NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली में पानी संकट चरम पर, सरकार को समय पर कदम उठाने चाहिए
अनुमान यह है कि दिल्ली का भूजल 2020 तक समाप्त हो जाएगाI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Jun 2018
water crisis in delhi
Image Courtesy : DNAIndia

आज के समय में पूरे विश्व में पानी का संकट है और भारत भी इससे कोई अछुता नहीं है। भारत की स्थिति तो विश्व के पटल पर और भी दयनीय है। पानी की गुणवत्ता में 122 देशों की श्रेणी में भारत का स्थान 120वां है।

नीति आयोग की एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान समय में भारत की लगभग 60 करोड़ आबादी पानी के संकट से जूझ रही है। रिपोर्ट के अनुसार प्रत्येक वर्ष भारत में दो लाख लोग गंदे पानी के सेवन से मर जाते हैं। हैरानी और स्तब्ध करने वाली बात तो यह है कि जिस मानसून के समय जल की कमी नहीं होनी चाहीए उसी समय दुर्भागयवश रूप से देश जल संकट की समस्या से जुझ रहा हैI  कहीं लोग पानी की समस्या को लेकर मटका फोड़ो आंदोलन कर रहे हैं तो कहीं पानी की समस्या को लेकर मारा-मारी है। देश के बड़े शहरों का तो और भी बुरा हाल है अगर बात भारत की राजधानी दिल्ली की की जाए तो तमाम अनुमान यह है कि दिल्ली का भूजल 2020 तक समाप्त हो जाएगा।

यह भी पढ़ें  हिमाचल के शिमला शहर में जल आपातकाल जैसी स्थिति

दिल्ली में इस समय  तक़रीबन 2.5 करोड़ लोग रहते हैं। पिछले दस वर्षों के  आँकड़े  अगर देखें तो पूरे भारत  में 61 प्रतिशत भूजल में कमी आई है, जबकि 2011 में पूरे विश्व का 25 प्रतिशत भूजल हमारे पास था।

दिल्ली में आँकड़ों की बानगी अगर देखी जाए तो यहाँ 600 मिलीयन क्यूबिक मीटर पानी वर्षा से हर साल मिलता है। वर्तमान समय में दिल्ली में भूजल की उपलब्धता 290 मिलीयन क्यूबिक मीटर है। वहीं सप्लाई वॉटर का 60 प्रतिशत पानी यमुना से आता है। दिल्ली जल बोर्ड के अनुसार दिल्ली को 3,859 मिलियन लीटर पानी हर दिन की ज़रूरत है।

वहीं अगर प्रभावित इलाकों की बात की जाए तो डियर पार्क, किशनगंज, महरौली, ग्रीन पार्क, मुनीरका, मालवीय नगर, चितरंजन पार्क, ए-2 ब्लॉक जनकपुरी, सुल्तानपुर, पूठ खुर्द, माजरा डबास, चंदनपुर, बुराड़ी, गीता कॉलोनी, लक्ष्मी नगर, रमेश पार्क, एनडीएमसी क्षेत्र, दिल्ली कैंट, पटेल नगर, पहाडग़ंज, वजीराबाद, राजेंद्र नगर, झंडेवालान, कनॉट प्लेस, करोल बाग,  चांदनी चौक, दिल्ली गेट, दरियागंज, सिविल लाइन के अलावा भी और कई सारे  इलाके पानी की किल्लत से प्रभावित हैं।

यह भी पढ़ें  दिल्ली:भू-जल का गिरता स्तर चिंता का कारण है

वहीं सीएसई (सेटर फॉर साईंस एंड इनवायरन्मेंट) की रिसर्च के मुताबिक दिल्ली में 3,800 मिलीयन क्यूबिक मीटर की सप्लाई होती है जो कि माँग से कम है जिसमें से 52 प्रतिशत  ट्रांसमिशन के दौरान बर्बाद हो जाता हैI  यही नहीं रिसर्च के अनुसार, दिल्ली में केवल 75 फीसदी पानी के सप्लाई का नेटवर्क है। 35 से 40  प्रतिशत पानी पुरानी पाइपलाइन में लीकेज और चोरी की वजह से बर्बाद होता है। 

वहीं एकद कॉन्वर्जेशन कि एक रिपोर्ट के अनुसार के मुताबिक दिल्ली में घरों तक जल पहुँचने से पहले ही 40 प्रतिशत रास्तें में ही रिसाव व चोरी के कारण बर्बाद हो जाता है, जबकि सिंगापुर, चीन, अमेरिका इत्यादि देशों में  मे यह अनुपात 15-20 प्रतिशत है।

1 अप्रैल 2016 की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में 2.65 लाख पानी के कनेक्शन बिना मीटर के लगे हुएं हैं और 4 लाख कनेक्शन वाले मीटर या तो काम नहीं कर रहें हैं या खराब है।

जल की समस्या या जल संकट पैदा होने के लिए न केवल सरकार ज़ि़म्मेदार है बल्कि इस समस्या को पैदा करने में हम भी बराबर के भागीदार हैं। दिल्ली में ही रसूखदार लोगों की बात की जाए तो वह एक दिन में 600 लिटर से भी ज़्यादा पानी का इस्तेमाल कर लेते हैं। साथ ही यहाँ रहने वाले निवासी प्राकृतिक संसाधन का सदुपयोग भी नहीं कर रहे हैं। इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली सरकार की जल संरक्षण योजना जिसके तहत दिल्ली में रहने वाले लोगों (जिनका घर 500 स्क्वायर मीटर या इससे ज़्यादा है) को जल संरक्षण तंत्र लगाना था। लेकिन इस पर भी लोगों ने सजग और सक्रिय हो कर काम नहीं किया वैसे यहाँ गलती सरकार की भी है क्योंकि इसे लागू करवाने में उसने भी कोई सख्ती नहीं दिखाई।

यह भी पढ़ें  दिल्ली: जल बोर्ड की सरकारी विभागों पर इतनी कृपा क्यों?

ज्ञानेंद्र रावत पर्यावरण कार्यकर्ता  के हिंदुस्तान में छपे लेख के अनुसार यह समय, यानी कि मानसून  सरकार को कदम उठाने का एकदम सही समय हैI इसी समय हमें जल संकट पर सोचना चाहिए मगर हम कर कुछ नहीं रहें हैं।

दिल्ली पानी के संकट से परेशान है लेकिन पानी की समस्या से उबरने के बजाए यहाँ की सरकार और निगम दोनो हाथ पर हाथ दे कर बैठे हुए हैं। सरकार  को पानी के संरक्षण पर बल देना चाहिए  लेकिन आश्चर्य की  बात  है कि अभी भी 60 प्रतिशत दिल्ली का गंदा पानी यमुना में  डाले जाने  से नहीं रोक रही है।

हर वर्ष भारी मात्रा में वर्षा होने के बाद भी पानी के इतने बड़े संकट के पीछे आखिर कौन ज़िम्मेदार है? वैसे तो मानसून की पहली बारिश ही निगम और सरकार की पोल खोलने के लिए काफी होते हैं कि सरकार ने क्या तैयारी कर रखी है। नदियों के दिन-ब-दिन सूखने के साथ-साथ कूड़े और कचरे का उनमें डाले जाने से उसका रंग काला पड़ रहा है क्योंकि सरकार कूड़े और कचरे का सही ढ़ंग से प्रबंधन नहीं कर रही है और जल का बचाने के बजाए उसे दूषित ही कर रही है। वहीं सरकार की सारी एक्शन योजना चाहे वो यमुना एक्शन प्लान 1994 हो या और कोई सब की सब धरी की धरी रह गई हैंI यमुना एक्शन प्लान के क्रियान्यवन का अंदाज़ा तो आप दिल्ली में यमूना नदी के किसी भी किनारे पर खड़े हो कर खुद लगा सकते हैं।

केंद्र सरकार के साथ-साथ दिल्ली सरकार भी जल संकट को लेकर पूरी तरह उदासीन दिख रही है। जल संकट हो या जल प्रबंधन  या फिर जल संरक्षण किसी भी मुद्दे को लेकर सरकार का रवैया सकारात्मक  नहीं दिख रहा । जल संकट से बचने के लिए न सिर्फ सरकार का सजग होना चाहिए बल्कि हमें भी जल संरक्षण पर उचित ध्यान देने की आवश्यकता है।

 

दिल्ली में जल संकट
जल संकट
दिल्ली जल बोर्ड
दिल्ली नगर निगम
दिल्ली सरकार
जल संरक्षण
जल प्रबंधन

Related Stories

दिल्ली: दिव्यंगो को मिलने वाले बूथों का गोरखधंधा काफी लंम्बे समय से जारी

क्या भाजपा हेडक्वार्टर की वजह से जलमग्न हो रहा है मिंटो रोड?

दिल्ली सरकारी स्कूल: छात्र अपने मनचाहे विषय में दाखिला ले सकेंगे!

2030 तक आधे से अधिक भारतीयों की पहुँच से दूर हो जाएगा जल?

दिल्ली सरकारी स्कूल: सैकड़ों छात्र लचर व्यवस्था के कारण दाखिला नहीं ले पा रहे

दिल्ली के लिए पूर्ण राज्य की माँग पर जनता की राय

दिल्ली में कक्षा 12वीं तक ईडब्ल्यूएस छात्र शिक्षा ले सकतें है?

दिल्ली:भू-जल का गिरता स्तर चिंता का कारण है

श्रमिक अधिकार और इनके प्रति सरकारों का बर्ताव

कैग रिपोर्ट: दिल्ली सरकार ने लक्षित लोगो की मदद की जगह फिजूलखर्ची की


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License