NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हाथियों के रास्ते में होगा छत्तीसगढ़ का कोयला खदान
राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण तथा वन मंत्रालय के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि मंत्रालय ने पर्यावरण मंज़ूरी देते समय वन्यजीवन को ध्यान में नहीं रखा। इस आदेश के बाद साल 2014 में कोयला खनन रोक दिया गया था।
विवान एबन
11 Oct 2018
coal mine

भारत में कोयला ब्लॉक, घोटालों और अपारदर्शी सौदों का पर्याय बन गया है। हालांकि प्रारंभिक घोटालों में कोयले के ब्लॉक आवंटित करने की प्रक्रिया में अस्पष्टता थी, लेकिन वर्तमान मुद्दा पर्यावरणीय मामलों से भी संबंधित है। साल 2014 में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने छत्तीसगढ़ में पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील हसदेव अरंद वन में परसा ईस्ट तथा कोंटे बसन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉक में कोयला खनन के संबंध में पर्यावरण और वन राज्य मंत्री जयराम रमेश के 2011 के आदेश को रद्द कर दिया था। चार साल बाद, छत्तीसगढ़ सरकार की तरफ से परसा ओपन कास्ट माइन में खनन को फिर से शुरू करने के लेकर प्रयास किया गया।

ओपन कास्ट माइनिंग आम तौर पर किए जा रहे खनन कार्य के विशिष्ट क्षेत्र के आस पास बड़े क्षेत्र को नष्ट कर देता है। धूल और कण जो प्रदूषण पैदा करते हैं, इसके अलावा ये खनिज जल श्रोंतों में जा सकते हैं और इससे आगे भी फैल सकते हैं। इस तरह के प्रदूषण न केवल वनस्पतियों और जीवों को प्रभावित करते हैं, बल्कि मनुष्यों, पशुओं और फसलों को भी प्रभावित करते हैं।

पीईकेबी कोयला ब्लॉक में खनन परियोजनाओं का विरोध हसदेव अरंद संघ समिति के साथ-साथ छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन ने भी किया है। हालांकि, परसा ईस्ट और कांटे बसन में कोयले के ब्लॉक गौतम अदानी से जुड़े लगते हैं। हसदेव अरंद क्षेत्र में कोयला खनन पर हसदेव अरंद संघ समिति द्वारा पेश किए गए एक परिप्रेक्ष्य दस्तावेज के अनुसार पीईकेबी कोयला ब्लॉक में परियोजना का प्रस्ताव करने वाला मूल रूप से राजस्थान राज्य विद्युत उत्तपादन निगम (आरआरवीयूएनएल) था। हालांकि साल 2007 में अदानी समूह ने पूरी स्वामित्व वाली सहायक कंपनी के रूप में अदानी माइनिंग प्राइवेट लिमिटेड का गठऩ किया। यह सहायक कंपनी जल्द ही आरआरवीयूएनएल के साथ संयुक्त उद्यम बन गया, और परस कोंटे कोलियरीज़ लिमिटेड का गठन किया जिसमें अदानी की सहायक कंपनी ने 74 प्रतिशत हिस्सेदारी ली।

अदानी समूह ने खदान से कोयला ढ़ोने के लिए अपने स्पेशल परपस व्हीकल- सरगुजा रेल कॉरिडोर प्राइवेट लिमिटेड- के माध्यम से रेल लाइन बिछाने के लिए भी एक अनुबंध हासिल कर लिया।

साल 2012 में खनन कार्य शुरू होने से पहले सुदीप श्रीवास्तव ने इन खदानों के लिए पर्यावरण मंजूरी देने के आदेश के ख़िलाफ़ राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से अपील किया था। एनजीटी ने पाया कि न तो वन सलाहकार समिति (एफएसी) और न ही राज्य मंत्री ने वृक्ष क्षेत्र के अलावा अन्य पहलुओं पर विचार किया। एफएसी ने इस क्षेत्र के वृक्षारोपण को ध्यान में रखते हुए सिफारिश की थी कि मंजूरी खारिज कर दी जाए। हालांकि, राज्य मंत्री ने पर्यावरण मंजूरी को मंजूरी देने के लिए वृक्ष क्षेत्र पर विचार किया। दोनों ही मामलों में इस क्षेत्र की जैव विविधता पर विचार नहीं किया गया था।

इस प्रकार एनजीटी ने राज्य मंत्री के आदेश को रद्द कर दिया, और एफएसी और पर्यावरण तथा वन मंत्रालय दोनों को सिफारिश करने और आदेश देने से पहले उक्त क्षेत्र की जैव विविधता पर अध्ययन करने के लिए निर्देशित किया।

संयोग से छत्तीसगढ़ सरकार ने पहले सिफारिश की थी कि इस क्षेत्र को हाथी रिजर्व घोषित किया जाए क्योंकि यह हाथियों के प्रवास मार्ग का हिस्सा बन गया था। केंद्र सरकार ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया था। हालांकि साल 2013 में टाइम्स ऑफ इंडिया ने एक रिपोर्ट प्रकाशित किया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने इस पूरे विचार को गुप्त रूप से समाप्त कर दिया।

द वायर के अनुसार एनजीटी के आदेश और खनन परियोजनाओं के विरोध के बावजूद पर्यावरण मंजूरी पर विचार करने के लिए विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के समक्ष मामला अभी भी विचाराधीन है। शायद, यह कुछ अहम शख्स की मौजूदगी के कारण है। हालांकि, अगर परसा ओपन कास्ट माइन के लिए मंजूरी दे दी जाती है तो ओपन कास्ट माइनिंग से जुड़े प्रदूषण के अलावा यह मानव-वन्यजीव के संघर्ष को निश्चित तौर पर बढ़ाएगा क्योंकि यह सीधे तौर पर हाथियों के प्रवास मार्ग में ही स्थित है।
 

coal mines
open cast mining
Adani
human wild life conflict
national green tribunal

Related Stories

कोयले की कमी? भारत के पास मौजूद हैं 300 अरब टन के अनुमानित भंडार

गैर-स्टार्टर स्मार्ट सिटी में शहरों में शिमला कोई अपवाद नहीं है

सुंदरबन में अवैध रिसॉर्ट के मालिक की पहचान नहीं कर पा रही ममता सरकार

किसानों और सरकारी बैंकों की लूट के लिए नया सौदा तैयार

उत्तराखंड: लंबित यमुना बांध परियोजना पर स्थानीय आंदोलन और आपदाओं ने कड़ी चोट की

ग्राउंड रिपोर्ट: देश की सबसे बड़ी कोयला मंडी में छोटी होती जा रही मज़दूरों की ज़िंदगी

भू-विस्थापितों के आंदोलन से कुसमुंडा खदान बंद : लिखित आश्वासन, पर आंदोलन जारी

दूध गंगा के बचाव में आगे आया एनजीटी

देश के कई राज्यों में कोयले का संकट, मध्यप्रदेश के चार पॉवर प्लांट में कोयले की भारी कमी

अनियंत्रित ‘विकास’ से कराहते हिमालयी क्षेत्र, सात बिजली परियोजनों को मंज़ूरी! 


बाकी खबरें

  • covid
    संदीपन तालुकदार
    सार्स-सीओवी-2 का नया डेल्टा प्लस वैरिएंट और उससे चिंता के कारण
    16 Jun 2021
    कोविड के इस नए वैरिएंट से चिंता की एक वजह, विशेषकर भारत के सन्दर्भ में यह हो सकती है कि तथ्य इस बात की ओर इशारा करते हैं कि यह वैरिएंट मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज के प्रति अवरोधक साबित हो सकते हैं।
  •  covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.92 फ़ीसदी हुई
    16 Jun 2021
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 62,224 नए मामले दर्ज किए गए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 2.92 फ़ीसदी यानी 8 लाख 65 हज़ार 432 हो गयी है।
  • भाषा सिंह
    भाषा सिंह
    बात बोलेगी: ज़मानत से तो राहत, पर कब होगी फंसाने वालों पर कार्रवाई?
    15 Jun 2021
    दिल्ली हाईकोर्ट ने आख़िरकार दिल्ली दंगों को भड़काने के आरोप में एक साल से बंद नताशा नरवाल, देवांगना कलिता और आसिफ़ इक़बाल को जमानत दी, उनके ख़िलाफ़ लगाई गई धाराओं, साक्ष्यों को आधारहीन पाया।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    नताशा नरवाल, देवांगना कालिता और आसिफ़ इक़बाल को ज़मानत, यूपी में पत्रकार की मौत और अन्य ख़बरें
    15 Jun 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हम बात करेंगे यूएपीए मामले में नताशा, देवांगना और आसिफ़ को ज़मानत, शराब माफ़िया का पर्दाफ़ाश करने वाले पत्रकार को ज़मानत और अन्य ख़बरों के बारे में।
  • फ़ैज़ल लाईबी साही (इराक़), कैफ़े 2, 2014
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    दुनिया का हर कोना बुरी तरह से प्रभावित है
    15 Jun 2021
    संयुक्त राष्ट्र संघ का खाद्य और कृषि संगठन (एफ़एओ) हर महीने एक मासिक खाद्य मूल्य सूचकांक जारी करता है। 3 जून को जारी विज्ञप्ति से पता चलता है कि खाद्य क़ीमतों में 40% की वृद्धि हुई है, जो कि 2011 के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License