NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
समाज
भारत
राजनीति
चुनावी नतीजे तो जान गए अब नतीजों से उपजी बिहार की जनता की राय भी सुन लीजिए!
परमेश कुमार यादव ने चाय की दुकान पर भूपेंद्र सिंह पांडे को चुनावी जीत की बधाई देते हुए भोजपुरी लहजे में कहा कि अब लालटेन को कौन पूछता है। अब तो सब लोग बिजली के दीवाने हो चुके हैं।
अजय कुमार
11 Nov 2020
bihar

उदास मन से बैठे हुए परमेश कुमार यादव ने चाय की दुकान पर भूपेंद्र सिंह पांडे को चुनावी जीत की बधाई देते हुए भोजपुरी लहजे में कहा कि अब लालटेन को कौन पूछता है। अब तो सब लोग बिजली के दीवाने हो चुके हैं। 5 साल का यह लड़का अगले 10 साल बाद यह भी नहीं जानेगा कि लालटेन कैसा होता है। तेजस्वी को इस बारे में सोचना चाहिए। लालटेन चुनाव चिह्न अब चलेगा नहीं। यादव जी की बात सुनकर पांडे जी ठहाका मारकर हंस पड़े। आसपास के लोग भी हंसने लगे। पांडे जी बत्तीसी निकाल कर भोजपुरी में कहने लगे कि मोदी है तो मुमकिन है। तीर भी और लालटेन भी। पांडे जी बहुत खुश थे। पांडे जी जब चले गए तब चाय की दुकानदार ने बताया कि 2 दिन से पांडे जी बड़े उदास थे। कह रहे थे कि टीवी तेजस्वी की सरकार बना रहा है। आज खुश हुए हैं। खुशी में बड़ी अजीब अजीब हरकत कर दिए हैं। गांव की औरतों के सामने आज बाल बाल पिटने से बच गए हैं। पता ना चुनाव में का मजा मिलता है।

यह सारी बात वाल्मीकि नगर विधानसभा के क्षेत्र धनहा में एक चाय की दुकान पर साल 2020 के बिहार के विधानसभा नतीजों के आने के बाद हो रहीं थी। वाल्मीकि नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रत्याशी को  तकरीबन 21000 वोटों से हराकर जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी धीरेंद्र कुमार सिंह उर्फ रिंकू सिंह ने जीत हासिल की है।

बिहार विधानसभा चुनाव के साथ वाल्मीकि नगर लोकसभा उपचुनाव की भी लड़ाई लड़ी गई थी। इस सीट पर भी नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के सुनील कुमार ने जीत हासिल की है। उन्होंने महागठबंधन से कांग्रेस उम्मीदवार प्रवेश कुमार मिश्रा को 22,539 वोटों से मात दी। कांग्रेस उम्मीदवार प्रवेश मिश्रा इससे पहले पत्रकारिता में लंबी पारी खेल चुके हैं।

मंगलवार को बिहार विधानसभा चुनाव का नतीजा निकल रहा था। वाल्मीकि नगर विधानसभा क्षेत्र के गांव दौनहा में सुबह से बिजली नहीं थी। लोग मोबाइल पर नतीजे देख रहे थे। साथ में कह रहे थे कि बिजली को भी अभी काटना था। इसी बीच बिजली आ गई। मैं दुकानों की तरफ निकला। लेकिन दुकान पर कोई नहीं था। दुकानदारों का कहना था कि सब लोग चुनाव का रिजल्ट देख रहे हैं। सड़क सुनसान थी।

सड़क पर एक बूढ़े शख्स मिले। उन्होंने भोजपुरी में कहा गजब जमाना आ गईल बाबू। एक समय था जब लालू जीते कि नहीं जीते। यहां से कौन जीता कौन हारा। यह जानने के लिए रेडियो पर कई घंटे कान लगाकर सुनना पड़ता था। कोई साइकिल से आता था तो चिल्ला कर बताता था कि लालू इतना सीट से आगे चल रहे हैं। अब तो सब बदल गया है। लोग के पास पल-पल की खबर है। फिर भी लोग छटपटा रहे हैं कि 11:00 बज गया लेकिन अभी तक नहीं पता चला कि कौन जीत रहा है कौन हार रहा है। इसके बाद जब मैं लौट रहा था तब मैंने यह दृश्य देखा। 

इनमें से किसी को यह नहीं पता था कि महागठबंधन क्या है? गठबंधन क्या है? इन्हें केवल चार नाम पता हैं। लालू, नीतीश,तेजस्वी और मोदी। यहां जिनकी  चाह जीतती थी तो उनके चेहरे पर रौनक आती थी जिसकी चाह हारती थी वह कहते थे कि “हमनी के का मिली हमन क त रोटी खाती दिन भर जरे के पड़ी।” यानी हमें क्या मिलेगा। रोटी का जुगाड़ करने के लिए दिन भर मेहनत करना पड़ेगा। 

मैंने इनके बीच एक शिगूफा छोड़ दिया था कि अगर यह बात है कि आप लोगों को कुछ नहीं मिलेगा तो आप लोग वोट देने क्यों गए? आपके मन में चोर है? इसके बाद बेचारे ज्यादातर लोग कुछ बोलने से पहले एक दूसरे को देखकर हंसना शुरू कर देते थे और मेरी ही बात को चिपका देते थे।

इसके बाद मैं अगले दिन यानी बुधवार सुबह चुनावी नतीजे पर राय लेने के लिए वाल्मीकि नगर विधानसभा के कुछ इलाकों में घूमने निकला। मेरी पहली मुलाकात संयोगवश एक ऐसे शख्स से हुई जो बच्चों को पढ़ा रहे थे। समाज और राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले शख्स थे। चुनाव शब्द सुनते हैं उन्होंने बड़ी खुशी के साथ जवाब दिया की इस चुनाव की सबसे अच्छी बात तेजस्वी नहीं है। वह लोग तो जन्म लेते ही कुर्सी के दावेदार हो जाते हैं। उनकी बात ही छोड़िए। सबसे अच्छी बात लाल झंडे का जीतना है। लेफ्ट पार्टियों की जीत ने मन गदगद कर दिया है। असली लड़ाई यही लोग लड़ते हैं। मैंने इनके पर्चे और बांटी हुई किताबें खूब पढ़ी हैं। यह लोग जीते तो पुराने दिन के याद आ गए जब इनके जत्थे में मैं भी शामिल हुआ करता था। सुन रहा हूं कि इनकी वजह से भोजपुर में भाजपा बहुत पीछे हो गई है। आने वाले दिनों में बिहार की राजनीति भाजपा के हाथों में जाने वाली है। नीतीश कुमार के बाद जेडीयू खत्म हो जाएगी। केवल आरजेडी बचेगी। ऐसे में लेफ्ट पार्टियों के पास बहुत बड़ा चांस बना है कि वह जबरदस्त काम करें। खुद को दिखाते रहे। और बिहार की राजनीति में एक दमदार जगह बना लें। बिहार ने लेफ्ट पार्टियों को आगे आने के लिए बहुत बड़ा अवसर दिया है। इसे को खोएंगे तो बेचारे और पीछे चले जाएंगे।

बात आगे बढ़ी तो मुलाकात अनाज रखने के लिए बांस का बखार बना रहे सैयद मियां से हुई। सैयद मियां कहे कि देखिए साहब हम बिल्कुल नहीं डिगे हैं। हम तो चाहते थे कि भाजपा हारे। इसलिए हाथ के पंजा पर निशान दिए हैं। जबकि हमें पता है कि वह बहुत ही लड़ाने भिड़ाने वाला आदमी है। हम बखार बनाते हैं इसलिए घर घर की बात भी सुन लेते हैं। बहुत सारी औरत सब अपने मर्द का बात नहीं मानी है सब। फलाने घर की औरत कह रही थी कि कभी इस इलाके में बिजली आई है। कभी नहीं आई है। यह मोदी जी की वजह से हुआ है। वोट तो मोदी जी के ही पड़ेगा। चिलाने घर की औरत खुलकर कह रहे थी दारू बंदी के बाद उसका मर्द उसे कम मार रहा है। वजह यह है कि वह दारू कम पीता है। चाहे कुछ भी हो जाए वोट तो नीतीश को ही जाएगा। ई सब तो बहुत दूर की बात है मेरे घर की ही औरत मुझे कह रही थी कि इतना राशन कभी ना मिला था ना ही बैंक में कभी पैसा आया। वोट मोदी को देंगे। मैंने कहा मार खाओगे। यह सब राजनीति है। भाजपा मुस्लिमों की दुश्मन है। वोट उसी को देंगे जो भाजपा को हराएगी।

आगे बढ़ा फिर चाय की दुकान आई। चाय की दुकान पर जाते ही कह दिया कि लोगों ने बेरोजगारी की वजह से जमकर तेजस्वी को वोट दिया है। तभी तो 110 सीटें आई हैं। लोग मुझ पर हंसने लगे। एक ने कहा कि आप तो हिंदी बोलते हैं। लगता है आप यहां के नहीं हैं। बेरोजगारी से कोई फर्क नहीं पड़ता। यह बाबू साहेब का इलाका है। सबने रिंकू सिंह को वोट दिया है। उधर जाइए उधर यादवों का इलाका मिलेगा। वहां सब ने तेजस्वी को वोट दिया है।

तभी किसी ग्रेजुएशन के लड़के ने रोकते हुए कहा कि बेरोजगारी कभी मुद्दा नहीं हो सकता है। पापा कहते हैं की पढ़ोगे नहीं तो नौकरी कहां से मिलेगी। पढ़ाई ऐसी है की नौकरी के दरवाजे पर पहुंचकर मुंह लटकाए लौटना पड़ता है। नौकरी देने वाला कहता है कि नौकरी तो है लेकिन आपके पास वह काबिलियत नहीं है कि आपको नौकरी पर रखा जाए। मुझे लगता है सब ऐसा ही सोचते हैं। सब कहते हैं कि बेरोजगारी कोई मुद्दा नहीं है। पढ़ोगे नहीं काबिल नहीं बनोगे तो मोदी जी नौकरी कैसे दे देंगे। नौकरी पेड़ पर थोड़े ना लटका होता है। उसे हासिल करना पड़ता है। मोदी जी के विपक्षी जानबूझकर बेरोजगारी का मुद्दा बना रहे हैं। तुम सब पढ़ने पर ध्यान दो। नौकरी मिलेगी। यह बात बोलते ही तीन चार लोगों ने हां में हां मिलाते हुए कहा कि सही कह रहा है लड़का। स्कूल बनाइए, कॉलेज बनाइए, ठीक ढंग का मास्टर लाइए, यह सब बात समझ में भी आती है। नौकरी वाली बात नहीं समझ में आती। जो बहुत अधिक गरीब है उसे मोदी जी राशन तो दे ही रहे हैं ना। यहां वोट भले नीतीश और तेजस्वी में बटे लेकिन बड़का जब चुनाव होगा तो वोट मोदी जी को ही दिया दिया जाएगा। यहां से लोकसभा का चुनाव भी हुआ तो लोगों ने मोदी जी को ही वोट डाला।

मैंने हंसते हुए कहा आप लोग मोदी जी मोदी जी बहुत करते हैं। लोगों ने भी हंसते हुए कहा आपने कभी राहुल गांधी जी सुना है। सब हंसने लगे। मैं वहां से आगे बढ़ा।

आगे बढ़ा। रास्ते में लोगों से पूछते चला। सवाल था कि नीतीश से गुस्सा होने के बावजूद नीतीश चुनाव जीत गए। तो आप लोग गुस्सा किस बात के थे। कईयों ने कहा कि हम तो लालटेन को ही वोट दिए थे। पता नहीं क्या हुआ। इसी बीच तकरीबन 55 साल के रामेश्वर प्रसाद मिले। उन्होंने कहा देखा है वह जमाना। यादव लोग कपार पर बैठ जाते थे। अबकी बार भी यही हो रहा था। टीवी में देखा कि तेजस्वी की रैली में बड़ी भीड़ जुट रही है। तो सोचा कि नहीं देंगे। वह जमाना नहीं आना चाहिए। जटाशंकर चौहान कहते हैं कि चाहे कुछ भी हो लेकिन नीतीश की वजह से यह सड़क बन पाई है। नीतीश को चांस देना चाहिए। तेजस्वी तो अभी लड़का है।

यहां बातचीत खत्म हुई तो आगे बढ़ चला। आगे तो उदासी थी। राजद का कार्यकर्ता उदास मन से कह रहा था कि कांग्रेस की वजह से हार गया। नहीं तो सरकार उनकी बनती। कांग्रेस मध्य प्रदेश, गुजरात में बुरी तरह से हारी है। यहां केवल हारी ही नहीं राजद को भी ले डूबी है। राजद की सरकार बननी चाहिए थी। तेजस्वी नेता होते अब तक। पता नहीं कांग्रेस के सहारे लोग भाजपा को कैसे हराएंगे। आलाकमान के नेताओं को कार्यकर्ताओं के बारे में तो सोचना ही चाहिए। हम इतनी मेहनत करते हैं। और लोग मिलकर एक अच्छा नेता नहीं चुन पाते। राहुल गांधी पर बहुत सारे बिहार के लोग हंसते हैं। साफ कहते हैं कि यह नेता नहीं है। बोल नहीं पाता है। कांग्रेस की स्थिति तो बहुत खराब है यहां। आप ही बताइए क्या बिहार में कांग्रेस के दो बड़े नेता का नाम आप बता सकते हैं? मैं चुप हो गया।

काम भर बातचीत करने के बाद अब मैं लौट रहा था। मैं स्थानीय स्कूल के सोशल साइंस के मास्टर साहब दक्षिणेश्वर प्रसाद यादव से टकरा गया। चूंकि वह मास्टर थे तो मैंने पूछा कि चुनावी नतीजे कैसे लगे आपको? मास्टर साहब ने कहा कि बिहार में विकास के बारे में बात कीजिए या जंगल राज के बारे में। लेकिन कोई भी बात जाति में लिपटकर ही आती है। किसी भी तरह की बात लोग अपनी जाति की जगह से खड़े होकर करते हैं। जंगल राज कहने वाला यादव जाति का नहीं होगा। 10 लाख नौकरियों की बात करते हुए तेजस्वी का गुणगान करने वाला अधिकतर हिस्सा यादव या मुस्लिम जाति का होगा। नीतीश कुमार के खिलाफ खूब गुस्सा होगा। लेकिन यादवों से इधर लोगों की हल्की सी एक बात होगी नीतीश को चांस देना चाहिए। बिहार जैसे राज्य में सरकार के जरिए जनकल्याण से ज्यादा सरकार के जरिए जातिगत जुड़ाव अधिक मायने रखता है। यह बहुत गहरा है। तेजस्वी लालू के बेटे हैं। नेता का बेटा तो बहुत मुश्किल से ऐसे अलगाव को कभी पाट पाएगा। तेजस्वी ने बहुत अच्छा दमखम दिखाया है। लेकिन अगर कुछ बहुत बेहतरीन नहीं किया तो तेजस्वी यादव के नेता बनकर रह जाएंगे। जरा सोचिए पूरे चुनाव में लोग कह रहे थे कि एक तेजस्वी जैसे बच्चे के पीछे पूरा मोदी राजकाज लग गया है। सब खड़े हो गए हैं। यह सारी बातें आम लोगों में बहुत अपील करती हैं। लेकिन जैसे ही जाति बदलती है लोग थोड़ा गहरा देखने लगते हैं। खुलकर कहते हैं तेजस्वी बच्चा नहीं है। उसकी केवल एक पहचान है कि वह लालू यादव का लड़का है। इस नाते थाली में सजे सजाए उसे मुख्यमंत्री के पद पर लड़ने की भूमिका मिल गई है। उसने तो जन्म लेते ही वह बहुत बड़ी खाई पार कर दी जिसे कोई जिंदगी भर रगड़ने के बाद भी पार नहीं कर पाता। यह सब बकवास बतोलेबजी है। चुनाव में बहुत काम आती है। लेकिन बहुत नुकसान भी पहुंचाती है। इस चुनाव से अगर तेजस्वी खुद को उस तरह गढ़ पाते हैं जो उन्हें लालू की पहचान की बजाय तेजस्वी की पहचान से जोड़ने में सक्षम हो तो वह पक्का बहुत बड़े नेता साबित होंगे। बाकी चुनाव है। इसमें हार जीत का महत्व इतना बड़ा नहीं कर देना चाहिए कि लोकतंत्र की आत्मा ही मरने लगे। दुर्भाग्यवश भारत में चुनाव यह ज्यादा कर रहे हैं।

Bihar election 2020
bihar result 2020
people opinion on bihar election result

Related Stories

बिहार चुनाव के फ़ैसले की वजह एआईएमआईएम या कांग्रेस नहीं,बल्कि कुछ और है

बिहार चुनाव: क्रिकेट मैच और चाय पर चर्चा...और पांच बड़ी परेशानियां

बिहार की जमींदारी प्रथा ने बिहार में औद्योगीकरण नहीं होने दिया!


बाकी खबरें

  • Jhajjar Road Flyover of Bahadurgarh
    सोनिया यादव
    लखीमपुर खीरी कांड के बाद हरियाणा में प्रदर्शनकारी महिला किसानों को ट्रक ने कुचला, तीन की मौत
    28 Oct 2021
    महज़ एक महीने के भीतर लखीमपुर खीरी की घटना के बाद ये दूसरा किसानों की हत्या से जुड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया क्षेत्र में तीन अक्टूबर को हुई हिंसा में चार किसानों…
  • fact check
    प्रियंका झा
    आज तक, APN न्यूज़ ने श्रीनगर में WC में पाकिस्तान की जीत का जश्न बताकर 2017 का वीडियो चलाया
    28 Oct 2021
    ऑल्ट न्यूज़ ने श्रीनगर के एक रिपोर्टर से बात की जो समाचारपत्र के लिए काम करते हैं. उन्होंने कहा कि ये वीडियो श्रीनगर का ही है लेकिन पुराना है. उन्होंने ये भी कहा कि हाल में श्रीनगर में मैच के बाद…
  • schools colleges reopen
    भाषा
    दिल्ली: डेढ़ साल बाद एक नवंबर से फिर खुलेंगे स्कूल, कॉलेज
    28 Oct 2021
    दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने बुधवार को कहा कि दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने शहर में एक नवंबर से सभी शैक्षणिक संस्थानों को फिर से खोलने और छठ पूजा समारोहों को कोविड के सख्त…
  • Zakia Jafri
    सबरंग इंडिया
    जाकिया जाफरी मामला : याचिकाकर्ता ने जांच की मांग की
    28 Oct 2021
    सुप्रीम कोर्ट जाकिया जाफरी द्वारा दायर एक विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें गुजरात प्रशासन में प्रमुख सदस्यों की भूमिका की जांच की मांग की गई थी, जिन्होंने 2002 के नरसंहार को बेरोकटोक…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 16,156 नए मामले, 733 मरीज़ों की मौत
    28 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.47 फ़ीसदी यानी 1 लाख 60 हज़ार 989 हो गयी है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License