NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
गाज़ा में नरसंहार जारी, मृतकों की संख्या 50 के पार
यूएस दूतावास के येरूसलम स्थानांतरण को लेकर विरोध कर रहे हज़ारों प्रदर्शनकारियों पर इज़रायली सेना ने चलाई गोलीI
अभिजान चौधरी, द डॉन न्यूज़
15 May 2018
palestine

अमेरिकी दूतावास के तेल अवीव से येरूसलम में स्थानांतरण को लेकर हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन में 52 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई जबकि 2,000 से ज़्यादा लोग घायल हो गए। मारे गए लोगों में 18 साल से कम उम्र के 6 युवा शामिल थें जबकि 200 घायल थें। वहीं घायलों में 11 महिलाएं थीं जबकि इनमें 11 पत्रकार भी थें। इजरायल के लड़ाकू विमानों ने सोमवार को गाज़ा क्षेत्र में सात जगहों को निशाना बनाया।

विरोध प्रदर्शन में कम से कम 40,000 फिलिस्तीनियों ने हिस्सा लिया, ये रैली रमल्लाह और हेब्रोन में भी हो रही हैं। बेथलहम शहर में इज़़रायली सेना और फिलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष की भी ख़बर है। अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन इज़रायल की स्थापना की 70 वीं वर्षगांठ एक साथ हो रहा है, और नकबा (आपदा) दिवस से एक दिन पहले होता है। इस दिन को फिलिस्तीनी इज़़रायल की स्थापना के बाद लगभग 750,000 फिलिस्तीनियों को निष्कासन की याद में मनाते हैं।

नए दूतावास परिसर के उद्घाटन के दौरान लोगों के गिरफ्तारियों की भी सूचना है।

फिर से हुई हिंसा को लेकर दुनिया भर में लोगों ने निंदा की है। "दर्दनाक तरीके से अत्यधिक बल और गोला बारूद का इज़रायली सेना द्वारा इस्तेमाल करना एक अन्य डरावना उदाहरण है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन है, कुछ मामलों में जो हो रहा है ऐसा लगता है कि जानबूझकर युद्ध अपराध की हत्याएं है, यह भी कहा कि यूएस दूतावास का स्थानांतरण ग़ैर क़ानूनी स्थापना समेत इज़रायल द्वारा दशकों की हिंसा को माफ करना है जो युद्ध अपराध करता है।"

रेड क्रॉस और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने भी इस हिंसा की निंदा की है।

सोमवार को नए दूतावास के उद्घाटन में डोनाल्ड ट्रम्प के वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर को यह कहते हुए देखा गया कि "हिंसा को बढ़ावा देना समस्या का हिस्सा हैं न कि समाधान का हिस्सा है।" इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने घोषणा की कि "सच यह है कि येरूशलेम हमेशा से यहूदी देश के यहूदी लोगों की राजधानी रही है और हमेशा रहेगी।"अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक रिकॉर्ड संदेश में कहा कि यह काम "लंबे समय से किया जा रहा है" और एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में इज़रायल को अपनी राजधानी का स्थान निर्धारित करने का अधिकार है। ट्रम्प ने टेंपल माउंट समेत येरूशलेम के पवित्र स्थलों की रक्षा करने की कसम खाई।

इज़रायली लोक सुरक्षा मंत्री गिलाद एर्डन ने इजरायली सेनाओं द्वारा मारे जा रहे फिलीस्तीनियों की तुलना नाज़ियों से की है जो विश्व युद्ध के दौरान मारे गए थें।

इससे पहले रमल्लाह में फिलीस्तीनी प्राधिकरण (पीए) के प्रवक्ता ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से फिलिस्तीन की राजधानी के रूप में पूर्वी येरुसलम को मान्यता देने का आग्रह किया था और योजनाबद्ध तरीके से दूतावास के स्थानांतरण की अंतरराष्ट्रीय अस्वीकृति और निंदा की मांग की थी। गाज़ा में हमास ने कहा कि दूतावास के स्थानांतरण के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन में हजारों लोग के और शामिल होने की उम्मीद थी।

दूतावास के स्थानांतरण को यूरोपीय नेताओं ने निंदा की। यूरोपीय संघ के देशों के ज़्यादातर राजदूतों ने कहा कि वे समारोह का बहिष्कार करेंगे। फ्रांस ने कहा कि दूतावास का स्थानांतरण अंतरराष्ट्रीय क़ानून का उल्लंघन करने के समान था। सऊदी प्रिंस तुर्क अल फैसल ने एक साक्षात्कार में कहा कि दूतावास का स्थानांतरण एक "डरावना क़दम" था। तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन ने रविवार को कहा कि येरुसलम को इज़रायल की राजधानी के रूप में घोषणा किए जाने के सभी क़दमों के बावजूद फिलिस्तीन की राजधानी पूर्वीयेरुसलम थी। इज़राइल सेना द्वारा फिलिस्तीनियों पर निशाना बनाए जाने को लेकर मिस्र ने भी सोमवार को कड़ी निंदा की है।

ईरान के विदेश मंत्री जवाद ज़रीफ़ ने सोमवार को ट्वीट किया कि नए अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन होना "बड़े शर्म का दिन था।"

"इज़राइली शासन ने अनगिनत फिलिस्तीनियों को नरसंहार किया क्योंकि वे दुनिया की सबसे बड़ी खुली जेल में विरोध करते हैं। इस बीच ट्रम्प ने अमेरिकी अवैध दूतावास केस्थानांतरण का जश्न मनाया और उनके अरब सहयोगियों ने ध्यान हटाने के लिए कदम उठाया।"

ज़़रीफ़ शायद खाड़ी अरब देशों का जिक्र इस वजह से कर रहे थे कि वह अब तक हुई मौत और हिंसा को लेकर चुप रहा है। दूतावास के स्थानांतरण पर चर्चा करने के लिए अरब लीग विशेष बैठक आयोजित कर सकता है।

इस बीच सोमवार को तेल अवीव विश्वविद्यालय में सैकड़ों छात्रों और प्रतिभागियों ने नकबा दिवस के आयोजन में हिस्सा लिया। अरब-प्रभुत्व वाले दलों के राजनीतिक गठबंधन वालेसंयुक्त सूची के कानून निर्माताओं ने आयोजन में हिस्सा लिया।

एमके यूसुफ जबरीन (संयुक्त सूची) ने कहा, "आज न्याय और शांति की तलाश करने वालों के लिए एक काला दिन है- दूतावास को येरुसलम में स्थानांतरित करना अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के चेहरे पर थूक फेंकना है, और गंभीर रूप से पूरे क्षेत्र में शांति के मौका में बाधा उत्पन्न करता है।"

Great Return March
Israel Occupied Palestine
गाज़ापट्टी
नकबा

Related Stories

फ़िलिस्तीन पर इज़राइली हिंसा और यूक्रेन-रूस में ख़ूनी जंग कब तक

शता ओदेह की गिरफ़्तारी फ़िलिस्तीनी नागरिक समाज पर इस्राइली हमले का प्रतीक बन गया है

फ़िलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी लोय अल-अश्क़र ने रिहाई पर हुए समझौते के बाद भूख हड़ताल ख़त्म की

इज़रायली सैनिकों ने क़ब्ज़े वाले फ़िलिस्तीनी क्षेत्रों में एक 12 वर्षीय लड़के की हत्या की

गाज़ा के स्थानीय लोगों का सवाल, ‘हम कहां जाएं?’

गाज़ा पर इज़रायल के हमले में 36 लोगों की मौत

फ़िलिस्तीनी भूमि पर इज़रायल का अवैध क़ब्ज़ा और तोड़ फोड़ जारी

भूख हड़ताल के चलते फिलिस्तीनी प्रशासनिक बंदी मौत के कगार पर

फ़िलिस्तीनियों ने इज़रायल के साथ संबंध "सामान्य" करने वाले समझौतों का विरोध किया

इज़रायल ने बनाई फ़िलिस्तीन की इब्राहिमी मस्जिद के आसपास के इलाक़े को क़ब्ज़ाने की योजना


बाकी खबरें

  • सरोजिनी बिष्ट
    विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 
    17 May 2022
    ये आशायें लखनऊ में "उत्तर प्रदेश आशा वर्कर्स यूनियन- (AICCTU, ऐक्टू) के बैनर तले एकत्रित हुईं थीं।
  • जितेन्द्र कुमार
    बिहार में विकास की जाति क्या है? क्या ख़ास जातियों वाले ज़िलों में ही किया जा रहा विकास? 
    17 May 2022
    बिहार में एक कहावत बड़ी प्रसिद्ध है, इसे लगभग हर बार चुनाव के समय दुहराया जाता है: ‘रोम पोप का, मधेपुरा गोप का और दरभंगा ठोप का’ (मतलब रोम में पोप का वर्चस्व है, मधेपुरा में यादवों का वर्चस्व है और…
  • असद रिज़वी
    लखनऊः नफ़रत के ख़िलाफ़ प्रेम और सद्भावना का महिलाएं दे रहीं संदेश
    17 May 2022
    एडवा से जुड़ी महिलाएं घर-घर जाकर सांप्रदायिकता और नफ़रत से दूर रहने की लोगों से अपील कर रही हैं।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 43 फ़ीसदी से ज़्यादा नए मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए 
    17 May 2022
    देश में क़रीब एक महीने बाद कोरोना के 2 हज़ार से कम यानी 1,569 नए मामले सामने आए हैं | इसमें से 43 फीसदी से ज्यादा यानी 663 मामले दिल्ली एनसीआर से सामने आए हैं। 
  • एम. के. भद्रकुमार
    श्रीलंका की मौजूदा स्थिति ख़तरे से भरी
    17 May 2022
    यहां ख़तरा इस बात को लेकर है कि जिस तरह के राजनीतिक परिदृश्य सामने आ रहे हैं, उनसे आर्थिक बहाली की संभावनाएं कमज़ोर होंगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License