NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बिहार : न खाद्यान्न और न ईंधन उपलब्ध, छतों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ज़िंदा रहने का संघर्ष करते बाढ़ पीड़ित
'हम क्या कर सकते हैं, बाढ़ के पानी में सबकुछ डूब गया है और गांव को जोड़ने वाली सड़क को भी बाढ़ ने बर्बाद कर दिया है। बाहर निकलने के लिए कोई रास्ता ही नहीं है। प्रखंड अधिकारियों ने उपलब्धता ना होने का हवाला देते हुए नाव की व्यवस्था करने से इनकार कर दिया है। हम अब तक ज़िंदा बचे हुए हैं, लेकिन अगर हमें खाने का सामान उपलब्ध नहीं कराया गया, तो हम भूखे मर जाएंगे।’
मोहम्मद इमरान खान
13 Jul 2021
बिहार : न खाद्यान्न और न ईंधन उपलब्ध, छतों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में ज़िंदा रहने का संघर्ष करते बाढ़ पीड़ित

पटना: भिखारी राय पिछले हफ़्ते से मजबूर हैं। मुजफ्फरपुर जिले के बाशगाथा गांव स्थित उनके घर में बाढ़ का पानी घुसने के बाद, भिखारी और उनका परिवार अपने छत पर फंसे हुए हैं। अब छत ही उनके परिवार के लिए सुरक्षित जगह बची है। राय स्थानीय प्रशासन से अपने परिवार को निकालने के लिए बोट उपलब्ध न करवा पाने को लेकर नाराज हैं।

इस तरह की व्यथा वाले राय अकेले शख़्स नहीं हैं। उनके पड़ोसी रामेंद्र सिंह ने अपने घर के बाहर रखे ट्रेक्टर-ट्रॉली को परिवार के लिए सुरक्षित पनाहगाह बनाने का फ़ैसला किया। वह कहते हैं, "मेरे घर में छाती तक पानी घुस गया, मेरे पास अपने बच्चों को ट्रॉली तक पहुंचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था, क्योंकि वहां बाढ़ के पानी में डूबने की कोई गुंजाइश नहीं थी।"

इसी गांव के लालबाबू प्रसाद कहते हैं कि ज़्यादातर घरों में कमर तक पानी घुस गया है। लोगों को ज़िंदा रहने के लिए अपने छतों पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। वह कहते हैं, "हम क्या कर सकते हैं, बाढ़ का पानी सब तरफ भर गया है और गांवों को जोड़ने वाली सड़क को भी इस पानी ने नुकसान पहुंचाया है। हमारे पास बाहर जाने के लिए कोई रास्ता नहीं है। प्रखंड अधिकारियों ने बोट ना रहने की बात कहते हुए, बोट उपलब्ध कराने से इंकार कर दिया है। हम अब तक ज़िंदा बचे हुए हैं, लेकिन अगर हमें खाने का सामान नहीं पहुंचाया गया, तो हम भूखे मर जाएंगे।"

राय, सिंह और प्रसाद तीनों ही बाढ़ पीड़ित हैं। उन्होंने कहा कि वे अब तक सूखे चावल, गुड़ और दूसरी चीजों के सहारे ज़िंदा हैं। यही उनका सूखा भोजन है, क्योंकि उनका रसोईघर पानी के भीतर डूबा हुआ है और खाना बनाने के लिए ईंधन उपलब्ध नहीं है। इन लोगों ने बताया कि इनके खेतों में भी पानी भर गया है, इससे धान की रोपाई भी बुरे तरीके से प्रभावित हुई है। इन लोगों को आशा है कि आगे वे दोबारा रोपाई कर पाएंगे। 

मुजफ्फरपुर जिले में बाढ़ से प्रभावित दो लाख लोगों में यह तीन की कहानी है। मुजफ्फरपुर भी बिहार के उन एक दर्जन ज़िलों में शामिल है, जिनमें बाढ़ आई हुई है। अब तक कितने गांव और लोग इस बाढ़ में प्रभावित हुए हैं, सरकारी संस्थानों द्वारा यह आंकड़ा निकाला जाना अभी बाकी है। राज्य में बाढ़ की स्थिति पर प्रतिदिन कोई आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं होता, सिर्फ़ बाढ़ से बढ़ता जलस्तर और वर्षा का अनुमान बताया जाता है।

सोमवार को भी राज्य में बाढ़ की स्थिति ख़तरनाक बनी रही, क्योंकि उफान पर चल रही कई बड़ी नदियां कई जगह खुले मैदान में आ गईं। इसके चलते अलग-अलग ज़िलों में सैकड़ों गांव डूब क्षेत्र में आ गए। इसके चलते लोग अपने घरों को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं, अब ऊंची जगहों पर स्थानांतरित होने के बाद उन्हें संघर्ष करना पड़ रहा है। 

जबसे गांवों में बाढ़ का पानी घुसा है, हज़ारों लोग, जिनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं, तबसे सबसे बुरे तरीके से प्रभावित गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिमी और पूर्वी चंपारण, दरभंगा, पूर्णिया, मधुबनी और कटिहार में लोगों को आसपड़ोस की ऊंची जगहों और हाईवे पर शरण लेनी पड़ रही है।

अब जब पानी बड़े भूमिखंडों को जलमग्न कर चुका है, तब कई लोगों ने पॉलिथीन सीट से अस्थायी तंबू गाड़ लिए हैं। बागमती, कोशी, लाखनदेई, गंडक, बूढ़ी गंडक और कमला बालन नदियों में जल स्तर बढ़ने के बाद, बाढ़ का पानी पूर्वी और पश्चिमी चंपारण, गोपालगंज, मुजफ्फरपुर, अररिया, किशनगंज, सीतामढ़ी, श्योहर, मधुबनी और दरभंगा ज़िलों में हज़ारों गांवों के लिए ख़तरा बन चुका है।

उत्तरी बिहार के बाढ़ प्रभावित ज़िलों में ट्रेन सेवा बाधित हो गई है। कई ट्रेन रद्द हो गई हैं, कई ट्रेनों का रूट बदल दिया गया है। जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक़, पिछले हफ़्ते भारी बारिश के बाद बांधों से बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने के बाद तटबंधों पर दबाव बढ़ गया है। अब नदियों का जलस्तर चिंता का विषय बन गया है, क्योंकि कई जगह यह नदियां ख़तरे के निशान से ऊपर बह रही हैं और तटबंधों को ख़तरा पैदा कर रही हैं।

हालांकि WRD ने आधिकारिक दावा किया है कि सभी बाढ़ सुरक्षा तटबंध सुरक्षित हैं।

इस साल मानसून आने के बाद से बिहार और पड़ोसी नेपाल में बड़ी नदियों के बहाव क्षेत्रों में अधिशेष वर्षा हुई है (430 मिलीमीटर से भी ज़्यादा, जो सामान्य वर्षा से 100 मिलीमीटर ज़्यादा है)। इसके चलते निचले इलाकों में बाढ़ आ गई है।

भारतीय मौसम विभाग की पटना शाखा ने अगले कुछ दिनों में पूरे राज्य में मध्यम से भारी बारिश का अंदाजा लगाया है। इसके चलते राज्य सरकार ने 28 से 30 बाढ़ संभावित ज़िलों को आगाह कर दिया है। 

राज्य में अनुमान से परे वर्षा होने के चलते किसानों के लिए भी दिक्कत हो गई है। क्योंकि खेतों में पानी भरे होने से उनकी धान की बुआई पूरी तरह बर्बाद हो गई है। बताया जा रहा है कि गर्मी के मौसम में आने वाली, फिलहाल खेतों में खड़ी मक्के की फ़सल भी पिछले महीने भारी बारिश के चलते खराब हो गई थी। 

WRD की वेबसाइट के मुताबिक़, बिहार सबसे ज़्यादा बाढ़ प्रभावित राज्य है। देश के कुल बाढ़ संभावित हिस्से में बिहार की हिस्सेदारी 17।2 फ़ीसदी है। 94।16 लाख हेक्टेयर में से 68।80 लाख हेक्टेयर (76 फ़ीसदी उत्तरी बिहार और 73 फ़ीसदी दक्षिणी बिहार) बाढ़ संभावित क्षेत्र है। मौजूदा स्थिति में राज्य के 38 ज़िलों में 28 ज़िलों में बाढ़ का ख़तरा बना रहता है।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें।

Bihar: No Food or Cooking Fuel, Flood Victims Struggle for Survival on Rooftops, in Tractor-Trolleys

Bihar
Bihar flood
natural disaster
climate change
Bihar Rivers

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

गर्म लहर से भारत में जच्चा-बच्चा की सेहत पर खतरा

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

मज़दूर वर्ग को सनस्ट्रोक से बचाएं


बाकी खबरें

  • BCI
    भाषा
    बीसीआई ने खोसला को दोषी ठहराने के ख़िलाफ़ जारी वकीलों की हड़ताल वापस लेने का निर्देश दिया
    09 Nov 2021
    बीसीआई ने कहा कि यह कानून के तहत प्रदत्त वैध तरीका नहीं है। एक निचली अदालत ने 1994 में एक महिला वकील के साथ मारपीट करने के मामले में 29 अक्टूबर को खोसला को दोषी ठहराया था। सजा पर बहस 15 नवंबर को होगी।
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चैक: भाजपा द्वारा बुंदेलखंड में घर-घर नल से जल का दावा ग़लत
    09 Nov 2021
    भाजपा उत्तर प्रदेश के आधिकारिक अकाउंट से एक ट्वीट किया गया है। ट्वीट किये गए ग्रैफिक में बुंदेलखंड में पानी के संबंध में दो तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। इन तस्वीरों के जरिये सपा, बसपा, कांग्रेस…
  • rafale
    भाषा
    रफ़ाल मामले पर पर्दा डालने के लिए मोदी सरकार और सीबीआई-ईडी के बीच सांठगांठ हुई: कांग्रेस
    09 Nov 2021
    कांग्रेस और राहुल गांधी की ओर से ये आरोप उस वक्त लगाए गए हैं जब फ्रांस के पोर्टल ‘मीडिया पार्ट’ ने अपनी एक रिपोर्ट में दावा किया है कि रफ़ाल निर्माता कंपनी दसॉल्ट की ओर से बिचौलियों को कम से कम 75…
  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: पर्यावरण को दांव पर लगाकर पर्यावरणविद् का सम्मान!
    09 Nov 2021
    पर्यावरण को बचाना ही पर्यावरण का सच्चा सम्मान है। पर्यावरण को लेकर देश-दुनिया में चिंता है, ऐसे में पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा को पद्मश्री से सम्मानित किया जाना अच्छा कदम है, लेकिन इससे भी अच्छा होता…
  • Demonetisation
    अनिल जैन
    नोटबंदी: पांच साल में इस 'मास्टर स्ट्रोक’ ने अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया
    09 Nov 2021
    नोटबंदी का फ़ैसला भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए हर लिहाज से आत्मघाती साबित हुआ। इसीलिए सरकार और उसके ढिंढोरची की भूमिका निभा रहे मीडिया ने भी नोटबंदी के पांच साल पूरे होने पर इस मसले पर पूरी तरह खामोशी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License