NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
नज़रिया
भारत
राजनीति
महंगाई और बेरोज़गारी के बीच अर्थव्यवस्था में उछाल का दावा सरकार का एक और पाखंड है
जून 2021 में बेरोजगारी दर 9.7 फ़ीसदी थी। जुलाई में इसमें थोड़ा सा सुधार हुआ और यह 6.96 फीसदी पर पहुंच गई। लेकिन फिर से इसमें गिरावट आई। अब अगस्त की बेरोजगारी दर 8.32 फ़ीसदी है। मतलब अब भी भारत की अर्थव्यवस्था में बेरोजगारों की फौज पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा है। अब भी बेरोजगारी दर 6 फ़ीसदी से नीचे नहीं आ रही है। बेरोजगारी और बेकारी लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है।
अजय कुमार
05 Sep 2021
unemployment

सरसों का तेल ₹200 प्रति लीटर से अधिक कीमत पर बिक रहा है। खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाला गैस सिलेंडर कई इलाकों में ₹1000 प्रति सिलेंडर से अधिक दाम पर मिल रहा है। पेट्रोल की कीमतों के बारे में तो आप जानते ही हैं कि पिछले कई महीने से भारत सरकार ₹100 प्रति लीटर से अधिक कीमत पर पेट्रोल बेच कर बंपर कमाई कर रही है।

जेब में अगर ठीक-ठाक पैसा न रहे तो न ही भरपेट खाना मिल पाएगा और न ही जिंदगी की गाड़ी ढंग से आगे बढ़ पाएगी। इन सारी चुनौतियों के बीच अगर लोगों को नौकरी ही न मिले तब क्या होगा? अगर नौकरी चले जाने का डर सर पर हमेशा मंडराते रहे तब सोचिए जिंदगी किस मनोदशा से गुजरती होगी?

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी के आंकड़ों के मुताबिक भारत में जुलाई महीने में तकरीबन 39.97 करोड़ लोग काम कर रहे थे। अगस्त महीने में काम करने वाले लोगों की संख्या घटकर 39.78 करोड़ रह गई है। इसका मतलब है कि केवल 1 महीने में तकरीबन 15 लाख से अधिक लोगों ने अपनी नौकरियां गंवा दी है।

जून 2021 में बेरोजगारी दर 9.7 फ़ीसदी थी। जुलाई में इसमें थोड़ा सा सुधार हुआ और यह 6.96 फीसदी पर पहुंच गई। लेकिन फिर से इसमें गिरावट आई। अब अगस्त की बेरोजगारी दर 8.32 फ़ीसदी है। मतलब अब भी भारत की अर्थव्यवस्था में बेरोजगारों की फौज पिछले 45 सालों में सबसे ज्यादा है। अब भी बेरोजगारी दर 6 फ़ीसदी से नीचे नहीं आ रही है। बेरोजगारी और बेकारी लोगों की सबसे बड़ी परेशानी बनी हुई है।

अगस्त महीने के दौरान तकरीबन 10 लाख से अधिक नौकरियां मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से गायब हुई है। अर्थशास्त्री संतोष मेहरोत्रा की माने तो भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को छोड़कर लोग कृषि क्षेत्र की तरफ जिंदगी गुजारने के लिए बढ़े थे। कोरोना के दौर में शहरों से गांव की तरफ पलायन हुआ था। कृषि क्षेत्र में साल 2017-18 में कुल कार्यबल का 37 फ़ीसदी हिस्सा लगा हुआ था। 2020-21 में यह बढ़कर 40 फ़ीसदी तक पहुंच चुका है। नई नौकरियों की संभावना वाली जगह तकरीबन 60 फ़ीसदी से अधिक की हिस्सेदारी भारत के ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद खेती किसानी है। यानी लोग उद्योग धंधे के कामकाज को छोड़कर कृषि क्षेत्र पर बढ़ रहे हैं। इसका मतलब है कि पहले से ही सबसे अधिक कार्य बल को संभालने वाले कृषि क्षेत्र में और अधिक लोग आए हैं और इनके आने की वजह से मजदूरी पहले से भी कम हुई है।

ऐसे में सोच कर देखिए कि ₹1000 प्रति सिलेंडर से अधिक की कीमत देकर कितने परिवार गैस सिलेंडर खरीद पाएंगे? गैस सिलेंडर खरीदने वाले कितने परिवार लकड़ी पर खाना बनाने की तरफ बढ़ गए होंगे। दिसंबर 2019 की CAG रिपोर्ट है कि 35 प्रतिशत लाभार्थी कीमत बढ़ने के कारण सिलेंडर नहीं भरवा रहे थे। इसी रिपोर्ट में यह भी बताया गया था उज्जवला योजना से जुड़े तकरीबन 50 फ़ीसदी ग्राहकों ने दोबारा सिलेंडर नहीं भरवाया। इसका मतलब है कि इस भयंकर बेरोजगारी में इस संख्या में और अधिक इजाफा हुआ होगा। खाना पकाना और ढंग से खाना खाना कईयों के लिए बहुत कठिन काम हो गया होगा।

इसी तरह से सोचिए कि ₹200 प्रति लीटर से अधिक का सरसों का तेल कौन खरीद पाता होगा। बिहार के गांव से ऐसी खबरें आ रही हैं की औरतें सब्जी में तेल डालने की बजाय उसे उबाल कर बना रही हैं। दुकानों पर सरसों के तेल की खरीददारी कम हो गई है।

बेरोजगारी के यह आंकड़े हमें क्या बताते हैं? भारत में सरकारी क्षेत्र रोजगार का बहुत बड़ा क्षेत्र नहीं है। जुलाई में महंगाई भत्ता बढ़ने के वक्त बताया गया था कि केंद्रीय कर्मचारियों की 40 लाख पदों की तुलना में केंद्रीय कर्मचारियों की संख्या महज 31 लाख के करीब है। निजी और सरकारी क्षेत्र मिलाकर कार्यबल का महज 6 फ़ीसदी हिस्सा फॉर्मल सेक्टर के तौर पर काम करता है। जिसे महीने में सैलरी मिलती है और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं मिलती हैं। बाकी सभी अनौपचारिक क्षेत्र में कार्यरत हैं। मतलब अगर नौकरियों की बदतर स्थिति है तो इसका मतलब यह है कि जो पहले से बहुत मुश्किल में जिंदगी गुजार रहे थे, उन पर बेरोजगारी की सबसे बड़ी मार पड़ी होगी. कईयों की जिंदगी की छत ढह गई होगी।

लोगों की जिंदगी महंगाई और बेरोजगारी के अंधेरों में भटक रही है। लेकिन फिर भी इसी समय बरगलाने के लिए हेड लाइन बनाई जाती है कि जीडीपी में 20 फ़ीसदी का उछाल देखा गया। जबकि हकीकत यह है कि भारत की जीडीपी अब भी कोरोना के पहले के कहर से पार नहीं हो पाई है। जानकारों की माने तो भारत की अर्थव्यवस्था अब भी कोरोना के पहले की जीडीपी से 9 फ़ीसदी पीछे है।

बेरोजगारी की इस दशा को जीडीपी के आंकड़ों से पढ़ कर देखा जाए तो और भयंकर हालात दिखने लगता है। इंडियन एक्सप्रेस ने वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही के जीडीपी को विश्लेषण करते हुए बताया कि प्रति व्यक्ति खर्चे की दर अब भी साल 2017- 18 से कम है। यानी लोगों की जेब में पैसा अब भी चार साल पहले से कम मौजूद है। जिसके पीछे तमाम कारण हो सकते हैं। खास तौर पर बेरोजगारी एक अहम कारण हो सकता है। साथ में लोगों को यह भी लग सकता है कि उनकी नौकरी कभी भी जा सकती है। वरिष्ठ आर्थिक पत्रकार टी नायनन बिजनेश स्टैंडर्ड अखबार में लिखते है कि प्रति व्यक्ति खर्च की दर 2017-18 कम है। इसका मतलब है कि मार्च में पीयू रिसर्च द्वारा प्रसारित आंकड़े जिसमें कहा गया था कि भारत के निम्न मध्य वर्ग के तकरीबन साढ़े तीन करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे चले गए हैं, वह स्थति अब भी नहीं सुधरी है। इस दौर में अमीरों ने भी खूब कमाई की है। यानी अमीर और गरीब का फासला पहले से बहुत अधिक बढ़ा है।

इस तरह का हाल क्या बताता है? यह बताता है कि मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के नाम पर सरकार जिस तरह की विकास का प्रोपेगेंडा छोड़ती है वह सब के सब बेअसर रहे हैं। सरकार की नीतियां इस तरह की है कि लोगों को रोजगार नहीं मिल रहा है। सरकारी कंपनियों को बेच कर राजस्व भरपाई से जुड़ी जिस तरह की भी घोषणाए हो रही है, उनका रोजगार पैदा करने में कोई योगदान नहीं रहा है। अमीरी और गरीबी की खाई के बीच तमाम लोग ऐसे हैं जिन्हें इस समय रोजगार की सख्त जरूरत है। लेकिन भारत सरकार की आर्थिक नीतियां बेरोजगारों को रोजगार देने से कोसों दूर चल रहे हैं

unemployment
economic crises
Inflation

Related Stories

जनादेश-2022: रोटी बनाम स्वाधीनता या रोटी और स्वाधीनता

हम भारत के लोगों की असली चुनौती आज़ादी के आंदोलन के सपने को बचाने की है

हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल

हम भारत के लोग : हम कहां-से-कहां पहुंच गये हैं

संविधान पर संकट: भारतीयकरण या ब्राह्मणीकरण

हम भारत के लोग:  एक नई विचार श्रृंखला

कैसे भाजपा की डबल इंजन सरकार में बार-बार छले गए नौजवान!

बेरोज़गारी से जूझ रहे भारत को गांधी के रोज़गार से जुड़े विचार पढ़ने चाहिए!

रसोई गैस के दाम फिर बढ़े, महंगाई की जबरदस्त मार

कभी रोज़गार और कमाई के बिंदु से भी आज़ादी के बारे में सोचिए?


बाकी खबरें

  • fact check
    किंजल
    UP का वीडियो दिल्ली के सरकारी स्कूल में मदरसा चलाने के दावे के साथ वायरल
    30 Nov 2021
    वीडियो को गौर से देखने पर ऑल्ट न्यूज़ ने स्कूल के बोर्ड पर ‘प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर’ लिखा हुआ पाया. प्राथमिक विद्यालय मिर्ज़ापुर, गाज़ियाबाद के विजयनगर इलाके में है. यानी, ये घटना उत्तर प्रदेश की है…
  • tripura
    संदीप चक्रवर्ती, शांतनु सरकार
    त्रिपुरा नगर निकाय चुनावों में ‘धांधली’ के चलते विपक्ष का निराशाजनक प्रदर्शन 
    30 Nov 2021
    यह पहली बार नहीं है जब राज्य को चुनाव पूर्व हिंसा और चुनाव के दिन ‘धांधली’ देखने को मिल रही है, ऐसा ही कुछ दो साल पहले पंचायत चुनावों के दौरान भी देखने में आया था।
  •  Pentagon
    सोनाली कोल्हटकर
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट मीडिया की सुर्खियां क्यों नहीं बनता?
    30 Nov 2021
    पेंटागन का भारी-भरकम बजट आम अमेरिकियों के कल्याण के लिए मिलने वाले सरकारी लाभों से चुराया जा रहा है। लेकिन कॉरपोरेट मीडिया या नीति-निर्माता इसे मानने के लिए तैयार नहीं हैं, इस मुद्दे पर उनसे बहस की…
  • Rajya Sabha
    भाषा
    राज्यसभा की ऐतिहासिक सबसे बड़ी कार्रवाई में 12 सांसद निलंबित
    30 Nov 2021
    राज्यसभा के 12 सांसदों को वर्तमान शीत सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित कर दिया गया है। यह उच्च सदन के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई है। इससे पहले 2020 में आठ सांसदों को निलंबित किया गया था,…
  • media
    अभिषेक पाठक
    कृषि कानून वापसी पर संसद की मुहर, लेकिन गोदी मीडिया का अनाप-शनाप प्रलाप जारी!
    30 Nov 2021
    आज के दौर में मोदी सरकार शोले फ़िल्म में अमिताभ बच्चन के उस सिक्के जैसी हो गई है जिसके दोनों ओर 'मास्टरस्ट्रोक' लिखा है। गोदी मीडिया के उन एंकरों पर तरस भी आता है जिन्होंने सालभर इस कानून और सरकार का…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License