NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
गरीब-पिछड़े तबके को फेलोशिप से बाहर करने की साज़िश! एसएफआई का प्रदर्शन
पिछले चार साल से जब से मोदी सरकार आई है शोध छात्रों के फेलोशिप में किसी भी तरह कि बढ़ोतरी नहीं हुई है बल्कि लगातार कटौती हुई है। कई सारे फेलोशिप जो समाज के पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों के लिए हैं उनमें लगातार ऐसे नियम बनाए जा रहे हैं जिससे छात्रों का एक बड़ा तबका उसके लाभ से बाहर हो जाए।

मुकुंद झा
21 Dec 2018
एसएफआई का प्रदर्शन
शोध छात्रों के फेलोशिप में बढ़ोतरी को लेकर प्रदर्शन

स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (एसएफआई) की केंद्रीय कार्यकारी समिति के आह्वान पर आज शुक्रवार को एसएफआई की सभी इकाइयों ने  फेलोशिप बढ़ाने और उसके नियमित वितरण की मांग को लेकर प्रदर्शन किया।

एसएफआई ने देश के सभी राज्यों में विरोध प्रदर्शनों का अयोजन किया गया। आईआईटी मद्रास, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय, कलकत्ता के प्रेजिडेंसी कॉलेज, हरियाणा के कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय, उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद विश्वविद्यालय के साथ दिल्ली में भी विज्ञान क्षेत्र से जुड़े छात्रों ने भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया।

पिछले चार साल से जब से मोदी सरकार आई है शोध छात्रों के फेलोशिप में किसी भी तरह कि बढ़ोतरी नहीं हुई है जबकि महंगाई अपनी चरम सीमा पर है, बल्कि उसमे लगातार कटौती हुई है। कई सारे फेलोशिप जो समाज के पिछड़े तबके से आने वाले छात्रों के लिए हैं उनमें लगातार ऐसे नियम बनाए जा रहे हैं जिससे छात्रों का एक बड़ा तबका उसके लाभ से बाहर हो जाए। इन सभी मुद्दों को लेकर एसएफआई ने देशभर में विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मुख्य मांग हैं-

1. इस सत्र से नॉन-नेट फेलोशिप कम से कम 50% तक बढ़ाई जानी चाहिए।

 2. पिछले 4 वर्षों की महंगाई के अनुसार वृद्धि और जेआरएफ, सीएसआईआर और आईसीसीएसआर या आईसीएचआर की फेलोशिप का नियमित वितरण किया जाना है।

 3. उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्रवृत्ति प्रदान करते समय राशि की समानता को बनाए रखने की आवश्यकता है।

 4. एमएनएफ, आरजीएनएफ या एसवीएसजीसी जैसे छात्रवृत्ति के लिए अधिसूचना, जो समाज के पिछड़े तबके के लिए है वो  असामयिक और अनियमित नहीं हो सकती है। इसे नियमित किया जाना चाहिए।

 5. स्नातकोत्तर स्तर में अधिक छात्रवृत्ति उन लोगों के लिए सुनिश्चित की जानी चाहिए जो समाज के कमजोर वित्तीय वर्ग से आते हैं।

उत्तर प्रदेश.jpeg

एसएफआई  के महासचिव मयूख बिश्वास ने न्यूज़क्लीक से बात करते हुए कहा की यूजीसी द्वारा बेहद शर्मनाक प्रयास किया गया है  कि मौलाना आज़ाद नेशनल फेलोशिप (एमएनएफ) और राजीव गाँधी नेशनल फेलोशिप (आरजीएनएफ) के लिए  इस सत्र से नेट की योग्यता  अनिवार्य कर दी गई है। (विशेष रूप से अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए),  यह बहुत खतरनाक  है। अल्पसंख्यकों और दलितों के लिए ऐसी विशेष कंडीशनिंग के तहत ये फेलोशिप रखी गईं थी ताकि उच्च शिक्षा में उनका प्रतिनिधित्व बढ़ सके। इन  वंचित समुदायों के लिए अधिक से अधिक अवसर बनाने में सरकार का प्रयास होना चाहिए। फेलोशिप की संख्या सीमित करने जैसे एक योजनाबद्ध हमले से हमारे समाज के एक बड़े वर्ग के लिए उच्च शिक्षा का दरवाजा बंद हो जाएगा।

मयूख कहते है की हमारा मानना है कि यह जातिवाद और इस्लामोफोबिया का एक स्पष्ट उदाहरण है जो आरएसएस बीजेपी का शुरू से मुख्य एजेंडा रहा था और संविधान के विचार के प्रति पूरी तरह से विरोधाभासी है।

शिक्षा का लगातार गिरता बजट

 2013-14 के बजट में, शिक्षा क्षेत्र को कुल बजट का 4.57% आवंटित किया गया था। यह 2017-18 के बजट में 3.8% से कम हो गया है। 1966 में कोठारी आयोग की रिपोर्ट ने प्रस्तावित किया था कि जीडीपी का 6% शिक्षा के लिए आवंटित किया जाना चाहिए लेकिन 50 से अधिक वर्षों बाद भी नहीं हुआ है। मोदी सरकार पूरे शिक्षा क्षेत्र के लिए बजट जो पहले से कम है उसे और कम करने पर तुली हुई है। (इसमें स्कूल और उच्च शिक्षा शामिल है।)

Education Table.jpg

दिल्ली के विधि विभाग के छात्र व एसएफआई  के राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य और दिल्ली प्रदेश  अध्यक्ष विकास भदौरिया ने कहा कि मोदी सरकार ने यह ठान लिया है कि वो सार्वजनिक शिक्षा को बर्बाद करेगी, हम देख रहे हैं कि जिस तरह सामजिक न्याय का मज़ाक बनाया जा रहा है। समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को मिलने वाली फेलोशिप को मोदी सरकार ने आने के बाद से बंद कर दिया है, ये साफ दिखाता है कि वे नहीं चाहते हैं कि समाज का सबसे पिछड़ा  तबका जो बहुत मुश्किल से  विश्वविद्यालयो तक पहुँच पा रहा है, वो पढ़े और इन मनुवादियों से सवाल करे।

आगे वो कहते हैं कि इसलिए वो लगातर शिक्षा के बजट में कटौती कर रहे हैं, परन्तु वो नहीं जानते कि छात्र अपने हक के लिए लड़ने को तैयार हैं। हम एसएफआई  भगत सिंह  और अंबेडकर के सपनों का भारत चाहते हैं परन्तु ये संघ समर्थित भाजपा की सरकार भारत को मनु और गोलवलकर के सपनों का भारत बनाना चाहते है, लेकिन हम ये नहीं होनें देंगे और हमारा आज का विरोध प्रदर्शन इसको लेकर था।

मोदी सरकार में शिक्षा बदहाल

हिमाचल के रामपुर भी इन मांगों के साथ कुछ स्थानीय मांगों को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। इस मौके पर एसएफआई इकाई उपाध्यक्ष नेहा ने कहा कि आज महाविद्यालय में छात्रों को उनकी मूलभूत सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। महाविद्यालय के अंदर इस कड़ाके की ठंड में लाइब्रेरी के अंदर छात्रों को अध्ययन करना बहुत मुश्किल हो रहा है, क्योंकि लाइब्रेरी में हीटर की सुविधा नहीं दी जा रही है। महाविद्यालय में छात्राओं की संख्या 65% से अधिक है फिर भी महाविद्यालय में गर्ल्स कॉमन रूम नहीं है।

प्रेजिडेंसी.jpeg

नेहा  ने कहा कि “वर्तमान समय में रिसर्च स्कॉलर को जो फेलोशिप मिलनी चाहिए थी वह नहीं मिल पा रही है जिस कारण छात्रों को शोध करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के शोध छात्र व दिल्ली एसएफआई के उपाध्यक्ष  सुमित कटारिया ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि नरेंद्र मोदी कि इस सरकार ने  शिक्षा प्रणाली का व्यावसायीकरण और भगवाकरण तेज से किया है। सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों के लिए बजट  में भारी कटौती की गई है और उच्च शिक्षा का निजीकरण कर रही  है। इसके साथ ही राजनीतिक नियुक्तियां (जो अक्सर अनुभवहीन और अक्षम होती हैं) और उन्हें कठपुतली की तरह प्रयोग करके और आरएसएस संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के माध्यम से, मोदी सरकार सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थानों में लोकतांत्रिक माहौल को खत्म कर रही है।  इसका उदाहरण हमने कई बार देखा अभी हाल में ही इसी तरह का एक नियुक्ति हिन्दू कालेज के प्रिंसिपल की थी जिसे बाद में दिल्ली उच्च न्यायलय के गलत माना और इस नियुक्ति को रद्द कर दिय।

एसएफआई न केवल आने वाले सत्रों के लिए पिछली योग्यता जो फेलोशिप के लिए थी उसे जारी रखने की मांग करता है, बल्कि इन वंचित वर्गों के लिए अधिक छात्रवृत्ति देने की मांग भी करता है और इसके लिए एक ऑनलाइन पेटिशन भी साइन कराई जा रही है जिसे वो मानव विकास एवं संसाधन मंत्री को भेजेंगे। 

 

SFI
UGC
MHRD
modi sarkar
BJP-RSS
SC and ST discrimination
education under attack
SFI Protest
‪‎fightforfellowship
‬HikeFellowship

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

डीवाईएफ़आई ने भारत में धर्मनिरपेक्षता को बचाने के लिए संयुक्त संघर्ष का आह्वान किया

लखनऊ विश्वविद्यालय: दलित प्रोफ़ेसर के ख़िलाफ़ मुक़दमा, हमलावरों पर कोई कार्रवाई नहीं!

कविता का प्रतिरोध: ...ग़ौर से देखिये हिंदुत्व फ़ासीवादी बुलडोज़र

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

भारत में सामाजिक सुधार और महिलाओं का बौद्धिक विद्रोह

2023 विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र तेज़ हुए सांप्रदायिक हमले, लाउडस्पीकर विवाद पर दिल्ली सरकार ने किए हाथ खड़े

मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में सैलून वाले आज भी नहीं काटते दलितों के बाल!

कॉमन एंट्रेंस टेस्ट से जितने लाभ नहीं, उतनी उसमें ख़ामियाँ हैं  

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च


बाकी खबरें

  • अरुण कुमार त्रिपाठी
    विचार: योगी की बल्ले बल्ले, लेकिन लोकतंत्र की…
    27 Mar 2022
    अंतरराष्ट्रीय पूंजी ने आधुनिक किस्म के हिंदुत्व के साथ एक तालमेल बिठा लिया है। अब इसे मनुवादी कहना और ब्राह्मणवादी कहना एकदम से सटीक नहीं बैठता। इसमें सत्ता में भागीदारी का पूरा इंतजाम किया गया है।
  • international
    न्यूज़क्लिक टीम
    रूस-यूक्रेन युद्धः क्या चल रहा बाइडन व पुतिन के दिमाग़ में
    26 Mar 2022
    पड़ताल दुनिया भर की में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने युक्रेन युद्ध के एक महीने होने के बाद चल रहे दांवों पर न्यूज़ क्लिक के एडिटर-इन-चीफ प्रबीर पुरकायस्थ से बातचीत की। इसमें रूस की रणनीति के साथ-साथ…
  • रवि शंकर दुबे
    IPL 2022:  नए नियमों और दो नई टीमों के साथ टूर्नामेंट का शानदार आगाज़
    26 Mar 2022
    आईपीएल 2022 का आगाज़ हो चुका है, इस बार कई नियमों में बदलाव किए गए हैं तो लखनऊ और गुजरात की टीमों ने भी एंट्री मार ली है। ऐसे में क्रिकेट फैंस के लिए टूर्नामेंट बेहद रोचक होने वाला है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या RSS योगी में देखता है मोदी का उत्तराधिकारी
    26 Mar 2022
    यूपी में दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक कद अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है. भारतीय जनता पार्टी-शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियो में अब उनकी बराबरी कराने वाला कोई नहीं!
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    रेलवे में 3 लाख हैं रिक्तियां और भर्तियों पर लगा है ब्रेक
    26 Mar 2022
    एक तरफ बेरोज़गार युवा दर-दर भटक रहे हैं वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों में इतनी बड़ी संख्या में रिक्तियां, वह भी केवल एक विभाग में, चौंकाने वाली है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License