NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर एक और हमला
जानकारों का मानना है कि ये बिल दरअसल उन फासीवादी ताकतों को कानूनी संरक्षण देगा जो काफी समय से आदिवासियों को हिन्दू धर्म में शामिल करने के प्रयास में लगे हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
03 Aug 2017
धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार पर एक और हमला

१ अगस्त , मंगलवार को झारखण्ड की कैबिनेट ने धर्मांतरण विरोधी बिल ( anti-conversion bill) को मंज़ूरी दे दी , इस बिल को रिलीजियस फ्रीडम बिल 2017  का नाम दिया गया है और ये विधान सभा के मानसून सत्र  में पेश किया जायेगा ।  इस  बिल के तहत जबरन या लालच देकर किसी व्यक्ति का धर्म परिवर्तन करवाने पर ३ साल की सजा या ,50000 हज़ार तक का जुर्माना या दोनों हो सकते हैं । बिल में एक प्रावधान के तहत अगर पिछड़ी जातियों या आदिवासी समुदाय से सम्बंधित नाबालिक लड़की का धर्म  परिवर्तन कराया गया तो  4 साल की सजा या एक लाख का  जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।  इसके साथ  ही अगर कोई अपनी मर्ज़ी से धर्म बदलता  है तो उसे डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट को अपने धर्म बदलने की वजह , समय और जगह बतानी होगी।  

कैबिनेट द्वारा इस बिल को मंज़ूरी मिलते ही कई ईसाई संगठनों  ने इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है । उनका मानना है की ये बिल सरकार से जुड़े  दक्षिण पंथी  संगठनों  द्वारा आदिवासियों को हिन्दू बनाने की उनकी मुहिम को तेज़ करने के लिए लाया गया है।  दूसरी तरफ राज्य सरकार ये कह रही है की  ईसाई संगठन कई सालों से आदिवासियों को  जबरदस्ती  या लालच  देकर ईसाई बना रहे हैं इसीलिए ये बिल ज़रूरी है ।  

जानकारों का मानना है कि ये बिल दरअसल उन फासीवादी ताकतों को कानूनी संरक्षण देगा जो काफी समय से आदिवासियों  को  हिन्दू धर्म में शामिल करने के प्रयास में लगे हैं।  आदिवासी इलाकों में ये कार्य काफी सालों  से आरएसएस से जुड़े संगठन कर रहे  हैं , जिसके तहत आदिवासी समाज को "वनवासी समाज " कहा जाता है और ये प्रचार किया जाता है कि आदिवासी हमेशा से ही हिन्दू थे। जबकि इसके ठीक उलट समाजशास्त्री  ये बताते हैं की आदिवासी समाज के रीति रिवाज़ और रहन सहन हिन्दू समाज से काफी भिन्न  हैं और ये प्रचार साफ़ तौर पर दक्षिणपन्थी राजनीति से प्रेरित है।  दक्षिणपंथी संगठनों द्वारा इस तरह के बिल की मांग काफी पुरानी  है और , राजस्थान , हिमाचल , छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में ये बिल पहले से ही पास किया जा चुका है । 

अंग्रेज़ों के समय से ही ईसाई संगठन आदिवासी इलाकों में काम कर रहे हैं और कई आदिवासी और दलित समाज के लोग हिन्दू धर्म की जातीय व्यवस्था से छुटकारा पाने के लिए ईसाई बनते रहे हैं।  दक्षिण पंथी ताकतों के उभार से ईसाई संगठनों  के साथ इस टकराव की शुरुआत हुई और  २००८ में कण्डमाल के  ईसाई  विरोधी दंगो में  दक्षिणपंथियों  ने धर्मपरिवर्तन  को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था।  कुछ समय पहले घर वापसी  के नाम पर चलायी गयी मुहिम ,धर्म  चुनने की इसी आज़ादी पर लगाम लगाने के लिए शुरू  की गयी थी । इसके अलावा,  पूंजीवादी व्यवस्था द्वारा, जातिवाद और गरीबी को कम ना कर पाने की वजह से  दलित और आदिवासी कई बार पैसे और अन्य लाभ मिल जाने की उम्मीद में धर्मांतरण करते हैं। इसी वजह से धर्म चुनने की आज़ादी के लिए लड़ने के साथ इन मूलभूत मुद्दों के लिए भी संघर्ष की ज़रुरत है। 

धर्म परिवर्तन
धर्मनिर्पेक्षता
भाजपा
आरएसएस

Related Stories

#श्रमिकहड़ताल : शौक नहीं मज़बूरी है..

बढ़ते हुए वैश्विक संप्रदायवाद का मुकाबला ज़रुरी

यूनिफॉर्म सिविल कोड का मुद्दा भी बोगस निकला, आप फिर उल्लू बने

आपकी चुप्पी बता रहा है कि आपके लिए राष्ट्र का मतलब जमीन का टुकड़ा है

अबकी बार, मॉबलिंचिग की सरकार; कितनी जाँच की दरकार!

आरक्षण खात्मे का षड्यंत्र: दलित-ओबीसी पर बड़ा प्रहार

झारखंड बंद: भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त विरोध

एमरजेंसी काल: लामबंदी की जगह हथियार डाल दिये आरएसएस ने

झारखण्ड भूमि अधिग्रहण संशोधन बिल, 2017: आदिवासी विरोधी भाजपा सरकार

यूपी: योगी सरकार में कई बीजेपी नेताओं पर भ्रष्टाचार के आरोप


बाकी खबरें

  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पीएम सुरक्षा चूक मामले में पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में समिति गठित
    12 Jan 2022
    सुप्रीम कोर्ट ने कहा- ‘‘सवालों को एकतरफा जांच पर नहीं छोड़ा जा सकता’’ और न्यायिक क्षेत्र के व्यक्ति द्वारा जांच की निगरानी करने की आवश्यकता है।
  • dharm sansad
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    नफ़रत फैलाने वाले भाषण देने का मामला: सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस
    12 Jan 2022
    पीठ ने याचिकाकर्ताओं को भविष्य में 'धर्म संसद' के आयोजन के खिलाफ स्थानीय प्राधिकरण को अभिवेदन देने की अनुमति दी।
  • राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    विजय विनीत
    राय-शुमारी: आरएसएस के निशाने पर भारत की समूची गैर-वैदिक विरासत!, बौद्ध और सिख समुदाय पर भी हमला
    12 Jan 2022
    "आरएसएस को असली तकलीफ़ यही है कि अशोक की परिकल्पना हिन्दू राष्ट्रवाद के खांचे में फिट नहीं बैठती है। अशोक का बौद्ध होना और बौद्ध धर्म धर्मावलंबियों का भारतीय महाद्वीप में और उससे बाहर भी प्रचार-…
  • Germany
    ओलिवर पाइपर
    जर्मनी की कोयला मुक्त होने की जद्दोजहद और एक आख़िरी किसान की लड़ाई
    12 Jan 2022
    पश्चिमी जर्मनी में एक गांव लुत्ज़ेराथ भूरे रंग के कोयला खनन के चलते गायब होने वाला है। इसलिए यहां रहने वाले सभी 90 लोगों को दूसरी जगह पर भेज दिया गया है। उनमें से केवल एक व्यक्ति एकार्ड्ट ह्यूकैम्प…
  • Hospital
    सरोजिनी बिष्ट
    लखनऊ: साढ़ामऊ अस्पताल को बना दिया कोविड अस्पताल, इलाज के लिए भटकते सामान्य मरीज़
    12 Jan 2022
    लखनऊ के साढ़ामऊ में स्थित सरकारी अस्पताल को पूरी तरह कोविड डेडिकेटेड कर दिया गया है। इसके चलते आसपास के सामान्य मरीज़ों, ख़ासकर गरीब ग्रामीणों को इलाज के लिए भटकना पड़ रहा है। साथ ही इसी अस्पताल के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License