NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बागानों को उजाड़ना राज्य का आतंक है : किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति
हिमाचल सरकार उच्चन्यायालय के आदेश की आड़ा गरीब सेब किसानो को उज़ड़ा रही है |
मुकुंद झा
16 May 2018
शिमला

हिमाचल प्रदेश के जुब्बल क्षेत्र में एसआईटी द्वारा अवैध अतिक्रमण हटाओ मुहिम के खिलाफ हिमाचल प्रदेश किसान सभा के नेत्रत्व आंदोलन कर रही किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति के तमाम प्रयासों के बाद भी एसआईटी ने सेब के अवैध बगीचों का कटान जारी रहा। नायब तहसीलदार जुब्बल को कुछ घंटों तक बंधक बनाने के बाद देर रात को एडीएम जीसी नेगी ने जुब्बल पंहुचे और समिति के सदस्यों के साथ मंगलवार सुबह दो बजे तक बैठक की लेकिन एसआईटी ने मंगलवार को भी अतिक्रमण हटाओ अभियान जारी रखा। 

जैसाकि न्यूज़क्लिक ने कुछ दिनों पूर्व अपनी रिपोर्ट में बतया था की किस तरह से हिमाचल में प्रशासन द्वारा सेब बगना को काट जा रहा है जिससे वहां के किसान गुस्से में है और किसान सभा के नेत्रत्व में विरोध प्रदर्शन कर रहे है |

इसी क्रम में किसान सभा के नेत्रत्व  वाले किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति जुब्बल की ओर से नायब तहसीलदार कार्यालय के बाहर सेब के पौधों को काटने को लेकर सोमवार देर शाम तक नारे लगाए जाते रहे। जब संघर्ष समिति के सदस्य नायब तहसीलदार कार्यालय को छोड़ने को तैयार नहीं हुए तो एडीएम शिमला को मौके पर बुलाना पड़ा। मामला नहीं सुलझा तो रात को करीब दस बजे गुस्साए लागों को शांत करने के लिए एडीएम शिमला पहुंचे। एडीएम शिमला के पहुंचते ही संघर्ष समिति व बागबानों के साथ बैठक लोक निर्माण विभाग जुब्बल विश्राम गृह में आयोजित हुई। बैठक का दौर चलता रहा और रात दो बजे तक भी जब कोई निष्कर्ष नहीं निकला तो बैठक स्थगित की गई। इस दौरान बैठक में डीएसपी रोहडू, एसएचओ, एएसपी शिमला, एसडीएम रोहडू भी मौके पर रहे।

इसमें देर रात दो बजे समझौता हुआ। समझौते के अनुसार एडीएम ने उन्हें आश्वासन दिया कि बागबानों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा और बताया कि सेब कटान को लेकर उच्च न्यायलय की अनुपालना की जाएगी। बीते दिनों जुब्बल में सेब कटान जोरों पर चल रहा है। अब तक बढाल, पहाड़ और नंदपुर के भलई में सेब का कटान चल रहा है, आंकड़ों के अनुसार अब तक 25 हजार के करीब सेब के पौधों को कटा  गया है, जिससे हर साल दो लाख से अधिक सेब पेटियों की पैदावार करने वाले पौधे नष्ट हो गए हैं।

न्यूज़क्लिक  से बात करते हुए संजय चौहान ,पूर्व मेयर शिमला ने कहा की हिमाचल सरकार उच्चन्यायालय के आदेश की आड़ा गरीब सेब किसानो को उज़ड़ा रही है |उन्होंने कहा की “डीएफओ जो की इसका कोर्डिनेटर वो किसानो की जमीन की मलकियत के कागज़ देखे  बिना ही उन लोगो की भी जमीन पर से भी पड़े कट दिए जिन्हें 1984 में भूमिहीनता के कारण सरकार से जमीन मिली है ”|

किसानो की संम्पत्ति का नाश करने वाले डीएफओ के खिलाफ मुक़दमे की जगह शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे किसानो पर आईपीसी की धारा143,342और186 के तहत मुकदमा दर्ज़ किया गया है |

इस पर उन्होंने कहा की “सरकार न्यायमांगने वालो लोगो पर तो मुकदमा दायर कर रही है जबकी डीएफओ जिसने उच्च न्यायालय के आदेश की आड़ा में गरीब किसानो की मलकियत ही काट दी है ,उसके खिलाफ कार्यवाही करने के बजाय उसको बचने का कम कर रही हैं” |

किसान सभा के नेता ने आगे कहा की सरकार चाहें कितने भी मुकदमा करे हम उनके दमन के खिलाफ लड़ेंगे | उन्होंने आगे कहा की “हम 21 मई को हम और बड़ी संख्या में किसानो को इकठ्ठा करेंगे और बड़ा आन्दोलन करेंगे | सरकार द्वारा हरे पौधों के काटे जाने के खिलाफ कोर्ट भी जाएंगे” |

एडीएम शिमला ने जुब्बल पहुंच कर बागवानों को जो आश्वासन दिया वह झूठा साबत हुआ। भू दस्तावेज के प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद भी बागवानों के सेब के पौधों को काटने का क्रम जारी है। बंदूकों के साए में बागवान दहशत में है। इस तरह के माहौल में से प्रभवित परिवारों का देश के कानून व न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ रहा है। जिसके घातक परिणाम हो सकते हैं । हम इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री से मिलने जा रहे हैं ।

हिमाचल प्रदेश
किसान आंदोलन
अखिल भारतीय किसान सभा
राकेश सिंघा

Related Stories

किसानों ने बनारसियों से पूछा- तुमने कैसा सांसद चुना है?

किसान आंदोलन के 300 दिन, सरकार किसानों की मांग पर चर्चा को भी तैयार नहीं

देश बचाने की लड़ाई में किसान-आंदोलन आज जनता की सबसे बड़ी आशा है

किसान आंदोलन के नौ महीने: भाजपा के दुष्प्रचार पर भारी पड़े नौजवान लड़के-लड़कियां

आंदोलन कर रहे पंजाब के किसानों की बड़ी जीत, 50 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ी गन्ने की कीमत

किसान एकबार फिर मुख्य विपक्ष की भूमिका में, 3 अगस्त को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन

चुनाव विशेष : क्या जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर पड़ेंगे वोट?

5 सितम्बर : देश के लोकतांत्रिक आंदोलन के इतिहास में नया अध्याय

शिमला : छात्रों के रियायातीं बस पासों में 50% की वृद्धि इसको लेकर वहाँ के नागरिक विरोध कर रहे हैं

हिमाचल : किसान सभा ने दूध के उचित दाम न मिलने को लेकर किया प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • असद रिज़वी
    CAA आंदोलनकारियों को फिर निशाना बनाती यूपी सरकार, प्रदर्शनकारी बोले- बिना दोषी साबित हुए अपराधियों सा सुलूक किया जा रहा
    06 May 2022
    न्यूज़क्लिक ने यूपी सरकार का नोटिस पाने वाले आंदोलनकारियों में से सदफ़ जाफ़र और दीपक मिश्रा उर्फ़ दीपक कबीर से बात की है।
  • नीलाम्बरन ए
    तमिलनाडु: छोटे बागानों के श्रमिकों को न्यूनतम मज़दूरी और कल्याणकारी योजनाओं से वंचित रखा जा रहा है
    06 May 2022
    रबर के गिरते दामों, केंद्र सरकार की श्रम एवं निर्यात नीतियों के चलते छोटे रबर बागानों में श्रमिक सीधे तौर पर प्रभावित हो रहे हैं।
  • दमयन्ती धर
    गुजरात: मेहसाणा कोर्ट ने विधायक जिग्नेश मेवानी और 11 अन्य लोगों को 2017 में ग़ैर-क़ानूनी सभा करने का दोषी ठहराया
    06 May 2022
    इस मामले में वह रैली शामिल है, जिसे ऊना में सरवैया परिवार के दलितों की सरेआम पिटाई की घटना के एक साल पूरा होने के मौक़े पर 2017 में बुलायी गयी थी।
  • लाल बहादुर सिंह
    यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती
    06 May 2022
    नज़रिया: ऐसा लगता है इस दौर की रणनीति के अनुरूप काम का नया बंटवारा है- नॉन-स्टेट एक्टर्स अपने नफ़रती अभियान में लगे रहेंगे, दूसरी ओर प्रशासन उन्हें एक सीमा से आगे नहीं जाने देगा ताकि योगी जी के '…
  • भाषा
    दिल्ली: केंद्र प्रशासनिक सेवा विवाद : न्यायालय ने मामला पांच सदस्यीय पीठ को सौंपा
    06 May 2022
    केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच इस बात को लेकर विवाद है कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रशासनिक सेवाएं किसके नियंत्रण में रहेंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License