NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: चौथे चरण में, यूपी के हार्टलैंड ने बदला पाला
29 अप्रैल को चौथे चरण में हुए मतदान में, भाजपा के 5 सीटें जीतने का अनुमान है जो 2014 में जीती 12 सीटों से काफ़ी कम है। इन चार चरणों में भाजपा द्वारा कुल 39 में सीटों में से केवल 12 सीटों पर जीत दर्ज करने का अनुमान है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
30 Apr 2019
Translated by महेश कुमार
चुनाव 2019: चौथे चरण में, यूपी के हार्टलैंड ने बदला पाला

उत्तर प्रदेश के आम चुनाव का रहस्य अब राज्य के गर्भ में प्रवेश कर गया है, विपक्षी गठबंधन चौथे चरण में भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को निर्णायक रुप से पछाड़ का संकेत देते हुए, अपनी बढ़त बनाते दिखाई दे रहे हैं। 2017 के विधानसभा चुनावों के अनुमानों से पता चलता है कि समाजवादी पार्टी (सपा), बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) के गठबंधन को आठ सीटों पर वापस लाने की तैयारी है, जबकि बीजेपी को पांच सीटों पर ही संतोष करना होगा।

2017 के विधानसभा चुनावों के ये अनुमान - न्यूज़क्लिक की एनालिटिक्स (विश्लेशक) टीम द्वारा तैयार किए गए हैं- इसके लिए संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों की 2017 के परिणामों के मुताबिक़ मैपिंग करना, प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में गठबंधन के वोटों को जोड़ना और बीजेपी से 2.5 प्रतिशत दूर होते वोट के एक अतिरिक्त कारक को लेना शामिल है। यह तरीक़ा नए गठबंधन के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नीतियों के प्रति असंतोष को भी मद्देनज़र रखता है।

29 अप्रैल को लोकसभा सीटों पर हुए चुनाव में से 12 को 2014 के आम चुनावों में भाजपा ने भारी बहुमत से क़ब्ज़ा लिया था। 2017 के विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र, सभी 13 भाजपा द्वारा जीते गए होते यदि विधानसभा परिणाम संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों पर मैप किए जाते।

Map 1_1.jpg

Map 2_0.jpg

Chart 2_0.jpg

चौथे चरण का मतदान शाहजहाँपुर, खीरी, हरदोई, मिश्रीख, उन्नाव, फ़र्रुखाबाद, इटावा, कन्नौज, कानपुर, अकबरपुर, जालौन, झाँसी और हमीरपुर क्षेत्रों में हुआ था जो उत्तर में तराई की सीमा से लगते हुए बुंदेलखंड क्षेत्र से लेकर मध्य प्रदेश की सीमा तक फैला हुआ है। दक्षिण में कानपुर इस बेल्ट में एकमात्र प्रमुख शहर है और जोकि एक औद्योगिक केंद्र भी है। इटावा, कन्नौज क्षेत्र सपा का गढ़ हैं और सपा नेता अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव ने 2014 में कन्नौज सीट जीती थी।

एसपी और बीएसपी का एक साथ आना, यादव (अन्य पिछड़ा वर्ग) और दलितों (मुख्य रूप से जाटवों) का एक दुर्जेय सामाजिक गठबंधन बनाना, इस बेल्ट के लिए अजेय प्रतीत होता है। अगर कांग्रेस अलग से चुनाव नहीं लड़ती और महागठबंधन में शामिल हो जाती, तो भाजपा शायद और भी ज़्यादा सीटें हार जाती।

बीजेपी की गिरावट सभी चरणों में लगातार जारी 

यूपी में पहले तीन चरणों के मतदान में इसी तरह के अनुमानों को जोड़ते हुए, जहाँ 39 सीटों पर मतदान पूरा हो चुका है, वहाँ से गठबन्धन को 27 सीटों पर जीत हासिल करने का अनुमान है, जबकि भाजपा केवल 12 सीटें जीत पाएगी, ऐसा अनुमान है।

UP Article Chart 1.jpg

2014 में, बीजेपी ने इन 39 सीटों में से 35 सीटें जीती थीं। तो, यह पहले से ही 23 सीटों के भारी नुक़सान के रूप में अनुमानित की गई है, अन्य तीन चरणों में 41 सीटों पर मतदान अभी होना है। संकेत हैं कि मतदान अब जब पुर्व की तरफ़ बढ़ रहा है, बीजेपी का नुक़सान यहाँ अच्छा ख़ासा हो सकता है क्योंकि एसपी और बीएसपी दोनों अवध और उसके आस पास के क्षेत्रों में मज़बूत उपस्थिति रखते हैं।

केंद्र में सत्ता में वपस लौटने की भगवा पार्टी की महत्वाकांक्षाओं को यूपी में भाजपा के संभावित पतन को प्रभावित करेगा। इसने 2014 में 80 में से 73 सीटें जीती थीं, जिसमें उसके सहयोगी अपना दल ने दो सीटें जीती थी और 41 प्रतिशत से अधिक प्रभावशाली वोट प्राप्त किया था।
बीजेपी के लिए दो कारक मौजूद हैं जो इसे नीचे ले जा रहे हैं: एक तो चुनावी गणित और दूसरा जनता में बढ़ता असंतोष। 25 साल के लंबे अंतराल के बाद दोनों प्रमुख दल सपा और बसपा मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। वे पश्चिम यूपी स्थित पार्टी, आरएलडी से भी जुड़े हुए हैं। लेकिन यह अंकगणित मुख्य रूप से किसानों का संकट (जिसमें आवारा पशुओ का ख़तरा भी शामिल है), भाजपा की बेरुखी और ज़हरीली सांप्रदायिक राजनीति के कारण लोगों में बड़े पैमाने पर असंतोष के कारण यूपी में भाजपा से अलगाव का पता चल रहा है, जो इस राज्य में भी लागू होता है।

कोई ऐसा कारण मौजूद नहीं है कि इस असंतोष को शेष तीन चरणों में, पूर्व की ओर बढ़ रहे चुनाव में ख़ुद को व्यक्त करने से रोकेगा - इस प्रकार सत्तारूढ़ दल के भाग्य को यहाँ सील करने की संभावना है।

Lok Sabha Elections
Eastern UP
Fourth Phase Elections
Poll Projections
BJP
Gathbandhan
Fall in BJP Tally
AKHILESH YADAV
MAYAWATI
SP-BSP-RLD

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • सरोजिनी बिष्ट
    विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 
    17 May 2022
    ये आशायें लखनऊ में "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन- (AICCTU, ऐक्टू) के बैनर तले एकत्रित हुईं थीं।
  • जितेन्द्र कुमार
    बिहार में विकास की जाति क्या है? क्या ख़ास जातियों वाले ज़िलों में ही किया जा रहा विकास? 
    17 May 2022
    बिहार में एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है, इसे लगभग हर बार चुनाव के समय दुहराया जाता है: ‘रोम पोप का, मधेपुरा गोप का और दरभंगा ठोप का’ (मतलब रोम में पोप का वर्चस्व है, मधेपुरा में यादवों का वर्चस्व है और…
  • असद रिज़वी
    लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश
    17 May 2022
    एडवा से जुड़ी महिलाएं घर-घर जाकर सांप्रदायिकता और नफ़रत से दूर रहने की लोगों से अपील कर रही हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 43 फ़ीसदी से ज़्यादा नए मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए 
    17 May 2022
    देश में क़रीब एक महीने बाद कोरोना के 2 हज़ार से कम यानी 1,569 नए मामले सामने आए हैं | इसमें से 43 फीसदी से ज्यादा यानी 663 मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए हैं। 
  • एम. के. भद्रकुमार
    श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी
    17 May 2022
    यहां ख़तरा इस बात को लेकर है कि जिस तरह के राजनीतिक परिदृश्य सामने आ रहे हैं, उनसे आर्थिक बहाली की संभावनाएं कमज़ोर होंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License