NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
किसान आंदोलन: 26 नवंबर को लखनऊ में होगी 'किसान महापंचायत'
बीकेयू नेता राकेश टिकैत ने घोषणा की है, 'यह महापंचायत केंद्र के ताबूत में आख़िरी कील साबित होगी', जिसमें पूर्वांचल, पश्चिम यूपी, बुंदेलखंड के किसान हिस्सा लेंगे।
अब्दुल अलीम जाफ़री
10 Nov 2021
Translated by महेश कुमार
किसान आंदोलन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार शुरू होने से पहले, संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम), जोकि 40 से अधिक किसान यूनियनों का एक सामूहिक मंच है और जो तीन विवादित कृषि-क़ानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर व्यापक आंदोलन का नेतृत्व कर रहा है, ने लखनऊ में 22 नवंबर को 'किसान महापंचायत' करने की घोषणा की है।

टिकैत ने ट्वीट कर कहा है कि, 22 नवंबर को होने वाली किसान महापंचायत अपने आप में ऐतिहासिक होगी। यह महापंचायत किसान-विरोधी सरकार और तीन काले कानूनों के खिलाफ ताबूत में आखिरी कील साबित होगी। अब पूर्वांचल में भी किसानों का आंदोलन तेज होगा।'

भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के नेता ने पहले भी केंद्र सरकार को चेतावनी दी थी कि अगर 26 नवंबर (जो तारीख किसानों के विरोध के एक साल को चिह्नित करती है) तक उनकी मांगों को पूरा नहीं किया गया तो किसान दिल्ली की सीमाओं पर अपने आंदोलन को फिर से तीव्र कर देंगे। 

"केंद्र सरकार के पास 26 नवंबर तक का समय है, उसके बाद 27 नवंबर से किसान अपने गांवों से इकट्ठा होकर ट्रैक्टरों के माध्यम से दिल्ली के आसपास के विरोध स्थलों पर पहुंचेंगे और ठोस किलेबंदी कर के विरोध स्थल को मजबूती प्रदान करेंगे।"

पहले लखनऊ रैली की योजना 26 अक्टूबर की बनाई गई थी, लेकिन इसे नवंबर के अंत तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया ताकि फसल का मौसम आड़े न आए और किसान पूरी ताकत के साथ इसमें भाग ले सकें। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में चार किसानों और एक स्थानीय पत्रकार की मौत के विरोध में विभिन्न प्रदर्शनों की श्रृंखला के जरिए महापंचायत की घोषणा की गई थी।

हालांकि, "किसान मोर्चा" के बैनर तले आयोजित होने वाली "महापंचायत" के लिए अभी स्थान मुकर्रर नहीं है, एसकेएम नेता ने न्यूज़क्लिक को बताया कि, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल, बुंदेलखंड क्षेत्र सहित राज्य भर के किसानों को इसमें जोड़ा जाएगा और तराई पट्टी से किसान कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। रैली में हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब और दक्षिणी राज्यों के किसान भी शामिल होंगे।

बीकेयू के राज्य उपाध्यक्ष और लखनऊ महापंचायत के एक प्रमुख आयोजक हरिनाम सिंह वर्मा ने न्यूज़क्लिक को बताया कि: “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कल शामली और कैराना का दौरा किया और कहा कि पश्चिमी यूपी से हिंदुओं का पलायन एक बड़ी चुनौती है। सीएम को उस पलायन की याद आती है जब वह एक दो महीने में अपना कार्यकाल पूरा करने वाले होते हैं। असली मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए वह हिंदू-मुस्लिम कार्ड खेल रहे हैं।

किसानों की दुर्दशा पर प्रकाश डालते हुए वर्मा ने कहा: “हर दिन, किसानों को उर्वरक के लिए सहकारी समितियों के बाहर लंबी कतारों में घंटों इंतजार करते देखा जा सकता है, लेकिन उन्होंने (सीएम योगी ने) उन किसानों के बारे में एक भी लाइन नहीं बोली है, जो किसान -अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) खाद के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लखनऊ महापंचायत से, किसान सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ उन्हें सबक सिखाने के लिए 'वोट की चोट' का अभियान शुरू करेंगे।

"समय की सबसे बड़ी जरूरत है कि पूर्वांचल के किसानों को पिछले 11 महीनों से दिल्ली की सीमा पर किसानों के चल रहे संघर्ष के बारे में एक जोरदार और स्पष्ट संदेश भेजा जाएगा और साथ ही उनके मुद्दों जिसमें आवारा पशुओं की समस्या, बिजली की दरों में वृद्धि और महंगे उर्वरकों सहित अनेक मुद्दों को भी उठाया जाएगा।" बीकेयू नेता ने कहा कि वे सरकार पर केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा टेनी को गिरफ्तार करने और बर्खास्त करने का दबाव बनाएंगे, जिनका बेटा लखीमपुर खीरी हिंसा का आरोपी है।

इस बीच, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 22 नवंबर को 'किसान महापंचायत' की तैयारियां जोरों पर हैं। बीकेयू नेताओं को मुजफ्फरनगर महापंचायत की तरह किसानों की बड़ी हिस्सेदारी का भरोसा है।

बीकेयू के मुजफ्फरनगर जिला अध्यक्ष योगेश शर्मा ने कहा: “26 नवंबर की महापंचायत कृषि कानूनों के खिलाफ और संयुक्त किसान मोर्चा के मिशन आंदोलन की दिशा तय करेगी। आगामी कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए हम युद्धस्तर पर अभियान चला रहे हैं। 

इसी तरह की एक बैठक मऊ क्षेत्र में हुई है जहां आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर के किसान नेता लखनऊ में प्रस्तावित 22 सितंबर की रैली की रणनीति पर चर्चा करने के लिए इकट्ठे हुए थे। 

 

Lucknow Mahapanchayat
rakesh tikait
Farmers Protests
Fertilisers Crisis

Related Stories

बेंगलुरु में किसान नेता राकेश टिकैत पर काली स्याही फेंकी गयी

किसान-आंदोलन के पुनर्जीवन की तैयारियां तेज़

MSP पर लड़ने के सिवा किसानों के पास रास्ता ही क्या है?

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

सरकार सिर्फ़ गर्मी, चर्बी और बदले की बात करती है - राकेश टिकैत

यूपी चुनाव: क्या पश्चिमी यूपी कर सकता है भाजपा का गणित ख़राब?

ख़ास इंटरव्यू : लोगों में बहुत गुस्सा है, नहीं फंसेंगे हिंदू-मुसलमान के नफ़रती एजेंडे में

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

लखीमपुर कांड की पूरी कहानी: नहीं छुप सका किसानों को रौंदने का सच- ''ये हत्या की साज़िश थी'’


बाकी खबरें

  • राज वाल्मीकि
    अब साहित्य का दक्षिण टोला बनाने की एक कोशिश हो रही है: जयप्रकाश कर्दम
    13 Feb 2022
    इतवार विशेष: दलित साहित्य और दलित लेखकों के साथ भेदभाव हो रहा है जैसे गांव में होता है न, दलित बस्ती दक्षिण टोला। दलित साहित्य को भी यह मान लीजिए कि यह एक दक्षिण टोला है। इस तरह वे लोग दलित साहित्य…
  • Saharanpur
    शंभूनाथ शुक्ल
    यूपी चुनाव 2022: शांति का प्रहरी बनता रहा है सहारनपुर
    13 Feb 2022
    बीजेपी की असली परीक्षा दूसरे चरण में हैं, जहां सोमवार, 14 फरवरी को वोट पड़ेंगे। दूसरे चरण में वोटिंग सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, संभल, मुरादाबाद, रामपुर, बरेली, बदायूँ, शाहजहांपुर ज़िलों की विधानसभा…
  • Uttarakhand
    कृष्ण सिंह
    चुनाव 2022: उत्तराखंड में दलितों के मुद्दे हाशिये पर क्यों रहते हैं?
    13 Feb 2022
    अलग उत्तराखंड राज्य बनने के बाद भी दलित समाज के अस्तित्व से जुड़े सवाल कभी भी मुख्यधारा के राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक प्रश्न नहीं रहे हैं। पहाड़ी जिलों में तो दलितों की स्थिति और भी…
  • Modi
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: अगर आरएसएस न होता...अगर बीजेपी नहीं होती
    13 Feb 2022
    "...ये तो अंग्रेजों की चापलूसी में लगे थे। कह रहे थे, अभी न जाओ छोड़ कर, कि दिल अभी भरा नहीं"
  • election
    अनिल जैन
    ख़बरों के आगे-पीछे: चुनाव आयोग की साख पर इतना गंभीर सवाल!
    13 Feb 2022
    हर हफ़्ते की कुछ खबरें और उनकी बारिकियाँ बड़ी खबरों के पीछे छूट जाती हैं। वरिष्ठ पत्रकार जैन हफ़्ते की इन्हीं कुछ खबरों के बारे में बता रहे हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License