NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
चुनाव 2019: दूसरे चरण में तमिलनाडु और कर्नाटक
आज दक्षिण भारत के दो राज्यों कर्नाटक के 14 और तमिलनाडु के 35 सीटों पर मतदान हुए। शाम पांच बजे तक कर्नाटक में 61.80 और तमिलनाडु में 61.52 फीसदी मतदान रहा।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Apr 2019
si
image courtesy- first post

आम चुनाव 2019 की गाड़ी दूसरे चरण में पहुंच को पार चुकी है। आज दक्षिण भारत के दो राज्यों  कर्नाटक के 14 और तमिलनाडु में सारी सीटों पर मतदान की  तारीख तय की गयी थी। शाम पांच बजे तक की मिली जानकारी के तहत तमिलनाडु का मतदान प्रतिशत तकरीबन 61.52 फीसदी रहा। वेल्लूर लोकसभा सीट पर होने वाले चुनाव को रदद् कर दिया गया। रद्दी की वजह यह थी कि वेल्लूर सीट से डीएमके के उम्मीदवार के घर पर इनकम टैक्स डिपाटमेंट ने छापा डाला। और तकरीबन 11 करोड़ की नकदी काले धन के तौर पर पकड़ा।  यह अंदेशा लगया गया कि इस काले धन का इस्तेमाल चुनावों में जमकर किया जाएगा।  इसलिए चुनाव को  रद्द कर देना चाहिए। 

पिछले लोकसभा चुनाव में तालिनाडु के 39 लोकसभा सीटों में तकरीबन 37 लोकसभा सीटों पर एआइडीएमके (AIDMK) ने जीत हासिल की थी।अब करुणानिधि और जे जयललिता के मरने के बाद  तमिलनाडु की चुनावी राजनीति  का पूरा मैदान खाली हो चूका है। तो नया चुनावी राजनीतिक  समीकरण कुछ ऐसा बना है। एआईएडीएमके के साथ बीजेपी,पीएमके,डीएमडीके के विजयकांत और डीएमके के साथ कांग्रेस, डीएमके,वीसीके  और लेफ्ट पार्टियां मिलकर एक दूसरे के खिलाफ लड़ रही हैं।  

जे जयललिता के बाद एआईएडीएमके की अगुवाई कर रहे  पनीरसेल्वम उस तरह से जनता को आकर्षित नहीं करते नहीं दिख रहे, जिस तरह जे जयललिता की अगुवाई वाली एआईएडीएमके करती थी। साथ में जे जयललिता के राजनीतिक जीवन की सबसे भरोसेमंद दोस्त शशिकला के भांजे दिनाकरन की अगुवाई वाली  Amma Makkal Munnetra Kazhagam (AMMK) भी इस चुनाव में एआईएडीएमके के जमे जमाए वोटों को तरफ खींचेगी।  इस तरह एआईएडीएमके के लिए जे जयललिता का न होना, पार्टी का दो फाड़ में बंट जाना, ऐसी स्थितियां हैं जो एआईएडीएमके के खिलाफ पहले से जा रही थी। अब बात करते हैं  एआईएडीएमके के साथ भाजपा के गठबंधन की।

तमिलनाडु में एक ऐसा राज्य हैं जहाँ भाजपा के खिलाफ सबसे मजबूत  हवा बहती है। कुल- मिलाजुलाकर यह कहा जा सकता है कि तमिलनाडु के लोगों के लिए भाजपा जैसी ब्राह्मणवाद और एकरंगी हिंदुस्तान की चाहत रखने वाली पार्टियों का कोई हैसियत नहीं।  यानी तमिलनाडु की चुनावी राजनीति में  कोई भी गंभीर दावेदारी रखने वाला राजनीतिक दल भाजपा से दूरी बनाकर ही चलेगा। तो सवाल उठता है कि एआईएडीएमके जैसी पार्टी ने भाजपा से गठबंधन क्यों किया ? जवाब साफ है इनकम टैक्स डिपार्टमेंट से लेकर सीबीआई जैसी संस्थाओं को एआईएडीएमके के नेताओं के पीछे लगा देने का डर।  इस तरह से  इस चुनाव में  एआईएडीएमके का चमकने वाला सूरज भाजपा के संगत से अस्त होता हुआ दिख रहा है। एआईएडीएमके के लिए देखने वाली बात यही है कि पीएमके,डीएमडीके के विजयकांत किस तरह का कमाल दिखा पाते हैं।इस तरह से अबकी  बार की चुनावी राजनीति  में डीएमके प्रभावी दिख रही है। करूणानिधि के बेटे स्टालिन की अगुवाई में लड़ रही डीएमके कांग्रेस और लेफ्ट वाला मोर्चा तमिलनाडु में सबसे प्रभावी दल के तौर पर उभर कर सामने आ रहा है । 

साल 2014 के आम चुनाव में पूरे देश के मतदान प्रतिशत से भी अधिक मतदान प्रतिशत कर्नाटक राज्य का रहा। राज्य में दूसरे और तीसरे चरण में क्रमश: 18 और 23 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। पहला चरण आज सम्पन्न हुआ। आज कर्नाटक के 14 सीटों पर शाम पांच बजे तक तकरीबन 61.80 फीसदी मतदान हुआ।     राज्य कांग्रेस का गढ़ रहा है लेकिन हालिया दौर के समीकरण बदल हुए भी हैं।  

कर्नाटक की राजनीति में तीन प्रमुख दल- कांग्रेस, जनता दल (सेक्युलर) और भाजपा हैं। वर्तमान में कांग्रेस और जेडीएस के गठबंधन से यहां की  सरकार चल रही है, जिसमें जेडीएस के एचडी. कुमारस्वामी मुख्यमंत्री हैं। 2018 में हुए इस गठबंधन के बाद से दोनों दलों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। कर्नाटक राजनीति पर नजर रखने वाले मानते हैं कि इस मदभेद का असर जेडीएस-कांग्रेस गठबंधन को आम चुनाव में भी दिख सकता है। इन परिस्थितयों को भाजपा अपने अनुकूल बनाने के लिए पूरी कोशिश में जुटी हुई है। 

अभी तक के चुनावों में देखा गया है कि कर्नाटकवासी राज्य स्तरीय चुनाव और केंद्र के चुनाव में अलग-अलग दल पर भरोसा जताते हैं। जेडी(एस) का वोटबैंक दक्षिणी जिलों के बाहर बहुत कम है। भाजपा मानती है कि मुंबई-कर्नाटक के तटीय क्षेत्र उसके गढ़ हैं, जबकि कांग्रेस एकमात्र पार्टी रही है जिसका प्रभाव पूरे राज्य में रहा है। लेकिन जेडी(एस) के साथ उसका संघर्षपूर्ण गठबंधन राज्य के उन दक्षिणी इलाकों में केंद्र की भाजपा सरकार का प्रवेश करा सकता है। ये क्षेत्र अब तक गैर भाजपा मतदाता वाले माने जाते हैं। 

विधानसभा चुनाव के बाद लोकसभा के लिए कांग्रेस और जेडी(एस) मिलकर लड़ रही हैं। जेडी(एस) का लगभग पूरा वोट कृषि प्रधान समुदाय वोक्कालिगा से आता है। राज्य की अगड़ी जाति लिंगायत का वोट भाजपा का माना जाता है। जबकि कांग्रेस को वहां के अल्पसंख्यक समुदाय, पिछड़ी जातियां और अन्य पिछड़ा वर्ग के कुछ समुदाय वोट देते हैं। अब देखने वाली बात यह है कि इन पांच सालों के दौरान पनपे असंतोष के माहौल में लोग किसकी तरफ मुड़ते हैं। 

 

south india election
second phase election in south india
karunanidhi and jaylalitha
stalin
BJP
Congress
election 2019
JDS

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • दो, तीन नहीं, कई साइगॉन बनाओ। यही आज का नारा है
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    दो, तीन नहीं, कई साइगॉन बनाओ। यही आज का नारा है
    21 Aug 2021
    आशाहीनता का आरोप केवल तालिबान पर नहीं लगाना चाहिए बल्कि अमेरिका, सऊदी अरब, जर्मनी और पाकिस्तान जैसे देशों पर भी लगाना चाहिए,जिन्होंने तालिबान जैसे फासीवादियों और कट्टर लोगों का समर्थन किया और इनकी…
  • दिल्ली मास्टर प्लान : पीपल्स कलेक्टिव ने सुनिश्चित किया कि झुग्गी-झोपड़ी निवासियों और मजदूरों के सुझाव सुने जाए 
    रौनक छाबड़ा
    दिल्ली मास्टर प्लान : पीपल्स कलेक्टिव ने सुनिश्चित किया कि झुग्गी-झोपड़ी निवासियों और मजदूरों के सुझाव सुने जाए 
    21 Aug 2021
    गुरुवार को इन समूहों के छोटे से प्रतिनिधिमंडल ने डीडीए के दफ़्तर आईएनए-विकास सदन में आवास विभाग कार्यालय में मुलाक़ात की और अपने सुझाव पेश किए; यह सब 'मैं भी दिल्ली' अभियान की एक पहल पर किया गया है। 
  • ऐतिहासिक नियति ने किसान-आंदोलन के साथ भारत के लोकतन्त्र की तकदीर नत्थी कर दी है
    लाल बहादुर सिंह
    ऐतिहासिक नियति ने किसान-आंदोलन के साथ भारत के लोकतन्त्र की तकदीर नत्थी कर दी है
    21 Aug 2021
    अधिनायकवादी सत्ता के खिलाफ किसानों की यह लड़ाई भारतीय लोकतन्त्र के भविष्य की दिशा तय करेगी।
  • अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं पर एक नज़र-IV
    एम. के. भद्रकुमार
    अफ़ग़ानिस्तान की घटनाओं पर एक नज़र-IV
    21 Aug 2021
    तालिबान को लेकर चीन की तरफ़ से जो टिप्पणियां सामने आ रही हैं, उससे तो यही लगता है कि तालिबान और चीन एक दूसरे के साथ बेहद सहज हैं। ज़ाहिर है, बीजिंग पाकिस्तान के साथ और भी घनिष्ठ सहयोग और समन्वय चाहता…
  • नर्क का दूसरा नाम...
    सबरंग इंडिया
    नर्क का दूसरा नाम...
    21 Aug 2021
    डिटेंशन कैंपों का नाम बदलने से यह तथ्य नहीं बदल जाता है कि वहां की स्थिति दयनीय बनी हुई है!
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License