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बीएचयू : यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफ़ेसर की बहाली के ख़िलाफ़ छात्र-छात्राओं का विरोध प्रदर्शन
न्यूज़क्लिक से बातचीत में छात्र-छात्राओं ने कहा, ‘हमारी मांग है कि यौन उत्पीड़न के दोषी प्रोफ़ेसर एसके चौबे को तुरंत बर्खास्त किया जाए। साथ ही प्रशासन प्रोफ़ेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।'
सोनिया यादव
15 Sep 2019
BHU Protest

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में यौन उत्पीड़न के आरोपी प्रोफ़ेसर एसके चौबे की बहाली के विरोध में शनिवार, 14 सितंबर को शुरू हुआ छात्र-छात्राओं का विरोध प्रदर्शन आज रविवार को भी जारी है। छात्र-छात्राएं बीएचयू के सिंह द्वार पर जमे हुए हैं। उनकी मांग है कि दोषी प्रोफ़ेसर एसके चौबे को तुरंत बर्खास्त किया जाए। साथ ही प्रशासन प्रोफ़ेसर के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। इसके अलावा छात्र जीएसकैश (जेंडर सेंसटाइजेशन कमेटी अगेंस्ट सेक्सुअल हरैस्मेंट) लागू करने की भी मांग कर रहे हैं। 

एक छात्रा ने कहा कि 14 सदस्यीय जांच कमेटी की सिफारिश को कार्यकारिणी परिषद ने मात्र 5 मिनट में ही निपटा दिया। इस परिषद में कुल आठ लोग थे जिसमें एक भी महिला शामिल नहीं थी। छात्रा ने सवाल किया कि क्या ऐसे देश में बेटियां बचेंगी और पढ़ेंगी?

 

BHU protestगौरतलब है कि विज्ञान संस्थान के जंतु विज्ञान विभाग के प्रोफ़ेसर एसके चौबे पर पिछले साल अक्तूबर में एक शैक्षणिक यात्रा के दौरान छात्राओं के साथ अश्लील हरकतें करने का आरोप लगा था। जिसके बाद इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) द्वारा इस मामले की जांच की गई और प्रोफेसर एसके चौबे पर लगे सभी आरोपों को सही पाया गया।

बता दें कि न्यूज़क्लिक ने बीएचयू में प्रोफ़ेसर एसके चौबे की बहाली को लेकर छात्र-छात्राओं के आक्रोश की खबर पहले ही प्रकाशित की थी। हमने इस संदर्भ में बीएचयू के कुलपति से भी संपर्क किया था, लेकिन उनकी तरफ से हमें अभी तक जवाब प्राप्त नहीं हुआ हैं।

इसे पढ़ें : बीएचयू : यौण शोषण के आरोपी प्रोफ़ेसर की बहाली को लेकर छात्रों में आक्रोश

छात्रों ने न्यूज़क्लिक को बताया, ‘‘जांच कमेटी ने कठोरतम कार्रवाई की सिफारिश की थी। इसके बावजूद दोषी प्रोफ़ेसर को बिना कार्रवाई के प्रशासन ने बहाल कर दिया है। हम प्रशासन से प्रोफ़ेसर एसके चौबे को बर्खास्त करने की मांग करते हैं। साथ ही उन पर कड़ी कार्रवाई की भी मांग करते हैं जिससे भविष्य में कोई भी ऐसा करने की सोच ना सके।’’

बता दें कि प्रो. चौबे के साथ छात्र-छात्राओं का यह समूह 3 अक्टूबर से 9 अक्टूबर 2018 तक भुवनेश्वर की शैक्षणिक यात्रा पर था। इस यात्रा से लौटने के बाद 13 अक्टूबर को प्रो. चौबे के संबंध में लिखित सामूहिक शिकायत दी गई थी। जिसके बाद 25 अक्टूबर 2018 से लेकर 30 नवंबर 2018 तक इंटरनल कंप्लेंट कमेटी (आईसीसी) द्वारा इस मामले की जांच की गई। कमेटी ने सभी पीड़ितों, गवाहों, आरोपी, विभागाध्यक्ष, पूर्व विभागाध्यक्षों और मामले से जुड़े अन्य लोगों से बात करने के बाद 30 नवंबर को अपनी रिपोर्ट सौंप दी।

छात्रों के मुताबिक, कुलपति प्रो भटनागर और रजिस्ट्रार डॉ त्रिपाठी ने जून 2019 तक इस मामले को दबाए रखा, विश्वविद्यालय की कार्यकारिणी परिषद में इस मामले को नहीं ले गए। जब कुलपति, रजिस्ट्रार और रेक्टर प्रो शुक्ला इस बात से आश्वस्त हो लिए की 36 छात्र- छात्राओं जिन्होंने प्रोफेसर चौबे पर आरोप लगाए हैं वे यहां से पासआउट होकर निकल गये हैं, तब 07 जून 2019 को इस मामले को निर्णय के लिए विश्विद्यालय की कार्यकारिणी परिषद में रखा और अंततः अगस्त 2019 में प्रो चौबे बहाल कर दिए गए।

इस संबंध में न्यूज़क्लिक से बातचीत में एक छात्र ने बताया कि प्रो. चौबे पर कई बार ऐसे आरोप लगे हैं लेकिन शिकायत लिखित में न होने के कारण कार्रवाई नहीं हुई। इस मामले के बाद कुलपति द्वारा आश्वासन दिया गया था कि दोष साबित होने पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। लेकिन छात्रों का कहना है कि प्रो. चौबे को फिर से बहाल कर छात्रों के साथ धोखा किया गया है।

न्यूज़क्लिक को इस संबंध में बीएचयू के जनसंपर्क अधिकारी (पीआरओ) डॉ. राजेश सिंह से बताया था कि जून 2019 में विश्वविद्यालय की एक्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में प्रो. एसके चौबे को निर्दोष पाया गया, इसलिए जुलाई से उन्हें बहाल करने का निर्णय लिया गया। इसके बाद बीते अगस्त से प्रो. चौबे ने अपने शैक्षणिक दायित्व संभाल लिया हैं।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि कमेटी ने अपनी जांच में प्रो. चौबे पर लगे आरोपों को सही पाया था। कमेटी रिपोर्ट में इस बात की भी पुष्टि हुई थी कि प्रो. चौबे लंबे समय से छात्राओं के साथ अभद्र व्यवहार और अश्लील हरकतें करते आ रहे हैं। फिर भी उन्हें क्यों नहीं बर्खास्त किया गया। उन्हें बहाल कैसे किया गया।

विद्यार्थियों का कहना है कि प्रोफेसर एसके चौबे ने भुवनेश्वर टूर के दौरान कई छात्राओं के साथ गलत हरकत की। कई लड़कियों की शारीरिक बनावट को लेकर भद्दे कमेंट किए। ऐसे में कल को प्रोफेसर दूसरी लड़कियों के साथ कुछ गलत करता है तो इसका जिम्मेदार कौन होगा।

इस प्रकरण के संदर्भ में प्रोफेसर एसके चौबे ने न्यू़ज़क्लिक को बताया था कि उनके ऊपर लगे सभी आरोप निराधार हैं। उन्होंने जांच कमेटी की रिपोर्ट पर नाराज़गी जाहिर करते हुए कहा कि रिपोर्ट एक तरफा थी। 

प्रदर्शन में हिस्सा ले रही एक छात्रा ने कहा कि जब कमेटी ने प्रोफेसर को दोषी करार दे दिया था। ऐसे में उन्हें फिर से बहाल कैसे किया जा सकता है। कल को प्रैक्टिकल में कम नंबर देने की धमकी देकर फिर से प्रोफेसर छात्र-छात्राओं के साथ कुछ गलत करेगा , तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

एक अन्य छात्रा ने बताया कि कमेटी की रिपोर्ट में सदस्यों ने कहा था कि ‘सम्मानित शिक्षक’ का चोला ओढ़े एक व्यक्ति अपनी वरिष्ठता और नंबर देने की ताकत का इस्तेमाल गलत कामों के लिए कर रहा है। ऐसे में इसी प्रोफेसर को दोबारा कैसे बहाल किया जा सकता है।

छात्रों का कहना है कि प्रोफेसर चौबे को सेंसर कर कड़ी चेतावनी देना काफी नहीं है। उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए। ताकी ये भविष्य के लिए मिसाल बन सके।

गौरतलब है कि इससे पहले भी छात्राएं बीएचयू परिसर में छेड़खानी और भेदभाव के खिलाफ खिलाफ सड़कों पर उतरी हैं। इन सबके बावजूद प्रशासन का इस मामले में लचर और उदासीन रवैया कई गंभीर सवाल खड़े करता है।

BHU Rakesh Bhatnagar
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Sexual Abuse of Women
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education system
UttarPradesh
Student Protests
Professor SK Chaubey

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