NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आदिवासी किसानों के बंद और मातम के बीच “स्टैच्यू ऑफ यूनिटी” का लोकार्पण
"बनासकांठा से डांग जिले तक, नौ जनजातीय जिले इस प्रदर्शन में शामिल होंगे और बंद केवल स्कूलों, कार्यालयों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि घरों में भी खाना नहीं बनेगा।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
31 Oct 2018
Statue of Unity
Image Courtesy : NDTV

जनजातीय समुदाय के लगभग 75,000 लोगों की विरोध और बंद के बीच आज, 31 अक्टूबर को  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी 182  मीटर  ऊँची सरदार  पटेल  के  प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ का अनावरण करने जा रहे हैं। बताया  जा  रहा  है  कि  ये  दुनिया  की  अब तक की सबसे  अधिक  ऊंचाई  वाली  प्रतिमा है।  प्रधानमंत्री मोदी ने 31  अक्टूबर  2013  को  सरदार पटेल  के  जन्मदिन  को  राष्ट्रीय  एकता  दिवस  घोषित   करते  हुए  प्रतिमा  की  पहली  ईंट डाली थी। नर्मदा  बाँध के निकट  सरदार पटेल की इस प्रतिमा को बनाने में करीब 2,989 करोड़ रुपये का खर्च आया है। इस  पूरी  परियोजना  को  'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' परियोजना का  नाम  दिया  गया।

'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' परियोजना से प्रभावित लगभग 75,000 आदिवासी प्रतिमा के अनावरण  का  विरोध  कर  रहे  हैं। इस  परियोजना  से  लगभग  72  गांव  प्रभावित  हैं। सरदार  सरोवर  बाँध  के निकट  के  लगभग  22  गाँवों  के  मुखियों  ने  प्रधानमंत्री  नरेंद्र  मोदी  को  खुला  खत  लिखा  है  कि वो 31 अक्टूबर  को  होने  वाले  प्रतिमा  के  अनावरण  में  प्रधानमंत्री  का  स्वागत  नहीं  करेंगे। लोकल  आदिवासी  लीडरों  ने  इस  अनावरण  प्रोग्राम  का  बहिष्कार  करने  की  घोषणा  की  है। उनका  कहना  है  कि लोगों  के  द्वारा  मेहनत से  कमाई  जाने  वाली  पूंजी  को  सरकार इस प्रतिमा  पर लगा रही  है  जबकि  आस  पास  के  गांवों  में  अभी  भी  स्कूलों , अस्पतालों  और  पीने  वाले  पानी  की  कमी  है।

अभी नर्मदा जिले में 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' के उद्घाटन का विरोध कर रहे जनजातीय लोगों ने पूरे जिले में मोदी, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी और समारोह की तस्वीर वाले 90 फीसदी पोस्टरों को या तो फाड़ दिया था या उन पर कालिख पोत दी थी।

आईएएनएस की रिपोर्ट के मुताबिक एक जनजातीय नेता प्रफुल वसावा ने कहा, "यह इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि जनजातीय समुदाय भाजपा से कितना असंतुष्ट है। उन्होंने जनजातीय समुदाय के सबसे बेशकीमती संसाधन उनकी जमीनों को कथित विकास कार्यों के लिए छीन लिया।"

उन्होंने कहा, "अधिकारियों ने फटे पोस्टरों को नए पोस्टर से बदल दिया है और पुलिस इन पोस्टरों की सुरक्षा कर रही है। यह दुनिया में शायद पहली बार हो रहा है कि किसी प्रधानमंत्री के पोस्टरों की सुरक्षा पुलिस द्वारा की जा रही है।"

उन्होंने कहा, "नर्मदा के जनजातीय समूह 2010 से इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं और अब पूरे प्रदेश की जनता इसके विरुद्ध है।"

इस परियोजना से प्रभावित जनजातीय समुदाय के लगभग 75,000 लोगों ने स्टैच्यू का विरोध करने के लिए आज 31 अक्टूबर को बंद बुलाया है।

वसावा ने कहा, "बनासकांठा से डांग जिले तक, नौ जनजातीय जिले इस प्रदर्शन में शामिल होंगे और बंद केवल स्कूलों, कार्यालयों या व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि घरों में भी खाना नहीं बनेगा।"

परंपरा के अनुसार, जनजातीय गांवों में जब लोग मौत का शोक मनाते हैं,तो उनके घरों में खाना नहीं पकता है।

वसावा ने कहा, "जनजातीय के रूप में सरकार ने हमारे अधिकारों का हनन किया है। गुजरात के महान सपूत के खिलाफ हमारा कोई विरोध नहीं है। सरदार पटेल और उनकी इज्जत बनी रहनी चाहिए। हम विकास के भी खिलाफ नहीं हैं, लेकिन यह परियोजना हमारे खिलाफ है।

अगर  हम सरदार  पटेल  की  बात  करे  तो उनकी  लड़ाई  हमेशा  किसानों  के लिए  रही  है। 1946  में  पोलसन  जो  कोलोनियल  प्राइवेट  के  खिलाफ  मोर्चा  खोलते  हुए  सरदार  पटेल  की  देखरेख में  गुजरात  के  कैरा  जिले  में  पहली  किसानों  से  संबंधित  कोऑपरेटिव  डेयरी  की  स्थापना  हुई  थी। अब  सवाल  यह  उठता  है  कि किसानों  के  हक़  के  लिए  लड़ने  वाले  पटेल  की  प्रतिमा  के  लिए  हज़ारों  किसानों  को  नुकसान  हो रहा  है  यह  क्या  उचित  होगा?

अब  थोड़ा  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस  ( जिसके  विचारों  पर  मोदी  सरकार  काम  करती  है) के  सरदार  पटेल  से  संबंधों पर  नज़र  डालें  तो  पटेल  ने 4 फरवरी 1948 को आरएसएस पर प्रतिंबध लगा दिया था। उस वक्त वो देश के गृह मंत्री थे। उन्होंने प्रतिबंध लगाते हुए चिट्ठी में कहा था,  कि “संघ का एक चेहरा और भी है, जो मुसलमानों से बदला लेने के लिए उन पर हमले करता है। हिन्दुओं की मदद करना एक बात है, लेकिन गरीब, असहाय, महिला और बच्चों पर हमला असहनीय है।'' दरअसल  पटेल  का मानना  था कि गाँधी जी की  हत्या  में  आरएसएस  का अप्रत्यक्ष  रूप  से  हाथ  था। पटेल, नेहरू को 27 फरवरी, 1948 को एक चिट्ठी लिखते हैं। इस चिट्ठी में पटेल ने लिखा कि संघ का गांधी की हत्या में सीधा हाथ तो नहीं है लेकिन ये जरूर है कि गांधी की हत्या का ये लोग जश्न मना रहे थे।

मोदी  सरकार  अभी  के  दिनों  में   आज़ादी  के  लिए  लड़े  लोगों  को  अपनाने  में  लगी  हुई  है  कभी  गांधी  तो  कभी  पटेल। हालाँकि  वह  शायद  इस  बात  को  नज़रअंदाज़  कर रही है  कि  आज़ादी  के  लिए  लड़ने  वाले  गाँधी  और  पटेल  के  विचार  उन  विचारों  से  काफी  मतभेद  रखते  थे  जिनकी  नींव  पर  ये  सरकार  खड़ी  है।

statue of unity
SARDAR PATEL
Gujrat
Narendra modi
VIJAY RUPANI
Narmada River
Tribal

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

नर्मदा के पानी से कैंसर का ख़तरा, लिवर और किडनी पर गंभीर दुष्प्रभाव: रिपोर्ट

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़


बाकी खबरें

  • Olaf Scholz
    एम. के. भद्रकुमार
    मास्को की नपी-तुली कूटनीति काम कर रही है
    21 Feb 2022
    यूक्रेन पर रूसी हमले की संभावना सही मायने में कभी थी ही नहीं। हालांकि, अगर यूक्रेनी सेना अलगाववादी ताक़तों पर हमला करती है, तो डोनबास क्षेत्र में मास्को के हस्तक्षेप का होना सौ फ़ीसदी तय है।
  • sultanpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनावः सुल्तानपुर चीनी मिल राज्य सरकार की अनदेखी से हुई जर्जर
    21 Feb 2022
    "सुल्तानपुर चीनी मिल के सही ढ़ंग से न चलने की वजह से इस इलाके के गन्ने की उपज प्राइवेट क्रशर मशीन में किसान मजबूरन दे देते हैं जहां से उनको गन्ने की कीमत आधी या दो-तिहाई ही मिल पाती है।"
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में पीएम मोदी ने पार की चुनावी मर्यादा, जागो चुनाव आयोग
    21 Feb 2022
    आज के एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अखिलेश यादव पर साधे गए निशाने पर बात की और उसको हास्यास्पद बताया। उसके साथ ही उन्होंने इस बात पर भी टिप्पणी की कैसे एक…
  • election
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव चौथा चरण: लखीमपुर हिंसा और गोवंश से फ़सलों की तबाही जैसे मुद्दे प्रमुख
    21 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश में तीन चरणों के चुनावों के बाद अब चौथे चरण के लिए जंग शुरू हो गई है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बाद अब अवध की चुनावी परिक्रमा लगातार जारी है। लेकिन चौथे चरण में अवध की वो सीटे भी हैं जहां…
  • Ballia
    विजय विनीत
    बलिया: ''सबके वोटे के चिंता बा, चुनाव बाद रसड़ा चीनी मिल के बात केहू ना करे ला''
    21 Feb 2022
    देसी चीनी और गुड़ के लिए मशहूर रसड़ा, कभी ''रसदा'' के नाम से जाना जाता था। रसड़ा इलाके में कई घंटे गुजारने के बाद हमें इस बात का एहसास हो चला था कि रसड़ा में हर आदमी की जुबां पर सिर्फ़ एक ही सवाल है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License