NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हिंदी विवाद:"किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को विविधता में एकता के वादे को नहीं तोड़ना चाहिए"
अमित शाह द्वारा हिंदी को देश की इकलौती जोड़ने वाली भाषा बताने वाले बयान का विरोध करते हुए कमल हासन ने कहा है कि विविधता में एकता के वादे को किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को तोड़ना नहीं चाहिए।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
16 Sep 2019
kamal hasan
फोटो साभार: India Today

मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) के संस्थापक व दिग्ग्ज अभिनेता कमल हासन ने हिंदी को ‘‘थोपने’’ के किसी भी प्रयास का विरोध करते हुए सोमवार को कहा कि यह दशकों पहले देश से किया गया एक वादा था, जिसे ‘‘किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को तोड़ना नहीं चाहिए।’’
उन्होंने एक वीडियो में कहा, ‘‘विविधता में एकता का एक वादा है जिसे हमने तब किया था जब हमने भारत को एक गणतंत्र बनाया था। अब, उस वादे को किसी शाह, सुल्तान या सम्राट को तोड़ना नहीं चाहिए। हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं, लेकिन हमारी मातृभाषा हमेशा तमिल रहेगी।’’

‘‘शाह या सुल्तान या सम्राट’’ टिप्पणी में स्पष्ट रूप से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की ओर इशारा किया गया है। ग़ौरतलब है कि शाह ने हिंदी दिवस के मौक़े पर कहा था कि आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है। शाह के इस बयान पर द्रमुक अध्यक्ष एम के स्टालिन और कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता सिद्धरमैया सहित कई विपक्षी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रियाएं दी थीं।
 

आज दिल्ली में आयोजित ‘हिंदी दिवस समारोह-2019’ में भाग लिया।

भारत की अनेक भाषाएं और बोलियां हमारी सबसे बड़ी ताकत है। लेकिन देश की एक भाषा ऐसी हो, जिससे विदेशी भाषाएँ हमारे देश पर हावी ना हों इसलिए हमारे संविधान निर्माताओं ने एकमत से हिंदी को राजभाषा के रूप में स्वीकार किया। pic.twitter.com/nJpesiYEFN

— Amit Shah (@AmitShah) September 14, 2019

स्टालिन ने कहा था कि ये इंडिया है, हिंदिया नहीं!

इसके अलावा तमिल फ़िल्मों के निर्देशक पा रंजीत ने भी केंद्र सरकार को टार्गेट करते हुए कहा था, कि हिंदी को थोपना बंद किया जाए।
हासन ने वीडियो में कहा कि भारत विभिन्न व्यंजनों से भरी शानदार थाली के समान है। हमें इसका मिलकर लुत्फ़ उठाना चाहिये और किसी एक व्यंजन (हिंदी) को थोपने से इसका ज़ायक़ा बिगड़ जाएगा। कृपया ऐसा नहीं करें।

हासन ने यहां 2017 के जल्लीकट्टू के समर्थन में हुए प्रदर्शन का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘यह सिर्फ एक विरोध था, हमारी भाषा की लड़ाई इससे कहीं ज्यादा बड़ी होगी।’’

उन्होंने कहा कि भारत या तमिलनाडु को इस तरह की लड़ाई की कोई जरूरत नहीं है।

देश के राष्ट्रगान का जिक्र करते हुए, हासन ने कहा कि यह एक ऐसी भाषा (बंगाली) में लिखा गया था जो अधिकांश नागरिकों की मातृभाषा नहीं है।

अधिकांश देशवासी खुशी के साथ बंगाली में अपने राष्ट्रगान को गाते हैं और वे ऐसा करते रहेंगे।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इसका कारण कवि (रवींद्रनाथ टैगोर) हैं जिन्होंने राष्ट्रगान लिखा था, जिसमें उन्होंने सभी भाषाओं और संस्कृति को उचित सम्मान दिया और इसलिए, यह हमारा राष्ट्रगान बन गया।’’

उन्होंने कहा कि समावेशी भारत को एक अलग तरह का देश बनाने की कोई कोशिश नहीं की जानी चाहिए क्योंकि ‘‘इस तरह की अदूरदर्शिता की वजह से सभी को नुकसान होगा।’"

आखिरश ग़ौरतलब बात ये है कि हिंदी को थोपने की बात हमेशा से देश में होती रही है। अन्य भाषा-बोलियों के बोलने वालों की शिकायत रही है कि उनकी भाषा-बोली को उचित सम्मान और जगह नहीं दी जा रही। भारत का विचार ही विविधता में एकता का है, लेकिन केंद्र सरकारों ने ग़ैर-हिंदी भाषी प्रदेशों में हिंदी थोपने के लिए कई काम किए हैं और 2014 में बीजेपी की सरकार आने के बाद से ये तेज़ी से बढ़ रहा है, कम से कम नारों और जुमलों में तो बहुत ही ज़्यादा।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

kamal hassan
Amit Shah
hindi
Language
India
south india

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आईपीईएफ़ पर दूसरे देशों को साथ लाना कठिन कार्य होगा

UN में भारत: देश में 30 करोड़ लोग आजीविका के लिए जंगलों पर निर्भर, सरकार उनके अधिकारों की रक्षा को प्रतिबद्ध

वर्ष 2030 तक हार्ट अटैक से सबसे ज़्यादा मौत भारत में होगी

लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार

वित्त मंत्री जी आप बिल्कुल गलत हैं! महंगाई की मार ग़रीबों पर पड़ती है, अमीरों पर नहीं

झारखंड : नफ़रत और कॉर्पोरेट संस्कृति के विरुद्ध लेखक-कलाकारों का सम्मलेन! 

क्या हिंदी को लेकर हठ देश की विविधता के विपरीत है ?


बाकी खबरें

  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज फिर एक हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 71 मरीज़ों की मौत
    06 Apr 2022
    देश में कोरोना के आज 1,086 नए मामले सामने आए हैं। वही देश में अब एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.03 फ़ीसदी यानी 11 हज़ार 871 रह गयी है।
  • khoj khabar
    न्यूज़क्लिक टीम
    मुसलमानों के ख़िलाफ़ नहीं, देश के ख़िलाफ़ है ये षडयंत्र
    05 Apr 2022
    खोज ख़बर में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने दिल्ली की (अ)धर्म संसद से लेकर कर्नाटक-मध्य प्रदेश तक में नफ़रत के कारोबारियों-उनकी राजनीति को देश के ख़िलाफ़ किये जा रहे षडयंत्र की संज्ञा दी। साथ ही उनसे…
  • मुकुंद झा
    बुराड़ी हिन्दू महापंचायत: चार FIR दर्ज लेकिन कोई ग़िरफ़्तारी नहीं, पुलिस पर उठे सवाल
    05 Apr 2022
    सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि बिना अनुमति के इतना भव्य मंच लगाकर कई घंटो तक यह कार्यक्रम कैसे चला? दूसरा हेट स्पीच के कई पुराने आरोपी यहाँ आए और एकबार फिर यहां धार्मिक उन्माद की बात करके कैसे आसानी से…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    एमपी : डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे 490 सरकारी अस्पताल
    05 Apr 2022
    फ़िलहाल भारत में प्रति 1404 लोगों पर 1 डॉक्टर है। जबकि वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के मानक के मुताबिक प्रति 1100 लोगों पर 1 डॉक्टर होना चाहिए।
  • एम. के. भद्रकुमार
    कीव में झूठी खबरों का अंबार
    05 Apr 2022
    प्रथमदृष्टया, रूस के द्वारा अपने सैनिकों के द्वारा कथित अत्याचारों पर यूएनएससी की बैठक की मांग करने की खबर फर्जी है, लेकिन जब तक इसका दुष्प्रचार के तौर पर खुलासा होता है, तब तक यह भ्रामक धारणाओं अपना…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License