NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
भारत
बिहार: कोल्ड स्टोरेज के अभाव में कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर आलू किसान
कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की काफी कमी होने से आलू की बंपर फसल होने के बावजूद किसानों को अपनी उपज मजबूरी में बेचनी पड़ी है।
मोहम्मद इमरान खान
30 Mar 2022
potato
फोटो सौजन्यः रायटर्स

पटनाः बिहार के कटिहार जिले के किसान राजेंद्र मंडल, नौशाद अली, मनोज सिंह, अब्दुल रहमान और संजय यादव इस बार आलू की बम्पर पैदावार होने के बावजूद परेशान हैं और चिंतित हैं। जिले में आलू-भंडारण-सुविधाओं की कमी होने तथा कुछ कोल्ड स्टोरेज इकाइयां किसानों को उनके पैदावार की आपात बिक्री पर मजबूर कर रही हैं। 

मक्के की तरह आलू के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) नहीं होने से सीमांचल के इस बाढ़ पीड़ित क्षेत्रों- किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जिले-के हजारों किसान अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी एमएसपी की मांग का सरकार के बहरे कानों पर कोई असर नहीं हुआ है। 

मार्च की शुरुआत तक, मंडल, अली, सिंह, रहमान और यादव को आलू में मुनाफा होने की उम्मीद थी-लेकिन उनकी उम्मीदें धराशायी हो गई हैं। मंडल न्यूजक्लिक से बातचीत में कहते हैं,“हम क्या कर सकते हैं? कोविड-19 महामारी के दो बुरे वर्ष गुजरने के बाद, हम अपने निवेश और कड़ी मेहनत पर सही रिटर्न पाने की आस लगाए थे। अब यह असंभव मालूम होता है।” 

मंडल की तरह सीमांचल में हजारों किसान हैं। मक्का किसानों की तरह, उनके पास भी कम कीमत पर अपनी उपज बेचने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है। 

आलू किसान मार्च के अंतिम सप्ताह में अचानक तापमान बढ़ने और बेमौसम बारिश के डर से परेशान हैं क्योंकि उनकी उपज खुले आसमान के नीचे पड़ी रहती है। मंडल कहते हैं “आने वाले दिनों में कहीं बेमौसम बारिश हुई या पारा चढ़ा तो आलू नष्ट हो जाएगा। हम लाचार असहाय हैं क्योंकि राज्य सरकार आलू-भंडारण की सुविधाएं नहीं मुहैया करातीं।” 

कटिहार में केवल पांच निजी कोल्ड स्टोरेज इकाइयां चालू हालत में हैं, जिनकी क्षमता ​7​​ लाख बोरी आलू को स्टोर करने की है। यह फसल के बाद आलू को स्टोर करने के लिए आवश्यक क्षमता से काफी कम है। हाल के वर्षों में जिले में तीन सरकारी कोल्ड स्टोरेज इकाइयों को बंद कर दिया गया था। 

​जिले के एक अधिकारी अरुण सिंह, न्यूजक्लिक से बातचीत में स्वीकार करते हैं कि, “​यह सच है कि कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं की कमी आलू किसानों को परेशान करती है। जिले में एक भी सरकारी कोल्ड स्टोरेज नहीं है।” 

जिला कृषि कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार, हजारों किसानों ने जिले में लगभग ​8,000​​ हेक्टेयर पर आलू की खेती की है और लगभग ​23​​ लाख क्विंटल का उत्पादन किया है। एक अन्य अधिकारी राहुल सिंह भी कहते हैं कि “इस बार आलू की बम्पर फसल हुई है।” 

​अली के अनुसार, एक किसान आमतौर पर ​​50​​ किलोग्राम के दो जूट बैग में एक क्विंटल आलू रखता है। वे कहते हैं, “इसका मतलब यह हुआ कि ​आलू की 46​​ लाख बोरियों (आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक 23​​ लाख क्विंटल) को कोल्ड स्टोरेज में रखने की जरूरत है। लेकिन कुछ निजी कोल्ड स्टोरेज इकाइयों में भंडारण-क्षमता का अभाव है।” 

अली आगे कहते हैं, “अगर सरकार शीत भंडारण इकाइयों का निर्माण करती तो इससे किसानों को अपना लाभ बढ़ाने में मदद मिलती। भंडारण की सुविधा न होने से किसानों का शोषण स्थानीय और बाहरी व्यापारी कर रहे हैं।” 

किसानों को हो रहे नुकसान के बारे में समझाते हुए यादव कहते हैं,"प्रति हेक्टेयर उत्पादन की हमारी लागत ​​1​​ लाख रुपये से अधिक बैठती है,लेकिन हमें कम रिटर्न मिलता है। हमें केंद्र की भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पर कोई भरोसा नहीं है, जिसने ​2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का वादा किया था। किसानों को साल दर साल भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है और उन्हें अपनी फसलों की मजबूरन बिक्री करनी पड़ रही है।” 

इसी तरह मक्का के हजारों किसान संकटग्रस्त बिक्री का सहारा लेने को मजबूर हुए हैं। राज्य कृषि विभाग के अनुसार,पूरे बिहार में कुल मक्का उत्पादन का लगभग ​65​ फीसदी अकेले सीमांचल और कोशी क्षेत्रों में होता है। देश बिहार देश में मक्के का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। 

पटना स्थित केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान के अनुसार, आलू का उत्पादन मौसमी होता है, लेकिन पूरे वर्ष इसका विपणन होता है। कोल्ड स्टोरेज इकाइयों की कमी के कारण, किसान अपनी उपज को सुरक्षित रूप से संग्रहीत करने में असमर्थ हैं, जिससे उन्हें फसल के तुरंत बाद इसे मामूली कीमत पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इससे फसल कटाई के मौसम में कीमत में अचानक गिरावट आ जाती है। 

राज्य के कृषि विभाग के अनुसार, बिहार में चावल, गेहूं और मक्का के बाद आलू चौथी प्रमुख फसल है। आलू की खेती और उत्पादन में यह राज्य उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के बाद तीसरे स्थान पर है। 

अंग्रेजी में मूल रूप से लिखे लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए लिंक पर क्लिक करें

https://www.newsclick.in/potato-farmers-bihar-katihar-profit-cold-storage

potato farmers
Potato farming
Bihar
katihar
agricultural crises

Related Stories

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्ट: कम हो रहे पैदावार के बावजूद कैसे बढ़ रही है कतरनी चावल का बिक्री?

यूपी चुनाव: आलू की कीमतों में भारी गिरावट ने उत्तर प्रदेश के किसानों की बढ़ाईं मुश्किलें

ग्राउंड  रिपोर्टः रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के गृह क्षेत्र के किसान यूरिया के लिए आधी रात से ही लगा रहे लाइन, योगी सरकार की इमेज तार-तार

पीएम के 'मन की बात' में शामिल जैविक ग्राम में खाद की कमी से गेहूं की बुआई न के बराबर

बिहारः खाद न मिलने से परेशान एक किसान ने की आत्मदाह की कोशिश

बिहार खाद संकटः रबी की बुआई में देरी से किसान चिंतित, सड़क जाम कर किया प्रदर्शन

पूर्वांचल से MSP के साथ उठी नई मांग, किसानों को कृषि वैज्ञानिक घोषित करे भारत सरकार!

ग्राउंड रिपोर्ट: पूर्वांचल में 'धान का कटोरा' कहलाने वाले इलाके में MSP से नीचे अपनी उपज बेचने को मजबूर किसान


बाकी खबरें

  • modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    चुनावी चक्रम: लाइट-कैमरा-एक्शन और पूजा शुरू
    19 Dec 2021
    सरकार जी उतनी गंभीरता, उतना दिमाग सरकार चलाने में नहीं लगाते हैं जितना पूजा-पाठ करने में लगाते हैं। यह पूजा-पाठ चुनाव से पहले तो और भी अधिक बढ़ जाता है। बिल्कुल ठीक उसी तरह, जिस तरह से किसी ऐसे छात्र…
  • teni
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे : जयपुर में मौका चूके राहुल, टेनी को कब तक बचाएगी भाजपा और अन्य ख़बरें
    19 Dec 2021
    सवाल है कि अजय मिश्र को कैसे बचाया जाएगा? क्या एसआईटी की रिपोर्ट के बाद भी उनका इस्तीफा नहीं होगा और उन पर मुकदमा नहीं चलेगा?
  • amit shah
    अजय कुमार
    अमित शाह का एक और जुमला: पिछले 7 सालों में नहीं हुआ कोई भ्रष्टाचार!
    19 Dec 2021
    यह भ्रष्टाचार ही भारत के नसों में इतनी गहराई से समा चुका है जिसकी वजह से देश का गृह मंत्री मीडिया के सामने खुल्लम-खुल्ला कह सकता है कि पिछले 7 सालों में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ।
  • A Critique of Capitalism’s Obscene Wealth
    रिचर्ड डी. वोल्फ़
    पूंजीवाद की अश्लील-अमीरी : एक आलोचना
    19 Dec 2021
    पूंजीवादी दुनिया में लगभग हर जगह ग़ैर-अमीर ही सबसे ज़्यादा कर चुकाते हैं और अश्लील-अमीरों की कर चोरी के कारण सार्वजनिक सेवाओं में होने वाली कटौतियों की मार बर्दाश्त करते रहते हैं।
  •  Bihar and UP lagging behind in studies
    एम.ओबैद
    बिहार और यूपी पढ़ाई में फिसड्डी: ईएसी-पीएम
    19 Dec 2021
    रिपोर्ट में बड़े राज्यों में 9 राज्यों को शामिल किया गया है जिसमें बिहार 36.81 अंकों के साथ नौवें तथा उत्तर प्रदेश 38.46 अंकों के साथ आठवें स्थान पर है। दोनों राज्य का स्थान राष्ट्रीय औसत 48.38 से…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License