NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बुद्धिजीवियों पर दमन के चार प्रमुख कारण
देश के कई वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, जिनमें प्रख्यात पत्रकार, एडवोकेट और लेखक शामिल हैं; की गिरफ्तारी भारतीय राज्यसत्ता की निरंकुशता के खतरनाक स्तर तक पहुंचने का भयावह संकेत है!
उर्मिलेश
29 Aug 2018
civil rights activists

देश के कई वरिष्ठ बुद्धिजीवियों, जिनमें प्रख्यात पत्रकार, एडवोकेट और लेखक शामिल हैं; की गिरफ्तारी भारतीय राज्यसत्ता की निरंकुशता के खतरनाक स्तर तक पहुंचने का भयावह संकेत है! इनमें 'इकोनामिक एंड पोलिटिकल वीकली' जैसी देश की श्रेष्ठतम पत्रिका से लंबे समय तक सम्बद्ध रहे जाने-माने पत्रकार और मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा, आदिवासी हक के लिए आवाज उठाने वाली मशहूर एडवोकेट सुधा भारद्वाज, तेलुगू के प्रख्यात कवि और सामाजिक कार्यकर्ता वरवर राव सहित और झारखंड के प्रतिष्ठित बुद्धिजीवी फादर स्टैन स्वामी कई लोग शामिल हैं। 

अभी-अभी पता चला कि श्री नवलखा को नजरबंद रखा गया है। संभवतः कोर्ट में कल सुनवाई होगी। दलित मामलों के गंभीर जानकार और विख्यात लेखक आनंद तेलतुंबडे जैसे कई लोगों के महाराष्ट्र स्थित घरों पर छापेमारी की गई है! इनमें ज्यादातर पर जो आरोप लगे हैं, वे राजनीति-प्रेरित और हास्यास्पद हैं! अभिव्यक्ति पर अंकुश लगाने या असहमति की आवाज़ दबाने के लिए अब 'इमरजेंसी' लगाने की जरूरत क्या है?

मेरे हिसाब से इन लोगों पर दमनात्मक कार्रवाई के पीछे चार अहम कारण हैं: १. इस वक्त देश में संघ-मनुवादी-कारपोरेट सत्ता का सबसे सशक्त विरोध समाज के दलित-आदिवासी और अन्य सबाल्टर्न समाजों में हो रहा है। ये सभी बुद्धिजीवी इन समुदायों और वर्गों के पक्षधर हैं। इनकी आवाज उठाते हैं। दलित-आदिवासी और उनके समर्थक बौद्धिक समाज को आतंकित करने के लिए राज्य मशीनरी का कहर बरपाया गया है।

२. महाराष्ट्र के भीमा कोरेगांव कांड में दलितों पर हमला करने वाली संघ समर्थक भिड़े ब्रिगेड के खिलाफ कार्रवाई करने से बचने के लिए अब पुणे के उस आयोजन पर सवाल उठाया जा रहा है, जिसमें देश के विभिन्न हिस्सों के सामाजिक कार्यकर्ता और जनपक्षधर बुद्धिजीवी पहुचे थे। सरकार दलितों और ऐसे बुद्धिजीवियों के बीच उभरती एकता को छोड़ना चाहती है। इसलिए ऐसे बौद्धिकों को डराया जा रहा है! 

३. इस वक्त पुणे में ही सदरमुकाम रखने वाली उग्र हिंदुत्ववादी संस्था 'सनातन संस्था' के अनेक लोगों के आपराधिक मामलों का जांच में खुलासा हुआ है। भाजपा और संघ इस संस्था को लगातार बचाते आ रहे हैं। सनातन संस्था यानी 'हिंदुत्वा-मनुवादी आतंक' से मीडिया और देश की जनता का ध्यान हटाने के लिए जनपक्षी बौद्धिकों पर दमन की यह कारवाई शुरू की गई है। 

४. चुनाव नजदीक आता जा रहा है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान सहित कुछ राज्यों के चुनाव तो इसी साल होने हैं। केंद्र और राज्यों की सरकारों की पहाड़ जैसी बड़ी विफलताओं को छुपाने और लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह आपरेशन चलाया जा रहा है। चैनलों के जरिए इसका मनोनुकूल कवरेज कराते जाने की योजना है ताकि सत्ताधारी पार्टी को चुनावी लाभ मिले!  इसके जरिए चुनाव में जनपक्षधर बुद्धिजीवियों की आवाज बंद करने या उन्हें डराने की भी कोशिश होगी। 

bheema koregaon
civil rights activists
human rights activists
Baseless arrests

Related Stories

क्यों वरवरा राव को ज़मानत भारतीय लोकतंत्र के लिए एक शुभ संकेत है?

अदालत ने सुधा भारद्वाज को जेल के बाहर से किताबें मंगवाने की अनुमति दी

पूर्वांचल राज्य निर्माण की मांग; योगी ने साधी चुप्पी, छोटे संगठन अब भी क़ायम

गौतम नवलखा को जेल में चश्मा दिए जाने से ‘‘मना’’ करने पर जांच का आदेश

खोज ख़बर: मीलॉर्ड पर्सनल लिबर्टी यानी क्या और किसकी?

प्रशांत भूषण व अन्य बुद्धिजीवी, मानवाधिकार कर्मियों के पक्ष में खड़े हुए लेखक और सांस्कृतिक संगठन

दिल्ली हाईकोर्ट ने गौतम नवलखा की अंतरिम ज़मानत की याचिका पर एनआईए से मांगा जवाब

व्हाट्सऐप स्पाईवेयर: हैदराबाद के वकील का भी फोन हैक

इजराइली स्पाईवेयर के जरिये भारतीय पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की जासूसी की गई: व्हॉट्सएप

हिरासत में मौत मामले में तीन पुलिसवालों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज


बाकी खबरें

  • ram_navmi
    अफ़ज़ल इमाम
    बढ़ती हिंसा व घृणा के ख़िलाफ़ क्यों गायब है विपक्ष की आवाज़?
    13 Apr 2022
    हिंसा की इन घटनाओं ने संविधान, लोकतंत्र और बहुलतावाद में विश्वास रखने वाले शांतिप्रिय भारतवासियों की चिंता बढ़ा दी है। लोग अपने जान-माल और बच्चों के भविष्य को लेकर सहम गए हैं।
  • varvara rao
    भाषा
    अदालत ने वरवर राव की स्थायी जमानत दिए जाने संबंधी याचिका ख़ारिज की
    13 Apr 2022
    बंबई उच्च न्यायालय ने एल्गार परिषद-माओवादी संपर्क मामले में कवि-कार्यकर्ता वरवर राव की वह याचिका बुधवार को खारिज कर दी जिसमें उन्होंने चिकित्सा आधार पर स्थायी जमानत दिए जाने का अनुरोध किया था।
  • CORONA
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 1,088 नए मामले, 26 मरीज़ों की मौत
    13 Apr 2022
    देश में अब तक कोरोना से पीड़ित 5 लाख 21 हज़ार 736 लोग अपनी जान गँवा चुके है।
  • CITU
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली: बर्ख़ास्त किए गए आंगनवाड़ी कर्मियों की बहाली के लिए सीटू की यूनियन ने किया प्रदर्शन
    13 Apr 2022
    ये सभी पिछले माह 39 दिन लंबे चली हड़ताल के दौरान की गई कार्रवाई और बड़ी संख्या आंगनवाड़ी कर्मियों को बर्खास्त किए जाने से नाराज़ थे। इसी के खिलाफ WCD के हेडक्वार्टस आई.एस.बी.टी कश्मीरी गेट पर प्रदर्शन…
  • jallianwala bagh
    अनिल सिन्हा
    जलियांवाला बाग: क्यों बदली जा रही है ‘शहीद-स्थल’ की पहचान
    13 Apr 2022
    जलियांवाला बाग के नवीकरण के आलोचकों ने सबसे महत्वपूर्ण बात को नज़रअंदाज कर दिया है कि नरसंहार की कहानी को संघ परिवार ने किस सफाई से हिंदुत्व का जामा पहनाया है। साथ ही, उन्होंने संबंधित इतिहास को अपनी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License