NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा: तथ्यों की जांच लोकसभा में अमित शाह के दावों की पोल खोल देती है
गृहमंत्री ने 36 घंटों में हिंसा पर नियंत्रण पाने के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ की थी। लेकिन कॉल लॉग के आंकड़ें निष्क्रियता की कहानी बयां करते हैं।
तारिक अनवर
16 Mar 2020
Delhi Violence
Image Courtesy: NDTV

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पिछले महीने उत्तरपूर्व दिल्ली में हुई हिंसा के दौरान पुलिस की संदिग्ध और निष्प्रभावी भूमिका को क्लीन चीट दे दी है। संसद में दिए अमित शाह के भाषण के मुताबिक़, ''52 भारतीय'' लोगों की उस हिंसा में जान गई और 526 लोग घायल हो गए। शाह ने ''36 घंटे में हिंसा'' को ''प्रभावी'' काबू में करने के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ की।

यमुना पार के इलाके में 23 फरवरी की शाम से तनाव गहराना शुरू हो गया था, जो आखिरकार दंगे में बदल गया, जो अगले 48 घंटों तक चलते रहे।दंगों के दौरान निष्प्रभावी भूमिका के आरोपों और आलोचना का शिकार हो रही दिल्ली पुलिस का बचाव करने के लिए अमित शाह ने 11 मार्च को संसद में कई तर्क दिए। उन्होंने यह बातें विपक्ष द्वारा दंगों पर उठाए सवाल के जवाब में कहीं। लेकिन आधिकारी रिकॉर्ड कुछ और ही कहानी बयां करते हैं।

सीधे गृहमंत्रालय के अंतर्गत आने वाली दिल्ली पुलिस की तारीफ करते हुए अमित शाह ने कहा, ''दंगे उस इलाके में हो रहे थे, जहां की आबादी बीस लाख थी। घने इलाकों में दंगों पर नियंत्रण मुश्किल होता है। दिल्ली पुलिस ने दंगों पर 36 घंटों मे काबू पा लिया। मुझे कहना होगा कि पुलिस ने शानदार काम किया। मैं उन्हें बधाई देता हूं और दंगों को दूसरे इलाकों में न फैलने देने के लिए दिल्ली पुलिस की तारीफ करता हूं।''। उन्होंने आगे कहा, ''दंगों की पहली सूचना 24 फरवरी को मिली थी और आखिरी 25 फरवरी को रात 11 बजे।''

सच्चाई का परीक्षण

गृहमंत्री ने सदन से कहा कि हिंसा 36 घंटों (25 फरवरी को रात 11 बजे) में रुक गई। लेकिन तथ्य यह है कि 26 फरवरी को भी हिंसा जारी रही और 28 फरवरी तक हत्या की खबरें आती रही। मतलब गृहमंत्री ने दंगों के रुकने के वक्त का जो दावा किया था, उसके 48 घंटे बाद तक हिंसा की खबरें आती रहीं।

पुलिस रिकॉर्ड से पता चलता है कि 24 फरवरी (जैसा आधिकारिक दावा है) को शुरू होने के बाद अगले 72 घंटों तक हिंसा चलती रही। दिल्ली पुलिस कंट्रोल रूम के रिकॉर्ड के मुताबिक़, 23 फरवरी (रविवार) 700 लोगों ने मदद के लिए फोन आए। वहीं 24 फरवरी को 3500, 25 फरवरी को 7500 और 26 फरवरी को 1500 फोन कॉल आईं। 27 और 28 फरवरी को भी हिंसा की छिट-पुट घटनाएं सामने आती रहीं।

अब सवाल उठता है कि इन मदद की गुहार लगाती फोन कॉल का क्या हुआ?

हिंसाग्रस्त इलाकों के पुलिस स्टेशन की फोन कॉल लॉग शीट से पता चलता है कि इन फोन कॉल पर या तो कोई कार्रवाई नहीं की गई या फिर कार्रवाई को लंबित कर दिया गया।24 से 26 फरवरी के बीच भजनपुरा पुलिस स्टेशन में 3300 कॉल आईं। भजनपुरा पुलिस स्टेशन का अधिकारक्षेत्र चांदबाग, यमुना विहार, घोंडा और नूर-ए-इलाही के कुछ इलाकों तक है।

लेकिन कॉल लॉग रजिस्टर में ''कार्रवाई के संक्षिप्त वर्णन'' वाले खंड से पता चलता है कि मदद के लिए लगाई गई इन गुहारों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। न्यूज़क्लिक ने खुद रजिस्टर के इस खंड का परीक्षण किया है।इसी तरह शिव विहार इलाके में राजधानी पब्लिक स्कूल पर हुए हमले से जुड़ी कुछ कॉल को करावल नगर पुलिस स्टेशन ट्रांसफर किया गया था। हिंसा की सबसे ज़्यादा मार झेलने वाले शिव विहार इलाके में स्कूलों, दुकानों और घरों पर हमले किए गए, यहां 60 घंटों तक हिंसा चलती रही, जिसमें बड़ी तबाही हुई।

24 फरवरी को दोपहर 3 बजकर 30 मिनट से रात 10 बजे के बीच किए गए फोन में दंगाईयों के स्कूल और पास की दुकानों में घुसने की जानकारी थी।  
लॉग बुक से पता चलता है कि स्कूल पर हो रहे हमले को लेकर कई फोन आए, लेकिन हर कॉल का स्टेट्स ''लंबित'' दर्ज किया गया है।जब सुरक्षाबलों के हजारों लोग हिंसाग्रस्त इलाकों में सड़कों पर आए, तब हिंसा रुकनी शुरू हुई। एक सवाल, जिसका जवाब नहीं दिया गया है, वह यह है कि जब राष्ट्रीय राजधानी का एक घना इलाका जल रहा था, तब खाकी वर्दी वाले लोग कहां थे?

दिल्ली पुलिस में करीब 80,000 सुरक्षाबल हैं। लेकिन 23 से 26 फरवरी के अहम वक़्त में यह लोग नदारद थे, या फिर चुपचाप दंगाईयों को खड़े होकर देख रहे थे। कई वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों से इन तथ्यों का खुलासा हुआ है।न्यूज़क्लिक ने कुछ अधिकारियों से बात की, लेकिन कोई भी आधिकारिक तौर पर कुछ बोलना नहीं चाहता। लेकिन उन्होंने कहा कि वो जितना कर सकते थे, उतना किया, क्योंकि हथियारबंद दंगाईयों को काबू में करने के लिए पुलिसवालों की संख्या काफी कम थी।

क्षणिक या साजिश?

अमित शाह द्वारा संसद में किए गए दूसरे दावों पर भी संशय पैदा होता है। शाह ने आरोप लगाया कि दंगे सोची समझी साजिश के तहत अंजाम दिए गए। शाह ने कहा कि साजिश का मामला दर्ज किया गया है और जांच जारी है। शाह ने कहा, ''बिना योजना बनाए इस तरीके के दंगे संभव नहीं हैं। कितना पैसा दिल्ली में हवाला के ज़रिए लाया गया, हमारे पास इस बात के आंकड़े हैं। दिल्ली पुलिस ने इस संबंध में कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया है। जांच से आगे की जानकारी पता चलेगी।''

तथ्यों की जांच

इससे पहले शाह ने दंगों को ''क्षणिक'' कहा था। उनका आधिकारी प्रेस स्टेटमेंट पीआईबी की वेबसाइट पर भी दर्ज है।कोई कह सकता है कि पहला स्टेटमेंट तब दिया गया, जब दंगे जारी थे और शुरुआती जानकारी के आधार पर ही स्टेटमेंट दिया गया था। तब तक जांच शुरू नहीं हुई थी।लेकिन शाह ने अपने स्टेटमेंट में ''पेशेवर विश्लेषण'' के आधार पर हिंसा को क्षणिक बताया था।

शाह के सहायक और गृहराज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने हैदराबाद में एक इंटरव्यू में कहा था कि हिंसा साजिशन हुई है और यह देश को बदनाम करने की कोशिश है। यहां तक कि उन्होंने दंगों के लिए राहुल गांधी को ज़िम्मेदार ठहराया था।बाद में शाह ने अपनी बात बदली दी और संसद को बताया कि दंगे ''साजिशन'' हुए थे।

पुलिस पर पूर्वाग्रह के आरोप

पुलिस पर निष्क्रियता के अलावा पूर्वाग्रह से ग्रस्त होकर काम करने का भी आरोप लगाया गया। दंगे खत्म होने के महज़ दो दिन बाद एक वीडियो क्लिप आई, जिसमें कुछ घायल लोग ज़मीन पर लेटे हुए होते हैं और उनके आसपास खड़े पुलिस वाले उन्हें गाली देते हुए राष्ट्रगान सुनाने के लिए बोल रहे होते हैं।घायलों को अस्पताल पहुंचाने के बजाए पूछताछ के लिए ज्योति नगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। घायलों में से एक, फैजान की बाद में मौत हो गई। पुलिस अभी तक मामले में साफ होकर बरी नहीं हुई है।

यहां तक कि दंगों की जो जांच चल रही है, उनमें भी पुलिस पर पक्षपातपूर्ण ढंग से काम करने के आरोप हैं।  पुलिस ने एक वीडियो जारी किया है, जिसमें नागरिकता संशोधन अधिनियम विरोधी प्रदर्शनकारी पुलिस टीम पर हमला कर रहे हैं। लेकिन उन्होंने रोड के दूसरी तरफ से फुटेज दिखाना जरूरी नहीं समझा। ठीक उसी जगह से आए वीडियो में दिखता है कि दंगाई मोहन नर्सिंग होम की छत से भीड़ पर फायरिंग कर रहे होते हैं। यह भीड़ मुस्लिम बहुल चांद बाग इलाके से आई थी, जो हिंदू बहुल यमुना विहार की भीड़ का मुकाबला कर रही थी।

वीडियो हॉस्पिटल के दूसरी तरफ चांद बाग की ओर से रिकॉर्ड किया गया है। एक हेलमेट लगाए हुए आदमी गोली चलाते हुए, वहीं एक दूसरा पत्थर और द्रव्य भरी बॉटल फेंकता दिखाई देता है। उनके बगल में कई दूसरे लोग भी खड़े होते हैं।जब वीडियो सार्वजनिक हो चुका है, तब भी अब तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की है। गनमैन ने हालांकि हेलमेट पहन रखा था, पर दूसरे लोगों की आसानी से पहचान की जा सकती है, क्योंकि उनके चेहरे साफ-साफ दिख रहे हैं।

यह वीडियो रिकॉर्ड करने वाले आदमी ने एक दूसरा वीडियो भी रिकॉर्ड किया है, जिसमें एक आदमी को पेट में गोली लगी है और उसे छत से कुछ लोग नीचे लेकर आ रहे हैं। जिस आदमी को गोली लगी, वो 22 साल का शाहिद खान अल्वी था। शाहिद उत्तरप्रदेश के बुलंदशहर का रहने वाला था और दिल्ली में ऑटो चलाता था। गोली लगने से उसकी मौत हो गई।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

Delhi Violence: Reality Check Punches Holes in Amit Shah’s Claims in Lok Sabha

delhi police
Amit Shah
Distress Calls
Delhi Violence
Home Minister
Police Complicity
Shiv Vihar
Police Call Logs

Related Stories

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!


बाकी खबरें

  • cartoon
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक : …अब साइकिल भी आतंकवादी हो गई...और कूकर...और मोटरसाइकिल!
    21 Feb 2022
    एक चुनाव की ख़ातिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा साइकिल को आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश आमतौर पर पसंद नहीं की जा रही है। मज़दूर-कामगार के लिए तो आज भी साइकिल ही उनकी मोटरसाइकिल और कार है। सोशल…
  • lalu
    भाषा
    चारा घोटाला : डोरंडा कोषागार गबन मामले में दोषी लालू प्रसाद यादव को पांच साल कैद की सज़ा
    21 Feb 2022
    रांची स्थित विशेष सीबीआई अदालत  ने डोरंडा कोषागार से 139.35 करोड़ रुपये के गबन के मामले में राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव को पांच साल कैद और 60 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनायी।
  • up
    अजय कुमार
    यूपी से बाहर का मतलब केवल बंबई और दिल्ली नहीं है बल्कि सऊदी, ओमान और कतर भी है!
    21 Feb 2022
    "योगी के समर्थक योगी के पांच काम गिनवा देंगे तो मेरा वोट योगी को चला जाएगा।"
  • hum bharat ke log
    नाज़मा ख़ान
    हम भारत के लोग: देश अपनी रूह की लड़ाई लड़ रहा है, हर वर्ग ज़ख़्मी, बेबस दिख रहा है
    21 Feb 2022
    नफ़रत के माहौल में तराने बदल गए, जिस दौर में सवाल पूछना गुनाह बना दिया गया उस दौर में मुसलमानों से मुग़लों का बदला तो लिया जा रहा है। लेकिन रोटी, रोज़गार, महंगाई के लिए कौन ज़िम्मेदार है ये पूछना तो…
  • European Union
    अब्दुल रहमान
    यूरोपीय संघ दुनियाभर के लोगों के स्वास्थ्य से बढ़कर कॉर्पोरेट मुनाफे को प्राथमिकता देता है 
    21 Feb 2022
    अपनी आबादी के अधिकांश हिस्से का टीकाकरण हो जाने के बावजूद कोविड-19 संबंधित उत्पादों पर पेटेंट छूट को लेकर अनिच्छा दिखाते हुए यूरोपीय संघ के नेतृत्व ने एक बार फिर से बिग फार्मा का पक्ष लिया है और…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License