NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
त्रिपुरा : पूर्व सीएम माणिक सरकार ने मोदी-शाह पर लगाया राज्य के इतिहास से 'छेड़छाड़' का आरोप
माणिक सरकार ने कहा है कि प्रधानमंत्री मोदी ने जनशिक्षा आंदोलन का अपमान किया है, जिस आंदोलन ने त्रिपुरा में रियासती हुकुमत के अंत का रास्ता तैयार किया था।
संदीप चक्रवर्ती
27 Jan 2022
Translated by महेश कुमार
छाड़' का आरोपत्रिपुरा : पूर्व सीएम माणिक सरकार ने मोदी-शाह पर लगाया राज्य के इतिहास से 'छेड़

कोलकाता / अगरतला: त्रिपुरा पर कोई भी टेलीविजन भाषण देने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को त्रिपुरा के इतिहास के बारे में कुछ जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए थी, उक्त बातें त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री माणिक सरकार ने 21 जनवरी को त्रिपुरा की 50 वीं वर्षगांठ के अवसर पर पीएम द्वारा दिए गए आभासी भाषण के जवाब में कही। 

माणिक सरकार ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री ने उस जनशिक्षा आंदोलन का अपमान किया है, जिसने लोकतांत्रिक तरीके से त्रिपुरा राज्य में रियासती हुकुमत के अंत का मार्ग प्रशस्त किया था। उस दिन के पीएम के भाषण के बारे में कहा कि, "इतिहास सीधा है और सच्चाई किसी भी इतिहास का मुख्य आधार होती है। जो लोग इतिहास को विकृत करने की कोशिश करते हैं, वे एक दिन गुमनामी के अंधेरे में खो जाएंगे क्योंकि प्रधानमंत्री ने जनशिक्षा आंदोलन का जिक्र नहीं किया।" 

जनशिक्षा समिति ने त्रिपुरा में जनशिक्षा आंदोलन का नेतृत्व किया था और इसका नेतृत्व फायरब्रांड कम्युनिस्ट और आदिवासी नेता और तत्कालीन मुख्यमंत्री दशरथ देब ने किया था। नृपेन चक्रवर्ती जैसे कम्युनिस्ट दिग्गजों के नाम भी इस आंदोलन से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने शाह के भाषण को राज्य की आबादी को भ्रमित करने के प्रयास के रूप में भी संदर्भित किया है। अपने भाषण में, शाह ने कहा कि त्रिपुरा राज्य की 50 वीं वर्षगांठ राज्य में लोकतांत्रिक आंदोलन में एक महत्वपूर्ण घटना है। सरकार ने कहा, "यह अचानक से नहीं हुआ था। त्रिपुरा में 1945 से ही त्रिपुरा के रियासती शासन को समाप्त करने का आह्वान किया गया था। लोककथाओं के अनुसार, कुल 184 शासकों ने राज्य पर शासन किया था।" भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान, 1947 से पहले, राजशाही को समाप्त करने का आह्वान एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया था, जिसने त्रिपुरा को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया था। पूर्व सीएम ने उस समय के इतिहास के बारे में भी बताया जिससे महाराजा बीरबिक्रम सिंह ने अपनी मृत्यु से पहले भारतीय राज्य में शामिल होने का फैसला किया था।

राजा की मृत्यु के बाद, उनकी रानी कंचनप्रभा देवी रीजेंसी काउंसिल की प्रमुख बनीं थी। उसी समय, राजा के दरबार के अंदर बातचीत हो रही थी, और पाकिस्तान का पक्ष लेने का एक नापाक प्रयास शुरू में ही विफल हो गया था क्योंकि राज्य का एक लोकतांत्रिक आंदोलन उस प्रयास के खिलाफ विद्रोह में उठ गया था। 1950 में, त्रिपुरा को भारतीय संघ में राज्य की 'डी श्रेणी' के रूप में सूचीबद्ध किया गया था, और 21 जनवरी, 1971 को, यह भारतीय संघ के तहत एक पूर्ण राज्य बन गया था।

उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि जनशिक्षा समिति ने राज्य में लोकतंत्र स्थापित करने के लिए 27 साल की लंबी लड़ाई लड़ी थी, और संगठन की यह बहादुर भूमिका राज्य के इतिहास में अंतर्निहित थी। हालांकि, पीएम ने अपने भाषण में कहा कि त्रिपुरा को अपनी रियासतों से खुद राजाओं ने मुक्त किया था। सरकार ने कहा कि, "प्रधानमंत्री ने त्रिपुरा राज्य के लोगों, आदिवासी और गैर-आदिवासी द्वारा निभाई गई भूमिका को नकार दिया है, जिन्होने राज्य को रियासत से मुक्त करने और उसके स्थान पर लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित सरकार स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।"

पूर्व सीएम के मुताबिक सात से आठ मिनट के वर्चुअल भाषण में पीएम मोदी ने राज्य की रियासत का महिमामंडन किया और जो धारणा उन्होंने सामने रखने की कोशिश की वह यह थी कि लोकतंत्र की स्थापना राजाओं ने खुद की थी। सरकार ने कहा, "यह इतिहास की एक साधारण विकृति है और राजनीति से प्रेरित है, क्योंकि जनशिक्षा आंदोलन और लोकतांत्रिक आंदोलन ने राज्य में प्रगतिशील राजनीति के गौरवशाली चरण की नींव डाली थी।"

उन्होंने गृह मंत्री शाह के भाषण पर भी कटाक्ष करते हुए कहा कि दुनिया ने गुजरात में प्रधान मंत्री और गृह मंत्री की "जुगलबंदी" और वहां हुए "नरसंहार" को देखा है। कम्युनिस्टों के प्रति  मोदी के इस रवैये की आलोचना करते हुए कि कम्युनिस्टों ने राज्य के लिए कुछ नहीं किया, सरकार ने राज्य की प्रशासनिक उन्नति और आतंकवाद को हराने के कम्युनिस्टों के अनुभव का विस्तृत विवरण दिया।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली त्रिपुरा सरकार को चार साल हो गए हैं, लेकिन पिछले विधानसभा चुनावों में किए गए अपने चुनावी वादों को अभी तक पूरा नहीं किया है। उन्होंने कहा, "लोग अब कह रहे हैं कि भाजपा का मतलब जुमला है, और इसने जो विजन डॉक्यूमेंट बनाया है वह भी जुमला है। अब उसने 'टारगेट 2047' कहते हुए एक और जुमला दस्तावेज बनाया है। 25 साल बाद क्या होगा, यह कहने की हिम्मत किसने दी? सरकार केवल पांच साल के लिए चुनी जाती है, “वाम नेता ने कहा कि पूरे राज्य में श्मशान जैसी शांति है।

उन्होंने कहा, "लोगों से मतदान का अधिकार छीन लिया गया है। राज्य में एक दलीय शासन स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।" और अब उनके उपमुख्यमंत्री जिष्णु देबबर्मा भी इसका समर्थन कर रहे हैं।"

वस्तुतः टेलीविजन पर दिए गए भाषण में, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री दोनों ने यह कहने की कोशिश की कि त्रिपुरा में काफी विकास हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि साम्यवादी शासन के दौरान, विकास रुक गया था, और वामपंथियों ने विपक्ष को पीड़ा देने की कोशिश की थी। जबकि "वास्तविकता में देखा यह गया है कि वर्तमान भाजपा आईपीएफटी गठबंधन सरकार के दौरान, 22 वामपंथी कार्यकर्ताओं की शहादत हुई है। सरकार ने बताया कि, 2021 में, 7 से 8 सितंबर के बीच, पूरे राज्य में 44 वाम मोर्चा कार्यालयों को ध्वस्त कर दिया गया" यहां तक कि माकपा के राज्य मुख्यालय को भी नहीं बख्शा गया, जबकि पूर्व मुख्यमंत्री दशरथ देब की प्रतिमा को हमलावरों ने तोड़ दिया और ध्वस्त कर दिया था। 

इस दौरान विभिन्न मीडिया कार्यालयों पर भी हमला किया गया और 67 दुकानों और प्रतिष्ठानों को लूट लिया गया। राज्य में 2018 में सत्ता में आने के बाद, जून 2021 तक, वामपंथियों के अनुमान के अनुसार, माकपा के 662 कार्यालयों और जन संगठनों के 204 कार्यालयों पर स्पष्ट रूप से हमला किया गया और तोड़फोड़ की गई। वामपंथी समर्थकों या कार्यकर्ताओं के कुल 3,363 घरों को भाजपा के गुंडों द्वारा लूट लिया गया या नष्ट कर दिया गया, 659 दुकानों को नष्ट कर दिया गया और साथ ही साथ 1500 से अधिक तालाबों और रबर के बागानों को नष्ट कर दिया गया है।

Manik Sarkar
PM MODI
Amit Shah

Related Stories

कानपुर हिंसा: दोषियों पर गैंगस्टर के तहत मुकदमे का आदेश... नूपुर शर्मा पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं!

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?

सिख इतिहास की जटिलताओं को नज़रअंदाज़ करता प्रधानमंत्री का भाषण 

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

चुनावी वादे पूरे नहीं करने की नाकामी को छिपाने के लिए शाह सीएए का मुद्दा उठा रहे हैं: माकपा

यूपी में संघ-भाजपा की बदलती रणनीति : लोकतांत्रिक ताकतों की बढ़ती चुनौती

100 राजनयिकों की अपील: "खामोशी से बात नहीं बनेगी मोदी जी!"

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?


बाकी खबरें

  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    पाकिस्तानी क्रिकेटर हसन पर हमले से भारत के लिए सबक
    12 Nov 2021
    वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा आज चर्चा कर रहे हैं T20 वर्ल्ड कप के बारे में, हार की वजह सिर्फ एक खिलाड़ी क्यों? पहले भारतीय खिलाड़ी मोहम्मद शमी, अब पाकिस्तानी खिलाड़ी हसन अली, हार के बाद इन दोनों…
  • Bihar: Minor girl gangraped, one accused in custody
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः नाबालिग लड़की से गैंगरेप, एक आरोपी हिरासत में
    12 Nov 2021
    नालंदा के हिलसा के एसडीपीओ ने न्यूज़क्लिक को बताया कि पीड़िता की मां ने घटना के संबंध में केस दर्ज कराया है। पीड़िता के पुरूष-मित्र को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य दो आरोपियों की तलाश जारी है।
  • Central TUs
    रौनक छाबड़ा
    केन्द्रीय ट्रेड यूनियनों ने बजट सत्र के दौरान बेरोज़गारी, मूल्य वृद्धि के ख़िलाफ़ 2-दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है
    12 Nov 2021
    सीटीयू के नेतृत्व की ओर से केंद्र सरकार द्वारा “लोगों के मानव अस्तित्व को बचाए रखने के अधिकार को कमज़ोर करने” के खिलाफ निंदा प्रस्ताव को अपनाते हुए अपनी दस मांगों को पेश किया गया है।
  • ICF
    शशि देशपांडे, गीता हरिहरन
    "लोकतंत्र यानी संवाद, बहस और चर्चा..."
    12 Nov 2021
    लोगों को विभाजनकारी विचारधारा को स्वीकार करने के लिए बरगलाया गया है।
  • Bihar Poisonous Liquor Case
    अनिल अंशुमन
    बिहार ज़हरीली शराब कांड: नहीं थम रहा मौत का सिलसिला, 16 नवंबर को समीक्षा करेगी सरकार
    12 Nov 2021
    ‘ताला लागल बा, पाला खुलल बा’ की तर्ज़ पर जारी है शराबबंदी: भाकपा माले ने विपक्षी महागठबंधन से एकजुट होकर राज्य सरकार को घेरने का किया आह्वान।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License