NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दलित नेता :भीमा कोरेगाँव हमला सुनियोजित था, भाजपा नेतृत्व वाले ‘पेशवाई शासन’ को उखाड़ फेंकने का लिया प्रण
कोरेगाँव भीमा में पेशवा बाजीराव द्वितीय की सेना को ब्रिटिश सैनिकों द्वारा 1 जनवरी, 1818 को हारने के जश्न मनाते हुए दलितों पर हमले से महाराष्ट्र उबाल पर।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Jan 2018
Translated by महेश कुमार
dalit atrocity

महाराष्ट्र में उस वक्त तनाव पैदा हो गया जब पुणे जिले के भीमा कोरेगाँव में दलितों पर कथित तौर पर कुछ व्यक्तियों ने जो भगवा झंडे लिए हुए थे ने हमला किया और पथराव किया, इस हमले में एक व्यक्ति के मारे जाने के बाद, पथराव हुआ और 25 वाहनों को जला दिया गया ,साथ ही 100 से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हुए। 1 जनवरी को भीमा कोरेगाँव में हर वर्ष लाखों लोगों 1818 में एक युद्ध की सालगिरह को मनाने के लिए इकठ्ठा होते हैं, जहां ज्यादातर महार जाति के (अनुसूचित जाति) सैनिकों ने ब्रिटिश सेना में लड़ते हुए ब्राह्मण पेशवा की अगुवाई वाली मराठा सेना को हराया था। दलित समुदायों पेशवाओं के द्वारा ब्राह्मण दमन के विरुद्ध इसे अपनी विजय के रूप में मनाते हैं। जो लोग इस युद्ध में मारे गए उनके नामों के साथ, एक स्तम्भ, उस जगह पर ब्रिटिश द्वारा स्थापित किया गया था।

पुलिस के मुताबिक, 28 वर्षीय राहुल फतांगले कल के हिंसक टकराव में घायल हो गए थे और बाद में पुणे के सासून जनरल अस्पताल में उनकी मौत हो गई थी।

पुणे की ग्रामीण पुलिस के मुताबिक, एक पुलिस वैन समेत चार पहिया वाहन को आग के हवाले कर दिया गया। करीब 1.30 बजे के आसपास भीड़ पर नियंत्रण पा लिया गया। दुकानें और पेट्रोल पंप बंद रहे। पुलिस "बंदोबस्त" पहले से ही क्षेत्र में था क्योंकि ग्रामीणों ने सोमवार की रैली का विरोध करने कि तैयारी की हुयी थी। दो सी.आर.पी.एफ. कंपनियां,  जिन्हें सोमवार को बुलाए गया था, को किन्ही हालात से निबटने के लिए आसपास के शिकरपुर में तैनात किया गया।

"क्षेत्र में सोमवार से तनाव था। उस वक्त सुबह भगदड़ मची जब भगवा झंडे लिए कुछ पुरूषों ने इस क्षेत्र का दौरा किया। बाद में, ग्रामीणों ने राजमार्ग पर आठ वाहनों को आग लगा दी और कुछ वाहनों पर पत्थर फेंके, "विश्वास नांगरे पाटिल आई.जी.पी. (कोल्हापुर रेंज) ने न्यूज़क्लिक को बताया।

उन्होंने कहा कि अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं की गई है। "हमने कोरेगांव स्मारक की ओर बढ़ने वाली सड़कों को घेर लिया है। भारी पुलिस बैंडोबस्त को तैनात किया गया है। पुणे-अहमदनगर राजमार्ग के पास के खेतों में ज्यादातर दंगाई छिपे हुए थे पत्थरबाजी कर रहे थे।"

औरंगाबाद और पुणे और नांदेड़ जिलों के कुछ इलाकों में एक पूरी की पूरी भीड़ को देखा गया था। मुंबई में कई स्कूलों और कॉलेज बंद थे क्योंकि विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। प्रदर्शनकारियों ने कुर्ला, मुलुंड, चेंबुर, भण्डुप, रमाबाई अम्बेडकर नगर और नेहरु नगर में 'रास्ता रोको' का प्रयास किया। मुलुंड और चेंबुर में दुकानें जबरन बंद की गयी। मंगलवार को मुंबई कि हार्बर लाइन को भी प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया था।

डॉ. भीम राव अम्बेडकर के पोते प्रकाश अम्बेडकर ने पुणे में चकन-कोरेगांव तालुका में गांवों को सभी सरकारी सहायता रोकने की मांग की, उन्होंने आरोप लगाया कि क्योंकि वे हिंसा में शामिल थे।

राज्य में कई जगहों पर स्थिति अभी भी पूरी तरह तनावपूर्ण बनी हुयी है। सुरक्षा को बढ़ा दिया गया है मुंबई सहित विभिन्न क्षेत्रों में धारा 144 को लगाया गया है।

भीम कोरेगांव अभियान के आयोजकों ने राज्य में फड़नवीस की अगुआई वाली भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सरकार को नया "पेशवा शासन" करार दिया है।

"यह एक योजनाबद्ध आक्रमण था जिसे पुलिस और सरकार ने मदद की थी। वे (शरारती तत्व) ने पहली बार (28 फरवरी को) गणपत गायकवाड़ के स्मारक पर हमला किया, जो महार जाति के थे (और औरंगजेब एक शाही आर्डर की अवज्ञा में संभाजी के अंतिम संस्कार का आयोजन किया था)। राज्य के समर्थन के बिना, कोई भी दलितों पर हमला करने की हिम्मत नहीं कर सकता है जिन्होंने ब्राह्मण पेशवा की अगुवाई वाली मराठा सेना को हराया था, "न्यूज़क्लिक से बात करते वक्त वीर सतदीर ने कहा।

शिरूर पुलिस स्टेशन ने पुष्टि की कि गायकवाड़ के स्मारक पर पिछले हफ्ते हमला हुआ था।

उन्होंने कहा, "पेशवेई" एक विचारधारा के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है जो दलित जाति के खिलाफ है। "वे अकेले दलित ही नहीं थे जो ब्रिटिश कि तरफ से लड़े थे, यहां तक कि इस लड़ाई में मराठ और मुस्लिम भी शामिल थे। और इसलिए, इस घटना में हंगामा पैदा करना केवल महार और मराठों के बीच खायी पैदा करने का एक प्रयास है। लेकिन हम ऐसे हमले को बर्दाश्त नहीं करेंगे। हम बैठेंगे और कार्रवाई की एक योजना के साथ आएंगे। हम इस सरकार को उखाड़ फेंक देंगे, "।

वे इसे कथित तौर पर दक्षिण पंथी संगठनों द्वारा अपने अभियान की "सफलता" के रूप में इस हमले को देखते है।देश के बाकी हिस्सों से दलित बुद्धिजीवियों और कार्यकर्ताओं ने सोमवार की घटना को "महाराष्ट्र में दलित राजनीति की नई शुरुआत" के रूप में वर्णित किया है।

दिल्ली के राष्ट्रीय अभियान पर दलित मानवाधिकारों के पॉल दिवाकर ने कहा कि, "कोरेगांव भीमा को दो तरीकों से देखा जाना चाहिए - अंग्रेजों ने सत्ता हासिल करने के लिए अपने एजेंडा को पूरा किया और कृषि श्रमिकों के समक्ष दलित समुदायों को दमनकारों से लड़ने का एक रास्ता दिखाया"।

महाराष्ट्र में एक दलित नेता आर.एस. कांबले ने कहा कि, "जिग्नेश मेवानी और प्रकाश अम्बेडकर के साथ आने और इसमें अन्य पिछड़े दलों को शामिल होने से दलित पैंथर युग के बाद एक नई दलित राजनीति की शुरुआत हुयी है।"

इस बीच, सामाजिक न्याय राज्य मंत्री रामदास आठवले ने सोमवार को दलितों के लिए पुलिस सुरक्षा की मांग की और भीम कोरेगांव में अतिरिक्त बल तैनात किए जाने की मांग की। "कोरेगांव के पास एक गांव सानस्वाडी में वाहनों को भीम कोरेगांव गांव का दौरा करने वाले दलितों को रोक दिया गया," आठवले ने एक बयान में कहा। "उन पर पत्थर फेंके गए थे उनकी सुरक्षा के लिए कोई पुलिस बल उपलब्ध नहीं था। "

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष शरद पवार ने आरोप लगाया कि दक्षिणपंथी ताकतों ने वाधू बुद्रुक के लोगों को हिंसा के लिए उकसाया था।

पवार ने कहा "पिछले 200 सालों से लोग इस जगह पर आ रहे हैं इस प्रकार की घटना कभी नहीं हुयी। चूंकि यह एक महत्वपूर्ण घटना की 200 वीं वर्षगांठ थी, इसलिए एक बड़ी भीड़ की उम्मीद थी और इसलिए प्रशासन को अधिक सावधान रहना चाहिए था।"

भीमा कोरेगाँव
दलित प्रतिरोध
Maharastra

Related Stories

कभी सिख गुरुओं के लिए औज़ार बनाने वाला सिकलीगर समाज आज अपराधियों का जीवन जीने को मजबूर है

महाराष्ट्र: फडणवीस के खिलाफ याचिकाएं दाखिल करने वाले वकील के आवास पर ईडी का छापा

ख़बरों के आगे पीछे: यूक्रेन में फँसे छात्रों से लेकर, तमिलनाडु में हुए विपक्ष के जमावड़े तक..

गढ़चिरौलीः यह लहू किसका है

महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल जारी, मंत्री ने यूनियन से बात की

उद्धव ठाकरे को थप्पड़ मारने वाली टिप्पणी पर केंद्रीय मंत्री नारायण राणे गिरफ्तार

महाराष्ट्र में भूस्खलन और बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 149 हुई

महाराष्ट्र : रायगढ़ जिले में भूस्खलन के कारण 30 लोगों की मौत

केंद्र के कृषि कानूनों के जवाब में महाराष्ट्र सरकार ने तीन विधेयक पेश किए

दाल आयात नीति से किसानों की छाती पर मूंग दल रही सरकार!


बाकी खबरें

  • एजाज़ अशरफ़
    दलितों में वे भी शामिल हैं जो जाति के बावजूद असमानता का विरोध करते हैं : मार्टिन मैकवान
    12 May 2022
    जाने-माने एक्टिविस्ट बताते हैं कि कैसे वे इस निष्कर्ष पर पहुंचे हैं कि किसी दलित को जाति से नहीं बल्कि उसके कर्म और आस्था से परिभाषित किया जाना चाहिए।
  • न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,827 नए मामले, 24 मरीज़ों की मौत
    12 May 2022
    देश की राजधानी दिल्ली में आज कोरोना के एक हज़ार से कम यानी 970 नए मामले दर्ज किए गए है, जबकि इस दौरान 1,230 लोगों की ठीक किया जा चूका है |
  • सबरंग इंडिया
    सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल
    12 May 2022
    सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ एमपी के आदिवासी सड़कों पर उतर आए और कलेक्टर कार्यालय के घेराव के साथ निर्णायक आंदोलन का आगाज करते हुए, आरोपियों के घरों पर बुलडोजर चलाए जाने की मांग की।
  • Buldozer
    महेश कुमार
    बागपत: भड़ल गांव में दलितों की चमड़ा इकाइयों पर चला बुलडोज़र, मुआवज़ा और कार्रवाई की मांग
    11 May 2022
    जब दलित समुदाय के लोगों ने कार्रवाई का विरोध किया तो पुलिस ने उन पर लाठीचार्ज कर दिया। प्रशासन की इस कार्रवाई से इलाके के दलित समुदाय में गुस्सा है।
  • Professor Ravikant
    न्यूज़क्लिक टीम
    संघियों के निशाने पर प्रोफेसर: वजह बता रहे हैं स्वयं डा. रविकांत
    11 May 2022
    लखनऊ यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर रविकांत के खिलाफ आरएसएस से सम्बद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ता हाथ धोकर क्यों पड़े हैं? विश्वविद्यालय परिसरों, मीडिया और समाज में लोगों की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License