाज की मुख्य संपत्ति भूमि थी। भूमि अचल और स्थायी संपत्ति होती है। इसलिए तब संबंध अटल और स्थायी होते थे। औद्धोगीकरण के बाद लगभग सोलहवीं-सत्रहवीं शताब्दी से नकद के वर्चस्व के बाद से मामला पलट गया। दूसरे शब्दों में कहें तो बाजार के प्रसार के साथ ही जो चंचलता पूंजी में थी वही चंचलता अब प्रेम संबंधों में दिखाई देने लगी। यहीं से परिवार और प्रेम संबंधों का टूटना शुरू हो गया।

आज तो मुक्त और आवारा पूंजी का जमाना है। देश में जब 80 प्रतिशत से ज्यादा पूंजी बिना आधार के भटक रही है, तो संबंध कैसे स्थायी और आधारवान हो सकते हैं? पिछले तीन दशकों में श्रम के क्षेत्र से जो चीज समाप्त हुई है वह स्थायी नौकरी है। यह कांट्रैक्ट सर्विस का समय है। ठेकेदारी और अनुबंध पर श्रम को खरीदा जा रहा है। इसका सीधा असर प्रेम संबंधों पर पड़ा है।

प्रेम हमेशा से मानवीय भावनाओं के केंद्र में रहा है। हालांकि बाजार की मार ने आज उसे पिछवाड़े खड़ा कर दिया है। हर आदमी के वजूद के लिए प्रेम भावना और संवेदना आवश्यक अंग है। प्रेम आहत अहम पर बहुत बड़ा मरहम है।

प्रकृति में व्यक्ति और अभिव्यक्ति एक दूसरे के पूरक हैं। प्रेम ऐसा तत्व है,जिसमें एक से प्रेम करने पर पूरी दुनिया हसीन लगने लगती है। एक के बहाने पूरी दुनिया हसीन दिखे तो यही प्रेम की मंजिल है। प्रेम एकात्म हो जाने का नाम है। सबको अपने में समा लेने और अपने को सबके नजदीक ले जाने का विज्ञान है।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Valentine’s Day
Love
Love Marriage
Discrimination
Caste
Colorism
Casteism
religion

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

‘धार्मिक भावनाएं’: असहमति की आवाज़ को दबाने का औज़ार

बिहार में विकास की जाति क्या है? क्या ख़ास जातियों वाले ज़िलों में ही किया जा रहा विकास? 

कैसे जहांगीरपुरी हिंसा ने मुस्लिम रेहड़ी वालों को प्रभावित किया

सर जोड़ के बैठो कोई तदबीर निकालो

देश भर में निकाली गई हनुमान जयंती की शोभायात्रा, रामनवमी जुलूस में झुलसे घरों की किसी को नहीं याद?

जय भीम: माई जजमेंट इन द लाइट ऑफ़ अंबेडकर

कमज़ोर वर्गों के लिए बनाई गईं योजनाएं क्यों भारी कटौती की शिकार हो जाती हैं

शिक्षित मुस्लिम महिलाओं ने हिजाब फ़ैसले को “न्यायिक अतिक्रमण’ क़रार दिया है 


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License