NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली उच्च न्यायालय : सभी बच्चों को सरकारी विद्यालयों में दाखिला देना होगा !
दिल्ली सरकार हज़ारों बच्चों को आधारभूत ढांचा न होने की बात कह के स्कूली शिक्षा से बाहर कर दिया था परन्तु न्यायलय ने उनको वापस स्कूली शिक्षा में आने का मौका दिया हैI
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Aug 2018
school kids

दिल्ली सरकारी स्कूल में फेल लगभग 42 हज़ार छात्रों को दिल्ली उच्च न्यायालय से न्याय मिला, जब न्यायालय दिल्ली सरकार ने ये हुक्म दिया कि दिल्ली के सभी फेल हुए छात्र जो दोबारा रेगुलर पढ़ाई करना चाहते हैं उनका दाखिला करना होगा | इस आदेश के बाद दिल्ली के उन छात्रो को दिल्ली सरकार के उस फैसला से राहत मिली जिसके अनुसार 10 वीं और 12 वीं में फेल छात्रों का दाखिला दिल्ली के रेगुलर विद्यालयों में नही होगा उनका दाखिला ओपन स्कूल   विद्यालयों में ही होगा |

दिल्ली उच्च न्यायालय ने भी बच्चों के समर्थन में अपना फैसला दिया,ये दिल्ली के स्कूली छात्र और  दिल्ली सरकार के बीच एक संघर्ष था जिसमें दिल्ली के स्कूली छात्रों की विजय हुई है |ये पूरा मामला तब शुरू हुआ जब  दिल्ली सरकार के अधीन आने वाले सभी सरकारी विद्यालयों ने दसवीं में फेल 42,503 बच्चों के नाम काट दिए थे और उन्हें ओपन स्कूलों में पढाई करने का हुक्म दिया |

छात्रों की तरफ से न्यायालय में उनक पक्ष रख रहे सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और सामाजिक कार्यकर्ता अशोक अग्रवाल ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि “इस पूर मामले में दिल्ली सरकार का रुख बहुत ही निराशाजनक था वो सुनवाई के दौरान ये तर्क दें रहे थे कि उनके पास इन बच्चों को दाखिला देकर  पढ़ाने के लिए पर्याप्त ढांचा नही है जबकि  उनकी सरकार ये कहते नहीं थकती कि उन्होंने दिल्ली स्कूली शिक्षा में क्रन्तिकारी बदलाव किये हैं जिससे दिल्ली के सरकारी स्कूलों आधारभूत ढांचा देश में सबसे बेहतर हो गया है | परन्तु यह सवाल उठता है कि कैसे ? तकरीबन 60 हज़ार छात्रों को स्कूल से बाहर फेंके गए हैं? जो कि किसी करण से 10वीं और 12वीं में किसी कारण से फेल हो गये थे” |

शिक्षा क्षेत्र में काम करने वाले कई सामजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया ताकि पढ़ाई में कमज़ोर छात्रों को स्कूल से बाहर कर दिया जाए और जिससे सरकारी स्कूल अपने रिजल्ट बढ़ोतरी दिखा सकें और सरकार अपनी पीठ थप-थपा सके | जो कि सरासर गलत है और ये स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों के साथ अन्याय है | क्योंकि दिल्ली सरकारी स्कूल के रूल 138 के हिसाब से सभी छात्रों को फेल होने के बाद उसी विद्यालय में और उसी कक्षा में दाखिला लेने का हक़ है | जिससे ये केजरीवाल सरकार खत्म नहीं कर सकती है |

सरकार के इस तुगलकी फरमान के खिलाफ स्कूली छात्रों ने हार नहीं मानी और उन्हें इसमें अशोक अग्रवाल का साथ मिला और वो दिल्ली उच्च न्यायालय गए | उच्च न्यायालय ने भी इस पर सुनवाई की और दिल्ली सरकार को फटकारते हुए कहा कि 42 हजार 503 फेल बच्चों को ओपन स्कूल, पत्राचार से पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता | न्यायालय ने आगे यह भी कहा गया कि अगर बच्चें  रेगुलर पढ़ाई करना चाहते हैं तो सरकारी स्कूलों को उनका  दोबारा दाखिला लेना  ही होगा |

अशोक अग्रवाल ने बताया कि माननीय न्यायालय ने सरकार से कहा कि सरकार ओपन स्कूल में जाने का विकल्प बच्चों को दे सकती है लेकिन यह बच्चों और उनके अभिभावकों पर निर्भर करता है कि वे सरकार द्वारा दिए गए विकल्प को मंजूर करते हैं या नहीं | न्यायालय ने अपने निर्देश में साफतौर पर यह कहा कि किसी भी हाल में ओपन स्कूल से पढ़ाई करने के लिए जबरदस्ती नहीं की जा सकती या रेगुलर स्कूल में दोबारा दाखिले से मना नहीं किया जा सकता |

न्यायालय ने आगे कहा कि जिन बच्चों का ओपन स्कूल में पहले ही फॉर्म भरवा लिया है | उनके पास भी यह विकल्प है कि अगर वो अपने उसी स्कूल में पढना चाहतें है तो उनका भी दाखिला करना होगा | अंत में न्यायालय ने कहा कि अगर  किसी बच्चे या अभिभावक के साथ सरकारी स्कूल ज़बरदस्ती कर ओपन स्कूल में जाने का विकल्प भरवाते लेते हैं तो वे न्यायालय में सीधे अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं |

उच्च न्यायालय की यह फटकार से 10 वीं के उन हज़ारों बच्चों के लिए खुशखबरी है जिनको बोझ समझकर सरकार ने आगे की पढाई ओपन स्कूल से करने की हिदायत दी थी | इसके अतिरिक्त ये आर्डर 9 वीं से लेकर 12 वीं तक के सभी बच्चों के लिए भी खुशखबरी है जिनकी गिनती इस संख्या में शामिल नही थी |

Delhi High court
delhi govt
AAP Govt
Government schools

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

उत्तराखंड : ज़रूरी सुविधाओं के अभाव में बंद होते सरकारी स्कूल, RTE क़ानून की आड़ में निजी स्कूलों का बढ़ता कारोबार 

जहांगीरपुरी— बुलडोज़र ने तो ज़िंदगी की पटरी ही ध्वस्त कर दी

ख़बरों के आगे-पीछे: केजरीवाल मॉडल ऑफ़ गवर्नेंस से लेकर पंजाब के नए राजनीतिक युग तक

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

ख़बरों के आगे पीछे: बुद्धदेब बाबू को पद्मभूषण क्यों? पेगासस पर फंस गई सरकार और अन्य

दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत


बाकी खबरें

  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव: कांग्रेस ने इन महिलाओं को दिया है टिकट, जानिए क्यों अलग है इनके संघर्ष की कहानी
    13 Jan 2022
    प्रियंका गांधी ने डिजिटल संवाददाता सम्मेलन के माध्यम अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है जिसमें विशेष रूप से 50 महिला उम्मीदवारों के नामों का उल्लेख किया गया है।
  • health
    सुहित के सेन
    पश्चिम बंगाल : तीसरी लहर के बीच राजनीति की वजह से नज़रअंदाज़ हो रही स्वास्थ्य व्यवस्था
    13 Jan 2022
    मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक तरफ़ नाइट कर्फ़्यू लगाती हैं, मगर साथ ही गंगा सागर मेला को भी अनुमति दे देती हैं; ऐसे में कोविड से बचने के लिए उचित प्रबंधन होते नहीं दिख रहे हैं।
  • Guantanamo Bay
    ओलिवर सल्लेट
    ग्वांतानामो की विवादित जेल को हुए 20 साल
    13 Jan 2022
    क्यूबा में इस कुख्यात बंदी शिविर को 20 साल हो गए हैं। पिछले कई वर्षों से इसे बंद किये जाने की कई योजनाओं को ख़ारिज किया जाता रहा है। बंदियों के जीवन में पिछले दो दशकों में शायद ही कुछ बदलाव देखने को…
  • Berang goodrick
    संदीपन तालुकदार
    असम : बड़े-बड़े चाय बागानों वाले “बेहाली” में ज़रूरी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी
    13 Jan 2022
    बेहाली के पास ज़िला अस्पताल की सुविधा तक नहीं है। बेहाली असम के कमज़ोर स्वास्थ्य तंत्र की गवाही देता है। यहां की कमज़ोर स्वास्थ्य सुविधाओं, खासतौर पर कोविड महामारी के दौर में एक सार्वजनिक स्वास्थ्य…
  • CEL
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सरकार ने CEL को बेचने की कोशिशों पर लगाया ब्रेक, लेकिन कर्मचारियों का संघर्ष जारी
    13 Jan 2022
    यूनियन ने अपना प्रदर्शन जारी रखते हुए कहा है ‘जब तक कंपनी के विनिवेश का निर्णय "वापस नहीं ले लिया जाता है, उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।’ 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License