NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भारत में मानवाधिकार और प्रेस की आज़ादी को लेकर जारी रिपोर्ट्स चिंताजनक क्यों हैं?
भारत सरकार भले ही इन रिपोर्ट्स को ‘भ्रामक, गलत और अनुचित’ करार दे, लेकिन मानवाधिकार के मुद्दे पर ताज़ा जारी अमेरिकी रिपोर्ट एक बार फिर देश के भीतर गैर-कानूनी हत्याएं, धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के साथ-साथ सरकार के ख़िलाफ़ ख़बरें लिखने वाले मीडिया के दमन की अलग ही कहानी बयां कर रही है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
02 Apr 2021
भारत में मानवाधिकार और प्रेस की आज़ादी को लेकर जारी रिपोर्ट्स चिंताजनक क्यों हैं?

‘दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र निर्वाचित निरंकुशता में बदल गया है।’

ये बातें दुनिया के सबसे बड़ें लोकतंत्र यानी भारत के बारे में स्वीडन की वी-डेम इंस्टीट्यूट की एक रिपोर्ट में कही गई थीं। कुछ ऐसी ही बात अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस ने भी पिछले दिनों अपनी फ्रीडम इंडेक्स रिपोर्ट के माध्यम से कही थी। इन दो रिपोर्ट्स के बाद अब जो बाइडेन प्रशासन के अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने मानवाधिकार रिपोर्ट में भी कुछ इसी ओर इशारा किया है।

अमेरिका की ‘2020 कंट्री रिपोर्ट्स ऑन ह्यूमन राइट्स प्रेक्टिसेस’ रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सरकार को लेकर आलोचनात्मक खबरें लिखने वाले मीडिया पर सरकार या इसके नुमाइंदों द्वारा दबाव डाला जा रहा है या प्रताड़ित किया जा रहा है।

क्या है इस रिपोर्ट में?

आपको बता दें कि इस रिपोर्ट में भारत के संबंध में कुल 68 पेज के चैप्टर में कहा गया है कि गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए सरकार द्वारा की जा रहीं कोशिशों के बावजूद सत्ता के सभी स्तर पर आधिकारिक दुराचार को लेकर गैर-जवाबदेही है। रिपोर्ट में एक ओर जम्मू-कश्मीर में भारत सरकार द्वारा उठाए गये मानवहितों के लिए कदम को सकारात्मक कहा गया है तो वहीं प्रेस की स्वतंत्रता, गैर कानूनी हत्याएं, अभिव्यक्ति की आजादी और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर भारत की आलोचना भी की गई है।

गैर-क़ानूनी हत्याएं, धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में मानवाधिकारों से संबंधित कई बड़े मुद्दे हैं, जिनमें ‘मनमानी हत्याएं, अभिव्यक्ति और प्रेस की आजादी पर पाबंदी, भ्रष्टाचार और धार्मिक आजादी के उल्लंघन की सहनशीलता’ शामिल हैं। रिपोर्ट में एक दर्जन से अधिक मानवाधिकारों से जुड़े़ अहम मुद्दों को सूचीबद्ध किया है, जिनमें पुलिस द्वारा न्यायेत्तर हत्याओं समेत अवैध कत्ल, कुछ पुलिस और जेल अधिकारियों द्वारा प्रताड़ित करना, क्रूरता, अमानवीयता या अपमानजनक व्यवहार या सजा के मामले, सरकारी अधिकारियों द्वारा मनमानी गिरफ्तारियां और कुछ राज्यों में राजनीतिक कैदी प्रमुख हैं।

आलोचनात्मक ख़बरें लिखने वाली मीडिया का दमन

रिपोर्ट में प्रेस फ्रीडम को लेकर कहा गया है कि आम तौर पर भारत सरकार ने इसकी जरूरत का समर्थन किया है, लेकिन ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां सरकार या सरकार के करीबी लोगों ने ऑनलाइन ट्रोलिंग समेत विभिन्न तरीकों से आलोचनात्मक खबरें लिखने वाली मीडिया वाले के दमन की कोशिश की है।

इसमें कहा गया है कि प्रशासन ने मीडिया की आवाज को दबाने के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा, मानहानि, राजद्रोह, हेट स्पीच कानून के साथ-साथ अदालत की अवमानना जैसे कानूनों का सहारा लिया है।

इस संदर्भ को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में द वायर के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन का भी जिक्र किया गया है, जिनके खिलाफ उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने महज एक ट्विटर पोस्ट को लेकर केस दर्ज कराया था।

मालूम हो कि वरदराजन ने अपने एक ट्वीट में कहा था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि कोरोना लॉकडाउन के दौरान हुए धार्मिक आयोजनों की रक्षा भगवान करेंगे।

हालांकि बाद में वरदराजन ने इसे लेकर स्पष्टीकरण (कि योगी आदित्यनाथ ने ऐसा नहीं कहा था) जारी किया था, लेकिन बावजूद इसके उनके खिलाफ आईटी एक्ट, आईपीसी, आपदा प्रबंधन अधिनियम और महामारी बीमारी अधिनियम के विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।

इसके अलावा एक गुजराती समाचार पोर्टल ‘फेस ऑफ द नेशन’ के संपादक धवल पटेल का भी उल्लेख किया गया है, जिन्होंने राज्य में बढ़ते कोरोना वायरस मामलों की आलोचना के कारण गुजरात में नेतृत्व परिवर्तन का सुझाव देने वाली एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी और इसके लिए पिछले साल 11 मई को उनके खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया था।

रिपोर्ट में स्क्रॉल.इन की कार्यकारी संपादक सुप्रिया शर्मा की भी बात की गई है, जिनके खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र में लॉकडाउन की स्थिति पर रिपोर्ट छापने के लिए केस दर्ज किया गया था।

शर्मा के खिलाफ एससी/एसटी एक्ट और आईपीसी की धाराओं में मामला दायर किया किया गया था। वैसे तो इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्रकार को तत्काल राहत दे दी थी, लेकिन मामले में जांच करने की भी इजाजत दी।

इसके अलावा दिल्ली दंगे को लेकर रिपोर्टिंग कर रहे कारवां पत्रिका के तीन पत्रकारों पर हुए हमले का भी विवरण दिया गया है कि किस तरह से पुलिस ने इस मामले में एफआईआर भी दर्ज नहीं की।

भारत में लोकतंत्र की हालत पर कई चिंताजनक रिपोर्ट्स

गौरतलब है कि इससे पहले वी-डेम की रिपोर्ट में कहा गया था कि भारत में अभिव्यक्ति की आज़ादी कम हुई है और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने से पहले देश ने इस तरह की सेंसरशिप शायद ही कभी देखी है। रिपोर्ट के मुताबिक, सेंसरशिप के मामले में भारत अब पाकिस्तान के समान है, जबकि भारत की स्थिति बांग्लादेश और नेपाल से बदतर है।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत में मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने देशद्रोह, मानहानि और आतंकवाद के क़ानूनों इस्तेमाल अपने आलोचकों को चुप कराने के लिए किया है। रिपोर्ट में कहा गया है की बीजेपी के सत्ता संभालने के बाद सात हज़ार से अधिक लोगों पर राजद्रोह के आरोप लगाए गए हैं, और जिन पर आरोप लगे हैं उनमें से ज़्यादातर लोग सत्ता की विचारधारा से असहमति रखते हैं।

यह भी कहा गया है कि मानहानि का क़ानून उन पत्रकारों और मीडिया संस्थानों को चुप कराने के लिए अक्सर किया जा रहा है जो बीजेपी की नीतियों पर सवाल उठाते हैं। यह रिपोर्ट यह भी कहती है की निरंकुशता की प्रक्रिया में नागरिक समाज का भी दमन किया जा रहा है।

अमेरिकी संस्था फ्रीडम हाउस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी राज्यों की सरकारों ने आलोचकों पर हमले जारी रखे हैं। रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि कोविड के दौरान लगाए गए लॉकडाउन के कारण लाखों प्रवासी मज़दूरों का खतरनाक और बेपरवाह तरीके से विस्थापन हुआ।

इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि भारत में नागरिक स्वतंत्रताओं का लगातार क्षरण हुआ है। संगठन ने भारत के दर्जे को घटाकर ‘आंशिक रूप से स्वतंत्र’ श्रेणी में डाल दिया है।

केंद्र सरकार अभिव्यक्ति की आज़ादी को अधिक ख़तरे में डाल रही है!

इसके अलावा भारत में प्रेस फ्रीडम की बात करें तो पेरिस स्थित अंतरराष्ट्रीय स्वतंत्र संस्था 'रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स' हर साल 180 देशों की प्रेस फ्रीडम रैंक जारी करती है। इस इंडेक्स में भारत की रैंक लगातार गिरती जा रही है। साल 2009 में प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में भारत 105वें स्थान पर था जबकि एक दशक बाद यह 142वें स्थान पर पहुंच चुका है।

संस्था ने रिपोर्ट में कहा कि भारत में न सिर्फ़ लगातार प्रेस की आजादी का उल्लंघन हुआ, बल्कि पत्रकारों के विरुद्ध पुलिस ने हिंसात्मक कार्रवाई भी की। रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सोशल मीडिया पर उन पत्रकारों के खिलाफ सुनियोजित तरीके से नफरत फैलाई गई, जिन्होंने कुछ ऐसा लिखा या बोला था जो हिंदुत्व समर्थकों को नागवार गुजरा।

साल 2018 में 'फ्री स्पीच कलेक्टिव' की एक विस्तृत रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला गया कि भारत में लगभग सभी क्षेत्रों में अभिव्यक्ति की आजादी पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि देश की केंद्र सरकार अभिव्यक्ति की आजादी को संरक्षण देने के बजाय दमनकारी नियमन और निगरानी रखने की प्रणालियों का इस्तेमाल करके और अधिक खतरे में डाल रही है और कमोबेश मुख्य सेंसर की भूमिका निभा रही है।

इसे भी पढ़ें: क्या प्रेस की आज़ादी से सरकार को ख़तरा है!

human rights in india
Press freedom
2020 Country Reports on Human Rights Practices
freedom of expression
NSA
Police brutality
Freedom of Press

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

धनकुबेरों के हाथों में अख़बार और टीवी चैनल, वैकल्पिक मीडिया का गला घोंटती सरकार! 

दिल्ली : फ़िलिस्तीनी पत्रकार शिरीन की हत्या के ख़िलाफ़ ऑल इंडिया पीस एंड सॉलिडेरिटी ऑर्गेनाइज़ेशन का प्रदर्शन

भारत को मध्ययुग में ले जाने का राष्ट्रीय अभियान चल रहा है!

भारत में ‘वेंटिलेटर पर रखी प्रेस स्वतंत्रता’, क्या कहते हैं वैकल्पिक मीडिया के पत्रकार?

प्रेस स्वतंत्रता पर अंकुश को लेकर पश्चिम में भारत की छवि बिगड़ी

Press Freedom Index में 150वें नंबर पर भारत,अब तक का सबसे निचला स्तर

प्रेस फ्रीडम सूचकांक में भारत 150वे स्थान पर क्यों पहुंचा

नागरिकों से बदले पर उतारू सरकार, बलिया-पत्रकार एकता दिखाती राह


बाकी खबरें

  • Cuba
    ऋचा चिंतन
    वैश्विक एकजुटता के ज़रिये क्यूबा दिखा रहा है बिग फ़ार्मा आधिपत्य का विकल्प
    11 Jan 2022
    दुनिया को बिग फ़ार्मा के एकाधिकारवादी चलन का एक विकल्प सुझाते हुए क्यूबा मुनाफ़े से कहीं ज़्यादा अहमियत लोगों को देता है। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली, राज्य से वित्त पोषित अनुसंधान को बढ़ावा देता…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,68,063 नए मामले, 277 मरीज़ों की मौत 
    11 Jan 2022
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 2.29 फ़ीसदी यानी 8 लाख 21 हज़ार 446 हो गयी है।
  • kashi
    विजय विनीत
    काशी विश्वनाथ कॉरिडोर: कैसे आस्था के मंदिर को बना दिया ‘पर्यटन केंद्र’
    11 Jan 2022
    काशी विश्वनाथ मंदिर के समीप सड़क के किनारे श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर का न्यास सुविधा केंद्र है। यहां एक हेल्प डेस्क है, जिसके बाहर कांच के गेट पर 300 रुपये में सुगम दर्शन का पोस्टर चस्पा किया गया है।…
  • security lapse
    शिव इंदर सिंह
    “मोदी की सुरक्षा में चूक या राजनीतिक ड्रामा?” क्या सोच रहे हैं पंजाब के लोग! 
    11 Jan 2022
    जिला लुधियाना के नौजवान किसान जगजीत सिंह का कहना है, “पहली बात तो किसान मोदी के काफिले से करीब एक किलोमीटर दूरी पर थे। दूसरी बात उनके पास कोई हथियार नहीं थे। वह कम से कम मोदी को काले झंडे दिखा सकते…
  • Rahul and Modi
    ओंकार पूजारी
    2022 तय कर सकता है कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों का भविष्य
    11 Jan 2022
    कमज़ोर कांग्रेस इतनी कमज़ोर नहीं है कि औपचारिक मोर्चे या भाजपा विरोधी ताक़तों की अनौपचारिक समझ के मामले में किसी भी अखिल भारतीय भाजपा विरोधी परियोजना से बाहर हो जाए।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License