NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सुरक्षित शहर में असुरक्षित होती महिलाएं
कोलकाता की लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों और महिलाओं के लिए चलने वाली विशेष ट्रेनों पर आए दिन पथराव की घटनाएँ हो रही हैं। इसके अलावा, महिला डिब्बों में गंदगी या मूत्र से भरी थैलियां फेंकने के भी मामले सामने आए हैं।
सरोजिनी बिष्ट
16 Mar 2020
सुरक्षित शहर में असुरक्षित होती महिलाएं

कोलकाता में महिलाओं के खिलाफ अपराध का एक नया रूप देखने को मिल रहा है। लोकल ट्रेनों के महिला डिब्बों और महिलाओं के लिए चलने वाली विशेष ट्रेनों पर आए दिन पथराव की घटनाएँ हो रही हैं। इसके अलावा, महिला डिब्बों में गंदगी या मूत्र से भरी थैलियां फेंकने के भी मामले सामने आए हैं। कोलकाता को महिलाओं के लिए अपेक्षाकृत सुरक्षित शहर माना जाता है। लेकिन ऐसी घटनाओं से इस धारणा पर सवालिया निशान लगने लगा है। जानकारों का कहना है कि इन घटनाओं के पीछे महिलाओं के प्रति विद्वेषपूर्ण मानसिकता और एक तरह की यौन विकृति है। महिलाओं को कमज़ोर और आसान निशाना समझने की मनोवृत्ति भी इसके पीछे काम करती है।

13 मार्च की शाम को लेडीज़ स्पेशल सियालदह-बनगांव मातृभूमि लोकल पर पत्थर फेंका गया। इस घटना में शिल्पी मंडल नामक एक युवती घायल हो गयी। पैर में इतना बड़ा ज़ख्म हो गया कि सात टांके लगाने पड़े। इस घटना के चंद घंटों पहले ही पुलिस की ओर से विधाननगर से दमदम, बिराटी, बारासत, बामनगाछी जैसे कई स्टेशनों पर रेल लाइन के किनारे जागरुकता यात्रा निकाली गयी थी, जिसके माध्यम से ट्रेनों पर पथराव न करने की अपील की गयी थी। लेकिन इसका कोई असर होता नहीं दिख रहा है। एक के बाद एक ऐसी घटनाओं से रेलयात्रियों ख़ासकर महिलाओं में आक्रोश बढ़ रहा है। उनका आरोप है कि पुलिस ऐसे अपराधी तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने में विफल है।

बारासत जीआरपी में दर्ज कराई गयी शिकायत में शिल्पी ने कहा है कि वह मातृभूमि लोकल में बिराटी से गुमा लौट रही थीं। वह ड्राइवर के ठीक पीछे वाले डिब्बे में दरवाज़े के पास खड़ी थीं। तभी कुछ समाज-विरोधी तत्वों ने पत्थर चलाया, जो उनके पैर पर आकर लगा। इससे पहले, 9 मार्च को पार्क सर्कस में डायमंड हार्बर जा रही लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे में मृत्र से भरा पॉलीबैग फेंका गया। घटना के बाद रेल पुलिस ने जांच के नाम पर 10-12 लोगों को पकड़ा, लेकिन कुछ ख़ास सफलता नहीं मिली। क्योंकि जिस युवती ने शिकायत की थी वह अंधेरे के कारण गंदगी फेंकने वालों को ठीक से देख नहीं सकी थी।

लेकिन पकड़े गये लोगों से पूछताछ में यह ज़रूर सामने आया कि पटरियों के आसपास रहनेवाले कुछ लोग 'मनोरंजन' के लिए महिलाओं के डिब्बे में ऐसी चीज़ें बीच-बीच में फेंकते हैं। पटरियों के किनारे नशे का कारोबार भी चलता है। कई नशेड़ी भी इस तरह की वारदात को अंजाम देते हैं। मामला पत्थर मारने या गंदगी फेंकने तक सीमित नहीं है। नशे की लत पूरी करने के लिए महिलाओं के डिब्बे में घुसकर नशेड़ी बैग या मोबाइल भी छीनते हैं।

महिलाओं के ख़िलाफ़ लगातार होते अपराध

29 जनवरी को सरस्वती पूजा के दिन पार्क सर्कस स्टेशन से ट्रेन के छूटते ही एक युवती को चलती ट्रेन से फेंक दिया गया था। इस घटना में पुलिस अभी तक किसी को गिरफ़्तार नहीं कर सकी है। उसी दिन सोनारपुर से सियालदह जा रही एक अन्य युवती से महिला डिब्बे में बदमाशों ने उसका बैग छीनने की कोशिश की। विरोध करने पर उसे घूंसा मारकर घायल कर दिया गया। बदमाश बैग नहीं छीन पाए, लेकिन युवती और उनकी मां से मोबाइल छीनकर भाग निकले। महिला यात्रियों का कहना है कि चलती ट्रेन में शाम को शराब पीने के मामले भी देखे जाते हैं। इसकी वजह से भी उनकी सुरक्षा ख़तरे में पड़ती है। बारासत लोकल ट्रेन के एक डिब्बे में होली की पूर्व-संध्या पर दो व्यक्तियों के शराब पीने का वीडियो इन दिनों वायरल है। 

नौकरी के सिलसिले में  लोकल ट्रेन के महिला डिब्बे में सफ़र करने वाली कोलकाता निवासी मानुशी घोष कहती हैं, "पहले इतनी असुरक्षा महसूस नहीं होती थी हम निश्चिंत रहते थे कि महिला डिब्बा होने की वजह से हम सुरक्षित हैं और हमें अपने शहर पर भी भरोसा था क्योंकि कोलकाता महिलाओं के लिए सुरक्षित शहरों में गिना जाता है लेकिन अब हालात पहले जैसे तो बिलकुल नहीं हैं। अगर कहीं खुले स्पेस में महिलाओं को अपराधी टारगेट नहीं बना पा रहे तो महिला डिब्बों को ही निशाना बना रहे हैं।"

ज़्यादातर घटनाओं में महिला यात्रियों को निशाना बनाया गया है। लेकिन कई बार पुरुष यात्री भी चपेट में आए हैं। 27 जनवरी को सियालदह दक्षिण शाखा की बारूईपुर लोकल ट्रेन पर पत्थर फेंका गया। मल्लिकपुर स्टेशन छोड़ते ही अचानक पत्थर चलने लगे। दरवाज़े के सामने खड़े एक व्यवसायी संजय सरदार का पत्थर लगने से सर फट गया। बीते साल अक्टूबर महीने में भी सियालदह-बनगांव सेक्शन में लोकल ट्रेनों पर हमले की कई घटनाएँ हुई थीं। इसमें कई यात्री ज़ख़्मी हुए, जिनमें सात साल की एक बच्ची भी शामिल थी।

महिलाओं पर गंदगी फेंकना या मूत्र से भरी थैलियां फेंकने जैसे मामले भी कोई नए नहीं हैं। याद कीजिए दो साल पहले दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुछ काॅलेजों की छात्राओं और शिक्षिकाओं शिकायत की थी कि कैसे दिनदहाड़े मनचलों ने उन पर सीमन (पुरुष वीर्य) से भरे गुब्बारे फेंके थे। इस घटना का इतना आक्रोश था की पुलिस मुख्यालय के सामने छात्राओं और महिला टीचरों ने प्रदर्शन भी किया था। इस पर गंभीरता से सोचना होगा कि महिलाओं के ख़िलाफ़ होते अपराध का क्या यह एक नया ट्रेंड बनता जा रहा है। 

बहरहाल कोलकाता की घटनाओं पर यदि लगाम नहीं लगाई गई तो उसकी छवि भी देश की राजधानी दिल्ली जैसी हो जाएगी जिसे अब दुनिया में महिलाओं के लिए असुरक्षित शहर के रूप में जाना जाता है।

kolkata
Local Train
Women
Women Rights
crimes against women
gender discrimination
mamta banerjee
TMC

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

विशेष: क्यों प्रासंगिक हैं आज राजा राममोहन रॉय

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश

5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5

मेरे लेखन का उद्देश्य मूलरूप से दलित और स्त्री विमर्श है: सुशीला टाकभौरे


बाकी खबरें

  • भाषा
    सांप्रदायिक ताकतों से लड़ने के लिए आंबेडकर के संघर्षों से प्रेरणा लें : विजयन
    14 Apr 2022
    विजयन ने कहा कि लोकतंत्र को लेकर आंबेडकर का दृष्टिकोण ऐसे समय में और प्रासंगिक हो गया है जब सांप्रदायिक फासीवादी राजनीति और नव उदार पूंजीवादी नीतियां संवैधानिक मूल्यों पर बड़ा खतरा पैदा कर रही हैं। 
  • एजाज़ अशरफ़
    दंगे भड़काने के लिए धार्मिक जुलूसों के इस्तेमाल का संघ का इतिहास
    14 Apr 2022
    संघ परिवार का गान करने वाले चाहते हैं कि हम रामनवमी की हालिया हिंसा के उस पहलू को भूल जायें, जो उसकी सांप्रदायिक आग भड़काने के पुराने इतिहास को दर्शाती है। 
  • न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,007 नए मामले, एक मरीज़ों की मौत
    14 Apr 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है | दिल्ली में मात्र एक सप्ताह के भीतर नए मामलों की संख्या करीब तीन गुना हो गयी है | 
  • ambedkar
    लाल बहादुर सिंह
    एक आधुनिक लोकतांत्रिक राष्ट्रनिर्माण की डॉ. आंबेडकर की परियोजना आज गहरे संकट में
    14 Apr 2022
    डॉ. 
  • ambedkar
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    मैं अंबेडकर बोल रहा हूँ... भेद तुम्हारे खोल रहा हूँ
    14 Apr 2022
    आज, 14 अप्रैल बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की जयंती है। इस मौके पर बहुत भाषण होंगे, लेख लिखे जाएंगे, लेकिन जिस तरह से युवा कवि राज वाल्मीकि अंबेडकर की तरफ़ से बोल रहे हैं और हमारे समाज का भेद खोल रहे…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License