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भारत
राजनीति
गरीबी और कुपोषण ने ले ली दो नौजवान मुसहर भाइयों की जान
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में भूख, गरीबी, कुपोषण महादलित मुसहर समुदाय के लोगों की जान ले रहा है। लगातार मौतों ने सरकार के राष्ट्रीय पोषण माह और भोजन की गारंटी योजना पर सवाल खड़े कर दिए हैं। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने सिंतबर माह को पोषण माह घोषित किया है।
मनोज कुमार सिंह
17 Sep 2018
जंगल खिरकिया गांव का एक दृश्य।
फोटो : साभार

कुशीनगर के दुदही ब्लाक के रकबा दुलमापट्टी गांव में पांच दिन में एक मुसहर महिला और उसके दो बच्चों की कुपोषण से मौत के बाद पडरौना ब्लाक के जंगल खिरकिया गांव में दो मुसहर भाइयों की कुपोषण से मौत हो गई। इस घटना से नाराज लोगों ने पूर्वांचल किसान यूनियन के कार्यकर्ताओं के साथ गांव में धरना भी दिया।

दो सप्ताह के अन्दर कुपोषण और कुपोषण जन्य बीमारियों से पांच मुसहरों की मौत के बाद प्रशासन जगा है। डीएम डा. अनिल कुमार सिंह ने दोनों मुसहरों की मौत के बारे में एसडीएम पडरौना से जाँच कर रिपोर्ट देने को कहा है।

सभी मुसहर गांवों में हेल्थ कैम्प लगाने और मुसहरों का स्वास्थ्य परीक्षण करने, उनके गांवों में साफ-सफाई का अभियान चलाने, पोषाहार अभियान/ मेला आयोजित करने, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग को  अपनी योजनाएं चलने और सभी मुसहर गांवों को सभी योजनाओं से संतृप्त करने की मांग की है।

जंगल खिरकिया गांव की मुसहर बस्ती में चार भाइयों का बेहद गरीब परिवार रहता है। इस परिवार के मुखिया सुदर्शन की दो दशक पहले मौत हो चुकी है। घर में सबसे बड़े दो भाइयों की शादी हो चुकी है। वे काम के सिलसिले में बाहर चले गए हैं। दो छोटे भाई फेंकू (22) और पप्पू (16) मजदूरी कर किसी तरह जीवन यापन करते थे।

ये दोनों अपनी मां सोनवा देवी के साथ रहते थे। सोनवा देवी ने बताया कि दोनों बेटे ईंट भट्ठे पर काम करते थे। सीजन में ही काम मिलता था। बाकी समय खाली बैठे रहते। घर की हालत खराब है जिसके कारण दो जून की रोटी भी मिलना मुहाल था। दोनों बेटे काफी कमजोर हो गए थे और बीमार रहने लगे थे। पैसे के अभाव में वह उनका ठीक से इलाज भी नहीं करा सकी।

फेंकू की 12 सितम्बर को हालत गंभीर हो गई। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया। अगले दिन सुबह उनकी मौत हो गई। उधर उनके छोटे भाई पप्पू की भी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया जहां रात में उनकी मौत हो गई। परिजनों व गांव के लोगों का आरोप है कि जिला अस्पताल में इलाज में लापरवाही बरती गई।

फेंकू की मौत की खबर मिलने पर पूर्वांचल किसान यूनियन के नेता पप्पू पांडेय गांव पहुंचे और धरने पर बैठ गए। वह मुसहरों के गांवों में तत्काल हेल्थ कैम्प लगाकर सभी का स्वास्थ्य परीक्षण करने और उनका इलाज करने की मांग कर रहे थे। साथ ही वह मुसहरों को सभी योजनाओं से लाभान्वित करने की मांग कर रहे थे। गांव पहुंचे एसडीएम ने उनकी मांग पूरा करने का आश्वासन दिया, तब उन्होंने धरना समाप्त किया।

उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केन्द्रीय गृह राज्यमंत्री कुंवर आरपीएन सिंह, पप्पू की मौत की खबर मिलने पर जिला अस्पताल पहुंचे और परिजनों से मुलाकात की। पूर्व सांसद बालेश्वर यादव और पूर्व मंत्री राधेश्याम सिंह भी जंगल खिरकिया गांव पहुंचे और घटना की जानकारी ली। विपक्ष ने इस मामले को विधानसभा में उठाने की भी घोषणा की है। 

(गोरखपुर न्यूज़ लाइन से साभार)

malnutrition in India
mushar
kushinagar
Death by malnutrition

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