NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
उत्पीड़न
कोविड-19
मज़दूर-किसान
समाज
भारत
राजनीति
अर्थव्यवस्था
कोविड-19: दूसरी लहर के दौरान भी बढ़ी प्रवासी कामगारों की दुर्दशा
स्वान (SWAN) की रिपोर्ट बताती है कि कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रवासी एवं अनौपचारिक क्षेत्रों के कामगारों तक राहत-सहायता पहुंचाने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रयास जरूरत के लिहाज से एकदम नाकाफी थे। सरकारों ने या तो कोई कदम नहीं उठाया या बेहद न के बराबर काम किया।
दित्सा भट्टाचार्य
25 Jun 2021
migrant workers
फ़ोटो साभार: बिजनस स्टैन्डर्ड

भारत में कोविड-19 की दूसरी लहर के शुरू होने तक, प्रवासी कामगारों के पास कुछ भी नहीं रह गया था-न तो पैसे, न कोई सामाजिक संरक्षण और न स्वास्थ्य देखभाल संस्थाओं तक उनकी पहुंच ही बन पाई थी। जबकि कोरोना की दूसरी लहर से निबटने की केंद्र एवं राज्य सरकारों की बदतर तैयारियों में समाज के सभी क्षेत्रों पर अपना कहर बरपाया था, लेकिन इनमें अनौपचारिक क्षेत्रों के कामगार सबसे ज्यादा तबाह हुए हैं। यह खुलासा स्ट्रैन्डेड वर्कर्स एक्शन नेटवर्क(स्वान/SWAN) की रिपोर्ट ने किया है। 

रिपोर्ट में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान प्रवासी एवं अनौपचारिक कामगारों में छाई अनिश्चितता के अनेकानेक पहलुओं को उजागर किया गया है। इसके अध्ययन में पाया गया कि पिछले साल आई कोरोना की पहली लहर के दौरान हुई दुर्गति के अनुभवों को देखते हुए संकट एक जैसा ही था, लेकिन यह उसकी अपेक्षा असाधारण इसलिए मायने में है क्योंकि इसने उन कामगारों की समस्या को बढ़ा दिया है, जिनके पास बचाने के लिए कुछ नहीं बचा था और जिनकी सुरक्षा के संजालों तक सीमित पहुंच थी।

हालांकि 8,000 कामगारों एवं उनके परिवार से बातचीत के जरिए स्वान ने पाया कि भोजन एवं राशन तक उनकी पहुंच सीमित थी, स्वास्थ्य की बुनियादी देखभाल तक पहुंच की कमी थी, आमदनी एवं कमाई का स्तर न्यून था, कर्ज का स्तर बढ़ता जा रहा था, नगरों में खुद को टिकाए रखने की जद्दोजहद बढ़ गई थी तथा गांवों में लौटने के साथ गृहस्थी की शुरुआत की अतिरिक्त चिंताएं थीं।

21 अप्रैल 2021, और 31 मई 2021 के बीच, स्वान ने 1,396 कामगारों से संपर्क किया था। यह संख्या 8,023 लोगों तक पहुंच गई, जिनमें 4,836 महिलाएं एवं बच्चे शामिल थे, जो कामगारों के बड़े समूह या परिवार के हिस्सा थे। हालांकि फोन करने वालों में 60% दिहाड़ी मजदूर थे, 6% गैर समूह आधारित दिहाड़ी कामगार थे, जैसे ड्राइवर, घरेलू सहायक/सहायिका और इसी तरह कामगार थे, और 16% स्वनियोजित थे।

स्वान द्वारा संपर्क किए गए कामगारों की दिहाड़ी का मध्यमान 308 रुपये थे। इनमें आधे से अधिक कामगारों (57%) के पास मात्र दो दिनों का ही राशन बचा था, जब उन्होंने स्वान से बातचीत की थी। लगभग 76% कामगारों ने कहा कि जब वे यहां पहुंचे थे तो उनके पास 200 रुपये से भी कम रह गए थे। इसके अलावा, 34% कामगारों को उनके काम पूरे होने के बावजूद मेहनताने का भुगतान नहीं किया गया था जबकि उनमें से 13% कामगारों को आंशिक भुगतान किया गया था। सबसे अधिक 92% कामगारों ने बताया कि लॉकडाउन के बाद से उन्हें अपने नियोक्ताओं की तरफ से एक पैसा नहीं दिया गया है और काम भी रोक दिया गया है। 56% कामगारों ने बताया कि एक महीने से भी अधिक समय से काम रुका पड़ा है।

रिपोर्ट कहती है, “गरीबों के लिए पिछले कुछ महीने महामारी के अंतर्वर्ती दोहराव, जीविका पर संकट के और भूख के रहे हैं, जिन्होंने स्वास्थ्य देखभाल के सर्वव्यापी संकट को बढ़ा दिया है और जिससे देश पंगु हो गया है। भूखे-प्यासे और थके-मांदे कामगारों को पैदल ही अपने सुदूर गांवों को लौटने की छवियां 2020 में सार्वजनिक विमर्श की विषय रही हैं। इस साल, हालांकि अर्थव्यवस्था पर संकट का घातक दुष्प्रभाव पड़ा है और अनौपचारिक क्षेत्रों पर कोई ध्यान नहीं दिया गया है। निस्संदेह, कोरोना की दूसरी लहर की संघातिकता असामान्य थी; इसने देश की स्वास्थ्य देखभाल संरचनाओं को चरमरा दिया है एवं समुदायों तथा परिवारों को तहस-नहस कर दिया है।

रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है कि कोरोना की इस दूसरी लहर के दौरान प्रवासी एवं अनौपचारिक क्षेत्रों के कामगारों तक राहत-सहायता पहुंचाने के लिए केंद्र तथा राज्य सरकारों के प्रयास जरूरत के लिहाज से एकदम नाकाफी थे। सरकारों ने कोई कदम नहीं उठाया या बेहद अल्प काम किया।

रिपोर्ट कहती है, “केंद्र सरकार ने अपनी सारी जवाबदेहियों को राज्य सरकारों पर डाल दिया था इस हद तक कि न्यायपालिका को इसमें दखल देना पड़ा था। सर्वोच्च न्यायालय ने खास तौर पर सक्रिय भूमिका निभाई और राज्य सरकारों को निर्देश दिया कि वह प्रवासी समुदायों को आत्मनिर्भर स्कीम (या राज्यों एवं केंद्र की अन्य योजनाओं) के तहत सूखा राशन के वितरण समेत खाद्यान्न सुरक्षा संबंधी उपाय करे तथा प्रवासी कामगारों  के लिए सामुदायिक रसोई चलाए।”

स्वान की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों की दिशा में कदम उठाते हुए राज्यों में कुछ उपायों की घोषणाएं की गईं, लेकिन आधे-अधूरे मन से उन नीतियों पर पहल की गईं, जिनसे प्रवासी कामगारों की दैनिक जरूरतें नहीं पूरी हो सकीं। इसके अलावा, राज्य सरकारों को धन के लाले पड़े हैं और उनकी स्थानीय स्तर पर तालाबंदी के चलते आर्थिक एवं स्वास्थ्य देखभाल के समक्ष आईं चुनौतियों से निबटने के लिहाज से राजस्व क्षमता सीमित है। 

रिपोर्ट में सरकार से अपने संवैधानिक उत्तरदायित्वों को पूरा करने एवं विश्व के बेहतर आचरणों के अनुरूप तत्काल कदम उठाने का आह्वान किया गया है-“यह अत्यावश्यक है कि भारत सरकार देश के कामगारों एवं नागरिकों के लिए निर्देशित, न्यायसंगत और सम्मानजनक आर्थिक सुधार की जरूरत की समझे।” 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें। 

https://www.newsclick.in/COVID-19-migrant-workers-plight-continued-grow-through-second-wave-report 

Migrant workers
COVID-19
Coronavirus

Related Stories

फादर स्टेन की मौत के मामले में कोर्ट की भूमिका का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी

कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए हताश भारतीयों ने लिया क़र्ज़ और बचत का सहारा

यूपी: उन्नाव सब्ज़ी विक्रेता के परिवार ने इकलौता कमाने वाला गंवाया; दो पुलिसकर्मियों की गिरफ़्तारी

भाजपा शासित एमपी सरकार ने कोविड-19 के इलाज के लिए व्यापम आरोपियों के निजी अस्पतालों को अनुबंधित किया

उत्तर प्रदेश : योगी का दावा 20 दिन में संक्रमण पर पाया काबू , आंकड़े बयां कर रहे तबाही का मंज़र

गोल्ड लोन की ज़्यादा मांग कम आय वाले परिवारों की आर्थिक बदहाली का संकेत

महामारी प्रभावित भारत के लिए बर्ट्रेंड रसेल आख़िर प्रासंगिक क्यों हैं

कार्टून क्लिक: सरकार की आलोचना ज़रूरी लेकिन...

कोरोना महामारी के बीच औरतों पर आर्थिक और सामाजिक संकट की दोहरी मार!

न्यायालय ने पत्रकार कप्पन को बेहतर इलाज के लिए राज्य के बाहर भेजने का योगी सरकार को दिया निर्देश


बाकी खबरें

  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    एसकेएम का सरकार को अल्टीमेटम, कोरोना अपडेट और अन्य ख़बरें
    07 Oct 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार को दिया अल्टीमेटम और अन्य ख़बरों पर।
  • Supreme Court Asks: Why no Arrest in Lakhimpur Killings?
    न्यूज़क्लिक टीम
    सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: लखीमपुर में गिरफ्तारी क्यों नहीं ?
    07 Oct 2021
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस कार्यक्रम में अभिसार शर्मा लखीमपुर मामले पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बारे में बात कर रहे हैं, और बात कर रहे हैं कि किस तरह बीजेपी के प्रवक्ता लगतार किसानों को टारगेट कर…
  • Tribal Settlement Near Tamil Nadu Temple Uprooted
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु: उजाड़ दी गईं मंदिर से सटी आदिवासी बस्तियां 
    07 Oct 2021
    11 इरुलर आदिवासी परिवारों ने आरोप लगाया है कि यह जगह उन्हें स्थायी रिहाइश के लिए जमीन के पट्टे दिए जाने तक रहने के लिए दी गई थी।
  • SC
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर नरसंहार: न्यायालय ने उप्र सरकार से पूछा क्या आरोपी गिरफ़्तार किए गए हैं?
    07 Oct 2021
    प्रधान न्यायाधीश एन वी रमणा, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति हिमा कोहली की पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार की तरफ से पेश हुए वकील को इस बारे में स्थिति रिपोर्ट में जानकारी देने का निर्देश दिया।
  • delhi violence
    सबरंग इंडिया
    दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस की जांच की आलोचना करने वाले जज का ट्रांसफर
    07 Oct 2021
    अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद यादव ने पिछले कुछ महीनों में दिल्ली पुलिस के कई अधिकारियों को फटकार लगाई थी, और कुछ मामलों में पुलिस गवाहों की विश्वसनीयता पर संदेह करते हुए जमानत भी दे दी थी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License