NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अडवाणी जी के नाम खुला खत
वीरेन्द्र जैन
15 Oct 2015
मान्यवर,
अभिवादन, और उम्मीद कि आप सदा की तरह स्वस्थ होंगे।
 
पत्र प्रारम्भ करने से पहले एक लतीफा।
 
एक अध्यापक ने कक्षा में आकर छात्रों से कहा कि एक सवाल का उत्तर बताओ। ‘ दिल्ली से मुम्बई की ओर एक जहाज पाँच सौ किलोमीटर प्रति घंटा की गति से उड़ता है तो मेरी उम्र क्या है?’ यह सवाल सुन कर सारे छात्र हक्के बक्के रह गये किंतु पीछे बैठने वाले कक्षा के सबसे शैतान छात्र ने हाथ खड़ा कर दिया। वह इकलौता था इसलिए  अध्यापक ने उसे उत्तर बताने की अनुमति दी। उसने उत्तर में कहा कि ‘सर आपकी उम्र चालीस साल है’। उत्तर सुन कर अध्यापक गदगद हो गये और उसकी पीठ ठोकते हुए बोले, शाबाश, तुम इस कक्षा के सबसे समझदार लड़के हो, अब तुम इन मूर्खों को बताओ कि तुमने कैसे हिसाब लगाया और सही उत्तर तक पहुँचे।
 
छात्र गम्भीरतापूर्वक बोला- सर, मेरा एक भाई है, जो आधा पागल है और उसकी उम्र बीस साल है।
 
यह लतीफा आप पर लागू नहीं होता क्योंकि आप भारतीय राजनीति के सबसे वरिष्ठ, समझदार और चतुर राजनेता हो किंतु अगर किसी अन्य व्यक्ति ने वह बयान दिया होता जो आपने आगरा में एक पुस्तक के लोकार्पण समारोह के दौरान दिया, जिसमें आपने कहा कि ‘दादरी कांड पर यदि मैं कुछ बोलूंगा तो अटलजी नाराज हो जायेंगे’ तो उस पर यह अवश्य लागू हो जाता।  
 
देश के वरिष्ठ नेता अटल बिहारी वाजपेयी उम्र और स्वास्थ की उस अवस्था में हैं जब व्यक्ति नाराज होना भूल जाता है, यह बात आप अच्छी तरह से जानते हैं। ऐसी दशा में आप जैसे वरिष्ठ और सुलझे हुए व्यक्ति का उपरोक्त बयान हमें उस दशा में छोड़ देता है जो दशा हिन्दी के सामान्य पाठक की किसी बहु-पुरस्कृत कवि की नईकविता पढने के बाद होती है, जिसमें वह मानता तो है कि कविता उसे समझ में नहीं आयी किंतु वह दोष कवि की रचना प्रक्रिया को देने की जगह खुद की नासमझी को ही देता है।
 
आदरणीय, आप चाहते तो ‘नो कमेंट’ कह कर भी काम चला सकते थे, किंतु आपने वैसा नहीं किया। आप चाहते तो दादरी के हत्यारों को बेकसूर बता सकते थे, महेश शर्मा की तरह इसे दुर्घटना बता सकते थे व सत्तरह साल की लड़की को हाथ न लगाने के महान त्याग का बखान कर सकते थे, पर आपने वैसा भी नहीं किया। दूसरी ओर आपने खानपान के नाम पर मुसलमान परिवार को हमले का लक्ष्य बनाने की भावना की निन्दा भी नहीं की,उसमें कोई राजनीति भी नहीं देखी। आपने कहा कि ‘सरकार काम कर रही है। लेकिन आगे और बहुत कुछ करना होगा’। इस वाक्य में भी समर्थन और विरोध दोनों ही निहित हैं। परिणाम भी ऐसा ही निकला है जिसमें समर्थकों ने समर्थन तलाश लिया और विरोधियों ने विरोध के संकेत पा लिये। पहले भी आपके बयान इतने बहुअर्थी हुआ करते थे कि आपको बयान बदलने या उसे तोड़ मोड़ कर पेश करने वाला बताने की अधिक जरूरत नहीं पड़ी।
 
पिछले दिनों वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा ने कहा था कि वर्तमान सरकार ने अपने पचहत्तर पार नेताओं को ब्रेन डैड मान लिया है। उनका आशय था कि अनुभवी स्वस्थ नेताओं का उनके कद के अनुरूप कोई सदुपयोग नहीं किया जा रहा है। जाहिर है कि इनमें वे स्वयं अपनी और विशेष रूप से आप, शांता कुमार और मुरली मनोहर जोशी की ओर इंगित करते महसूस हो रहे थे। उनके इस स्पष्ट बयान के बाद भी पार्टी में कोई हलचल नहीं हुयी। इस जैसे अन्य कई बयान भी सूखी रेत में गिरे पनी की तरह सोख लिये गये। सवाल यह है कि क्या भाजपा अब जीवंत लोगों का समूह है या केवल मृतक समान लोगों की भीड़ भर होकर रह गयी है। आप पार्टी के सबसे वरिष्ठ, सबसे अनुभवी, सबसे चतुर, राजनेता थे जो कई बार राष्ट्रीय अध्यक्ष रहे, पार्टी निर्माण की सबसे प्रमुख योजनाओं के वास्तुकार रहे, संवैधानिक पदों पर रहे तथा उपप्रधानमंत्री के रूप में काम करते हुए परोक्ष में प्रधानमंत्री रहे। पार्टी में आपके प्रशंसक भी समुचित रहे। फिर ऐसा क्या हो गया था कि जब मोदी को प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी के रूप में मनोनीत करने के खिलाफ आपने त्यागपत्र दिया तो आपके साथ बहुत  सारे लोग खड़े नहीं हुये जबकि शांता कुमार और शिवराज सिंह चौहान जैसे बहुत सारे लोग मोदी को उस पद पर नहीं देखना चाहते थे। कहने का अर्थ यह है कि पार्टी जिस लोकतांत्रिक स्वरूप का दावा करती थी वह कहीं नजर नहीं आया। तय था कि प्रधानमंत्री पद प्रत्याशी का चुनाव अगर लोकतांत्रिक तरीके से हुआ होता तो आपका पलड़ा भारी रहा होता भले ही चुनाव परिणाम कुछ भिन्न आते। संजय जोशी को बाहर करने के मामले में भी कहीं लोकतंत्र नजर नहीं आया। सच्चा लोकतंत्र तब ही होता है जब फैसला बहुमत का माना जाये किंतु उस फैसले की आशंका से अल्पमत खुद ही अपनी आवाज दबा देने को मजबूर न हो। चिंता की बात तो यह है कि भाजपा में आवाज उठना ही बन्द हो गयी है। इमरजैंसी के दौरान इन्दिरा गाँधी की चापलूसी करने इन्दिरा को इंडिया बतलाने या संजय गाँधी के जूते उठाने वालों की सबसे कटु निन्दा भाजपा के नेता ही करते रहे हैं। काश आपने मध्य प्रदेश के वर्तमान पार्टी अध्यक्ष द्वारा मोदी और शिवराज को भगवान व देवता बताये जाने वाले भाषण सुने हों। जब राम जेठमलानी, शांता कुमार, आर के सिंह, या शत्रुघ्न सिन्हा कोई अलग बात कहते हैं तो सबके मुँह में दही जम जाता है। उन बयानों पर कोई तर्क वितर्क नहीं होता। अमित शाह जैसे व्यक्ति को पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में बिना चूं चपड़ के सह लिया जाता है। आखिर ऐसा क्या डर है कि आप जैसा वरिष्ठ नेता भी अपनी बात को घुमा फिरा कर कहे जिसका कोई स्पष्ट सन्देश नहीं जा रहा हो। क्या जीवन की लम्बाई इतनी कीमती है कि आदमी अपनी जुबान कटा कर और हाथ पैर बँधवा कर भी बना रहे। मुँह से गों गों की ऐसी आवाज निकाले जो किसी की समझ में ही नहीं आये। आप जैसे अनुभवी व्यक्ति को संकेत मिल रहे होंगे कि असंतोष कितना है किंतु वह अन्दर ही अन्दर खलबला रहा है। जार्ज आरवेल के ऎनिमल फार्म  सोल्झेनित्सिन के वार्ड नम्बर नौ या ‘1984’  से भी बुरे हाल हैं।
आदरणीय, इस आवाज को बाहर निकलने के लिए कुछ कीजिए बरना यह अन्दर ही अन्दर जहर बन जायेगी और यह जहर कब, कहाँ, कैसे फूटेगा यह कहा नहीं जा सकता।
 
डिस्क्लेमर:- उपर्युक्त लेख में वक्त किए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत हैं, और आवश्यक तौर पर न्यूज़क्लिक के विचारों को नहीं दर्शाते ।
अडवाणी
पार्टी लोकतंत्र
भाजपा

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?

बिहार: सामूहिक बलत्कार के मामले में पुलिस के रैवये पर गंभीर सवाल उठे!


बाकी खबरें

  • language
    न्यूज़क्लिक टीम
    बहुभाषी भारत में केवल एक राष्ट्र भाषा नहीं हो सकती
    05 May 2022
    क्या हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना चाहिए? भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष से लेकर अब तक हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने की जद्दोजहद कैसी रही है? अगर हिंदी राष्ट्रभाषा के तौर पर नहीं बनेगी तो अंग्रेजी का…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    "राजनीतिक रोटी" सेकने के लिए लाउडस्पीकर को बनाया जा रहा मुद्दा?
    05 May 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में अभिसार सवाल उठा रहे हैं कि देश में बढ़ते साम्प्रदायिकता से आखिर फ़ायदा किसका हो रहा है।
  • चमन लाल
    भगत सिंह पर लिखी नई पुस्तक औपनिवेशिक भारत में बर्तानवी कानून के शासन को झूठा करार देती है 
    05 May 2022
    द एग्ज़िक्युशन ऑफ़ भगत सिंह: लीगल हेरेसीज़ ऑफ़ द राज में महान स्वतंत्रता सेनानी के झूठे मुकदमे का पर्दाफ़ाश किया गया है। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    गर्भपात प्रतिबंध पर सुप्रीम कोर्ट के लीक हुए ड्राफ़्ट से अमेरिका में आया भूचाल
    05 May 2022
    राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अगर गर्भपात पर प्रतिबंध लगाने वाला फ़ैसला आता है, तो एक ही जेंडर में शादी करने जैसे दूसरे अधिकार भी ख़तरे में पड़ सकते हैं।
  • संदीपन तालुकदार
    अंकुश के बावजूद ओजोन-नष्ट करने वाले हाइड्रो क्लोरोफ्लोरोकार्बन की वायुमंडल में वृद्धि
    05 May 2022
    हाल के एक आकलन में कहा गया है कि 2017 और 2021 की अवधि के बीच हर साल एचसीएफसी-141बी का उत्सर्जन बढ़ा है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License