NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बंगाल में पत्रकारों पर हो रहे हमलों के खिलाफ, पत्रकारों ने किया काले पट्टे लगाकर प्रदर्शन
शुरूआती अंदाज़े के हिसाब से अप्रैल में कम-से-कम 70 पत्रकारों पर हमले हुए हैंI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Apr 2018
Translated by ऋतांश आज़ाद
बंगाली पत्रकार

पिछले कुछ समय से पश्चिम बंगाल में पत्रकारों पर लगातार हमले हो रहे हैंI ये हमले 2 अप्रैल को नामांकन की प्रक्रिया शुरू होने के बाद शुरू हुए और 9 अप्रैल तक चलते रहे जो कि 9 अप्रैल को नामांकन पत्र दायर करने का आखरी दिन था I

शुरूआती अंदाज़े के हिसाब से अप्रैल में कम-से-कम 70 पत्रकारों पर हमले हुए हैंI 23 अप्रैल को कोर्ट के आदेश के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने जब नामांकन पत्र दायर करने के लिए 4 घंटे और दिए तो ये हमले फिर से शुरू हो गए I

बता दें कि नामांकन दायर करने के समय सीमा को बढ़ाने की माँग को लेकर सभी विपक्षी दल कोलकत्ता हाई कोर्ट गए थे I लेकिन इस बढ़ी हुई समय सीमा के दौरान सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस का दमन और भी ज़्यादा बढ़ गया I 200 से ज़्यादा उम्मीदवार घायल हुएI

23 अप्रैल को कोलकत्ता के दक्षिण 24 परगना के प्रशासनिक अधिकारी और पुलिस अधीक्षक के दफ्तर के बहुत करीब एक टीवी पत्रकार प्रजना साहा पर तथाकथित तौर पर TMC के गुंडों द्वारा हमला किया गया I उन्हें कई घंटों तक एक जगह पर ज़बरदस्ती रख कर प्रताड़ित किया गया I उन्हें बस्ती में मौजूद जगह से तब छोड़ा गया जब उन्होंने उनके सहकर्मियों ने पुलिस मुख्यालय में और राजनेताओं को फोन किया जब वह वहाँ से निकली तो वह ज़ख़्मी हालत में थीं I

साहा ने कहा “युवकों के एक जुट मुझे ज़बरदस्ती बस्ती के कमरे में ले गए I उन्होंने मुझसे भद्दी भाषा में बात की और घंटों तक वहीं बंधी बनाकर रखा I उन्होंने धमकी दी कि अगर मैं अपना मुँह खोलूंगी तो मेरे घरवालों को नुक्सान पहुंचाएंगे I उन्होंने मेरे फ़ोन को भी फॉर्मेट कियाI”

आर्यभट्टा खान जो कि एक प्रमुख बंगाली पत्रिका के एक रिपोर्टर हैं, का भी इसी तरफ अपहरण किया गया और धमकाया गया I उनके साथ ये अलिपोर के प्रशासनिक भवन के बाहर

मोटरसाइकिल पर घूम रहे युवकों ने किया जिनका चेहरा ढंका हुआ था I

खान ने कहा “करीब 20 से 25 युवकों ने मुझपर लातों और घूंसों से हमला किया जब मैंने भीड़ की फोटो खींची I उन्होंने मेरा फ़ोन ले लिया और मेरी घड़ी भी छीन कर ले गएI”

दिलचस्प बात ये है कि ये सारे हमले तब हुए जब टाइम्स ऑफ़ इंडिया के एक फोटो पत्रकार का  इसी तरह अपहरण हुआ था, उनका अपहरण भी तथाकथित तौर पर सत्ताधारी पार्टी के गुंडों द्वारा 9 अप्रैल को किया गया था I उन्हें भी बस्ती में एक जगह ले जाया गया, उनके कपड़े उतारे गए और उन्हें पीटा गया I पत्रकारों के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज़ करने से मना कर दिया था I

प्रेस क्लब कोलकत्ता और कोलकत्ता जर्नलिस्ट क्लब ने इन हमलों की निंदा की है I अलग अलग प्रेस विज्ञप्तियों में उन्होंने कहा है कि लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर लगातार हो रहे हमले इस देश के लोकतंत्र को कमज़ोर करेंगेI

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कलकत्ता जर्नलिस्ट क्लब के सचिव राहुल गोस्वामी ने कहा “ऐसा लग रहा है कि पत्रकारों के लगातार विरोध प्रदर्शन का गुंडों और प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा हैI कोलकत्ता में एक फोटो पत्रकार का अपहरण कर लिया गया I इसके बाद एक महिला पत्रकार का अपहरण हुआ I उन्हें बहुत अघात हुआ है और वह अब तक डरी हुई हैं- अपनी तीन साल की बच्ची के बारे में सोचते हुए उन्हें अपना मुँह बंद रखना होगा I” विभिन्न संगठनों ने एक कमेटी मीटिंग की और काले पट्टे लगाकर विरोध किया I

प्रेस क्लब कोलकत्ता के सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार अनिरुद्ध चक्रवर्ती के मुताबिक ऐसे हमले पहली बार हुए हैं I उन्होंने कहा “इमरजेंसी के दौरान भी पत्रकारों को पुलिस द्वारा MISA के  अंतर्गत गिरफ्तार किया गया था I लेकिन इस सरकार के दौरान जिस तरह पुलिस ने गुंडों के साथ सहभागिता निभाई है, ये लोकतंत्र के लिए एक बुरा संकेत है I यहाँ तक की FIR भी दर्ज़ नहीं की जा रही है I पीड़ित पत्रकारों को रिपोर्ट दर्ज़ कराने से पुलिस और अधिकारियों द्वारा रोका जा रहा है I पुलिस और प्रशासन कुछ भी कार्यवाही करने में नाकाम रहे हैं I”

 दूरदर्शन न्यूज़ की एंकर और रबिन्द्र भारती विश्विद्यालय की अध्यापक देबज्योती चंद्रा ने कहा “पश्चिम बंगाल की पूरी पत्रकार बिरादरी इस समय बहुत बहुत डरी हुई है I पत्रकार अपना काम कर रहे हैं सरकार का काम है उन्हें सुरक्षा प्रदान करना I ये हमले न सिर्फ जघन्य अपराध हैं बल्कि इन्हें बर्बर कहा जाना चाहिए I

पश्चिम बंगाल
पत्रकारों पर दमन
पत्रकारों का विरोध
तृणमूल सरकार

Related Stories

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: CPI(M) के दो कार्यकर्ताओं को जिंदा जलाया गया , दिन भर में 12 लोगों की मौत

पंचायत चुनावो को मई दिवस पर कराने की घोषणा के बाद से ही,पश्चिम बंगला चुनाव आयोग केन्द्रीय ट्रेड यूनियनो के निशाने पर है

संघ परिवार साम्प्रदायिकता फैलाने के लिए कर रहा है रामनवमी का इस्तेमाल

बंगाल निकाय चुनाव और अलोकतांत्रिक तृणमूल सरकार


बाकी खबरें

  • yogi
    रोहित घोष
    यूपी चुनाव: योगी आदित्यनाथ बार-बार  क्यों कर रहे हैं 'डबल इंजन की सरकार' के वाक्यांश का इस्तेमाल?
    25 Feb 2022
    दोनों नेताओं के बीच स्पष्ट मतभेदों के बावजूद योगी आदित्यनाथ नरेंद्र मोदी के नाम का इसतेमाल करने के लिए बाध्य हैं, क्योंकि उन्हें मालूम है कि नरेंद्र मोदी अब भी जनता के बीच लोकप्रिय हैं, जबकि योगी…
  • bhasha singh
    न्यूज़क्लिक टीम
    खोज ख़बर, युद्ध और दांवः Ukraine पर हमला और UP का आवारा पशु से गरमाया चुनाव
    24 Feb 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने Ukraine पर Russia द्वारा हमले से अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति की हार पर चर्चा की। साथ ही, Uttar Pradesh चुनावों में आवारा पशु, नौकरी के सवालों पर केंद्रित होती…
  • UP Elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022 : आवारा पशु हैं एक बड़ा मुद्दा
    24 Feb 2022
    न्यूज़क्लिक के इस ख़ास इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार परंजॉय गुहा ठाकुरता ने सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता डॉ संदीप पांडे से उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। डॉ पांडेय ने…
  • russia ukrain
    अजय कुमार
    अमेरिकी लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव, दुनिया पर क्या असर डाल सकता है?
    24 Feb 2022
    अमेरिका के लालच से पैदा हुआ रूस और यूक्रेन का तनाव अगर बहुत लंबे समय तक चलता रहा तो दुनिया के बहुत से मुल्कों में आम लोगों के जीवन जीने की लागत बहुत महँगी हो जाएगी।
  • Tribal Migrant Workers
    काशिफ काकवी
    मध्य प्रदेश के जनजातीय प्रवासी मज़दूरों के शोषण और यौन उत्पीड़न की कहानी
    24 Feb 2022
    गन्ना काटने वाले 300 मज़दूरों को महाराष्ट्र और कर्नाटक की मिलों से रिहा करवाया गया। इनमें से कई महिलाओं का यौन शोषण किया गया था।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License