NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
हिमाचल प्रदेश: पैसा ना चुकाने वाले आढ़तियों पर क़ानूनी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आढ़ती को 1 करोड़ 20 लाख 90 हज़ार रुपए जो उन्हें किसानों को देने हैं, कम से कम उसका 50 प्रतिशत यानी 60 लाख 49 हज़ार रुपए सॉल्वेंट सिक्योरिटी के रूप में जमा करवाने होंगे। सेब आढ़तियों को यह पैसा चार सप्ताह में जमा करवाना होगा। यदि वह चार सप्ताह के भीतर पैसा जमा नहीं करते हैं तो उनकी ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।
मुकुंद झा
12 Jun 2019
बाग़वानों के करोड़ों रुपये न चुकाने वाले एक आढ़ती के ख़िलाफ़ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख़्त आदेश

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के बाग़वानों के करोड़ों रुपये न चुकाने वाले एक आढ़ती के ख़िलाफ़ हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सख़्त आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि आढ़ती को 1 करोड़ 20 लाख 90 हज़ार रुपए जो उन्हें किसानों को देने हैं, कम से कम उसका 50 प्रतिशत यानी 60 लाख 49 हज़ार रुपए सॉल्वेंट सिक्योरिटी के रूप में जमा करवाने होंगे। सेब आढ़तियों को यह पैसा चार सप्ताह में जमा करवाना होगा। यदि वह चार सप्ताह के भीतर पैसा जमा नहीं करते हैं तो उनकी ज़मानत रद्द कर दी जाएगी।

इसे भी पढ़ें- बागानों को उजाड़ना राज्य का आतंक है : किसान जमीन बचाओ संघर्ष समिति

जस्टिस सुरेश्वर ठाकुर ने एग्रीफ़्रेश ट्रेड सेंटर के मालिक प्रदीप चौहान आढ़ती की ज़मानत याचिका की सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। आपको बता दें कि इस फ़र्म के ख़िलाफ़ क़रीब 27 किसानों ने बीते 26 मार्च को कोटखाई थाने में सेब का पैसा न देने को लेकर एफ़आईआर दर्ज करवाई थी। इन बाग़वानों का क़रीब 1.62 करोड़ पेंडिंग हैं। इसके बाद एक लंबे संघर्ष के बाद करवाई हुई उसकी गिरफ़्तारी के भी आदेश हुए थे इसी के ख़िलाफ़ वो कोर्ट गया था और ज़मानत की अर्ज़ी दी थी। इस पर सुनावी करते हुए कल कोर्ट ने यह आदेश दिया था।

स्थानीय अख़बारों में छपी ख़बरों के मुताबिक़ प्रदीप चौहान ने साल 2013 में एग्रीफ़्रेश ट्रेड सेंटर नाम से यह फ़र्म बनाई थी। इस बीच साल 2014 में मुंबई में काम करने वाले दो लदानी राजेश पांडे और अखिलेश जैसवाल गुम्मा में सेब ख़रीदने आए। फ़र्म ने बाग़वानों को सेब के पहले अच्छे दाम दिए और पेमेंट भी की। इस तरह फ़र्म ने बाग़वानों में पहले भरोसा क़ायम किया। पुलिस ने एपीएमसी से जो रिकाॅर्ड लिया है उसमें सामने आया है कि इस फ़र्म ने 2015 में 54048 सेब की पेटियाँ ख़रीदीं, लेकिन इस दौरान इसने बाग़वानों की पेमेंट बक़ाया है।
 
हिमाचल में हज़ारो किसानों का आढ़तियों पर 100 करोड़ से अधिक बक़ाया

हिमाचल के किसानों और बाग़वानों ने सरकार से विभिन्न मंडियों में की जा रही धोखाधड़ी व शोषण को लेकर लगातार शिकायत की है। इसको लेकर किसान संघर्ष समिति काफ़ी समय से संघर्ष करती रही है।
 
किसानों की काफ़ी लंबे समय से मांग रही है कि मार्किटिंग बोर्ड व एपीएमसी को एपीएमसी अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के तहत तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इसके साथ ही मांग की गई है कि प्रत्येक कारोबारी, आड़ती, लदानी, ख़रीदार व अन्य सभी के इस अधिनियम के तहत लाइसेंस जारी किए जाएँ तथा इनके कारोबार पर पूर्णतः नियंत्रण रखा जाए।
किसानों व बाग़वानों को उनके उत्पाद की संस से और उचित कीमत सुनिश्चित की जाए। इसके लिए प्रत्येक ख़रीदार से सुरक्षा के रूप मे कम से कम 50 लाख रुपये की बैंक गारंटी अनिवार्यता लागू करने की भी मांग की।
इसे भी पढ़ें- हिमाचल के सेब किसान अपना आंदोलनों और तेज़ करेंगे


किसान संघर्ष समिति का कहना है "आज प्रदेश के हज़ारों किसानों व बागवानों के सैकड़ों करोड़ रुपये का बक़ाया भुगतान आढ़तियों व ख़रीदारों ने कई वर्षों से नहीं किया है। ये सभी बातें भी एपीएमसी अधिनियम, 2005 में है अगर इसे ठीक से लागू कर दिया जाए तो अधिकतर समस्या का हल हो जाए।
परन्तु सरकार, मार्केटिंग बोर्ड व एपीएमसी की लचर कार्यप्रणाली से किसान व बाग़वान मण्डियों में शोषित व धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं। किसान संघर्ष समिति ने कई बार इनका आढ़तियों से मिलीभगत का भी आरोप लगाया है। यही कारण है कि धोखाधड़ी करने वाले ख़रीदारों व आढ़तियों की संख्या में वर्ष दर वर्ष वृद्धि हो रही है।"
 
किसान संघर्ष समिति के सचिव संजय चौहान ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा, "किसान को अपने ही पैसों की लिए दर दर की ठोकर खानी पड़ रही है। आज प्रदेश के हज़ारों किसान हैं जिनका 100 करोड़ से अधिक आढ़तियों पर पैसा बक़ाया है, लेकिन उनकी सुध लेने वाल कोई नहीं है। वो कहते हैं कि पिछले कई सालों से किसान संघर्ष समिति का संघर्ष ही रहा है जिसके दबाव में प्रशासन और पुलिस कुछ हद तक सक्रिय हुई है। परन्तु आज भी पैसा उन्हीं किसानों को मिला है जो या तो पुलिस में केस कर रहे हैं या कोर्ट जा रहे हैं। इन आढ़तियों का मनोबल इतना बढ़ा है कि बाग़वानों को शिकायत करने पर जान से मारने तक की धमकियाँ भी दे रहे हैं।"

इसे भी पढ़ें- हिमाचल : किसानों और बागवानों की मंडियों में शोषण की शिकायत, कार्रवाई की मांग

कोर्ट के कड़े रुख के बाद भी ठोस कार्रवाई क्यों नहीं?

हिमाचल प्रदेश कोर्ट ने इन सभी शिकायतों को हल करने के लिए पुलिस को 25 अप्रैल, 2019 को डीएसपी के नेतृत्व में एसआईटी गठित करने के आदेश जारी किए हैं।

क़रीब 100 बाग़वानों ने दोषी आढ़तियों के विरुद्ध ठियोग, कोटखाई, छैला, जुब्बल व नारकंडा पुलिस थाना में एफ़आईआर कर मामले दर्ज किये हैं। इनमें से नवंबर, 2018 में ठियोग थाना में 17 बाग़वानों द्वारा दोषी आढ़तियों के विरुद्ध किये गए मामले में 24 लाख का भुगतान कर दिया गया है। इस मामले में भी उच्च न्यायालय ने कड़ा संज्ञान लिया था और कहा था कि दोषी आढ़ती को तब तक ज़मानत नहीं दी जब तक कि बाग़वानों का भुगतान नहीं किया गया तथा दूसरे दोषी आढ़ती को एक माह तक जेल में बंद रखा तथा भुगतान करने के बाद ही रिहा किया गया।
किसान संगठनों का कहना है कि यदि ठियोग में दर्ज एफ़आईआर मे दोषी आढ़तियों पर कार्रवाई कर भुगतान करवाया जा सकता है तो अन्य मामलों में दोषी आढ़तियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? 

किसान संघर्ष समिति ने कहा है, "सरकार समय रहते इन मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं कर रही है इसलिए मजबूर होकर किसान संघर्ष समिति किसानों व बाग़वानों को संगठित कर 24 जून को इन्हीं सभी मांगों को लेकर शिमला में प्रदर्शन करेगी और मुख्यमंत्री को ज्ञापन देगी।

इसे भी पढ़ें- हिमाचल किसान सभा की बड़ी जीत, भूमिहीन और छोटे किसानों को मिलेगी उनकी जमीन

 

 

Himachal Pradesh
himachal kisan SBHA
AIKS
apple kisan
himachal farmers

Related Stories

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

हिमाचल प्रदेश: नियमित करने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरीं आंगनबाड़ी कर्मी

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल

महाराष्ट्र: किसानों की एक और जीत, किसान विरोधी बिल वापस लेने को एमवीए सरकार मजबूर

किसान मोदी को लोकतंत्र का सबक़ सिखाएगा और कॉरपोरेट की लूट रोकेगा: उगराहां

क़रीब दिख रही किसानों को अपनी जीत, जारी है 28 नवंबर को महाराष्ट्र महापंचायत की तैयारी

किसानों की जीत: “यह आज़ादी का दूसरा आंदोलन रहा है”

MSP और लखीमपुर खीरी के किसानों के न्याय तक जारी रहेगा आंदोलन, लखनऊ में महापंचायत की तैयारी तेज़


बाकी खबरें

  • Dalit Movement
    महेश कुमार
    पड़ताल: पश्चिमी यूपी में दलितों के बीजेपी के ख़िलाफ़ वोट करने की है संभावना
    17 Jan 2022
    साल भर चले किसान आंदोलन ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चुनावी समीकरण बदल दिए हैं।
  • stray animals
    सोनिया यादव
    यूपी: छुट्टा पशुओं की समस्या क्या बनेगी इस बार चुनावी मुद्दा?
    17 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा मवेशी हैं। प्रदेश के क़रीब-क़रीब हर ज़िले में आवारा मवेशी किसानों, ख़ास तौर पर छोटे किसानों के लिए आफत बन गए हैं और जान-माल दोनों का नुकसान हो रहा है।
  • CPI-ML MLA Mahendra Singh
    अनिल अंशुमन
    झारखंड: एक विधायक की मां जीते जी नहीं दिला पायीं अपने पति के हत्यारों को सज़ा; शहादत वाले दिन ही चल बसीं महेंद्र सिंह की पत्नी
    17 Jan 2022
    16 जनवरी 2005 को झारखंड स्थित बगोदर के तत्कालीन भाकपा माले विधायक महेंद्र सिंह की हत्या कर दी गई थी। 16 जनवरी को ही सुबह होने से पहले शांति देवी ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उन्हें जीते जी तो…
  • Punjab assembly elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख़, अब 20 फरवरी को पड़ेंगे वोट
    17 Jan 2022
    पंजाब विधानसभा चुनाव की नई तारीख़ घोषित की गई है। अब 14 फरवरी की जगह सभी 117 विधानसभा सीटों पर 20 फरवरी को मतदान होगा।
  • Several Delhi Villages
    रवि कौशल
    भीषण महामारी की मार झेलते दिल्ली के अनेक गांवों को पिछले 30 वर्षों से अस्पतालों का इंतज़ार
    17 Jan 2022
    दशकों पहले बपरोला और बुढ़ेला गाँवों में अस्पतालों के निर्माण के लिए जिन भूखंडों को दान या जिनका अधिग्रहण किया गया था वे आज तक खाली पड़े हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License