NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
छात्राओं पर हमले के खिलाफ 11 अक्टूबर को पूरे बिहार में प्रतिवाद
ऐपवा-इंसाफ मंच व आइसा की जांच टीम ने त्रिवेणीगंज कस्तूरबा विद्यालय का दौरा किया और पूरे मामले की सच्चाई जानी। टीम का कहना है कि मोदी-नीतीश राज में महिलाओं पर हिंसा की बढ़ती प्रवृत्ति का नतीजा है त्रिवेणीगंज कांड।
न्यूजक्लिक रिपोर्ट
09 Oct 2018
त्रिवेणीगंज का कस्तूरबा विद्यालय और अस्पताल में भर्ती छात्राएं

पटना। ऐपवा की महासचिव मीना तिवारी ने आज पटना में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि सुपौल के त्रिवेणीगंज में कस्तूरबा बालिका विद्यालय की छात्राओं पर मुहल्लेवासियों द्वारा संगठित हमला बेहद खौफनाक है। आज ऐसा समय आ गया है कि छेड़खानी करने वाले लफंगों पर कार्रवाई व उन्हें नियंत्रित करने की बजाय मुहल्ले के लोग लड़कियों को ही बर्बरता से पीट रहे हैं। हमारे समाज में यह बिल्कुल नई प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। आखिर आज ऐसी नौबत क्यों आई? 

ऐपवा-इंसाफ मंच व आइसा की एक राज्यस्तरीय जांच टीम कल, सोमवार 8 अक्टूबर को त्रिवेणीगंज गई थी। इस जांच टीम में भाकपा-माले की राज्य कमिटी की सदस्य व ऐपवा की बिहार राज्य सह सचिव सोहिला गुप्ता, इंसाफ मंच के राज्य अध्यक्ष नेयाज अहमद व आइसा नेता प्रिंस कुमार कर्ण शामिल थे।

संवाददाता सम्मेलन को मीना तिवारी, जांच टीम के सदस्यों व आइसा के बिहार राज्य अध्यक्ष मोख्तार ने संबोधित किया। मीना तिवारी ने कहा कि दरअसल भाजपा राज में बलात्कारियों को बचाने और बलात्कार को जस्टिफाई करने की जो संस्कृति विकसित हुई है, उसने नीचे तक जहर घोल दिया है। इसी का नतीजा है कि छेड़खानी का विरोध करने पर छात्राओं को बर्बरता से पीटा जा रहा है। भाजपा द्वारा आज पूरे देश में महिलाओं-दलितों व अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत का जो माहौल बनाया गया है, इस तरह की बर्बर घटनायें उसी का परिणाम हैं। केंद्र व पटना की सरकार लड़कियों के उत्थान से संबंधित योजनाओं की चर्चा करते नहीं अघाती लेकिन आज का समय लड़कियों के लिए सबसे भयानक दौर साबित हो रहा है। डीका कांड से लेकर त्रिवेणीगंज तक में यही प्रवृत्ति देखने को मिल रही है। विद्यालय कैंपस में भी लड़कियां पूरी तरह असुरक्षित हैं। मुजफ्फरपुर बालिका गृह कांड में तो लड़कियों का सत्ता प्रायोजित उत्पीड़न को ही अंजाम दिया गया।

उन्होंने यह भी कहा कि महिलायें, दलित-मजदूर व मेहनतकश समुदाय ही भाजपा व संघ के निशाने पर हैं। गुजरात में बिहारी मजदूरों पर हमला भाजपा के मजदूर व बिहार विरोधी चरित्र को बेनकाब कर रहा है। महाराष्ट्र में क्षेत्रवादी ताकतों द्वारा बिहारी मजदूरों पर हमले तो लगातार होते रहते हैं लेकिन अब यह प्रधानमंत्री नरेन्द मोदी के गुजरात में हो रहा है, जिसकी ब्रांडिंग भाजपा जोरशोर से करती रही है। नरेन्द्र मोदी को इसका जवाब देना होगा कि गुजरात में बिहारी मजदूरों को क्यों निशाना बनाया जा रहा है और इस पर दिल्ली व गुजरात की सरकार खामोश क्यों है?

जांच टीम की रिपोर्ट

जांच टीम ने पाया कि यह घटना 6 अक्टूबर की शाम 4 से 4.30 बजे की है। त्रिवेणीगंज के ढपरखा मुहल्ले में स्थित कस्तूरबा विद्यालय की लड़कियां स्थानीय लफंगों की फब्तियों का हरदम शिकार होते रहती हैं। उनके स्कूल व छात्रावास की दीवारों पर गंदी-गंदी तस्वीरों व गालियों के द्वारा उन्हें मानिसक तौर पर परेशान किया जाता रहा है। स्कूल व छात्रावास के बीच दूरी है। सो, आने-जाने के क्रम में इन लफंगों को छात्राओं को छेड़ने का मौका मिल जाता है। 6 अक्टूबर की शाम जब छात्रायें अपने छात्रावास में खेल रही थीं तो लफंगों ने उनके साथ छेड़खानी की कोशिश की। छात्राओं ने इसका मुंहतोड़ जवाब दिया और लफंगों को वहां से भागने के लिए मजबूर किया। कुछ देर बाद मुहल्ले के लोग संगठित होकर लड़कियों पर टूट पड़े और उनकी बर्बर तरीके से पिटाई की।

हमले में कुल 34 छात्रायें घायल हुई हैं। इनमें से अधिकांश दलित व अल्पसंख्यक पृष्ठभूमि की हैं। 5 छात्राओं को अन्य छात्राओं की अपेक्षा कहीं अधिक चोट है। 2 छात्राओं का पता नहीं चल रहा है कि उन्हें कहां भेजा गया? जांच टीम ने कहा है कि छेड़खानी की घटनाएं अक्सर हुआ करती थीं, लेकिन स्कूल प्रशासन/वार्डन ने इसपर कभी ध्यान नहीं दिया। यहां तक कि लड़कियों की शिकायत के बावजूद स्कूल प्रशासन ने उसे दबाने का ही प्रयास किया। त्रिवेणीगंज विधानसभा पर कई वर्षों से जदयू का ही कब्जा रहा है। वर्तमान में वीणा भारती वहां की विधायक हैं लेकिन पीड़ित छात्राओं के प्रति इनका रवैया बेहद नकारात्मक है। जांच टीम ने पाया कि दीवारों पर लफंगों ने जो गंदी-गंदी गालियां लिखी थीं उसे इस घटना के बाद ही मिटाया गया। स्कूल प्रशासन ने उसे मिटाने तक की जहमत नहीं उठाई। स्कूल का गेट वर्षों से टूटा पड़ा हुआ है, छत पर आकर लफंगें लड़कियों को गंदे-गंद इशारे करते हैं। उस पर छात्राओं की ही पिटाई की गई और उनसे कुछ अधिक न बोलने को भी कहा जा रहा है।

कार्रवाई और सुरक्षा की मांग

जांच टीम ने एक बार फिर उन मांगों को दुहराया है जो लंबे समय से कस्तूरबा विद्यालयों के संदर्भ से उठाई जाती रही हैं। एक बार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री से कस्तूरबा व अन्य आवासीय विद्यालयों में रह रही लड़कियों की सुरक्षा की गारंटी तथा दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग करती है। त्रिवेणीगंज कस्तूरबा विद्यालय की प्रिंसिपल व वार्डन को भी अपनी जिम्मेवारी ठीक ढंग से नहीं निभाने के कारण उन्हें उनके पद से अविलंब हटाना चाहिए।

इस बर्बर व अचंभित कर देने वाली घटना के खिलाफ 11 अक्टूबर को पूरे बिहार में प्रतिवाद किया जाएगा और पूरे अक्टूबर महीने में स्कूल व अन्य शिक्षण संस्थानों के स्तर पर छात्राओं की आजादी, सुरक्षा व सम्मान के विषय पर जन जागरण अभियान चलाया जाएगा।

BIHAR SUPAUL TRIVENIGANJ
ATTACK ON SCHOOL GIRLS
Nitish Kumar
AIPWA
AISA

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

लखनऊ: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत के साथ आए कई छात्र संगठन, विवि गेट पर प्रदर्शन

बिहार : सरकारी प्राइमरी स्कूलों के 1.10 करोड़ बच्चों के पास किताबें नहीं

लखनऊ विश्वविद्यालय में एबीवीपी का हंगामा: प्रोफ़ेसर और दलित चिंतक रविकांत चंदन का घेराव, धमकी

बिहार : गेहूं की धीमी सरकारी ख़रीद से किसान परेशान, कम क़ीमत में बिचौलियों को बेचने पर मजबूर


बाकी खबरें

  • channi sidhu
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: ‘अनिवार्य’ वैक्सीन से सिद्धू-चन्नी के ‘विकल्प’ तक…
    23 Jan 2022
    देश के 5 राज्यों में चुनावों का मौसम है, इसलिए खबरें भी इन्हीं राज्यों से अधिक आ रही हैं। ऐसी तमाम खबरें जो प्रमुखता से सामने नहीं आ पातीं  “खबरों के आगे-पीछे” नाम के इस लेख में उन्हीं पर चर्चा होगी।
  • Marital rape
    सोनिया यादव
    मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं
    23 Jan 2022
    भारतीय कानून की नज़र में मैरिटल रेप कोई अपराध नहीं है। यानी विवाह के बाद औरत सिर्फ पुरुष की संपत्ति के रूप में ही देखी जाती है, उसकी सहमति- असहमति कोई मायने नहीं रखती।
  • Hum Bharat Ke Log
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    महज़ मतदाता रह गए हैं हम भारत के लोग
    23 Jan 2022
    लोगों के दिमाग में लोकतंत्र और गणतंत्र का यही अर्थ समा पाया है कि एक समय के अंतराल पर राजा का चयन वोटों से होना चाहिए और उन्हें अपना वोट देने की कुछ क़ीमत मिलनी चाहिए।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    नये चुनाव-नियमों से भाजपा फायदे में और प्रियंका के बयान से विवाद
    22 Jan 2022
    कोरोना दौर में चुनाव के नये नियमों से क्या सत्ताधारी पार्टी-भाजपा को फ़ायदा हो रहा है? कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने प्रशांत किशोर पर जो बयान दिया; उससे कांग्रेस का वैचारिक-राजनीतिक दिवालियापन…
  • chunav chakra
    न्यूज़क्लिक टीम
    चुनाव चक्र: यूपी की योगी सरकार का फ़ैक्ट चेक, क्या हैं दावे, क्या है सच्चाई
    22 Jan 2022
    एनसीआरबी की रिपोर्ट है कि 2019 की अपेक्षा 2020 में ‘फ़ेक न्यूज़’ के मामलों में 214 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। फ़ेक न्यूज़ के जरिए एक युद्ध सा छेड़ दिया गया है, जिसके चलते हम सच्चाई से कोसो दूर होते…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License