NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सरकार की कड़ी कार्रवाई भी बिहार में अवैध बालू खनन रोकने में विफल रही 
बार-बार कड़ी कार्रवाई किए जाने के बावजूद अवैध रूप से खनन किया गया बालू पटना में दिनदहाड़े पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी जानकारी में बेचा जा रहा है।
मोहम्मद इमरान खान
10 Aug 2021
सरकार की कड़ी कार्रवाई भी बिहार में अवैध बालू खनन रोकने में विफल रही 
प्रतिकात्मक चित्र। साभार: आउटलुक इंडिया

पटना: शक्तिशाली बालू माफिया पर कड़ी कार्रवाई करने तथा पिछले एक महीने से दर्जनों सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कदम उठाने के लंबे चौड़े दावों के बावजूद बिहार की विभिन्न नदियों में अवैध बालू खनन रोकने में प्राधिकारी विफल रहे हैं।

स्थानीय राजनीतिज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों तथा पुलिस के साथ रेत माफिया की मजबूत सांठगांठ के कारण मुख्य रूप से सोन तथा फल्गू नदियों में सोमवार को अवैध रूप से बालू खनन जारी रहा। अवैध रूप से खनन किया गया बालू पटना के खुले बाजार में दिनदहाड़े पुलिस तथा प्रशासनिक अधिकारियों की पूरी जानकारी में बेचा जा रहा है। सोमवार को तड़के सुबह से ही पटना में विभिन्न स्थानों पर, बालू से भरे ट्रक, ट्रैक्टर तथा अन्य वाहन खड़े पाए जाते हैं। यह अवैध बालू खनन से जबर्दस्त रूप से पैसा बनाने का एक उदाहरण है।

इसके अतिरिक्त, अवैध रूप से बालू खनन के खिलाफ बहु-प्रचारित कड़ी कार्रवाई का परिणाम बालू की कीमत में तीन गुनी बढोतरी के रूप में सामने आया है। आम आदमी के लिए अपने मकान के निर्माण के लिए बालू खरीदना अब महंगा हो रहा है।

न केवल अवैध रूप से बालू खनन जारी है बल्कि भोजपुर, रोहतास, अरवल तथा औरंगाबाद जिलों में सोन नदी के विभिन्न तटों से ट्रक तथा अन्य भारी वाहन लगातार बालू ढो रहे हैं। 

रस्मी तौर पर, पुलिस ने बालू से लदे कुछ ट्रक, ट्रैक्टर तथा अन्य वाहनों को एकाध बार जब्त किया था। फिर भी, इससे बालू माफिया पर कोई प्रभाव नहीं दिख रहा है जो धन और बाहुबल की सहायता से सुगमतापूर्वक अपना काम कर रहे हैं। कड़ी कार्रवाई के दौरान गिरफ्तार व्यक्ति माफिया प्रमुखों की बजाय मुख्य रूप से ड्राइवर और बालू की खुदाई करने वाले हैं। 

अवैध रूप से बालू खनन एक संगठित अपराध सिंडिकेट का उल्लेखनीय हिस्सा है। रविवार को, बालू माफिया ने एक पुलिस टीम पर हमला किया, जो भोजपुर में बरहरा पुलिस थाने के तहत बिदगवान के नदी के तटीय क्षेत्र के निकट अवैध रूप से बालू खनन करने के स्थान तथा बालू के स्टॉक पर छापा मारने जा रही थी। बालू माफिया के गुर्गों ने पुलिस बल पर पत्थर फेंके, आधा दर्जन पुलिस वाहनों को नुकसान पहुंचाया और पुलिस के अधिकारी अपनी जान बचाने के लिए वहां से भाग खड़े हुए। बाद में, पुलिस ने इस हमले के आरोप में 22 लोगों को गिरफ्तार किया। पिछले सप्ताह, बालू माफिया ने भोजपुर में संदेश पुलिस थाने के तहत सरीपुर सोनघाट में अवैध रूप से बालू खनन रोकने की कोशिश कर रही एक पुलिस टीम पर हमला किया था। पिछले महीने, बालू माफिया ने कई अन्य स्थानों पर भी पुलिस टीम पर हमला किया। 

एक कंस्ट्रक्शन ठेकेदार इरशाद अंसारी ने न्यूजक्लिक को बताया कि नीतीश कुमार की सरकार ने प्रति क्यूबिक फुट रेत की दर 4,000 रुपये निर्धारित की थी। लेकिन उन्होंने दावा किया कि ‘इसे 10,000 से 12,000 रुपये की दर से बेचा जा रहा है। अंसारी ने बताया कि हालांकि सरकार ने घोषणा की कि बालू की बिक्री केवल निर्धारित दर पर अनुमोदित स्टॉक से लाइसेंसधारी डीलर द्वारा की जाएगी, पर वास्तविकता में बाजार में बिक रहा बालू मुख्य रूप से अवैध रूप से खनन किया गया बालू है। 

नदी से जुड़े एक एक्टिविस्ट के अनुसार, सोन नदी में अवैध रूप से बालू खनन कार्रवाई खत्म होने के बमुश्किल कुछ ही घंटों बाद फिर शुरू हो जाता है। एक्टिविस्ट ने बताया कि ‘ यह एक सामान्य चलन बन गया है। बालू माफिया की सैकड़ों नावें बंदूकधारी निजी गार्डों के साथ अवैध रूप से बालू खनन के काम में जुटी हुई हैं।‘ उन्होंने यह भी कहा कि बालू से भरे सैकड़ों ट्रक तथा अन्य भारी वाहन रोजाना सोन नदी की तटों से राज्य के विभिन्न स्थानों के लिए रवाना होते हैं। यह प्रचलन अभी भी जारी है जबकि संसद के मानसून सत्र, जो 30 सितंबर को समाप्त हुआ, के दौरान राष्ट्रीय हरित ट्रिब्यूनल के आदेश के अनुपालन में जून से ही बालू खनन स्थगित किया जा चुका है।

बहरहाल, पिछले महीने राज्य सरकार ने राज्य के चार जिलों में अवैध रूप से बालू खनन करने वाले माफिया की सहायता करने तथा उन्हें प्रश्रय देने के आरोप में भारतीय पुलिस सेवा (आइपीएस) के दो अधिकारियों तथा चार पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) अधिकारियों समेत 17 अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इस कार्रवाई से कुछ दिन पूर्व, दो आईपीएस अधिकारियों को भोजपुर तथा औरंगाबाद जिलों में पुलिस अधीक्षक के पद से हटा दिया गया। 

रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार की आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) ने अवैध रूप से बालू खनन के संचालन में इन अधिकारियों की मिलीभगत पाई। ईओयू जुलाई में निलंबित 17 अधिकारियों सहित 42 सरकारी अधिकारियों द्वारा कर्थित रूप से अर्जित आय से अधिक संपत्ति की जांच करती रही है।

राज्य में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से बालू खनन व्यवसाय को ध्यान में रख कर, राज्य गृह विभाग ने पिछले महीने इओयू को पुलिस सहित संदिग्ध सरकारी अधिकारियों के खिलाफ बालू माफिया लॉबी में उनकी संलिप्तता की जांच करने का निर्देश दिया। 

पटना उच्च न्यायालय में, 2017 में प्रस्तुत एक पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बालू माफिया स्थानीय पुलिस, राजनीतिक संरक्षण प्राप्त बालू का खनन करने वालों तथा सरकार के खनन विभाग के अधिकारियों के बीच एक बड़ी सांठगांठ है। रिपोर्ट में बालू खनन करने वाली कंपनियों, जिन्हें विशेष रूप से पटना में बालू खनन के ठेके दिए गए, द्वारा उल्लंघनों की ओर भी इशारा किया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि ‘ राज्य सरकार के अधिकारियों, विशेष रूप से जो पुलिस, खनन तथा परिवहन विभाग से जुडे हैं, के बीच पूरी मिलीभगत...खनन और पर्यावरण के नियम और कानून केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। ‘

अवैध रूप से बालू खनन मानसून सीजन में शक्तिशाली बालू माफिया द्वारा पटना, भोजपुर, रोहतास, औरंगाबाद, सारण तथा वैशाली सहित कई जिलों में किया जाता है। 

इसका खुलासा पिछले सप्ताह किसी और ने नहीं बल्कि राज्य के खनन और भूविज्ञान मंत्री जनक राम ने किया था जिन्होंने कहा कि अवैध रूप से बालू खनन के कारण राज्य सरकार को 700 करोड़ रुपये का सालाना नुकसान उठाना पड़ा। 

इस वर्ष, मार्च में बिहार सरकार ने अवैध रूप से बालू खनन को रोकने जिससे नदियों पर बने पुलों को खतरा पैदा हो जाता है, के लिए नदी पर बने पुलों के निकट या उसके आसपास बालू खनन तथा रेत की खुदाई प्रतिबंधित कर दी है। पिछले कुछ वर्षों में, अवैध रूप से बालू खनन ने भोजपुर में कोइलवार रेलवे पुल की बुनियाद को क्षतिग्रस्त कर दिया है, जिसे अंग्रेजों ने 1900 में बनाया था।    
   
अंग्रेजी में मूल रूप में प्रकाशित इस लेख को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें

Govt Crackdowns Fail to Stop Illegal Sand Mining in Bihar

sand mining
Bihar
sand mafia
jdu
Illegal Sand Mining
Sone River

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • भाजपा
    अनिल जैन
    भाजपा सरकारों के बीच प्रचार के फ़रेब से छवि चमकाने की होड़
    17 Jul 2021
    भाजपा की राज्य सरकारें अपनी योजनाओं और कथित उपलब्धियों का प्रचार सिर्फ़ अपने सूबे में ही नहीं बल्कि देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी कर रही हैं। यह स्थिति तब है, जब ये सभी सरकारें गंभीर…
  • आज भी दर्द से भरे हैं उभ्भा गांव के आदिवासी। नरसंहार कांड की दूसरी बरसी से पहले एक जगह जमा होकर अपना दुख सुना रहे आदिवासी
    विजय विनीत
    सोनभद्र नरसंहार कांड: नहीं हुआ न्याय, नहीं मिला हक़, आदिवासियों के मन पर आज भी अनगिन घाव
    17 Jul 2021
    सोनभद्र के उभ्भा गांव में हुए नरसंहार की आज दूसरी बरसी है। आज ही के दिन 17 जुलाई 2019 को 112 बीघे ज़मीन के लिए यहां दबंगों ने अंधाधुंध फायरिंग कर 11 आदिवासियों की जान ले ली थी। इस घटना में 25 अन्य…
  • कानपुर के देहाती इलाक़ों का एक सियासी सफ़र
    मोहम्मद सज्जाद
    कानपुर के देहाती इलाक़ों का एक सियासी सफ़र
    17 Jul 2021
    एक ऐसी नयी किताब,जो सियासी घिनौनेपन और भ्रष्टाचार की जड़ों की सटीक शिनाख़्त करती है, लेकिन उद्धार के उस कुछ इतिहास से चूक जाती है, जो इसी सियासत के बूते घटित हुआ था।
  • सवालों से घिरा उत्तर प्रदेश: प्रियंका और सुभाषिनी ने दी योगी सरकार को चुनौती
    असद रिज़वी
    सवालों से घिरा उत्तर प्रदेश: प्रियंका और सुभाषिनी ने दी योगी सरकार को चुनौती
    17 Jul 2021
    शुक्रवार को दो महिला नेता प्रदेश कि राजधानी लखनऊ पहुंची। एक कांग्रेस की प्रियंका गांधी और दूसरी सीपीएम की सुभाषनी अली। दोनों ने योगी सरकार पर हल्ला बोला। प्रियंका ने पंचायत चुनाव में हुई हिंसा को…
  • क्यों आबादी को नियंत्रित करने से जुड़ा क़ानून संविधान के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है?
    अजय कुमार
    क्यों आबादी को नियंत्रित करने से जुड़ा क़ानून संविधान के मौलिक अधिकार के ख़िलाफ़ है?
    17 Jul 2021
    इस तरह के प्रावधान का मतलब है कि राज्य अपने नागरिकों को समान तौर पर नहीं देख रहा है। लोक कल्याण से जुड़ी मदद को पहुंचाने के लिए शर्त रख रहा है। आधुनिक राज्य से ऐसी अपेक्षा नहीं की जाती है कि वह अपने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License