NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
शिक्षा
भारत
राजनीति
पश्चिम बंगाल: पैरा शिक्षकों की भूख हड़ताल 15वें दिन भी जारी, शिक्षा मंत्री ने बात करने से किया इंकार  
पश्चिम बंगाल में 1000 से अधिक पैरा शिक्षक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 11 नवंबर से हड़ताल पर हैं। ये शिक्षक सरकारी विद्यालयों में संविदा पर पढ़ाते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
28 Nov 2019
Para Teacher's protest

पश्चिम बंगाल में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर जारी अस्थाई अध्यापकों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 19वें दिन भी जारी है। गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में 1000 से अधिक पैरा शिक्षक वेतन वृद्धि की मांग को लेकर 11 नवंबर से हड़ताल पर हैं। ये शिक्षक सरकारी विद्यालयों में संविदा पर पढ़ाते हैं। आपको बता दें कि 15 नवंबर की शाम से 37 से अधिक पैरा-शिक्षक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर चले गए हैं।

14 दिनों के लंबे भूख हड़ताल के बाद कई शिक्षकों की स्थिति गंभीर हो गई, जिसके बाद उनमें से कई लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। आंदोलन की अगुवाई करने वाले संगठन पैरा टीचर्स आइकिया मंच ने कहा है कि जब तक राज्य सरकार उनकी मांगों को पूरा करने के लिए मजबूर नहीं होती तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।
76705097_1012361575798846_850862235705147392_n (1).jpg
न्यूज़क्लिक से बात करते हुए आंदोलन की नेता मधुमिता बनर्जी ने कहा, “हमारे आंदोलन का हिस्सा रहे एक पैरा शिक्षक जिनका नाम मोहम्मद माजिद था। उनका बुधवार को कैंसर से निधन हो गया, जो अपने कम वेतन के कारण अपने इलाज का खर्च उठाने में असमर्थ थे। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। पिछले कुछ वर्षों में, कई पैरा-शिक्षकों ने बीमारियों के कारण दम तोड़ दिया, क्योंकि वे इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे। हमारे कम वेतन के बावजूद हमें कोई चिकित्सा भत्ता नहीं मिलता है।”
75550424_2139439239489318_7466140885579726848_n.jpg
उन्होंने कहा, "हमें नहीं पता कि राज्य सरकार का ध्यान हमारे संघर्षों पर कितने और लोगों की जान जाने के बाद पड़ेगा। हम यह नहीं समझते कि राज्य सरकार इतनी अमानवीय कैसे हो सकती है और हमारी दुर्दशा को पूरी तरह से अनदेखा कैसे कर सकती है। इतना सब कुछ होने के बावजूद सरकार के किसी भी व्यक्ति ने हमारे प्रदर्शन स्थल का दौरा नहीं किया है, न ही हमें चर्चा के लिए बुलाया है।”

उन्होंने कहा कि भले ही राज्य सरकार उनके मुद्दों पर कोई ध्यान न दे रही हो लेकिन  राज्य के आम लोगों, नागरिक समाज के साथ ही कवियों और लेखकों ने आंदोलन के साथ अपनी एकजुटता व्यक्त की है, जिसने उन्हें लड़ाई जारी रखने की ताकत प्रदान की है। कवि शिखा घोष, लेखक शिरसेन्दु मुखोपाध्याय ने राज्य सरकार से पैरा शिक्षकों द्वारा उठाए गए मांगों को हल करने का आग्रह किया है।
 
राज्य के शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी से जब प्रेस से पूछा कि क्या उन्होंने विरोध स्थल का दौरा करने की योजना बनाई है या नहीं, तो उन्होंने कहा , “मुझे वहां क्यों जाना चाहिए? मैंने उन्हें भूख हड़ताल पर जाने के लिए नहीं कहा। उन्होंने विरोध शुरू किया हैं, वे ही इसे खत्म करेंगे। उन्हें यह समझना चाहिए कि सरकार ने उनके लिए पर्याप्त काम किया है।”

उन्होंने यह भी दावा किया कि पैरा-शिक्षकों द्वारा उठाई गई मांगें निरर्थक हैं और वे स्कूलों का बहिष्कार करके और अपना आंदोलन जारी रखते हुए सरकारी स्कूलों के छात्रों की शिक्षा को रोक रहे हैं। यह बयान 27 नवंबर को एक संवाददाता सम्मेलन में दिया गया था।

शिक्षा मंत्री के इस बयान से प्रदर्शनकारी शिक्षकों में और भी गुस्सा है। इससे पहले, मंत्री ने कहा था कि वे भूख हड़ताल पर जा रहे हैं। निम्न-प्राथमिक कक्षाओं और उच्च-प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाने वाले पैरा शिक्षकों को क्रमशः 10,000 रुपये और प्रति माह 13,000 रुपये दिए जाते है।

प्रदर्शनकारी शिक्षकों में से एक कमलेश सिंह ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, “लोअर-प्राइमरी और अपर-प्राइमरी शिक्षकों को क्रमशः 25,000 रुपये और 33,000 रुपये प्रतिमाह मिलती हैं, लेकिन हमें वह राशि नहीं मिलती है। यही कारण है कि हम वेतन में बढ़ोतरी की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि हम वेतन में एक तार्किकता की मांग कर रहे हैं।”
wb paera teacher protest.PNG
विरोध करने वाले पैरा शिक्षकों ने कहा है कि राज्य शिक्षा अभियान के तहत, राज्य सरकार पैरा शिक्षकों के वेतन का 40% देती है, शेष 60% केंद्र सरकार द्वारा राज्य सरकार को दिया जाता है। शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी ने 27 नवंबर को इस आरोप से इनकार करते हुए कहा कि पैरा शिक्षकों को यह साबित करना होगा कि राज्य सरकार को केंद्र से पैसा मिल रहा है।

अनशन पर बैठे शिक्षकों ने कहा कि भूख हड़ताल तभी खत्म होगी जब या तो उनकी मांग मानी जाये या उनकी मौत हो जाए।  मधुमिता बनर्जी ने कहा, 'हम 19 दिनों से सड़कों पर अपने दिन और रात बिता रहे हैं। हम चौदह दिनों से उपवास कर रहे हैं। और हमने तय किया है कि मरना भी हमारे जीवन को इस तरह बिताने से बेहतर है, क्योंकि हम अपनी तनख्वाह के लिए भी मोहताज़ हैं।”

West Bengal
para teacher protest
hunger strike
teachers protest
education system
Wage increase demands
West Bengal government
mamta banerjee

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

दिल्ली : पांच महीने से वेतन न मिलने से नाराज़ EDMC के शिक्षकों का प्रदर्शन

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

एमपी : ओबीसी चयनित शिक्षक कोटे के आधार पर नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली

झारखंड: हेमंत सरकार की वादाख़िलाफ़ी के विरोध में, भूख हड़ताल पर पोषण सखी

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कोलकाता: बाबरी मस्जिद विध्वंस की 29वीं बरसी पर वाम का प्रदर्शन

बिहार : शिक्षा मंत्री के कोरे आश्वासनों से उकताए चयनित शिक्षक अभ्यर्थी फिर उतरे राजधानी की सड़कों पर  


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License