NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
मज़दूर संगठनों ने सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक की मांग की
श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स), मौजूदा 44 श्रम क़ानूनों का स्थान ले रहे है। मज़दूर संगठन इसका शुरआत से ही विरोध कर रहे हैं और इसे मालिकों के पक्ष और मज़दूरों के ख़िलाफ़ बता रहे है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jan 2021
मज़दूर संगठनों ने सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक की मांग की

नयी दिल्ली: देश के 10 केंद्रीय मजदूर संगठनों के संयुक्त मंच ने बुधवार को सरकार से चार श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन पर रोक लगाने और इस पर फिर से चर्चा करने की मांग की।

दस केंद्रीय मजदूर संगठनों- इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (इंटक), ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एआईटीयूसी), हिंद मजदूर सभा (एचएमएस), सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन (सीटू), इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर (एआईयूटीयूसी), ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर (टीयूसीसी), सेल्फ-एम्प्लॉइड वुमेन्स एसोसिएशन (सेवा), ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू), लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन (एलपीएफ) और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस (यूटीयूसी) के संयुक्त मंच द्वारा जारी बयान में यह मांग की गई।

इस मंच के साथ कुछ स्वतंत्र संगठन और फेडरेशन भी जुड़े हैं।

आपको बता दें पूरे देश में लागू श्रम कानूनों को समेकित (Integrated) करने और उनमें संशोधन करने के लिए बनाए गए तीन लेबर कोड को विपक्ष के विरोध के बावजूद मंगलवार, 22 सितंबर 2020  को लोकसभा में पास कर दिया गया है। और बुधवार, 23 सितंबर को विपक्ष की गैर मौजूदगी में राज्यसभा ने भी इन्हें पारित कर दिया था। इन कोड्स या संहिताओं में औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थिति संहिता, 2020 तथा सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 शामिल हैं। इसके अलावा वेतन संहिता, 2019 पहले ही पारित हो चुका है। ये सभी श्रम संहिताएं (लेबर कोड्स) 44 मौजूदा श्रम कानूनों का स्थान ले रहे है। मज़दूर संगठन इसका शुरआत से ही विरोध कर रहे हैं और इसे मालिकों के पक्ष और मज़दूरों के ख़िलाफ़ बता रहे हैं।  

बुधवार को संयुक्त बयान में कहा गया, ‘‘केंद्रीय मजदूर संगठनों की मांग है कि सभी चार संहिताओं को रोक दिया जाना चाहिए और फिर इन श्रम संहिताओं पर केंद्रीय मजदूर संगठनों के साथ सच्ची भावना से द्विपक्षीय और त्रिपक्षीय बातचीत होनी चाहिए।’’

मंच ने श्रम मंत्री संतोष गंगवार को लिखे पत्र में पिछले पांच वर्षों से भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं करने का भी विरोध किया।

श्रम मंत्रालय ने इन नए कानूनों को लागू करने के लिए श्रम संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप दे रहा है। मंत्रालय ने बुधवार को सामाजिक सुरक्षा और व्यवसायों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और कामकाजी परिस्थितियों पर चर्चा के लिए मजदूर संगठनों और अन्य हितधारकों की बैठक बुलाई थी।

मंत्रालय इस महीने के अंत तक श्रम संहिताओं के तहत नियमों को अंतिम रूप देना चाहता है, ताकि इन कानूनों को लागू किया जा सके।

हालांकि मज़दूर संगठनों ने श्रम मंत्रालय की इन बैठकों को केवल दिखावा बताया और इस बैठक का बहिष्कार मज़दूर संगठन पहले ही कर चुके हैं।

उनका कहना है ये श्रम सहिंता मजदूर-मालिक संबंध के संतुलन को निर्णायक रूप से मालिक के पक्ष में स्थानांतरित कर देगा, उसके मुताबिक नई संहिता में ऐसे कई प्रावधान हैं जो श्रमिकों के विभिन्न वर्गों के कई छोटे अधिकारों को खत्म कर देगा।

संक्षेप में, मज़दूर संगठनों की बात करें, तो उनका कहना है कि मोदी सरकार ने शोषणकारी मालिकों से श्रमिकों के लिए उपलब्ध सभी सुरक्षा नियमों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। ये नई संहिता वे पिछली शताब्दी में हमारे (मज़दूरों ) संघर्षों के माध्यम से श्रमिकों द्वारा पाए गए सभी लाभों को प्रभावी ढंग से नष्ट कर देंगे. 

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ)

CITU
AICCTU
INTUC
AITUC
Central Trade Unions
Labor code
Modi government
SANTOSH GANGWAR

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

झारखंड-बिहार : महंगाई के ख़िलाफ़ सभी वाम दलों ने शुरू किया अभियान

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

विशाखापट्टनम इस्पात संयंत्र के निजीकरण के खिलाफ़ श्रमिकों का संघर्ष जारी, 15 महीने से कर रहे प्रदर्शन

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे


बाकी खबरें

  • The Fakirganj Model Hospital
    संदीपन तालुकदार
    दक्षिण पश्चिम असम में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद खस्ताहाल–II
    15 Nov 2021
    फ़क़ीरगंज, डिब्रूगढ़, पलासबारी और कई अन्य कस्बे और गांव जो नदियों में समाहित और गायब हो चुके हैं, वे इस बात का जीता-जागता सुबूत हैं कि क्या और किस हद तक असम के इन दूर-दराज के इलाकों तक चिकित्सा सेवाओं…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    बीजेपी के हिन्दू राष्ट्र में सवाल पूछना मना है?
    15 Nov 2021
    न्यूज़चक्र में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं बीजेपी के हिन्दू राष्ट्र के बारे में। वह सवाल उठा रहे हैं कि क्या बीजेपी ऐसा हिन्दू राष्ट्र बनाना चाहती है जिसमें किसी को बोलनी आज़ादी न हो,…
  • china
    टिंग्स चा
    शिक्षा में असमानता को दूर करने का चीनी जतन 
    15 Nov 2021
    बच्चों पर पढ़ाई एवं उनके माता-पिता पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ को कम करने की चीन की 'दोहरी कटौती' नीति को सरकार के इस विचार के समर्थन के रूप में देखा जा सकता है कि उसके लिए बच्चों और परिवारों के…
  • Magdalena Andersson
    उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की: स्वीडन को पहली महिला प्रधानमंत्री का इंतज़ार
    15 Nov 2021
    स्कैंडिनेवियाई देशों (डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन और फिनलैंड) में इस समय केवल स्वीडन ही अकेला देश है जहां कभी महिला प्रधानमंत्री नहीं रही।
  • Anil Deshmukh
    भाषा
    धनशोधन का मामला: अदालत ने अनिल देशमुख को न्यायिक हिरासत में भेजा
    15 Nov 2021
    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मामले में पूछताछ के बाद एक नवंबर को देशमुख को धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License