NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
हरियाणा सरकार ने संविदाकर्मियों की दिवाली काली कर दी
रोडवेज कर्मचारी 18 दिनों की हड़ताल को खत्म कर वापस अपने काम पर लौट आए हैं, जिसके बाद तीन महीने की संविदा पर नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है।
मुकुंद झा
07 Nov 2018
Haryana roadways
Image Courtesy: NDTV

हरियाणा में अभी कुछ दिन पहले ही सरकार व उसके मंत्री कह रहे थे कि हरियाणा रोडवेज में पहली महिला कंडक्टर बनी है, लेकिन अब उस पहली महिला कंडक्टर ने अपनी  नौकरी खो दी है। और ऐसी वो अकेली कर्मचारी नहीं हैं।

दरअसल रोडवेज कर्मचारी 18 दिनों की हड़ताल को खत्म कर वापस अपने काम पर लौट आए हैं, जिसके बाद तीन महीने की संविदा पर नौकरी पर रखे गए कर्मचारियों को सरकार ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

32 वर्षीय रेवाड़ी निवासी शर्मिला, जो दो बेटियों की मां हैं, उन्हें  सरकार द्वारा तीन महीने की संविदा पर रोडवेज कंडक्टर पद पर उस समय रखा गया था जब हड़ताल के कारण राज्य की सार्वजनिक परिवहन सेवा पूरी तरह से चरमरा गई थी।  तब इनके जैसे ही सैकड़ों लोगों ने रोडवेज की कमान को संभला था। लेकिन हड़ताली कर्मचारियों के काम पर लौटने के एक दिन बाद ही, शर्मिला के साथ ही सैकड़ों अन्य कर्मचारी जिन्हें इस हड़ताल के दौरान सरकार ने काम पर रखा था को काम से बर्खास्त कर दिया, जिससे यह साफ हो गया है कि हरियाणा सरकार ने इन लोगों को केवल कर्मचारियों के आंदोलन को तोड़ने के लिए एक हथियार की तरह प्रयोग करके छोड़ दिया।

शर्मिला जो अपने पांव से 40% विकलांग हैं के हिंदुस्तान टाइम्स में छपे बयान के अनुसार, उन्होंने कहा "सरकार ने मेरी दिवाली बर्बाद कर दी है। मैं ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ के बारे में सरकार द्वारा बड़ी बड़ी बाते करने के बाद से स्थायी नौकरी पाने की उम्मीद कर रही थी। मेरे बाद दो और महिलाएं रोडवेज में कंडक्टर के रूप में शामिल हुईं। सरकार हमें एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत कर सकती थी और हम तीनों की नौकरियों को बचा सकती थी। लेकिन इस सरकार ने तो हमें तीन महीने तक भी काम नहीं करने दिया। हमने संकट के समय में सरकार की मदद की। लेकिन सरकार ने हमारे जीवन में संकट के लिए कोई ध्यान नहीं दिया और हमें दूध में से मक्खी की तरह निकाल दिया।"

शर्मिला ने कहा कि वह एक गरीब पृष्ठभूमि से आती है और पिछले आठ सालों से अपने परिवार का समर्थन करने के लिए नौकरी तलाश कर  रही थी। "जब मैंने यहां रिक्ति देखी, तो मैंने आवेदन किया और नौकरी मिल गई। मैंने काम सीखा था और बिना किसी समस्या के इसे करने में सक्षम थी। मैंने सोचा कि मैं अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित कर सकती हूं। लेकिन अब सब कुछ बिखरा हुआ दिखता है।”

सरकार का कहना है कि " नए कर्मचारियों को अनुबंध के आधार पर लिया गया था और यह उनके कार्य पर रखने से पूर्व ही स्पष्ट कर दिया गया था उन्हें जरूरत खत्म होने के बाद हटा दिया जाएगा।

इसके बाद भी सैकड़ों बेरोजगार युवाओं ने रोडवेज में कार्य करना शुरू किया क्योंकि उनके पास कोई और विकल्प नहीं था। शायद उन्हें यह उम्मीद नहीं थी की सरकार उन्हें सप्ताह भर के भीतर ही खदेड़ देगी। 

एक ऐसे ही नवनियुक्त कंडक्टर ने बताया कि उसके सामने एक बहुत बड़ा सवाल खड़ा हो गया कि वो क्या करेगा, वो कहते हैं कि उसने कभी नहीं सोचा था की वो मध्यरात्रि में लाइनों में खड़ा इसलिए हो रहा की उसे केवल एक सप्ताह में भगा दिया जाएगा |

अब ये हटाए गए  कर्मचारी राज्य के कई स्थानों पर, बर्खास्तगी के खिलाफ धरना दे रहे हैं और सरकार के इस रवैये की निंदा कर रहे हैं।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहना है कि उन्होंने सड़क मार्गों के लिए आवेदन करने के लिए अपनी नियमित नौकरियां छोड़ दी क्योंकि तीन महीनों के बाद संभावित स्थायी नौकरी का उल्लेख किया गया था। लेकिन उन्होंने हमें एक सप्ताह तक काम नहीं करने दिया। अब हम पूरी तरह से बेरोजगार हैं।

रोडवेज कर्मचारियों ने भी इन संविदा कर्मियों के प्रति सहानुभूति जताई हैं। उनका कहना है कि वे पहले से जानते थे कि ये सरकार इन युवाओं का इस्तेमाल सिर्फ हमारा आंदोलन कमजोर करने के लिए कर रही है। ये बात ये युवा भी अच्छी तरह जानते थे। इसलिए इन्हें अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ सरकार की ऐसी चालों में नहीं फंसना चाहिए। हालांकि बेरोजगारी इतनी है कि युवा भी मजबूर हैं। इसलिए अब युवाओं को सरकार के हाथों इस्तेमाल होने की बजाय रोजगार की मांग को लेकर मजबूत आंदोलन करना चाहिए। इसमें हम भी इनका साथ देंगे।

Haryana
haryana roadways
haryana roadways strike
Contract Workers
workers' rights
manohar laal khattar

Related Stories

सीवर कर्मचारियों के जीवन में सुधार के लिए ज़रूरी है ठेकेदारी प्रथा का ख़ात्मा

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने चंडीगढ़ मामले पर विधानसभा में पेश किया प्रस्ताव

विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा

हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित

वित्त अधिनियम के तहत ईपीएफओ फंड का ट्रांसफर मुश्किल; ठेका श्रमिकों के लिए बिहार मॉडल अपनाया जाए 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

हरियाणा के बजट पर लोगों की प्रतिक्रिया 

हरियाणा: हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकार्ताओं के आंदोलन में अब किसान और छात्र भी जुड़ेंगे 

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने


बाकी खबरें

  • रवि शंकर दुबे
    दिल्ली और पंजाब के बाद, क्या हिमाचल विधानसभा चुनाव को त्रिकोणीय बनाएगी AAP?
    09 Apr 2022
    इस साल के आखिर तक हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं, तो प्रदेश में आप की एंट्री ने माहौल ज़रा गर्म कर दिया है, हालांकि भाजपा ने भी आप को एक ज़ोरदार झटका दिया 
  • जोश क्लेम, यूजीन सिमोनोव
    जलविद्युत बांध जलवायु संकट का हल नहीं होने के 10 कारण 
    09 Apr 2022
    जलविद्युत परियोजना विनाशकारी जलवायु परिवर्तन को रोकने में न केवल विफल है, बल्कि यह उन देशों में मीथेन गैस की खास मात्रा का उत्सर्जन करते हुए जलवायु परिवर्तन से उत्पन्न संकट को बढ़ा देता है। 
  • Abhay Kumar Dubey
    न्यूज़क्लिक टीम
    हिंदुत्व की गोलबंदी बनाम सामाजिक न्याय की गोलबंदी
    09 Apr 2022
    पिछले तीन दशकों में जातिगत अस्मिता और धर्मगत अस्मिता के इर्द गिर्द नाचती उत्तर भारत की राजनीति किस तरह से बदल रही है? सामाजिक न्याय की राजनीति का क्या हाल है?
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहारः प्राइवेट स्कूलों और प्राइवेट आईटीआई में शिक्षा महंगी, अभिभावकों को ख़र्च करने होंगे ज़्यादा पैसे
    09 Apr 2022
    एक तरफ लोगों को जहां बढ़ती महंगाई के चलते रोज़मर्रा की बुनियादी ज़रूरतों के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्हें अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए भी अब ज़्यादा से ज़्यादा पैसे खर्च…
  • आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: इमरान को हिन्दुस्तान पसंद है...
    09 Apr 2022
    अविश्वास प्रस्ताव से एक दिन पहले देश के नाम अपने संबोधन में इमरान ख़ान ने दो-तीन बार भारत की तारीफ़ की। हालांकि इसमें भी उन्होंने सच और झूठ का घालमेल किया, ताकि उनका हित सध सके। लेकिन यह दिलचस्प है…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License