NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
भगतसिंह के जन्मदिवस पर नौजवान भारत सभा का राष्ट्रीय सम्मेलन सम्पन्न
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Oct 2014

आज के दौर में जहाँ एक ओर पूँजीवादी व्यवस्था अपने ढाँचागत संकट से गुजर रही है और बुर्जुआ जनवाद का रहा-सहा स्पेस भी सिकुड़कर तेज़ी से फ़ासीवाद की शक्ल अख़्तियार कर रहा है वहीं दूसरी ओर इस पूँजीवादी संकट को क्रान्तिकारी परिस्थिति में तब्दील करने में सक्षम क्रान्तिकारी शक्तियाँ पूरी दुनिया में अभूतपूर्व बिखराव और भटकाव की शिकार हैं। क्रान्ति की लहर पर प्रतिक्रान्ति की लहर लगातार हावी बनी हुई है। चारों ओर अन्याय-अनाचार-भ्रष्टाचार-लूट-बर्बरता और हताशा-निराशा का घटाटोप छाया हुआ है एवं गतिरोध की स्थिति क़ायम है। ऐसे ही गतिरोध को तोड़ने के लिए शहीद-ए-आज़म भगतसिंह ने क्रान्ति की स्पिरिट ताज़ा करने की बात कही थी। क्रान्ति की स्पिरिट को ताज़ा करने के मक़सद से ही भगतसिंह के 107वें जन्मदिवस के अवसर पर नौजवान भारत सभा का प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन 26-27-28 सितम्बर नई दिल्ली के अम्‍बेडकर भवन में आयोजित किया गया जो सफलतापूर्वक सम्‍पन्‍न हुआ। भगतसिंह जैसे महान युवा क्रान्तिकारी के विचारों से प्रेरित इस संगठन के प्रथम राष्ट्रीय सम्मेलन को आयोजित करने का इससे बेहतर मौका कोई नहीं हो सकता था। गौ़रतलब है कि 1926 में भगतसिंह और उनके साथियों ने औपनिवेशिक गुलामी के विरुद्ध भारत के क्रान्तिकारी आन्दोलन को नया वैचारिक आधार देने के लिए और एक नये सिरे से संगठित करने के लिए युवाओं का जो संगठन बनाया था उसका नाम भी नौजवान भारत सभा ही था। यह नाम अपने आप में उस महान क्रान्तिकारी विरासत को पुनर्जागृत करने और उसे आगे बढ़ाने के संकल्प का प्रतीक है।

                                                                                                           

                                                                                                                                                     सभा में हिस्सा लेते प्रतिनिधि

नौजवान भारत सभा नामक इस क्रान्तिकारी नौजवान संगठन का उद्देश्य देश के बिखरे हुए युवा आन्दोलन को एक सही दिशा की समझ के आधार पर एकजुट करना और उसे व्यापक जनसमुदाय के साम्राज्यवाद-पूँजीवाद विरोधी संघर्ष के एक अविभाज्य‍ अंग के रूप में आगे बढ़ाना है। सम्मेलन में पहले दो दिन के प्रतिनिधि सत्रों में दिल्ली,हरियाणा,पंजाब,उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र के अलग-अलग हिस्सों से चुने हुए नौजवान प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन के अन्तिम दिन भगतसिंह के 107वें जन्मदिवस पर एक खुले सत्र का आयोजन किया गया जिसमें लगभग 300 लोगों ने हिस्सा लिया जिसमें प्रतिनिधियों के अतिरिक्त नौजवान भारत सभा के शुभचिंतक एवं समर्थक शामिल थे।

सम्मेलन के दौरान अनेक सत्रों में इस बात पर जोर दिया गया कि यह सम्मेलन एक ऐसे समय में हो रहा है जब हमारा देश आम जनता के बहादुर इंसाफ़पसन्द प्रगतिकामी युवा सपूतों से एक बार फिर उठ खड़े होने कि और आगे बढ़कर अपनी ऐतिहासिक ज़िम्मेदारी को निभाने की माँग कर रहा है। साथ ही घोषणापत्र भी प्रस्तुत किआ गया जिसमे यह लिखा है कि भगतसिंह के आदर्शों के अनुगामी नौजवानों का यह दायित्व है कि वे पूँजीवादी राजनीति के छल-छद्म का भण्डाफोड़ करते हुए धार्मिक कट्टरपंथी फासिस्ट ताकतों के विरुद्ध स्वयं ज़मीनी स्तर पर एकजुट हों और व्यापक मेहनतकश आबादी को भी संगठित करें।

साथ ही सम्मलेन के दौरान अनेक अहम राष्‍ट्रीय एवं अन्‍तरराष्‍ट्रीय मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किये गये जिसमें नई सरकार के जनविरोधी फैसलों के खिलाफ प्रस्ताव से लेकर फ़िलिस्तीन पर हमले के खिलाफ प्रस्ताव आदि शामिल थे।साथ ही इन सत्रों में नौजवान युवा सभा के १७ सदस्यीय केन्द्रीय परिषद् का चुनाव भी किया गया जिसमे ७ सदस्यीय केन्द्रीय कार्यकारिणी का चुनाव भी शामिल है।छात्र युवाओं की हिंदी पत्रिका आह्वान ,पंजाबी पत्रिका ललकार एवं मराठी पत्रिका स्फुलिंग को नौजवान भारत सभा की सहयोगी पत्रिकाओं के रूप में चयन सम्बंधित प्रस्ताव भी शामिल था।इन प्रस्तावों और इस दृष्टिकोण से यह तो ज़रूर साफ़ है कि आने वाले दिनों में देश की सभी प्रगतिशील ताकतों को एक साथ मिलकर देश में तो हक की लड़ाई लड़नी होगी। साथ ही विश्व के अनेक हिस्सों में चल रहे संघर्षों के समर्थन में भी आवाज़ बुलंद करनी होगी। सम्मेलन का समापन शहीद-ए-आज़म भगतसिंह की याद में एक रैली से हुआ जिसमें युवाओं ने‘भगतसिंह का ख़्वाब अधूरा इसी सदी में होगा पूरा’और‘भगतसिंह से सपनों को साकार करो-साकार करो’जैसे गगनभेदी नारे लगाये।

                                                                                                                       

                                                                                                                                                                        रैली में नारे लगते प्रतिभागी

ऐसे कठिन समय में, जहाँ एक तरफ सरकार प्रगतिशील होने के दावे कर रही है और भाई चारे की बात कर रही है, वहीँ दूसरी तरफ वह कट्टरपंथी ताकतों को बढ़ावा भी दे रही है। एक तरफ सरकार विकास और रोजगार की बात कर रही है, वहीँ दूसरी तरफ मजदूर विरोधी कानूनों की सिपाहसालार भी बनी हुई है। विदेशी निवेश के सारे दरवाज़े खोल दिए गए हैं और स्वदेशी बनने की बात की जा रही है। जब शिक्षा और सिलेबस पर खतरा मंडरा रहा है, तब ऐसे समय में हमें भगत सिंह के आदर्शों से सीख लेते हुए एकत्रित होकर इस आने वाले फासीवाद से लड़ना होगा। इस सम्मलेन का भी यही संकल्प रहा है।

अनुवाद: प्रांजल

                                  

 

सांप्रदायिक ताकतें
नबउदारवाद
भारत नौजवान सभा
भाजपा
नरेन्द्र मोदी
साम्प्रदायिकता

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

पेट्रोल और डीज़ल के बढ़ते दामों 10 सितम्बर को भारत बंद

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप

मोदी के एक आदर्श गाँव की कहानी

क्या भाजपा शासित असम में भारतीय नागरिकों से छीनी जा रही है उनकी नागरिकता?


बाकी खबरें

  • राजु कुमार
    मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी
    09 May 2022
    सिवनी की घटना से मध्यप्रदेश का पूरा आदिवासी क्षेत्र आक्रोशित है। आज कई आदिवासी संगठनों ने संयुक्त रूप से सिवनी बंद का आह्वान किया था, जो पूरी तरह सफल रहा। सिवनी से लगे गांवों के आदिवासी भी इस बंद में…
  • भाषा
    श्रीलंका में कर्फ्यू, प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफ़ा दिया
    09 May 2022
    श्रीलंकाई अधिकारियों द्वारा सोमवार को पूरे देश में कर्फ्यू लगाये जाने के बीच प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे ने इस्तीफा दे दिया।
  • न्यूजक्लिक रिपोर्ट
    ज्ञानवापी मस्जिद सर्वे: कोर्ट कमिश्नर बदलने के मामले में मंगलवार को फ़ैसला
    09 May 2022
    वाराणसी के सिविल जज (सीनियर डिविजन) रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने कहा है कि सर्वे की टीम के कमिश्नर को बदलने की मांग वाली याचिका पर फ़ैसला मंगलवार को सुनाया जाएगा।
  • प्रभात पटनायक
    युद्ध, खाद्यान्न और औपनिवेशीकरण
    09 May 2022
    दुनियाभर के गेहूं के कुल निर्यात में 30 फीसद हिस्सा रूस और यूक्रेन मिलकर मुहैया कराते हैं। विशेष रूप से अफ्रीका के अनेक देश उनकी खाद्यान्न आपूर्ति पर ही ज्यादातर निर्भर हैं।
  • असद रिज़वी
    यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन
    09 May 2022
    यूपी पुलिस पर नागरिक समाज का आरोप है कि वह अपराधियों से अधिक, पीड़ित और उसके परिवार पर खामोश रहने के लिए दबाव बना रही है। “धमकाना , वसूली, झूठे मुकदमों में फंसा देने की धमकी जैसे अब आम बात हो गई है।”
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License