NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
अपराध
समाज
भारत
राजनीति
अलवर गैंगरेप: सिस्टम की संवेदनहीनता से उपजे कुछ गंभीर सवाल 
पति के सामने दलित महिला का गैंगरेप, फिर आरोपियों द्वारा उसका वीडियो वायरल करना और शिकायत को लेकर पुलिस की हीला-हवाली। अगर इस पूरे मामले को ध्यान से देखें तो समझ में आएगा कि हमारे सिस्टम ने संवेदनहीनता के नए प्रतिमान गढ़ने का काम किया है।

अमित सिंह
11 May 2019
सांकेतिक तस्वीर

राजस्थान के अलवर ज़िले के द्वारापुरा गांव में रहने वाले पति और पत्नी 26 अप्रैल को बाइक से बाजार जा रहे थे। दोपहर के तीन-सवा तीन बजे थे। बीच रास्ते में दो बाइक पर सवार 5 लोगों ने उन्हें रोक लिया। इसके बाद वे पांचों लोग दंपति को एक सुनसान जगह पर ले गए। युवकों ने महिला का उसके पति के सामने गैंगरेप किया।

इस घृणित वारदात को अंजाम देने वाले अपराधियों के हौसले कितने बुलंद थे इस बात का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता था है कि उन्होंने 3 घंटे तक बलात्कार, मारपीट और लूटपाट की और पूरी घटना का वीडियो बनाकर इस दंपित को ब्लैकमेल करने की भी कोशिश की।

इसके बाद 30 अप्रैल को पीड़ित के परिजन शिकायत लेकर पुलिस के पास पहुंचे। पुलिस ने इस मामले में एफआईआर दर्ज नहीं की। 

स्थानीय विधायक कांतिलाल मीणा के दबाव पर पुलिस ने 2 मई को एफआईआर दर्ज की। इसके बाद भी पांचों आरोपियों को नहीं पकड़ा गया। पुलिस द्वारा पीड़िता के मेडिकल में भी देर की गई। 2 मई को पीड़िता का मेडिकल नहीं हो पाया क्योंकि सरकारी अस्पताल में महिला डॉक्टर नहीं थी। 3 मई को पीड़िता का मेडिकल हुआ। मेडिकल रिपोर्ट के बारे में अब भी पीड़ित परिवार को कोई जानकारी नहीं है। 6 मई को राजस्थान में मतदान होना था, पुलिस ने इसका हवाला देते हुए मामले में ढील दे दी। 

वहीं आरोपियों को जब पता चला उनकी शिकायत पुलिस से हो रही तो उन्होंने सोशल मीडिया पर पीड़िता के वीडियो व तस्वीरें जारी कर दी। वीडियो जारी होने के बाद विभिन्न सामाजिक संगठनों ने पुलिस पर दबाव बनाया। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा।

क्या किया सरकार ने?

ये दु:खद घटना उस सरकार के कार्यकाल में हुई है जिसने अभी हाल ही में राजस्थान में विधानसभा चुनाव में कानून व्यवस्था के मुद्दे पर जीत दर्ज की थी। कांग्रेस का आरोप था कि पूर्ववर्ती वसुंधरा राजे के शासनकाल में राज्य की कानून व्यवस्था अपने सबसे खराब दौर से गुजर रही थी।

राज्य की गहलोत सरकार ने मामला सामने आने के बाद एसपी राजीव पचर को अगला आदेश आने तक छुट्टी पर भेज दिया है। इसके अलावा थानागाजी पुलिस स्टेशन के दो एसएचओ भी हटाए जा चुके हैं।

पुलिस ने अशोक गुर्जर, हंसराज गुर्जर, इंद्रराज गुर्जर, महेश गुर्जर और छोटेलाल गुर्जर नाम के आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर आईपीसी की धारा 147, 149, 323, 341, 354, 376-D, 506 और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।

वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद एफ़आईआर में आईटी एक्ट का कहीं ज़िक्र नहीं किया गया है। हालांकि पुलिस ने पीड़ित पक्ष को आईटी ऐक्ट के तहत केस दर्ज किए जाने का भरोसा दिलाया है।

हालांकि तमाम तरह के दबाव पड़ने के बाद पुलिस और सरकार हरकत में आई है लेकिन जिस तरह मामले की शुरुआत में उनका रवैया रहा है। वह एक बेहतर समाज के तौर पर हमारे ऊपर सवालिया निशान खड़ा करता है। यह रवैया बताता है कि आखिरी पंक्ति में खड़े लोगों पर हुआ अत्याचार हमें झकझोरता नहीं है।

हम ऐसी स्थिति में न्याय की उम्मीद क्या करें जब सारी ताकत प्राथमिकी ही दर्ज कराने में खर्च हो जाती है और सरकारी तंत्र अपने ढर्रे पर ही काम कर रहा होता है।

महिला और दलित 

महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचार को लेकर राजस्थान हमेशा से देश के शीर्ष राज्यों में शुमार है। 2016 के बाद नेशनल क्राइम ब्यूरो ने अभी तक आंकड़ें जारी नहीं किए हैं। लेकिन 2016 के सरकारी आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं के साथ इस वर्ष हुए अत्याचारों को लेकर कुल 3.38 लाख मामले दर्ज हुए थे।

आंकड़ें बताते हैं कि महिलाओं के साथ रेप के मामलों में राजस्थान तीसरे नंबर पर था। अकेले राजस्थान में साल 2016 में 3291 रेप के केस दर्ज हुए थे। जिस हिसाब से पिछले कुछ दिनों में गैंग रेप के मामले निकलकर आए हैं, वो आंकड़ा भयावह है। 

इस मामले में पीड़ित महिला दलित समुदाय की है। राजस्थान में काफ़ी समय से हम देख रहे हैं कि दलितों के प्रति क्रूरता बढ़ रही है। हत्याएं भी हो रही हैं तो बहुत जघन्य क़िस्म की हत्याएं हो रही हैं।

2016 के नेशनल क्राइम ब्यूरो के आंकड़ों के मुताबिक दलितों के साथ अत्याचार के मामले में राजस्थान देश में दूसरे नंबर पर है। प्रदेश में 2016 में दलित उत्पीड़न के 5,134 मामले दर्ज किए गए।

इस मामले में भी पीड़िता, महिला होने के साथ ही दलित समुदाय की है। इसलिए शासन, प्रशासन, सरकार और समाज के कथित ठेकेदारों को इससे फर्क नहीं पड़ा लेकिन इस घटना ने संवेदनहीनता के नए प्रतिमान स्थापित किए हैं। फिलहाल दुनिया में किसी भी देश में इस तरह की घटना को सामान्य नहीं माना जाएगा। इसके बाद यह कहा जा सकता है कि एक समाज के रूप में हम असंवदेनशील साबित हुए हैं।

 

Dalit atrocities
Rape of Dalit Woman
Alwar
Rajasthan
Rajasthan Police
SC/ST Prevention of Atrocities Act
Thanagazi
Caste Atrocities
Gang Rape in Alwar

Related Stories

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

न्याय के लिए दलित महिलाओं ने खटखटाया राजधानी का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश: योगी के "रामराज्य" में पुलिस पर थाने में दलित औरतों और बच्चियों को निर्वस्त्र कर पीटेने का आरोप

राजस्थान: रेप के आरोपी ने दोस्तों के साथ मिलकर दलित लड़की पर चाकू से किया हमला

राजस्थान में दलित युवक की पीट-पीटकर हत्या, तमिलनाडु में चाकू से हमला कर ली जान

राजस्थान: एक सप्ताह के भीतर दुष्कर्म के आधा दर्जन से अधिक मामले दर्ज, गहलोत सरकार की क़ानून व्यवस्था फेल!

बिहार: मुखिया के सामने कुर्सी पर बैठने की सज़ा, पूरे दलित परिवार पर हमला

त्रिपुरा: भीड़ ने की तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या, आख़िर कौन है बढ़ती लिंचिंग का ज़िम्मेदार?

राजस्थान : फिर एक मॉब लिंचिंग और इंसाफ़ का लंबा इंतज़ार


बाकी खबरें

  • bharat ek mauj
    न्यूज़क्लिक टीम
    भारत एक मौज: क्यों नहीं हैं भारत के लोग Happy?
    28 Mar 2022
    'भारत एक मौज' के आज के एपिसोड में संजय Happiness Report पर चर्चा करेंगे के आखिर क्यों भारत का नंबर खुश रहने वाले देशों में आखिरी 10 देशों में आता है। उसके साथ ही वह फिल्म 'The Kashmir Files ' पर भी…
  • विजय विनीत
    पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर
    28 Mar 2022
    मोदी सरकार लगातार मेहनतकश तबके पर हमला कर रही है। ईपीएफ की ब्याज दरों में कटौती इसका ताजा उदाहरण है। इस कटौती से असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सर्वाधिक नुकसान होगा। इससे पहले सरकार ने 44 श्रम कानूनों…
  • एपी
    रूस-यूक्रेन अपडेट:जेलेंस्की के तेवर नरम, बातचीत में ‘विलंब किए बिना’ शांति की बात
    28 Mar 2022
    रूस लंबे समय से मांग कर रहा है कि यूक्रेन पश्चिम के नाटो गठबंधन में शामिल होने की उम्मीद छोड़ दे क्योंकि मॉस्को इसे अपने लिए खतरा मानता है।
  • मुकुंद झा
    देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर
    28 Mar 2022
    सुबह से ही मज़दूर नेताओं और यूनियनों ने औद्योगिक क्षेत्र में जाकर मज़दूरों से काम का बहिष्कार करने की अपील की और उसके बाद मज़दूरों ने एकत्रित होकर औद्योगिक क्षेत्रों में रैली भी की। 
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    माले का 11वां राज्य सम्मेलन संपन्न, महिलाओं-नौजवानों और अल्पसंख्यकों को तरजीह
    28 Mar 2022
    "इस सम्मेलन में महिला प्रतिनिधियों ने जिस बेबाक तरीक़े से अपनी बातें रखीं, वह सम्मेलन के लिए अच्छा संकेत है।"
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License