NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
आरएन रवि का नगालैंड का राज्यपाल बनने के मायने 
नगालैंड के राज्यपाल के पास विधि-व्यवस्था के संबंध में अतिरिक्त शक्ति है जिससे अंतिम समझौता संभव हो सकता है।
विवान एबन
23 Jul 2019
Implications of RN Ravi as Nagaland Governor
mage Courtesy: scroll.in

भारत सरकार की तरफ से इंडो-नगा वार्ता के वार्ताकार आरएन रवि को 20 जुलाई को नगालैंड का नया राज्यपाल नियुक्त किया गया है। इस घोषणा के बाद मिली जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। कुछ लोगों का मानना है कि इनके नियुक्ति से वार्ता को गति मिलेगी जबकि अन्य लोगों का मानना है कि इससे वार्ता में रुकावट पैदा होगी।

लगता है ये प्रतिक्रियाएं उन अटकलों के आधार पर हैं कि रवि अब वार्ताकार नहीं होंगे और अगर किसी नए व्यक्ति को वार्ता के लिए नियुक्त किया जाता है तो उन्हें नए सिरे से इसकी शुरुआत करनी होगी। हालांकि हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि ऐसी परिस्थिति नहीं आएगी। नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालैंड (इसाक-मुइवा) [एनएससीएन(आई-एम)] ने अभी तक उनकी नियुक्ति पर कोई प्रेस विज्ञप्ति जारी नहीं किया है। 

हालांकि, राज्यपाल और वार्ताकार के रूप में दोहरी भूमिका संभालने पर आरएन रवि को इंडो-नगा शांति वार्ता में किसी भी अन्य वार्ताकार की तुलना में अब तक सबसे ज्यादा शक्ति प्राप्त होगी। ये अनुच्छेद 371 ए के प्रावधानों में निहित है।

अनुच्छेद 371 ए में नगालैंड के लिए विशेष प्रावधान हैं। विशिष्ट कानून (कस्टमरी लॉ) के संदर्भ में यह नगालैंड को काफी स्वायत्तता प्रदान करता है। हालांकि राज्यपाल अपने कर्तव्यों के मामले में इसी तरह लगभग स्वायत्त हैं।

खंड (1)(बी) के अनुसारः

'नगालैंड के राज्यपाल का नगालैंड राज्य में विधि-व्यवस्था के संबध में तब तक विशेष उत्तरदायित्व रहेगा जब तक इस राज्य के गठन के ठीक पहले नगा पहाड़ी त्युएनसांग क्षेत्र में विद्यमान आंतरिक अशांति, उसकी राय में, उसमें या उसके किसी भाग में बनी रहती है और राज्यपाल, इस संबंध में अपने कृत्यों का निर्वहन करने में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में अपने व्यक्तिगत निर्णय का इस्तेमाल मंत्रि-परिषद से परामर्श के पश्चात्‌ करेगा: बशर्ते यदि यह प्रश्न उठता है कि कोई मामला ऐसा मामला है या नहीं जिसके संबंध में राज्यपाल से इस उपखंड के अधीन अपेक्षा की गई है कि वह अपने व्यक्तिगत निर्णय का इस्तेमाल करके कार्य करे तो राज्यपाल के अपने विवेक के अनुसार लिया गया निर्णय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की विधिमान्यता इस आधार पर प्रश्नगत नहीं की जाएगी कि उसे अपने व्यक्तिगत निर्णय का प्रयोग करके कार्य करना चाहिए था या नहीं : बशर्ते यह और कि यदि राज्यपाल से प्रतिवेदन मिलने पर या अन्यथा राष्ट्रपति का यह समाधान हो जाता है कि अब यह आवश्यक नहीं है कि नगालैंड राज्य में विधि-व्यवस्था के संबंध में राज्यपाल का विशेष उत्तरदायित्व रहे तो वह, आदेश द्वारा, निर्देश दे सकेगा कि राज्यपाल का ऐसा उत्तरदायित्व उस तारीख से नहीं रहेगा जो आदेश में विनिर्दिष्ट की जाए;'


अब तक नगालैंड के राज्यपाल को विधि-व्यवस्था के प्रति विशेष जिम्मेदारियों से मुक्त करने का कोई आदेश नहीं दिया गया है। इसके अलावा राज्यपाल द्वारा इस संबंध में की गई किसी भी कार्रवाई पर प्रश्न नहीं उठाया जा सकता है। इस तरह राज्यपाल के पास काफी शक्ति है।

रवि के नेतृत्व में ही अगस्त 2015 में भारत सरकार और एनएससीएन (आईएम) के बीच समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे। बाद में वे इस फ्रेमवर्क समझौते में अन्य नगा नेशनल पॉलिटिकल ग्रुप्स (एनएनपीजी) को शामिल करने में कामयाब रहे। इसके अलावा उन्होंने वार्ता में जुड़े समूहों को दोषी ठहराते हुए वार्ता की धीमी प्रगति पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि वे व्यावहारिक समाधान तलाशने को तैयार नहीं हैं, अर्थात् अन्य मांगों के साथ अलग झंडा और पासपोर्ट के संबंध में।

नगालैंड के निवर्तमान गवर्नर पीबी आचार्य ने कहा था कि 2019 में अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। हालांकि 2015 के बाद से समय-समय पर अलग-अलग समय सीमा के संबंध में इस तरह के बयान दिए गए हैं। इसलिए अगर नयी तारीख को यह सफल हो जाता है तो राज्यपाल और वार्ताकार दोनों की भूमिकाओं को एक साथ निभाना होगा।

यह स्पष्ट है कि संप्रभुता की मांग को छोड़ दिया गया है और विशिष्ट साझा संप्रभुता के साथ प्रतिस्थापित किया गया है। इसके अलावा लगता है कि क्षेत्रीय एकीकरण को भी नकार दिया गया है। ऐसा प्रतीत होता है कि छोड़े जाने वाले सभी प्रतीकात्मक मांगें हैं, जो 'भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में सुरक्षा स्थिति पर' गृह मामलों की संसदीय स्थायी समिति की 213 वीं रिपोर्ट में भी शामिल हैं।

यह संभव है कि नगालैंड के नए राज्यपाल नगालैंड में वित्त और भर्ती की समस्या को दूर करने के लिए नगा आंदोलन के अपने पद और ज्ञान का इस्तेमाल करेंगे। यह ध्यान में रखते हुए कि एनएससीएन (आईएम) ने अरुणाचल प्रदेश के सुदूर पूर्वी भाग में मज़बूत उपस्थिति विकसित की है और अभी भी उत्तरी मणिपुर में मज़बूत पकड़ है, यहां से धन और भर्ती प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

दूसरी ओर ऑपरेशन सनशाइन के भाग एक और दो को ध्यान में रखते हुए वह भारत के नगा सशस्त्र राजनीतिक संगठनों और म्यांमार के बीच अंतिम ब्रेक में निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं। हालांकि सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करनी होगी कि असंतुष्ट समूह फिर से संघर्ष शुरू न करें।

Nagaland
RN Ravi
governor of nagaland
NSCN
NSCN(IM)
Indo-Naga Talks
framwork Agreement
final Agreement

Related Stories

नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”

2021: हिंसक घटनाओं को राजसत्ता का समर्थन

नगा संगठनों ने अफस्पा की अवधि बढ़ाये जाने की निंदा की

नागालैंड ओटिंग नरसंहार और लोकतंत्र में अपवाद की स्थिति

कुन्नूर से नागालैंड: दो अंत्येष्टि, योग्य और अयोग्य पीड़ित

नगालैंड गोलीबारी : मारे गए लोगों के परिवारों ने की न्याय की मांग, मुआवज़ा ठुकराया

क्यों प्रत्येक भारतीय को इस बेहद कम चर्चित किताब को हर हाल में पढ़ना चाहिये?

नगालैंड व कश्मीर : बंदूक को खुली छूट

नागालैंड: विपक्षहीन राजनीति के सबक़

नागालैंड की घटना पर सीएम रियो ने कहा, 'आफ़्स्पा कठोर है, इसे हटाना ज़रूरी!'


बाकी खबरें

  • No more rape
    सोनिया यादव
    दिल्ली गैंगरेप: निर्भया कांड के 9 साल बाद भी नहीं बदली राजधानी में महिला सुरक्षा की तस्वीर
    29 Jan 2022
    भारत के विकास की गौरवगाथा के बीच दिल्ली में एक महिला को कथित तौर पर अगवा कर उससे गैंग रेप किया गया। महिला का सिर मुंडा कर, उसके चेहरे पर स्याही पोती गई और जूतों की माला पहनाकर सड़क पर तमाशा बनाया गया…
  • Delhi High Court
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत
    29 Jan 2022
    दिल्ली हाईकोर्ट ने 1 फरवरी तक सांसी कैंप को प्रोटेक्शन देकर राहत प्रदान की। रेलवे प्रशासन ने दिल्ली हाईकोर्ट में सांसी कैंप के हरियाणा में स्थित होने का मुद्दा उठाया किंतु कल हुई बहस में रेलवे ने…
  • Villagers in Odisha
    पीपल्स डिस्पैच
    ओडिशा में जिंदल इस्पात संयंत्र के ख़िलाफ़ संघर्ष में उतरे लोग
    29 Jan 2022
    पिछले दो महीनों से, ओडिशा के ढिंकिया गांव के लोग 4000 एकड़ जमीन जिंदल स्टील वर्क्स की एक स्टील परियोजना को दिए जाने का विरोध कर रहे हैं। उनका दावा है कि यह परियोजना यहां के 40,000 ग्रामवासियों की…
  • Labour
    दित्सा भट्टाचार्य
    जलवायु परिवर्तन के कारण भारत ने गंवाए 259 अरब श्रम घंटे- स्टडी
    29 Jan 2022
    खुले में कामकाज करने वाली कामकाजी उम्र की आबादी के हिस्से में श्रम हानि का प्रतिशत सबसे अधिक दक्षिण, पूर्व एवं दक्षिण पूर्व एशिया में है, जहाँ बड़ी संख्या में कामकाजी उम्र के लोग कृषि क्षेत्र में…
  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड : नदियों का दोहन और बढ़ता अवैध ख़नन, चुनावों में बना बड़ा मुद्दा
    29 Jan 2022
    नदियों में होने वाला अवैज्ञानिक और अवैध खनन प्रकृति के साथ-साथ राज्य के खजाने को भी दो तरफ़ा नुकसान पहुंचा रहा है, पहला अवैध खनन के चलते खनन का सही मूल्य पूर्ण रूप से राज्य सरकार के ख़ज़ाने तक नहीं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License