NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
क्या कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध को सरकार नज़रअंदाज़ कर पाएगी?
जानकारों का मानना है कि सरकार अपनी नीतियों में बदलाव तभी करेगी कि जब यह विरोध वोटों में तब्दील होने लगे। फिलहाल बिहार और बंगाल चुनाव के साथ कई राज्यों में उपचुनाव सामने हैं। इन्हें किसान राजनीति का लिटमस टेस्ट भी मान सकते हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
05 Oct 2020
कृषि कानूनों को लेकर हो रहे विरोध
Image courtesy: The Indian Express

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने केन्द्र सरकार को आड़े हाथों लेते हुये कहा है कि नये कृषि कानूनों की आड़ में खरीद सिस्टम को दुरूस्त करने के बजाय इसे नष्ट किया जा रहा है जिसका बुरा असर किसानों पर ही नहीं बल्कि पूरे देश पर पड़ेगा।

तीन दिन की खेती बचाओ यात्रा के दूसरे दिन सोमवार को राहुल ने बरनाला चौक पर रैली को संबोधित करते हुये कहा कि मोदी सरकार को सत्ता पर काबिज हुये छह साल हो गये और यह सरकार गरीब, किसान और मजदूर विरोधी नीतियां बनाकर इन पर लगातार हमले कर रही है। अब नीतियां इनकी मदद के लिये नहीं बल्कि कुछ गिने चुने औद्योगिक घरानों के लिये बनायी जा रही हैं।

इससे पहले रविवार को भी राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि अगर ये अधिनियम किसानों के लिए हैं तो वे लोग विरोध क्यों कर रहे हैं? गांधी ने कहा कि अगर कांग्रेस सत्ता में आती है तो इन विवादित कानूनों को निरस्त कर दिया जाएगा। उन्होंने पूछा कि कोरोना वायरस महामारी के दौरान इन कानूनों को लागू करने की ऐसी क्या 'जल्दी' और जरूरत थी।

राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि किसानों के लिए कानून बनाए जा रहे हैं। अगर कानून किसानों के लिए बनाए जा रहे हैं तो फिर आपने लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा क्यों नहीं की?

पंजाब का हर किसान आंदोलन क्यों कर रहा है? किसानों को आशंका है कि केंद्र द्वारा किए जा रहे कृषि सुधारों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को समाप्त करने का रास्ता साफ होगा और वे बड़ी कंपनियों की ‘दया’ पर आश्रित रह जाएंगे।

गौरतलब है कि हाल ही में संपन्न मानसून सत्र में संसद ने कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तीकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 27 सितंबर को इन विधेयकों को स्वीकृति प्रदान कर दी, जिसके बाद ये कानून बन गए।

किसानों ने बढ़ाया 'रेल रोको आंदोलन'

वहीं, दूसरी ओर पंजाब में किसान-मजदूर सोमवार को भी रेल ट्रैक पर डटे रहे। प्रदेश में कई जगहों पर रेलवे ट्रैक पर धरना दे रहे किसान-मजदूरों ने इससे पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर के पुतले फूंके हैं। प्रदर्शनरत किसानों का कहना है कि अगर सरकार न मानी तो वे दशहरा और दीपावली भी रेल की पटरियों पर मनाएंगे।

किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के महासचिव सरवन सिंह पंधेर ने एलान किया कि अब उनका धरना 8 अक्तूबर तक जारी रहेगा। अमृतसर के जंडियाला गुरु के गांव देवीदासपुर के पास ट्रैक पर धरने पर बैठे किसान-मजदूर संघर्ष कमेटी के सैकड़ों सदस्यों ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत का पुतला फूंककर मोदी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।

पंजाब में किसानों के 31 संगठन साझे तौर पर रेलवे ट्रैक पर धरना दे रहे हैं। इसके अलावा पेट्रोल पंपों व टोल प्लाजा पर भी धरना दिया जा रहा है। मोहन भागवत का पुतला फूंकने के सवाल पर पंधेर ने कहा कि आरएसएस मोदी सरकार को रिमोट कंट्रोल से चला रहा है। आरएसएस प्रमुख को मोदी सरकार पर दबाव डालना चाहिए कि इस कानून को वापस लिया जाए।

उन्होंने कहा कि भाजपा के जो नेता बातचीत का न्योता दे रहे हैं, उनका केंद्र सरकार से कोई नाता नहीं है। ये नेता किसानों के बीच भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं। भाजपा को अगर किसानों की चिंता है तो वह मोदी को कानून रद्द करने के लिए कहें।

क्या सरकार झेल पाएगी यह विरोध?

गौरतलब है कि केंद्र सरकार द्वारा कृषि विधेयक के लोकसभा और राज्यसभा में पारित किए जाने के बाद से ही देशभर में किसान इसके विरोध में प्रर्दशन कर रहे हैं। यह प्रदर्शन उत्तर भारत से शुरू हुआ और धीरे धीरे दक्षिण भारत के राज्यों में फैल गया है। फिलहाल हरियाणा, पंजाब और पश्चिमी उत्तर प्रदेश इसका गढ़ बना हुआ है। आपको यह भी याद दिला दें कि देश भर के 250 किसान संगठनों की अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआइकेएससीसी) ने 25 सिंतबर को भारत बंद का आह्वान किया तो पूरे देश में प्रदर्शनों की बाढ़ आ गई थी।

इस प्रदर्शन को मजदूरों यूनियनों समेत विपक्षी पार्टियों का भी पूरा समर्थन मिल रहा है। गौरतलब है कि नए कानूनों को सरकार लंबे समय से लंबित सुधार बता रही है लेकिन किसानों को इस बात को लेकर चिंता है कि यदि ये कानून लागू किया जाता है तो एपीएमसी (कृषि उपज विपणन समितियों) और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) व्यवस्था खत्म हो जाएगी।

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या सरकार यह विरोध झेल पाएगी? या फिर क्या सरकार किसानों के विरोध और दूसरी राजनैतिक पार्टियों के दबाव में न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी दर्जा देने का कोई कानून लाएगी? फिलहाल तो केंद्र सरकार में कृषि मंत्री कहते हैं कि एमएसपी कभी कानूनी था ही नहीं, यह प्रशासनिक फैसला रहा है और अब भी है।

बहरहाल, इन सवालों का जवाब भविष्य के गर्भ में हैं। हालांकि कई राज्यों में चुनावों के मद्देनजर फेरबदल की संभवना हो सकती है लेकिन शायद यह तभी हो जब विरोध बढ़े और चुनावों में इसका असर दिखे। अभी हाल फिलहाल बिहार में विधानसभा चुनाव है। आपको याद दिला दें कि इसके पहले 2015 में बिहार चुनावों के पहले भूमि अधिग्रहण संशोधन अध्यादेश को छोड़ दिया गया था।

इसी तरह गुजरात में खराब प्रदर्शन और राजस्थान, मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ में सत्ता गंवाने के बाद सरकार ने किसान सम्मान निधि की घोषणा की थी। ऐसे में जानकारों का यही मानना है कि सिर्फ प्रदर्शन से सरकार पर फर्क नहीं पड़ने वाला है। सरकार अपनी नीतियों में बदलाव तभी करेगी कि जब यह विरोध वोटों में तब्दील होने लगे। फिलहाल बिहार और बंगाल चुनाव के साथ कई राज्यों में उपचुनाव सामने हैं। इन्हें किसान राजनीति का लिटमस टेस्ट भी मान सकते हैं।

( समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ )  

Farm bills 2020
Agriculture Bills
Farmer protest
Rahul Gandhi
Congress
BJP
Narendra modi
modi sarkar
farmer crisis
Agriculture Crises

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

मूसेवाला की हत्या को लेकर ग्रामीणों ने किया प्रदर्शन, कांग्रेस ने इसे ‘राजनीतिक हत्या’ बताया

दलितों पर बढ़ते अत्याचार, मोदी सरकार का न्यू नॉर्मल!

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

दिल्ली : पांच महीने से वेतन व पेंशन न मिलने से आर्थिक तंगी से जूझ रहे शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

आईपीओ लॉन्च के विरोध में एलआईसी कर्मचारियों ने की हड़ताल

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • russia attack on ukrain
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूक्रेन पर हमला, रूस के बड़े गेम प्लान का हिस्सा, बढ़ाएगा तनाव
    25 Feb 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने बात की न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ से। यूक्रेन पर रूस हमला, जो सरासर अंतर्राष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है, के पीछे पुतिन द्वारा…
  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License