NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हरियाणा चुनाव : ''कम विश्वास से भरी बीजेपी'' और ''टूटी-फूटी कांग्रेस'' के बीच सीधी लड़ाई
2014 में मोदी लहर पर सवार होकर जीतने वाली बीजेपी के लिए कृषि और उद्योग क्षेत्र की आर्थिक मंदी बन चुकी है बुरा सपना
रवि कौशल
09 Oct 2019
hooda khattar

हरियाणा में इस महीने चुनाव होने वाले हैं. प्रदेश के भीतरी इलाकों में इस बार पारंपरिक राजनीतिक विरोधियों के बीच मुकाबला है, इसे कई राजनीतिक विश्लेषक ''विश्वास की कमी से जूझ रही बीजेपी'' और ''टूटी-फूटी कांग्रेस'' के बीच लड़ाई बता रहे हैं. इस महीने की 21 अक्टूबर को प्रदेश में मतदान होगा.

पिछले राजनीतिक समीकरणों को कुछ क्षेत्रीय पार्टियां जैसे, जननायक जनता पार्टी (जेजेपी) औऱ लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी (एलपी) खराब कर सकती हैं. इनके प्रत्याशी कांग्रेस और बीजेपी के वोट बैंक में सेंध लगा सकते हैं.

क्या कांग्रेस 5 साल बाद वापसी करेगी? या बीजेपी लगातार दूसरी बार सत्ता में आएगी, जबकि पार्टी के इस कार्यकाल में तीन बार कानून-व्यवस्था से खराब तरीके से निपटा गया? क्या छोटे खिलाड़ियों से कोई चुनौती मिलेगी? जानिए फिलहाल हरियाणा में राजनीतिक परिदृश्य क्या है.

जाट और ब्राह्मणों के बीच राजनीतिक फूट

हरियाणा की चुनावी राजनीति 20 वीं सदी की शुरूआत से चालू होती है, जब चौधरी छोटू राम ने 1916 में एक साप्ताहिक मैगजीन ''जाट गैजेट'' शुरू किया. इसका उद्देश्य जाट समुदाय से जुड़ी खबरों के अलावा बड़ी घटनाओं और कार्यक्रमों की जानकारी रखना था. इसके जवाब में पंडित श्रीराम शर्मा ने 1923 में हरियाणा तिलक नाम की मैगजीन शुरू की.

इन दो जर्नल में जाटों और ब्राह्मणों के बीच विचारों का दिलचस्प टकराव देखने को मिलता है. जहां जाट समुदाय ने आर्य समाज आंदोलन के विचारों को आगे बढ़ाया, वहीं विधवा पुनर्विवाह, मूर्ति पूजा को बंद करने जैसे विचारों का ब्राह्मणों ने जमकर विरोध किया.

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूंपेद्र सिंह हुड्डा के दादा मातुराम हुड्डा आर्य समाज अभियान के मुख्य नेता थे. हरियाणा की राजनीति में आजादी के बाद भी इन प्रवृत्तियों को पाया गया. 1975 में जब बनारसी दास गुप्ता मुख्यमंत्री बने तो प्रदेश ने दूसरे समुदायों का उभार देखा. 

बीजेपी के लिए आसान नहीं है डगर

मोदी लहर पर सवार होकर 2014 में राज्य की 90 में से 47 सीटें जीतकर बीजेपी सत्ता में आई थी. इंडियन नेशनल लोक दल और दूसरे क्षेत्रीय दलों ने 17 सीटें जीती थीं. वहीं कांग्रेस महज 15 सीटों के साथ काफी पीछे रह गई थी.

विश्लेषकों के मुताबिक, बीजेपी 35 बिरादरियों के बीच उस चुनाव में इस बात का माहौल बनाने में कामयाब रही थी कि कांग्रेस जाट प्रभुत्व वाली पार्टी है. दूसरी जातियों को देने के लिए उसके पास ज्यादा कुछ नहीं है. पार्टी इन बिरादरियों का ध्रुवीकरण करने में कामयाब रही थी. उस चुनाव में बीजेपी ने ज्यादातर टिकट कांग्रेस और जेजेपी से आए विद्रोहियों को दिए थे. हाल ही में आईएनएलडी के पांच विधायकों ने जेजेपी ज्वाइन कर ली, जिनकी सदस्यता विधानसभा अध्यक्ष कंवर लाल ने दल-बदल कानून के तहत खारिज कर दी.

जेल में बंद नेता अजय चौटाला की पत्नी नैना सिंह चौटाला, राजदीप फोगाट, पिरथी सिंह और अनूप धानक, इन सभी विधायकों के जेजेपी ज्वाइन करने पर इनकी सदस्यता खत्म हो गई. वहीं एक दूसरे विधायक नसीम अहमद ने पहले कांग्रेस ज्वाइन की, लेकिन बाद में बीजेपी के पाले में आ गए. 

धीमी होती आर्थिक गति एक बड़ा मुद्दा है, जो बीजेपी को पक्का नुकसान पहुंचाएगा. हरियाणा पहले ही एक ही एक कृषि संकट से जूझ रहा है.

प्रदेश कपास का उत्पादन भी करता है जो कपड़ा उद्योग में काम आती है. विशेषज्ञ साफ कर चुके हैं कि आर्थिक मंदी के चलते उत्पादन को रोका जाएगा, इससे कपास की बिक्री तेजी से गिरेगी. मोटर उद्योग में आई गिरावट के चलते कई कामगारों को गांव वापस लौटना पड़ा है, यह अपने परिवार के एकलौते कमाऊ सदस्य हैं. एक अंदाज के मुताबिक, ऑटोमोबाइल कंपनियों की बिक्री में आई गिरावट के बाद दो लाख कामगार अपनी नौकरी खो चुके हैं.

टूटी फूटी कांग्रेस आपसी लड़ाई में फंसी

हुड्डा के नेतृत्व वाली कांग्रेस अशोक तंवर, कुमारी शैलजा और रणदीप सिंह सुरजेवाला के खेमों की लड़ाई में बंटी हुई है. इसके पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर पार्टी छोड़ चुके हैं. कांग्रेस के उम्मीदवारों की लिस्ट से पता चलता है कि कांग्रेस अपने पुराने जाट, दलित और मुस्लिम गठबंधन के फॉर्मूले पर वापस लौट रही है.  प्रदेश की आबादी में जाटों की हिस्सेदारी 27 फीसदी और दलितों की 29 फीसदी मानी जाती है. 

मुस्लिमों की आबादी कम है, लेकिन वे मेवात इलाके में प्रभावशाली हैं. बीजेपी ने एक भी धानक (जुलाहे) समुदाय के नेता को प्रत्याशी नहीं बनाया है, इसके चलते कांग्रेस उनके सहयोग की भी आस लगाए है. हालांकि चुनावी अभियान में पार्टी का जोर बेरोजगार के मुद्दे पर है, जो फिलहाल राज्य में 28.7 फीसदी पहुंच चुकी है.

क्षेत्रीय पार्टियां और बदलते समीकरण

क्षेत्रीय पार्टियां बीजेपी और कांग्रेस का खेल बिगाड़ सकते हैं. पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की अगुवाई वाली INLD में उत्तराधिकार की लड़ाई पर परिवार के आधार पर दो हिस्से हो गए हैं. बता दें ओमप्रकाश चौटाला शिक्षक भर्ती घोटाले में 10 साल की सजा काट रहे हैं.  उनके पोते दुष्यंत चौटाला ने नई पार्टी जेजेपी बनाई है, जो लोकसभा चुनाव में अपना प्रभाव छोड़ने में नाकामयाब रही थी. लेकिन उनका दावा है कि विधानसभा चुनाव में तस्वीर बदलेगी. 

बीजेपी से विद्रोह करने वाले नेता राज कुमार सैनी की बनाई पार्टी एलएसपी, राष्ट्रवादी जनलोक पार्टी के साथ गठबंधन में है. जाट कोटा को सुप्रीम कोर्ट से हटाए जाने के बाद हुए जाट प्रदर्शन के बाद सैनी ने पार्टी बनाई थी. ओबीसी वोटों पर नजर लगाए सैनी ने 80 सीटों पर पिछड़ा समुदाय से आने वाले उम्मीदवारों को प्रत्याशी बनाया है.  शिरोमणी अकाली दल पहले बीजेपी के साथ गठबंधन में था, लेकिन अपने एकमात्र विधायक के बीजेपी ज्वाइन करने के बाद पार्टी ने आईएनएलडी से गठबंधन कर लिया है. इसके अलावा आम आदमी पार्टी और स्वराज इंडिया जैसे कुछ छोटे खिलाडी भी मैदान में हैं.

 

Haryana
haryana Election
deependra hudda
ajay cahautala
economic crisis in haryana
bjp and congress in haryana

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव

विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा

हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित

हरियाणा के बजट पर लोगों की प्रतिक्रिया 

हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

मोदी सरकार द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के बिजली निगमों का निजीकरण "अलोकतांत्रिक" और "संघीय ढांचे के ख़िलाफ़"

हरियाणा : आंगनवाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल 3 महीने से जारी, संगठनों ने सरकार से की बातचीत शुरू करने की मांग

कार्टून क्लिक: ये दुःख ख़त्म काहे नहीं होता बे?


बाकी खबरें

  • BJP
    अनिल जैन
    खबरों के आगे-पीछे: अंदरुनी कलह तो भाजपा में भी कम नहीं
    01 May 2022
    राजस्थान में वसुंधरा खेमा उनके चेहरे पर अगला चुनाव लड़ने का दबाव बना रहा है, तो प्रदेश अध्यक्ष सतीश पुनिया से लेकर केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत इसके खिलाफ है। ऐसी ही खींचतान महाराष्ट्र में भी…
  • ipta
    रवि शंकर दुबे
    समाज में सौहार्द की नई अलख जगा रही है इप्टा की सांस्कृतिक यात्रा
    01 May 2022
    देश में फैली नफ़रत और धार्मिक उन्माद के ख़िलाफ़ भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) मोहब्बत बांटने निकला है। देशभर के गावों और शहरों में घूम कर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन किए जा रहे हैं।
  • प्रेम कुमार
    प्रधानमंत्री जी! पहले 4 करोड़ अंडरट्रायल कैदियों को न्याय जरूरी है! 
    01 May 2022
    4 करोड़ मामले ट्रायल कोर्ट में लंबित हैं तो न्याय व्यवस्था की पोल खुल जाती है। हाईकोर्ट में 40 लाख दीवानी मामले और 16 लाख आपराधिक मामले जुड़कर 56 लाख हो जाते हैं जो लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट की…
  • आज का कार्टून
    दिन-तारीख़ कई, लेकिन सबसे ख़ास एक मई
    01 May 2022
    कार्टूनिस्ट इरफ़ान की नज़र में एक मई का मतलब।
  • राज वाल्मीकि
    ज़रूरी है दलित आदिवासी मज़दूरों के हालात पर भी ग़ौर करना
    01 May 2022
    “मालिक हम से दस से बारह घंटे काम लेता है। मशीन पर खड़े होकर काम करना पड़ता है। मेरे घुटनों में दर्द रहने लगा है। आठ घंटे की मजदूरी के आठ-नौ हजार रुपये तनखा देता है। चार घंटे ओवर टाइम करनी पड़ती है तब…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License