NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अशांत क्षेत्र में बदलता पड़ोसी देश
अगर विदेशों की यात्राएं निर्णय क्षमता का प्रतीक है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने निस्संदेह जीत हासिल कर लिया है।

गौतम नवलखा
21 Jun 2018
modi

यह दावा किया जाता है कि नरेंद्र मोदी के शासन में भारत ने "संबंध बनाए रखने के अपने दृष्टिकोण को फिर से परिभाषित किया है"। अगर विदेशों की यात्राएं निर्णय क्षमता का प्रतीक है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले चार वर्षों में 44 देशों का दौरा कर बिना संदेह जीत हासिल कर लिया है। उनकी ऊर्जावान कूटनीति के ही कारण पिछले चार वर्षों में भारतीय विदेश और सुरक्षा नीति इसके परिणाम से जूझ रही है। अपने क़रीबी पड़ोस में भारतीय विदेश नीति की विफलता ने इसे मर्मभेदी तरीके से इसे स्वदेश पहुंचा दिया है। इसकी सराहना करने के लिए विदेशी और रक्षा नीति को नियंत्रित करने वाले निर्धारित सिद्धांतों के संदर्भ में इसे स्थापित करने योग्य है।

 

यद्यपि भारत के पास 'राष्ट्रीय रक्षा नीति' नामक दस्तावेज़ नहीं है फिर भी दिशा-निर्देशों के रूप में नीति मौजूद है जिसे उत्तरोत्तर सरकारों ने पालन किया था। इस पर पूर्व प्रधान मंत्री पी.वी. नरसिंह राव ने वर्ष 1994 में ज़ोर दिया था। संसद में भाषण के दौरान उन्होंने निम्न चार दिशानिर्देशों की ओर इशारा किया था:

 

1. भूमि, समुद्र तथा वायु पर राष्ट्रीय क्षेत्र की रक्षा के साथ साथ हमारी भूमि सीमाओं, द्वीप क्षेत्रों, अपतटीय संपत्तियों और हमारे समुद्री व्यापार मार्गों का उल्लंघन;

 

2. आंतरिक वातावरण को सुरक्षित करना जिससे हमारे देश को धर्म, भाषा, जातीयता या सामाजिक-आर्थिक विसंगति के आधार पर इसकी एकता या प्रगति के लिए किसी भी ख़तरे के खिलाफ सुरक्षित किया जाता है;

 

3. हमारे राष्ट्रीय हितों के अनुरूप सामंजस्यपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देने के लिए हमारे क़रीबी पड़ोसी देश पर प्रभाव का इस्तेमाल करने में सक्षम होना;

 

4. क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के प्रति प्रभावी रूप से योगदान करने में सक्षम होना और हमारे क़रीबी पड़ोस में छोटे राष्ट्रों के अस्थिरता को रोकने के लिए एक प्रभावी विदेशी आकस्मिक क्षमता रखने के लिए जो हमारे लिए प्रतिकूल सुरक्षा प्रभाव डाल सके।

 

 

निस्संदेह दिशानिर्देशों को बदलते समय के साथ सामंजस्य भी रखना चाहिए और इसलिए गंभीर रूप से जांच करने की आवश्यकता है। यद्यपि यदि थोड़े देर के लिए कोई रणनीतिक विाचर के लिए ध्रुवतारा के रूप में इन अपरिवर्तनीय दिशानिर्देशों को स्वीकार करता है तब जो 'क़रीबी पड़ोस' में हो रहा है, संभावित रूप से दक्षिण एशियाई उपमहाद्वीप के बाहर व्यापार और अन्य लिंक के विस्तार को ध्यान में रखते हुए जो कि 'विस्तारित पड़ोस' तक फैला हुआ है। हालांकि भारत सरकार की महत्वाकांक्षा इससे परे है। शांगरी-ला सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री ने नव निर्मित भारत-प्रशांत क्षेत्र में अफ्रीकी तटों से अमेरिका तक फैले हुए भारत के हितों की बात की। भारत के विदेश सचिव ने भारत को "अग्रणी शक्ति" के रूप में बताया न कि "संतुलित करने वाली शक्ति" के रूप में। लेकिन ऐसे सभी दावों के बावजूदभारत का "प्रभाव" अपने पड़ोस में ही खराब हो गया है। परिणामस्वरूप अपने शासन के पांचवें वर्ष में बीजेपी सरकार एक परिवर्तन का संकेत दे रही है।

 

 

टिप्पणीकारों ने नेपाल में प्रधानमंत्री की पहली दो यात्राओं के दौरान नेपाल में सम्मान हासिल करने के साथ-साथ विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल की सहायता करने की ओर ध्यान खींचा है। नेपाल के राजनीतिक दलों को संविधान में बदलावों को स्वीकार करने के लिए दबाव डालने की ओर ध्यान खींचा है जिसे कुछ मधेशी पार्टियों द्वारा मांग की गई थी। लेकिन इसने नेपाल के ख़िलाफ़ भी गुप्त रूप से आर्थिक नाकेबंदी कर दी जिससे भारत से या भारत के ज़रिए नेपाल में वस्तुओं केजाने या बाहर निकलने को रोक लगा रहा है। श्रीलंका में भारत श्रीलंका के हमबनटोटा बंदरगाह को विकसित करने के पहले प्रस्ताव पर ध्यान देने में असफल रहाजिसके बाद इस द्वीपीय सरकार ने चीन की तरफ रूख किया। बांग्लादेश के मामले में यद्यपि दोनों देशों के बीच खुशमिज़ाजी विद्यमान है ऐसे कई मुद्दे हैं जिन पर बांग्लादेश को मंजूरी दी जा रही है। यह विशेष रूप से सच है जहां तीस्ता नदी का पानी साझा करने के मुद्दे अनसुलझे हैं और पूर्वी भारत में अवैध बांग्लादेशी मुस्लिम के प्रवेश के संबंध में बीजेपी के अभियान के समान रूप से भावनात्मक मुद्दे हैं। भूटान के मामले की बात करें तो डोकलम गतिरोध ने भूटान को स्पष्ट संदेश भेज दिया कि भारत चीन से आमने-सामने हो सकता है।

फैले हुए पड़ोस की स्थिति कोई अलग नहीं है। मॉरीशस के अलावा मालदीव और सेशेल्स भारत की समुद्री सुरक्षा में प्रमुख हैं। यद्यपि मालदीव के साथ भारत के संबंधों में गिरावट आई जब भारत ने स्थिति को गलत तरीके से व्याख्या किया और विपक्षी नेताओं और उनकी गिरफ्तारी पर विरोध करने का इसका गिरता प्रभाव सामने आया और अब पता चला है कि मालदीव ने भारत के साथ संबंध को स्थिर रखा है: यह चाहता है कि भारत हेलीकॉप्टर का उपहार वापस ले ले और मालदीव में नौकरियां हासिल करने के लिए भारतीयों को हतोत्साहित करता है। भारत के सभी विरोधों के बदले मालदीव की आबादी 400,000 से ज़्यादा नहीं हैं (भारत के1.3 बिलियन आबादी के विपरित)। सेशेल्स में इस सरकार ने घोषणा की है कि एजंप्शन द्वीप के भारत में अधिग्रहण की अब कोई दिलचस्पी नहीं है।

पाकिस्तान के मामले में भारत कट्टरपंथ के साथ आगे बढ़ा है, जिसके चलते उत्तरोत्तर सरकारों ने प्रोपगैंडा के स्वर को उठाया है। न तो 'सर्जिकल स्ट्राइक' जिसके चलते 'पाकिस्तान को 3-4 गुना परेशानी' बढ़ी या न ही बलुचिस्तान पर पाकिस्तान को धमकी ने काम किया है।

यद्यपि भारतीय विदेश मंत्रालय पूर्व राष्ट्रपति मामून अब्दुल गयूम को सजा देने और सुप्रीम कोर्ट के एक जज जिन्होंने ट्रायल की निष्पक्षता के बारे में सवाल उठाया था पूरी तरह मालदीव के खिलाफ था, भारत ने विपक्षी दलों पर शेख हसीना की अवामी लीग सरकार की कार्रवाई का समर्थन करने के रास्ते से अदृश्य हो गया। नेपाल में भारत सरकार ने मधेशियों का समर्थन किया और 'पहाड़ी बनाम तराई' लोगों की एक रवायत को बढ़ावा दिया।

चौंकाने वाली बात यह है कि यद्यपि भारतीय विदेश नीति इस उप-महाद्वीप को अपने पड़ोसी क्षेत्र के रूप में मानता है जहां इसे बड़े बदलावों की दिशा में बाहरी शक्तियों के लिए गैर मेत्रीपूर्ण तरीके से उतारू था, भारत ने अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान के साथ अपनी विदेश सहायता नीति को जोड़ने का फैसला किया है जो बड़ी शक्ति के रूप में चीन के उभरने से डरते हैं। इस तरह यद्यपि नेपाल, अमेरिका और यूरोपीय संघ अब भारत के साथ अपनी सहायता राजनीति का समन्वय करते हैं, भारत हिंद महासागर में द्वीपीय देश के संबंध में अपनी स्थिति को मज़बूत करने के लिए पश्चिमी संधि के सदस्यों का चयन कर रहा है। इसलिए भारत सेशल्स को त्रिपक्षीय "सहयोग" बनाने में फ्रांस के साथ समन्वय कर रहा है। श्रीलंका में चीन को काउंटर करने के लिए यह ट्रिंकोमाली पोर्ट और बंदरगाह के विकास के लिए अनुबंध हासिल करने के लिए जापान का समर्थन कर रहा है।

मुद्दा यह है कि यदि भारत सरकार पड़ोसियों के साथ संबंधों को बेहतर करने की दिशा में आगे बढ़ने के बजाय अपने पड़ोस में अपनी स्थिति बेहतर करने में पश्चिमी गठबंधन की सहायता की तरफ अब देखता है तो क्या हम मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका में 'पसंदीदा' खेल खेल रहे हैं? और इस प्रक्रिया में पसंदीदा खेलने के दीर्घकालिक हानिकारक प्रभाव को भूल रहे हैं? इसलिए जब भारत सरकार "अग्रणी" शक्ति होने के अपने दावे पर मुखर बनी हुई है तो यह न तो क्षमता से समर्थित है और न ही सहायता से।

इसके परिणामस्वरूप एक ऐसा समय जब भारत सरकार या तो नेपाल में अपना सुर बदल रही है या फ्रांस में (सेशेल्स में) या श्रीलंका में राजी करने की कोशिश कर रही है, वह जापान की तरफ देखती है जैसा वह बांग्लादेश (जहां सरकार ने सोनाडिन बंदरगाह के पुनर्निर्माण के चीन के प्रस्ताव के विरोध में मार्ताबली बनाने के लिए जापान के प्रस्ताव का विकल्प चुना) में करती है। इसे भारत के लिए राजनयिक जीत के रूप में देखा गया था। लेकिन यह भारत की अपनी रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति के बारे में सवाल खड़े करता है जब बाहरी शक्तियों को चीन को इसके परिणामों के बारे में बेखबर रखने के क्रम में देश की आजादी और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

Modi
India

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

मोदी का ‘सिख प्रेम’, मुसलमानों के ख़िलाफ़ सिखों को उपयोग करने का पुराना एजेंडा है!

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

कटाक्ष: महंगाई, बेकारी भुलाओ, मस्जिद से मंदिर निकलवाओ! 

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

रूस की नए बाज़ारों की तलाश, भारत और चीन को दे सकती  है सबसे अधिक लाभ


बाकी खबरें

  • channi sidhu
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: ‘अनिवार्य’ वैक्सीन से सिद्धू-चन्नी के ‘विकल्प’ तक…
    23 Jan 2022
    देश के 5 राज्यों में चुनावों का मौसम है, इसलिए खबरें भी इन्हीं राज्यों से अधिक आ रही हैं। ऐसी तमाम खबरें जो प्रमुखता से सामने नहीं आ पातीं  “खबरों के आगे-पीछे” नाम के इस लेख में उन्हीं पर चर्चा होगी।
  • Marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं
    23 Jan 2022
    भारतीय कानून की नज़र में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है। यानी विवाह के बाद औरत सिर्फ पुरुष की संपत्ति के रूप में ही देखी जाती है, उसकी सहमति- असहमति कोई मायने नहीं रखती।
  • Hum Bharat Ke Log
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    महज़ मतदाता रह गए हैं हम भारत के लोग
    23 Jan 2022
    लोगों के दिमाग में लोकतंत्र और गणतंत्र का यही अर्थ समा पाया है कि एक समय के अंतराल पर राजा का चयन वोटों से होना चाहिए और उन्हें अपना वोट देने की कुछ क़ीमत मिलनी चाहिए।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये चुनाव-नियमों से भाजपा फायदे में और प्रियंका के बयान से विवाद
    22 Jan 2022
    कोरोना दौर में चुनाव के नये नियमों से क्या सत्ताधारी पार्टी-भाजपा को फ़ायदा हो रहा है? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रशांत किशोर पर जो बयान दिया; उससे कांग्रेस का वैचारिक-राजनीतिक दिवालियापन…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी की योगी सरकार का फ़ैक्ट चेक, क्या हैं दावे, क्या है सच्चाई
    22 Jan 2022
    एनसीआरबी की रिपोर्ट है कि 2019 की अपेक्षा 2020 में ‘फ़ेक न्यूज़’ के मामलों में 214 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ़ेक न्यूज़ के जरिए एक युद्ध सा छेड़ दिया गया है, जिसके चलते हम सच्चाई से कोसो दूर होते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License