NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
भारत
राजनीति
क्या सरकार की पीएम मोदी के जन्मदिन पर ढाई करोड़ लोगों के टीकाकरण की बात 'झूठ' थी?
लोकसभा में एक सवाल के लिखित जवाब में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया कि पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मृत लोगों और वैक्सीन न लेने वालों को भी डेटा एंट्री करते समय हुई गलती के चलते सर्टिफिकेट जारी हुए।
सोनिया यादव
13 Dec 2021
modi

सरकार की ओर से इस साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 18 सितंबर को देश-विदेश में एक बड़ी उपलब्धी के तौर पर ज़ोर-शोर से प्रदर्शित किया गया था। इसका एक बड़ा कारण वो सरकारी दावा था जिसमें कहा गया था कि इस दिन कोविड टीकाकरण अभियान के तहत एक दिन में सबसे अधिक देश के ढ़ाई करोड़ लोगों का टीकाकरण हुआ है, सरकार की तरफ से इसे एक रिकॉर्ड के तौर पर पेश किया गया। खुद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी थी। जिसके बाद प्रधानमंत्री के ट्विटर हैंडल से भी इसे ट्वीट किया गया था।

Congratulations india!

PM @NarendraModi जी के जन्मदिवस पर भारत ने आज इतिहास रच दिया है।

2.50 करोड़ से अधिक टीके लगा कर देश और विश्व के इतिहास में स्वर्णिम अध्याय लिखा है।

आज का दिन हेल्थकर्मियों के नाम रहा। #HealthArmyZindabad pic.twitter.com/F2EC5byMdt

— Dr Mansukh Mandaviya (@mansukhmandviya) September 17, 2021

Every Indian would be proud of today’s record vaccination numbers.

I acknowledge our doctors, innovators, administrators, nurses, healthcare and all front-line workers who have toiled to make the vaccination drive a success. Let us keep boosting vaccination to defeat COVID-19.

— Narendra Modi (@narendramodi) September 17, 2021

हालांकि अगले ही दिन कई राज्यों में वैक्सीन लगाने की दर में भारी कमी के चलते वैक्सीनेशन के इस सरकारी दावे पर सवाल उठने लगे थे, मीडिया में गड़बड़ियों की खबरें आने लगी थीं, लेकिन तब सरकार इसका उत्सव मनाने में व्यस्त थी, लेकिन अब मीडिया में आई खबरों की माने तो सरकार ने खुद इसकी सच्चाई स्वीकार कर ली है।

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर जिन ढाई करोड़ से अधिक लोगों को वैक्सीन लगाने का दावा किया जा रहा था, उसके आकंड़ों में एक बड़ा झोल सामने आया है। बताया जा रहा है कि इस दिन अभियान के दौरान आनन-फानन में उन लोगों को भी वैक्सीन सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए, जिनका या तो निधन हो चुका था या फिर जिन्हें टीका लगा ही नहीं था। ये बात भी खुद सरकार ने लोकसभा में एक लिखत सवाल के जवाब में स्वीकार की हैं।

क्या है पूरा मामला?

आरटीआई एक्टिविस्ट साकेत गोखले ने इस पूरे मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोकसभा के सवाल-जबाव से संबंधित एक दस्तावेज़ की फोटो पोस्ट की है। इस फोटो में अभिषेक बनर्जी के सवाल और मंत्रालय के जवाब का जिक्र है। फोटो के साथ ही साकेत गोखले ने लिखा है कि प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर प्रचार के उद्देश्य से नकली वैक्सीन सर्टिफिकेट जारी कर दिए गए। ये सरकार एक नेता के प्रचार प्रसार के लिए लोगों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रही है।

गोखले की पोस्ट के मुताबिक टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने लोकसभा में इस टीकाकरण के संबंध में सवाल पूछा था, जिसके जवाब में 10 दिसंबर को केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय का जवाब आया, जिसमें इस बात को स्वीकार किया गया कि पीएम मोदी के जन्मदिन के अवसर पर मृत लोगों और वैक्सीन न लेने वालों को भी सर्टिफिकेट जारी हुए।

इस पोस्ट के मुताबिक अभिषेक बनर्जी ने मुख्य तौर पर तीन सवाल पूछे थे। इसमें पहला सवाल था कि क्या सरकार ने इस बात का संज्ञान लिया है कि वैक्सीनेशन ड्राइव के दिन उन लोगों को भी सर्टिफिकेट जारी किए गए जिनका या तो निधन हो चुका था या फिर जिन्हें वैक्सीन लगी ही नहीं।

दूसरा सवाल ये कि अगर ऐसा हुआ है तो क्या इन सर्टिफिकेट्स को उस दिन लगे ढाई करोड़ टीकों में जोड़ा गया और तीसरा कि ऐसा भविष्य में ना हो, इसके लिए क्या कदम उठाए गए या उठाए जा रहे हैं।

सरकार का जवाब

इन सवालों का जवाब केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की तरफ से इस तरह से दिया गया है। इसमें पहले सवाल के जवाब में कहा गया है कि डेटा एंट्री करते समय हुई गलती की वजह से कुछ मामलों में उन लोगों को वैक्सीनेशन सर्टिफिकेट जारी किए गए, जिनका या तो निधन हो चुका था या फिर जिन्हें टीका लगा ही नहीं।

मंत्रालय ने बनर्जी के दूसरे सवाल का जवाब नहीं दिया। जिसमें पूछा गया था कि आखिर उस दिन लगे ढाई करोड़ टीकों में कितने ऐसे सर्टिफिकेट शामिल किए गए, जिन्हें उन लोगों को जारी किया गया था जिनका या तो निधन हो चुका था या फिर जिन्हें टीका लगा ही नहीं।

तीसरे सवाल के जवाब में कहा गया है कि भविष्य में ऐसा ना हो, इसके लिए कोविन पोर्टल पर टीका लगवाने वाले के फोन नंबर और फोटो आईडी कार्ड नंबर का ध्यान से वेरिफिकेशन किया जा रहा है। साथ ही साथ चार अंकों का सीक्रेट कोड जारी किया जा रहा है, ताकि टीका लगाने से पहले टीका लगाने वाले उसका मिलान कर सकें। मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को समय-समय पर डेटा एंट्री में सुधार करने के भी आदेश दिए हैं।

आंकड़ों का खेल और डैमेज कंट्रोल

गौरतलब है कि देश में अगर कोविड वैक्सीनेशन के आंकड़ों की बात करें तो कोविन पोर्टल के मुताबिक अब तक करीब एक अरब 33 करोड़ से अधिक वैक्सीन डोज लगाए जा चुके हैं। इनमें से 81 करोड़ लोगों को पहला और 51 करोड़ लोगों को दोनों डोज लग चुके हैं। हालांकि इन आंकड़ों की जमीनी सच्चाई पर भी अक्सर विवाद ही सामने आता है।

बहरहाल, ये हैरानी के साथ ही शर्मिंदगी की बात भी है कि जिस तरह एक समय कोविड के पीक पर मरने वालों की संख्या को छुपाने की कोशिश की जा रही थी, उसी तरह अब डैमेज कंट्रोल के नाम पर वैक्सीन की डोज़ के आंकड़ों के साथ खिलवाड़ कर लोगों को फिर धोखे में रखा जा रहा है। ये मामला सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग और राज्य सरकार द्वारा चलाए जा रहे टीकाकरण अभियान पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Narendra modi
Modi's Birthday
Covid Vaccination
BJP
fake news
fake propaganda

Related Stories

कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?

कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे

यूपी चुनाव : क्या पूर्वांचल की धरती मोदी-योगी के लिए वाटरलू साबित होगी

शीर्ष कोविड-19 वैक्सीन निर्माताओं ने गरीब देशों को निराश किया

कोविड -19 के टीके का उत्पादन, निर्यात और मुनाफ़ा

कोविड पर नियंत्रण के हालिया कदम कितने वैज्ञानिक हैं?

भारत की कोविड-19 मौतें आधिकारिक आंकड़ों से 6-7 गुना अधिक हैं: विश्लेषण

पंजाब सरकार के ख़िलाफ़ SC में सुनवाई, 24 घंटे में 90 हज़ार से ज़्यादा कोरोना केस और अन्य ख़बरें

रोजगार, स्वास्थ्य, जीवन स्तर, राष्ट्रीय आय और आर्थिक विकास का सह-संबंध

दो टूक: ओमिक्रॉन का ख़तरा लेकिन प्रधानमंत्री रैलियों में व्यस्त


बाकी खबरें

  • श्याम मीरा सिंह
    यूक्रेन में फंसे बच्चों के नाम पर PM कर रहे चुनावी प्रचार, वरुण गांधी बोले- हर आपदा में ‘अवसर’ नहीं खोजना चाहिए
    28 Feb 2022
    एक तरफ़ प्रधानमंत्री चुनावी रैलियों में यूक्रेन में फंसे कुछ सौ बच्चों को रेस्क्यू करने के नाम पर वोट मांग रहे हैं। दूसरी तरफ़ यूक्रेन में अभी हज़ारों बच्चे फंसे हैं और सरकार से मदद की गुहार लगा रहे…
  • karnataka
    शुभम शर्मा
    हिजाब को गलत क्यों मानते हैं हिंदुत्व और पितृसत्ता? 
    28 Feb 2022
    यह विडम्बना ही है कि हिजाब का विरोध हिंदुत्ववादी ताकतों की ओर से होता है, जो खुद हर तरह की सामाजिक रूढ़ियों और संकीर्णता से चिपकी रहती हैं।
  • Chiraigaon
    विजय विनीत
    बनारस की जंग—चिरईगांव का रंज : चुनाव में कहां गुम हो गया किसानों-बाग़बानों की आय दोगुना करने का भाजपाई एजेंडा!
    28 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के बनारस में चिरईगांव के बाग़बानों का जो रंज पांच दशक पहले था, वही आज भी है। सिर्फ चुनाव के समय ही इनका हाल-चाल लेने नेता आते हैं या फिर आम-अमरूद से लकदक बगीचों में फल खाने। आमदनी दोगुना…
  • pop and putin
    एम. के. भद्रकुमार
    पोप, पुतिन और संकटग्रस्त यूक्रेन
    28 Feb 2022
    भू-राजनीति को लेकर फ़्रांसिस की दिलचस्पी, रूसी विदेश नीति के प्रति उनकी सहानुभूति और पश्चिम की उनकी आलोचना को देखते हुए रूसी दूतावास का उनका यह दौरा एक ग़ैरमामूली प्रतीक बन जाता है।
  • MANIPUR
    शशि शेखर
    मुद्दा: महिला सशक्तिकरण मॉडल की पोल खोलता मणिपुर विधानसभा चुनाव
    28 Feb 2022
    मणिपुर की महिलाएं अपने परिवार के सामाजिक-आर्थिक शक्ति की धुरी रही हैं। खेती-किसानी से ले कर अन्य आर्थिक गतिविधियों तक में वे अपने परिवार के पुरुष सदस्य से कहीं आगे नज़र आती हैं, लेकिन राजनीति में…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License